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Friday, October 30, 2015

लोग जादुई फार्मूला ढूढ़ रहे है मोटापे का -

यह सच है कि मोटापा कम करने का ऐसा कोई जादुई फॉर्मूला अभी तक नहीं बना है लेकिन अगर रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ी सावधानी बरती जाए तो इसे जरूर कम किया जा सकता है-



आज कल लोग मोटापा कम करने के लिये ना जाने कौन कौन से हथकंडे अपनाते हैं, तो ऐसे में अगर आप इस आसान से घरेलू नुस्‍खे अपना लेगें तो इसमें कोई बुरार्इ नहीं है-


मैं अक्सर ब्लॉग पर देखता हूं कि तरह तरह के उपाय लोग अक्सर एक दूसरे से बांटते हैं। उनमें सबसे ज्यादा मोटापा कम करने के उपाय है। ये अजीब सी बात है-

आज से 15-20 साल पहले लोग पूछा करते थे कि हम मोटे कैसे हो सकते हैं...? जबकि आज लोग पूछते हैं कि हम पतले कैसे हो सकते हैं....? अब में और तब में बेशक बहुत अंतर आ गया है। हमारा रहन सहन पूरी तरह से बदल गया है। हमारी खाने पीने की आदत  बदल गयी है। औऱ बदल गयी है जीवनशैली। हालांकि बाजार में इन दिनों मोटापा कम करने के हजारों दवा मौजूद हैं। इनमें से आधी से ज्यादा सिर्फ खट्टे मीठे चूर्ण हैं। जिन्हें खाने के बाद पता चलता है कि हम ठगे गए। खैर ये तो बाजार की बात है। जिसकी ज्यादा डिमांड होती है वो बाजार में बेचा जाता है। मोटापा कम करने के लिए हम अक्सर दवाओं की ओर भागते हैं। लेकिन, कभी अपनी दिनचर्या को ठीक करने की बात नहीं सोचते-

एक समय था जब लोग सुबह पार्कों में जाकर व्ययाम किया करते थे। लोगों का खानपान बेहद संतुलित था। लेकिन, आज चाइनिंग फास्ट फूड और साँस ने ना सिर्फ बच्चों की बल्कि बड़ों के भी पेट खराब किए हुए हैं। इसमें बाजार में मिलने वाला लाल साँस  जो असल में सड़े कद्दू का होता है औऱ सोया साँस  जो काले रंग का होता है और चाउमीन में डला होता है। सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। लेकिन, हम इन्हें लगातार खा रहे हैं औऱ पेट की बैंड बजा रहे हैं। बस जिह्वा का टेस्ट नहीं बिगडना चाहिए भले पेट बिगड जाए बीमारियाँ लग जाए- .

गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान, रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है और कूल्हे भारी हो जाते हैं। इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढ़ना मोटापे के मोटे लक्षण हैं-

मोटापे से जहाँ शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियाँ मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं। हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयाँ, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है। पहले तो स्त्रियां घर में कपडे इत्यादि धो लेती थी उनकी एक्सार्साइज हो जाती थी इसलिए मोटापा नहीं होता था ...जबसे वाशिंग मशीन आई है एक मुसीबत साथ लाई है मोटापा ....कपडे मशीन में डाले और सोफे पे रक्खा रिमोट टी वी का हाथ में लिया  सीरियल नहीं छूटे बस मोटापा फिर किसको आएगा ....?

शरीर पर अधिक चर्बी बढ़ने से पेट बाहर निकल आता है और हाथ-पैर, गर्दन, कमर इत्यादि जगहों पर भी चर्बी जमा हो जाती है। जिससे शरीर बेड़ौल होने लगता हैं बहुत कम लोग ऐसे हैं जो वसा से दूर रह पाते हैं। यानी लोग मिठाईयों, तले पदार्थों और स्‍नैक्स इत्यादि को आसानी से नहीं छोड़ पाते।पहले सुबह चबा- चबा लोग चने का सेवन करते थे मुंह व्यायाम होता था और सेहत भी ठीक हो जाती थी अब नींद खुली तो बेड पे चाय और मेगी का सेवन होता है जबकि मैदा और आरारोट सिर्फ कब्ज ही बना सकता है -

भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है-

आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए-

अब मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बताता हूं जो मोटापा कम करने में सहायत सिद्ध हो सकते हैं। और आपकी सेहत भी ठीक कर सकते हैं-

बिना खर्च मोटापा घटाए -


पहला उपाय ये है कि आपको आलस  छोड़ना पड़ेगा और समय से विस्तर से उठ जाए । सुबह जल्दी उठने की आदात डाले औऱ सैर पर निकले।कम से कम एक घंटा सैर करें और हल्का व्ययाम करें। हो सके तो तेज तेज चले-

सुबह उठकर गर्म पानी पीये कम से कम दो गिलास।और पेट साफ होने के बाद एक घंटा कुछ ना खाए-

नीबूं पानी पीये अपनी सेहत हिसाब से। नमकीन या मीठा। और इसमें शहद मिलाया जाए तो मोटापा तेजी से कम होता है।  इसके अलावा नमक कम खाये-

पत्ता गोभी खाये खूब बढ़िया उबालकर।

तुलसी के पत्तो का रस 10 बूंद और दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी मे मिलाकर कुछ दिन पीने से मोटापा कम होता है  तली -भुनी व मैदे से बनी चीजे न खाये। ताजी सब्जियां व ताजे फल लें। खाने के बाद एक कप तेज गरम पानी घूंट लेकर पीए। मोटापा कम होगा-

अनामिका अंगुली के टौप भाग पर अंगूठे से दबाकर कम से कम 5 मिनट तक एक्यूप्रेशर करे। दिन में दो या तीन बार ऐसा कर सकते हैं। शरीर का वेट सन्तुलित रहेगा। इसके अलावा अगर आप शराब का सेवन करते हैं तो इसे पीना छोड़े। अगर नहीं छोड़ सकते तो कम कर दें। और साथ ही इसके साथ तली भुनी चीजे खाना बंद करें। इसकी जगह सलाद खाए। और अगर आप मांसाहारी है तो आप। रोस्टेड चिकन खाये। वो भी एक या दो पीस और हां...इस दिन एक घंटा ज्यादा व्यायाम करना ना भूले-

खाना खाते समय कभी पानी न पीएं। खाने के कम से कम 10-15 मिनट बाद गुनगुना पानी पीएं। बादी या वात पैदा करने वाले पदार्थ जैसे चावल, अरबी, मीट आदि का सेवन कम ही करें और रात को तो बिल्कुल न खाएं। खाने के बाद टीवी नहीं देखें और न तत्काल सोएं बल्कि कुछ देर टहलें-

हफ्ते में एक बार गर्म पानी से पेट पर सेक करें। ऎसा करने से पसीना अधिक आएगा और चर्बी कम होगी। पेट की स्किन में कसाव आता है-

खाने में प्रोटीन की मात्रा बढाएं। ये पचने में ज्यादा समय लेते हैं और पेट देर तक भरा रहता है। अंडे का सफे द भाग, फैट फ्री दूध व दही, ग्रिल्ड फिश और सब्जियां आपको स्लिम व फिट बनाएंगी-

दोपहर और रात के बीच में भूख लगने पर तले स्नेक्स खाने के बजाय ग्रीन या ब्लैक टी पिएं। इसमें थायनाइन नामक अमीनो एसिड होता है जो मस्तिष्क में रिलैक्सग केमिकल्स का स्त्राव करता है और आपकी भूख पर कंट्रोल करता है।तथा गर्भावस्था के समय पेट पर तेल से धीरे-धीरे मालिश करते रहना चाहिए,प्रसव बाद हल्के दबाव के साथ पेट को बांध कर रखें। ऎसा करने पेट ज्यादा उभरेगा नहीं-

भोजन में गेहूं के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएं। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा-

पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा-

अगर आप थुलथुले मोटापे से परेशान हैं तो लहसुन की दो कलियां भून लें उसमें सफेद जीरा व सौंफ सैंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें। इसका सेवन सुबह खाली पेट गर्म पानी से करें। लहसुन की चटनी खाना चाहिए और लहसुन को कुचलकर पानी का घोल बनाकर पीना चाहिए। लहसुन की पांच-छ: कलियां पीसकर पानी  में भिगो दें। सुबह पीस लें। और उसमें भुनी हींग और अजवाइन व सौंफ के साथ ही सोंठ व सेंधा नमक, पुदीना मिलाकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज फांकना चाहिए-



एक और जादुई फार्मूला भी अपनाये :-


यदि आप इस चाय को अगर आप नियमित पीयेगे  तो आप देखते ही देखते पतली हो जायेगे । चलो आपको बता ही देते  है कि कैसे बनाई जाती है ये हनी एंड सिनामन चाय-


सामग्री:-

शहद - 2 चम्‍मच

दालचीनी - 1 चम्‍मच

पानी - एक कप यानी 237 मिलीलीटर


व‍िधि-


1 कप पानी में 1 भाग दालचीनी और 1 चम्‍मच शहद मिला कर खौला लें। अब एक कप में दूसरा भाग दालचीनी डाल कर उसके ऊपर से खौलाया हुआ पानी उडे़लें। फिर इसे ढंक दें और पीने लायक ठंडा होने दें। जब पानी ठंडा हो जाए तब उसमें शहद मिला कर मिक्‍स करें। रात को सोने से पहले आधा कप चाय पियें और आधी कप चाय को ठंडा हो जाने के बाद फ्रिज में रख दें। फिर बची हुई चाय को दूसरे दिन बिना गरम किये हुए पियें-

ग्रीन टी क्या है और केसे इसे बनाये -


अन्य कुछ और प्रयोग- 


केवल सेवफल का ही आहार में सेवन करने से लाभ होता है। अरनी के पत्तों का 20 से 50 मि.ली. रस दिन में तीन बार पीने से स्थूलता दूर होती है-

चंद्रप्रभावटी की 2-2 गोलियाँ रोज दो बार गोमूत्र के साथ लेने से एवं दूध-भात का भोजन करने से 'डनलप' जैसा शरीर भी घटकर छरहरा हो जायेगा-

आरोग्यवर्धिनीवटी की 3-3 गोली दो बार लेने से व 2 से 5 ग्राम त्रिफला का रात में सेवन करने से भी मोटापा कम होता है। इस दौरान केवल मूँग, खाखरे, परमल का ही आहार लें। साथ में हल्का सा व्यायाम व योगासन करना चाहिए-

एक गिलास कुनकुने पानी में आधे नींबू का रस, दस बूँद अदरक का रस एवं दस ग्राम शहद मिलाकर रोज सुबह नियमित रूप से पीने से मोटापे का नियंत्रण करना सहज हो जाता है-


मोटापा घटाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपाय :-



गेहूं ,चावल,बाजरा और साबुत मूंग को समान मात्रा में लेकर सेककर इसका दलिया बना लें ! इस दलिये में अजवायन 20 ग्राम तथा सफ़ेद तिल 50 ग्राम भी मिला दें ! 50 ग्राम दलिये को 400 मि.ली.पानी में पकाएं ! स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लें ! नियमित रूप से एक महीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनक लाभ होता है-

अश्वगंधा के एक पत्ते को हाथ से मसलकर गोली बनाकर प्रतिदिन सुबह,दोपहर,शाम को भोजन से एक घंटा पहले या खाली पेट जल के साथ निगल लें ! एक सप्ताह के नियमित सेवन के साथ फल,सब्जियों,दूध,छाछ और जूस पर रहते हुए कई किलो वजन कम किया जा सकता है -

मूली के रस में थोडा नमक और निम्बू का रस मिलाकर नियमित रूप से पीने से मोटापा कम हो जाता है और शरीर सुडौल हो जाता है -

आहार में गेहूं के आटे और मैदा से बने सभी व्यंजनों का सेवन एक माह तक बिलकुल बंद रखें तथा इसमें रोटी भी शामिल है अब  अपना पेट पहले के 4-6 दिन तक केवल दाल,सब्जियां और मौसमी फल खाकर ही भरें और दालों में आप सिर्फ छिलके वाली मूंग कि दाल ,अरहर या मसूर कि दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडद कि दाल नहीं तथा सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं  गाजर,मूली,ककड़ी,पालक,पतागोभी,पके टमाटर और हरी मिर्च लेकर सलाद बना लें . सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च,सैंधा नमक,जीरा बुरककर और निम्बू निचोड़ कर खाएं  बस गेहूं कि बनी रोटी छोडकर दाल,सब्जी,सलाद और एक गिलास छाछ का भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए . इसमें मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं . इस प्रकार 6-7 दिन तक खाते रहें . इसके बाद गेहूं कि बनी रोटी कि जगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू करें फिर  5 किलो देशी चना और एक किलो जौ को मिलकर साफ़ करके पिसवा लें ! 6-7 दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में और आधी मात्रा में दाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू करें .एक महीने बाद गेहूं कि रोटी खाना शुरू कर सकते हैं लेकिन शुरुआत एक रोटी से करते हुए धीरे धीरे बढाते जाएँ . भादों के महीने में छाछ का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए इस महीनें में छाछ का प्रयोग नां करें -..

एरण्ड की जड़ का काढ़ा बनाकर उसको छानकर एक एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से मोटापा दूर होता है -

चित्रक कि जड़ का चूर्ण एक ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह शाम नियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर किया जा सकता है -

बिना बुझा चूना 15 ग्राम पीसकर 250 ग्राम देशी घी में मिलाकर कपड़े में छानकर सुबह-शाम 6-6 ग्राम की मात्रा में चाटने से मोटापा कम होता है-

सहजन के पेड़ के पत्ते का रस 3 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से त्वचा का ढीलापन दूर होता है और चर्बी की अधिकता कम होती है-

अर्जुन के 2 ग्राम चूर्ण को अग्निमथ के काढ़े में मिलाकर पीने से मोटापा दूर होता है-

भृंगराज के पेड़ के ताजे पत्ते का रस 5 ग्राम की मात्रा में सुबह पानी के साथ प्रयोग करने से मोटापा कम होता है-

विडंग के बीज का चूर्ण 1 से 3 ग्राम शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से मोटापा में लाभ मिलता है।
वायविंडग, सोंठ, जवाक्षार, कांतिसार, जौ और आंवले का चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करने से मोटापा में दूर होता है-

तुलसी के कोमल और ताजे पत्ते को पीसकर दही के साथ बच्चे को सेवन कराने से अधिक चर्बी बनना कम होता है। तुलसी के पत्तों के 10 ग्राम रस को 100 ग्राम पानी में मिलाकर पीने से शरीर का ढीलापन व अधिक चर्बी नष्ट होती है।तथा तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद और शहद 2 चम्मच को 1 गिलास पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से मोटापा कम होता है-

रात को सोने से पहले त्रिफला का चूर्ण 15 ग्राम की मात्रा में हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इस पानी को छानकर शहद मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे मोटापा जल्दी दूर होता है। त्रिफला, त्रिकुटा, चित्रक, नागरमोथा और वायविंडग को मिलाकर काढ़ा में गुगुल को डालकर सेवन करें। त्रिफले का चूर्ण शहद के साथ 10 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार (सुबह और शाम) पीने से लाभ होता है-

हरड़ 500 ग्राम, 500 ग्राम सेंधानमक व 250 ग्राम कालानमक को पीसकर इसमें 20 ग्राम ग्वारपाठे का रस मिलाकर अच्छी तरह मिलाकर सूखा लें। यह 3 ग्राम की मात्रा में रात को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सेवन करने से मोटापे के रोग में लाभ मिलता है-

सोंठ, जवाखार, कांतिसार, जौ और आंवला बराबर मात्रा में लेकर पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे मोटापे की बीमारी समाप्त हो जाती है-

सोंठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल, चव्य, सफेद जीरा, हींग, कालानमक और चीता बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण सुबह 6 ग्राम चूर्ण में गर्म पानी के साथ पीने से मोटापा कम होता है-

गिलोय, हरड़, बहेड़ा और आंवला मिलाकर काढ़ा बनाकर इसमें शुद्ध शिलाजीत मिलाकर खाने से मोटापा दूर होता है और पेट व कमर की अधिक चर्बी कम होती है-

गिलोय 3 ग्राम और त्रिफला 3 ग्राम को कूटकर चूर्ण बना लें और यह सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से मोटापा कम होता है-

गिलोय, हरड़ और नागरमोथा बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। यह 1-1 चम्मच चूर्ण शहद के साथ दिन में 3 बार लेने से त्वचा का लटकना व अधिक चर्बी कम होता है-

गुग्गुल, त्रिकुट, त्रिफला और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को अच्छी तरह एरण्ड के तेल में घोटकर रख लें। यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मोटापा की बीमारी ठीक होती है-

तिल के तेल से प्रतिदिन मालिश करने से शरीर पर बनी हुई अधिक चर्बी कम होती है-

दही को खाने से मोटापा कम होता है।तथा छाछ में कालानमक और अजवायन मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है-

100 ग्राम कुल्थी की दाल प्रतिदिन सेवन करने से चर्बी कम होती है-

पालक के 25 ग्राम रस में गाजर का 50 ग्राम रस मिलाकर पीने से शरीर का फैट (चर्बी) समाप्त होती है। 50 ग्राम पालक के रस में 15 ग्राम नींबू का रस मिलाकर पीने से मोटापा समाप्त होता है-

डिकामाली (एक तरह का गोंद) लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में गर्म पानी के साथ मिलाकर सुबह-शाम पीने से मोटापा कम होता है-

एरण्ड की जड़ का काढ़ा बनाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से मोटापा दूर होता है।तथा एरण्ड के पत्तों का रस हींग मिलाकर पीने और ऊपर से पका हुआ चावल खाने से अधिक चर्बी नष्ट होती है। एरंड को अंडी भी कहा जाता है -

पिप्पली का चूर्ण लगभग आधा ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ प्रतिदिन 1 महीने तक सेवन करने से मोटापा समाप्त होता है-

पीप्पल 150 ग्राम और सेंधानमक 30 ग्राम को अच्छी तरह पीसकर कूटकर 21 खुराक बना लें। यह दिन में एक बार सुबह खाली पेट छाछ के साथ सेवन करें। इससे वायु के कारण पेट की बढ़ी हुई चर्बी कम होती है-

पिप्पली के 1 से 2 दाने दूध में देर तक उबाल लें और दूध से पिप्पली निकालकर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। इससे मोटापा कम होता है-

जवाखार  35 ग्राम और चित्रकमूल 175 ग्राम को अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। यह 5 ग्राम चूर्ण एक नींबू का रस, शहद और 250 ग्राम गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट लगातार 40 दिनों तक पीएं। इससे शरीर की फालतू चर्बी समाप्त हो जाती है और शरीर सुडौल होता है। या फिर जौखार का चूर्ण आधा-आधा ग्राम दिन में 3 बार पानी के साथ सेवन करने से मोटापा दूर होता है-

प्रतिदिन अनन्नास खाने से स्थूलता नष्ट होती है क्योंकि अनन्नास चर्बी को नष्ट करता है-

मोटापा कम करेगी  यह स्पेशल चाय एक चम्मच सूखा अदरक पाउडर, आधा चम्मच धनिया पाउडर, दो चम्मच गुड़, आधा चम्मच सौंफ, एक टी बैग और एक कप पानी। सौंफ को दो मिनट पानी में उबालिए और गर्म पानी में 1 मिनट के लिए टी बैग डालें। इससे फ्लेवर आ जाएगा। और चाय का स्वाद भी कुछ बदल जाएगा जो पीने में अच्छा लगेगा। आखिर में सारे पदार्थ इसमें मिला दें और गुड़ मिलाकर इसे घोलें। जब गुड़ मिल जाए तो स्वाद के साथ पीएं-

आपको दूर करना हो शूगर या फिर मोटापा या आ रही हो कैलोरी की दिक्कत तीनों मर्ज में स्टीविया का करेंगे यूज तो होगा लाभ भरपूर-

इसे भी देखे - 

स्टीविया -शुगर-मोटापा-कैलोरी को दूर करे - 



विशेष :-

सबसे पहले मोटापे से पीड़ित रोगी को समझना चाहिए कि जब तक आप अपने खान-पान में सुधार नहीं करेगें, तब तक आपका मोटापा दूर नहीं हो सकता है। सादा भोजन और व्यायाम शरीर में अधिक चर्बी को पिघलाता है। मालिश उसमें सहायता करती है और रोगी के शरीर मे कमजोरी नहीं आने देती है, साथ ही चर्बी घटने पर शरीर के मांस को ढीला नहीं पड़ने देती, बल्कि मालिश शरीर को मजबूत तथा आकर्षक बना देती है। इसलिए मोटापा कम करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने भोजन में सुधार करे तथा प्रतिदिन व्यायाम करें। ठण्डी मालिश मोटापा दूर करने में विशेष सहायता करती है, इसके अलावा तेल मालिश या सूखी मालिश भी की जा सकती है। वैसे तेल मालिश का उपयोग कम ही करें तो अच्छा है क्योंकि तेल की मालिश तभी अधिक लाभ देती है जब रोगी उपवास कर रहा हो-

रोगी को उबली हुई सब्जियां, क्रीम निकला हुआ दूध, संतरा, नींबू आदि खट्टे फल तथा 1-2 चपाती नियमित रूप से कई महीने तक लेनी चाहिए। रोगी को तली और भुनी हुई चीजों को अपने भोजन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। उपचार के दौरान रोगी को बीच-बीच में 1-2 दिन का उपवास भी रखना चाहिए। उपवास के दिनों में केवल नींबू पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए। इस प्रकार के भोजन व उपचार से कुछ दिनों तक तो रोगी को कमजोरी महसूस होगी, परन्तु कुछ दिनों के अभ्यास से जब शरीर इसका आदि हो जाएगा, तब रोगी अपने को अच्छा महसूस करने लगेगा-

जिन लोगों को मोटापा थायराइड ग्रंथि की गड़बड़ी के कारण हो गया हो, उन्हें मोटापा दूर करने के लिए क्रीम निकले दूध के स्थान पर गाय का दूध पीना चाहिए, इससे रोगी को कोई नुकसान नहीं होगा। रोगी के लिए आवश्यक यह है कि वह एक समय में ही भोजन करे और सुबह और शाम 250 ग्राम से 300 ग्राम दूध के साथ कुछ फल भी ले, इससे रोगी को जल्दी लाभ होगा-


उपचार और प्रयोग -

पहले से अब रोग जादा क्यों बढ़ गए -

आज से पहले लोगो की आयु क्यों जादा होती थी -क्युकि खान -पान शुद्ध हुआ करता था हर व्यक्ति पैदल या सायकिल से जादा चलता था इसलिए शारीरिक एक्सरसाइज हो जाती थी भोजन पच जाया करता था ,पहले के लोग सुबह बिस्तर से जल्दी उठ जाते थे सुबह की शुद्ध हवा शरीर को तरोताजा रखती थी -





पहले- घर की महिलाये मुँह अँधेरे उठ जाती थी और अपने ही हाथो से घर का सारा काम अपने ही हाथो से करती थी, कपडे घोने से लेकर खाना बनाने तक मेहमान नवाजी में अपना अहोभाग्य  समझा करती थी , क्योंकि उसमे सामने वाले की तृप्त आत्मा से दुआ निकलती थी रिश्तो का मतलब बेमानी नहीं हुआ करता था- .

लेकिन आज-  9 बजे बहु या पत्नी को बेड टी की अपेक्षा हमेशा दुसरो से होती है नास्ता में  मेगी, पास्ता ,मैकरोनी ने जगह ले ली है , जिसमे सबसे जादा पेट को नुक्सान करने के गुण पाये जाते है -

घर में गृह लक्ष्मी को काम नहीं करना पड़े इसलिए नॉकरानी चाहिए , जब पत्नियाँ सेवा भाव से बच रही है तो पति से वफादारी की अपेक्षा करना भी बेमानी ही है इसलिए ही आज कल पतियो को भी नॉकरानी से जादा प्यार बढ़ रहा है, कपडा वाशिंग मशीन धोएगी तो भला पति श्री मति जी से क्यों पूछेगा आज जादा थक गई हो. टी वी रिमोट हाथ में और सीरियल से सास बहूं नन्द के झगड़ो का मजा और फिर मानसिकता वही सावधान इंडिया का रिपीट -

ये बात मस्तिस्क में बिठाने की जगह सावधानी रखना है या नहीं- बल्कि हर एक को शक भरी नजरो से देखो कुछ भी हो सकता है - काम का बोझ गृह लक्ष्मी का तो पति परमेश्वर जी ने तो कम कर दिया लेकिन बदले में बेठे रहने से रोगों का ट्रान्सफर कितना हुआ -क्योंकि एक्सरसाइज तो शारीरिक है ही नहीं- तो बी पी मोटापा शुगर माइग्रेन जेसी बीमारियां मजदुर वर्ग को  थोड़े आने वाली है- वो तो आज भी मेहनत करने के बाद सुख की नींद सोता है-

आप को बिमारी से बचना है तो सभी को सब सुख होने के बाद भी कुछ न कुछ शारीरिक मेहनत करना चाहिए जिससे आलस्य भी कम होगा और रोगों की प्रधानता भी कम हो जायेगी अपने जीवन का एक चार्ट निर्धारित करे और पूरी निष्ठा से उसका पालन करे आपको बिना किसी दवा के निश्चित मानिए साठ प्रतिशत रोगों से निजात अपने आप मिल जायेगी ,जितना हो सके जंक फ़ूड ,रेडी टू ईट , से बचना चाहिए -

जिसे आज का युवा जिसे बेकफुट पे ले जा रहा है वास्तव में वो दुसरे को नहीं खुद को ही धोखा दे रहा है -जिद और कलह से बचने के लिए बुजुर्गो ने अपने मुंह को तो बंद करना सीख लिया है लेकिन कही येसा तो नहीं आपको जो उनसे प्राप्त हो सकता था वो आप खोते जा रहे है -

अब भी समय है खुद को सक्षम बनाने का कुछ पल के लिए सोचो और अपने बुजुर्गो को सम्मान देते हुए कुछ लेने का प्रयास करे हो सकता है लाख की चीज आपको कौड़ियो में मिल जाए -

हम नहीं कहते है की इश्वेर ने आपको जो सुख साधन दिया है आप उसका उपयोग न करे -मेरा निवेदन ये है कि अगर आप कृत्रिम सुख साधन के उपयोग को करे तो कभी शारीरिक एक्सरसाइज हो इसका भी प्रयास करते रहना चाहिए - क्युकि सलाह  तो मेरी हो  सकती है -मगर ये शरीर तो आपका है ....?

उपचार और प्रयोग-

Wednesday, October 28, 2015

अलसी को अपनाए ये उपहार है सब के लिए - Linseed adopt these gifts for all

सेक्स संबन्धी समस्याओं के उपचारों में सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी - एक हर्बल चिकित्सक आपकी सारी सेक्स सम्बंधी समस्याएं अलसी खिला कर ही दुरुस्त कर देगा क्योंकि अलसी आधुनिक युग में स्तंभनदोष के साथ साथ शीघ्रस्खलन, दुर्बल कामेच्छा, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की भी महान औषधि है -



सेक्स संबन्धी समस्याओं के अन्य सभी उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। बस 30 ग्राम रोज लेनी है-

सबसे पहले तो अलसी आप और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक,कोमल,नम,बेदाग व गोरा बनायेगी। आपके केश काले, घने, मजबूत, चमकदार और रेशमी हो जायेंगे।

अलसी आपकी देह को ऊर्जावान, बलवान और मांसल बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी गहेगी, न क्रोध आयेगा और न कभी थकावट होगी-मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा-

अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और षटबंध उदर देख कर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी-

अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन एवं लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे शक्तिशाली स्तंभन तो होता ही है साथ ही उत्कृष्ट और गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। इसके अलावा ये शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करते हैं जिससे सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है।

नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ओमेगा-3 फैट के अलावा सेलेनियम और जिंक प्रोस्टेट के रखरखाव, स्खलन पर नियंत्रण, टेस्टोस्टिरोन और शुक्राणुओं के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार अलसी लिंग की लंबाई और मोटाई भी बढ़ाती है।

अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबर्दस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है-

अलसी सेवन का तरीकाः-


हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये। डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें। कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं-

दूसरा एक तरीका है कि आप अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये. भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है .लेकिन आप इसे जादा मात्रा में बना के न रक्खे क्युकि ये खराब हो जाती है .एक हफ्ते के लिए बनाना ही चाहिए .अलसी आपको अनाज बेचने वाले तथा पंसारी या आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वालो के यहाँ से मिल जायेगी -

अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है। यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।

इसकी बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है।

यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है।

अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है।

अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।

अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।

पथरी, सुजाक एवं पेशाब की जलन में अलसी का फांट पीने से रोग में लाभ मिलता है। अलसी के कोल्हू से दबाकर निकाले गए (कोल्ड प्रोसेस्ड) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें। स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा।

इसी कार्य के लिए इसके बीजों का ताजा चूर्ण भी दस-दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रयोग में लिया जा सकता है। यह नाश्ते के साथ लें।

बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।

अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। तीन घंटे बाद छानकर पीएं। इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा। मूत्र भी खुलकर आने लगेगा।

इसकी पुल्टिस हल्की गर्म कर फोड़ा, गांठ, गठिया, संधिवात, सूजन आदि में लाभ मिलता है।

डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में (जहां अलसी और गैहूं बराबर मात्रा में हो)

अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है।

कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी। कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।

जोड़ की हर तकलीफ का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया उपचार है अलसी। ­­ आर्थ्राइटिस, शियेटिका, ल्युपस, गाउट, ओस्टियोआर्थ्राइटिस आदि का उपचार है अलसी।

लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत अलसी ही है जो जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी, फफूंदरोधी और कैंसररोधी है। अलसी शरीर की रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ कर शरीर को बाहरी संक्रमण या आघात से लड़ने में मदद करती हैं और शक्तिशाली एंटी-आक्सीडेंट है।

लिगनेन वनस्पति जगत में पाये जाने वाला एक उभरता हुआ सात सितारा पोषक तत्व है जो स्त्री हार्मोन ईस्ट्रोजन का वानस्पतिक प्रतिरूप है और नारी जीवन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे रजस्वला, गर्भावस्था, प्रसव, मातृत्व और रजोनिवृत्ति में विभिन्न हार्मोन्स् का समुचित संतुलन रखता है। लिगनेन मासिकधर्म को नियमित और संतुलित रखता है। लिगनेन रजोनिवृत्ति जनित-कष्ट और अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार है। लिगनेन दुग्धवर्धक है। लिगनेन स्तन, बच्चेदानी, आंत, प्रोस्टेट, त्वचा व अन्य सभी कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू तथा एंलार्ज प्रोस्टेट आदि बीमारियों से बचाव व उपचार करता है।

त्वचा, केश और नाखुनों का नवीनीकरण या जीर्णोद्धार करती है अलसी। अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है। त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी। चिर यौवन का स्रोता है अलसी। बालों का काला हो जाना या नये बाल आ जाना जैसे चमत्कार भी कर देती है अलसी। किशोरावस्था में अलसी के सेवन करने से कद बढ़ता है।

अलसी एक फीलगुड फूड है :-

क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है यह आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है। अलसी के सेवन से मनुष्य लालच, ईर्ष्या, द्वेश और अहंकार छोड़ देता है। इच्छाशक्ति, धैर्य, विवेकशीलता बढ़ने लगती है, पूर्वाभास जैसी शक्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इसीलिए अलसी देवताओं का प्रिय भोजन थी। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित भोजन है।

अलसी कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और हृदयगति को सही रखती है। रक्त को पतला बनाये रखती है अलसी। रक्तवाहिकाओं को साफ करती रहती है अलसी।

अलसी शर्करा ही नियंत्रित नहीं रखती, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करती है। अलसी में रेशे भरपूर 27% पर शर्करा 1.8% यानी नगण्य होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है। अलसी बी.एम.आर. बढ़ाती है, खाने की ललक कम करती है, चर्बी कम करती है, शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है, आलस्य दूर करती है और वजन कम करने में सहायता करती है। चूँकि ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी

आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है और पेट साफ रखने में यह इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी।

ओमेगा-3 हमारे शरीर की सारी कोशिकाओं, उनके न्युक्लियस, माइटोकोन्ड्रिया आदि संरचनाओं के बाहरी खोल या झिल्लियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यही इन झिल्लियों को वांछित तरलता, कोमलता और पारगम्यता प्रदान करता है। ओमेगा-3 का अभाव होने पर शरीर में जब हमारे शरीर में ओमेगा-3 की कमी हो जाती है तो ये भित्तियां मुलायम व लचीले ओमेगा-3 के स्थान पर कठोर व कुरुप ओमेगा-6 फैट या ट्रांस फैट से बनती है, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का संतुलन बिगड़ जाता है, प्रदाहकारी प्रोस्टाग्लेंडिन्स बनने लगते हैं, हमारी कोशिकाएं इन्फ्लेम हो जाती हैं, सुलगने लगती हैं और यहीं से ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन, आर्थ्राइटिस और कैंसर आदि रोगों की शुरूवात हो जाती है।

फिर अभी भी क्या सोच रहे है आज ही अपनाए और देखे इसके फायदे ....गर्मी में आप इसकी मात्रा आधी कर ले सिर्फ 15 ग्राम ही सेवन करे -

उपचार और प्रयोग -

ह्रदय रोग और चुकंदर - Heart disease and beet

Beet juice is beneficial for heart patients. It can strengthen the muscles of patients with heart attack-


चुकंदर के रस में नाइट्रेट की उच्च मात्रा होने के कारण मांसपेशियों में बहुत ही सुधार होता है- अध्ययनों में भी ये साबित हो चुका है कि खान पान में नाइट्रेट (Nitrate ) के सेवन से कई प्रख्यात खिलाड़ियों की मांसपेशियों में सुधार आया है-

कई शोधकर्ताओं द्वारा चुकंदर का रस पीने के दो घंटों के बाद रोगियों की मांसपेशियों की ताकत में अभूतपूर्व सुधार का परिणाम प्राप्त किया है तथा शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि रोगियों के दिल की गति से लेकर रक्तचाप में गिरावट जैसा कोई विशेष साइड इफेक्ट (side effect )महसूस नहीं हुआ जो हृदयाघात के रोगियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है-


चुकंदर में पाया जाने वाला लाल रंग बेटाईन (Betain ) नामक रसायन की वजह से होता है जो कैंसरग्रस्त कोशिकाओं(cancerous cells ) की वृद्दि रोकने में मददगार साबित हुआ है-


चुकंदर शरीर में रक्त में हीमोग्लोबिन (hemoglobin ) की मात्रा बढ़ती है सफेद चुकंदर (white beet ) से व्यवसायिक तौर इस्तेमाल किया जाता है इससे शर्करा प्राप्त की जाती है जबकि लाल चुकंदर सलाद और सब्जी के तौर पर अपनाया जाता है-


चुकंदर मोटापे के लिए बहुत उपयोगी है यह बात बहुत कम लोग जानते है -कि चुकंदर के रस के साथ गाजर का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से शरीर की ताकत तो बढ़ती है -लेकिन साथ ही मोटापा भी नहीं बढ़ता और अनावश्यक चर्बी भी कम हो जाती है (Beetroot is very useful for obesity, it is very little known.The beet juice with carrot juice mixed drink similar amounts of body strength is increasing. But obesity also increases and decreases unnecessary fat Forms. )


आपका वजन कम करने के लिए चुंकदर भी एक बेहतर विकल्प है-कच्चा चुकंदर या कम से कम दो या तीन चुकंदर का जूस तैयार कर प्रतिदिन सुबह खाली पेट लिया जाए तो यह वजन करने में सहायक साबित होता है(Beetroot is also a better choice for your weight loss Forms-Raw beets or beet juice for at least two or three ready to be taken on an empty stomach every morning, it would have been helpful to weigh-in. )


चुकंदर को कच्चा चबाने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में फाईबार मिलते हैं जो पाचन क्रिया संतुलित कर अपचन की समस्या को दूर करता (Chewing raw beet body receives adequate Faibar-Balance digestion removes the problem of indigestion )-


चुकंदर के रस में समान मात्रा में खीरे का रस और एक या दो चम्मच नींबू का रस भी मिलाएं और प्रतिदिन 200 से300 मिलीमीटर तक पीने से कब्ज से छुटकारा मिल जाता है (In the same amount of beet juice, cucumber juice and add one or two tablespoons lemon juice-It is 200 to 300 millimeters per day to get rid of constipation is to drink)


चुकंदर का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए -यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा तैयार करने में मददगार साबित होता है-चुकंदर में भरपूर मात्रा में लौह तत्व और फ़ोलिक एसिड पाए जाते हैं जो रक्त निर्माण के लिए मददगार होते हैं (Intake of sugar beet women during menstruation should-It provides strength to women and blood volume in the body is helpful in preparation-Iron and folic acid rich in sugar beet, which are found in the blood are helpful for building.)

उपचार और प्रयोग-

Monday, October 26, 2015

महिलाओं की हर कमजोरी दूर करे -

हमारे देश में हमारी माताए बहने वैसे भी संस्कारित विचारों की होती है वो अपने परिवार की सेवा में अपना जीवन अर्पण कर देती है -त्याग और ममता की प्रतिमूर्ति है ममता ,प्यार ,दया ,और सेवा भावना जन्म जात कूट-कूट कर भरी होती है -इसलिए दूसरो का ध्यान देते-देते -खुद का ध्यान नहीं रख पाती है -




धीरे-धीरे यही सेवा भावना स्वयं पे ध्यान न दे पाने के कारण उनको अंदर से कमजोर बना देती है और उनको कुछ बीमारियों से स्वाभाविक रूप से जूझना पड़ता है जैसे- मासिक धर्म की अनियमितता ,कमजोरी,दुबला-पन,सिरदर्द,श्वेत प्रदर ,रक्त-प्रदर ,कमर-दर्द आदि -

आपके लिए एक आयुर्वेद का नुस्खा है जो महिलाओं की कमजोरी को दूर करके आपको बीमारियों से भी निजात दिला सकता है -


आयुर्वेद नुस्खा:-


सामग्री :-



स्वर्ण भस्म या वर्क -10 ग्राम 

मोती पिष्टी - 20 ग्राम 

शुद्ध हिंगुल - 30 ग्राम, 

सफेद मिर्च - 40 ग्राम, 

शुद्ध खर्पर - 80 ग्राम। 

गाय के दूध का मक्खन - 25 ग्राम 

नीबू का रस - थोडा सा 


बनाने की विधि :-


सबसे पहले आप स्वर्ण भस्म या वर्क और हिंगुल को मिला कर एक जान कर लें। फिर शेष द्रव्य मिलाकर मक्खन के साथ घुटाई करें। फिर नींबु का रस कपड़े की चार तह करके छान लें और इसमें मिलाकर चिकनापन दूर होने तक घुटाई करनी चाहिए।आठ-दस दिन तक घुटाई करनी होगी। फिर उसकी एक-एक रत्ती की गोलिया बना लें।


सेवन की विधि:-




आप इसे एक या दो  गोली सुबह शाम एक चम्मच च्यवनप्राश के साथ सेवन करें-इस दवाई का सेवन करने से महिलाओं को प्रदर रोग, शारीरिक क्षीणता, और कमजोरी आदिसे मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ और सुडौल बनता है- यह दवाई ”स्वर्ण मालिनी” वसंत के नाम से बाजार में भी मिलती है। इसके सेवन से शरीर बलशाली होता है। शरीर के सभी अंगों को ताकत मिलती है।


उपचार और प्रयोग-

Saturday, October 24, 2015

दो मुट्ठी रोज खाने से भी हेल्थ बनती है -

एक सस्ता और आसान सा दिखने वाला चना  हमारे  सेहत के लिए कितना फायदेमंद है हम इस पोस्ट में जानने का प्रयास करेगे-



काले चने भुने हुए हों, अंकुरित हों या इसकी सब्जी बनाई हो, यह हर तरीके से सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। आपको पता है कि इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं-


आपके शरीर को सबसे ज्यादा फायदा अंकुरित काले चने खाने से होता है, क्योंकि अंकुरित चने क्लोरोफिल, विटामिन ए, बी, सी, डी और के, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मिनरल्स का अच्छा स्रोत होते हैं। साथ ही इसे खाने के लिए किसी प्रकार की कोई खास तैयारी नहीं करती पड़ती। रातभर भिगोकर सुबह एक-दो मुट्ठी खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है। वेसे भी चने ज्यादा महंगे भी नहीं होते और इसमें बीमारियों से लड़ने के गुण भी छिपा हुए हैं- वैसे भी आजकल दूध तो शुद्ध मिल नहीं रहा है तो भरपूर विटामिन और सेहत के लिए खाए शुद्ध चने -

इसके खाने से कब्ज में राहत मिलती है- चने में मौजूद फाइबर की मात्रा पाचन के लिए बहुत जरूरी होती है।

आप रात-भर भिगोए हुए चने से पानी अलग कर उसमें नमक, अदरक और जीरा मिक्स कर खाने से कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही जिस पानी में चने को भिगोया गया था, उस पानी को पीने से भी राहत मिलती है। लेकिन कब्ज दूर करने के लिए चने को छिलके सहित ही खाएं-

ये एनर्जी बढ़ाता है कहा तो यहाँ तक जाता है यदि आपको इंस्टेंट एनर्जी चाहिए, तो रात-भर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकड़े और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है। आप चने का सत्तू भी खा सकते हैं। यह बहुत ही फायदेमंद होता है।गर्मियों में चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलाकर पीने से शरीर को एनर्जी तो मिलती ही है, साथ ही भूख भी शांत होती है।

आपको एक बात से और अवगत कराता हूँ कि ये पथरी की प्रॉब्लम दूर करता है- दूषित पानी और खाने से आजकल किडनी और गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या आम हो गई है। हर दूसरे-तीसरे आदमी के साथ स्टोन की समस्या हो रही है। इसके लिए रातभर भिगोए हुए काले चने में थोड़ी सी शहद की मात्रा मिलाकर खाएं। रोजाना इसके सेवन से स्टोन के होने की संभावना काफी कम हो जाती है और अगर स्टोन है तो आसानी से निकल जाता है। इसके अलावा चने के सत्तू और आटे से मिलकर बनी रोटी भी इस समस्या से राहत दिलाती है।

काला चना शरीर की गंदगी को पूरी तरह से बाहर भी निकालता है ।

एनर्जी बढ़ाता है, ये डायबिटीज से छुटकारा मिलता है, एनीमिया की समस्या दूर होती है, बुखार में पसीना आने की समस्या दूर होती है, पुरुषों के लिए फायदेमंद, हिचकी में राहत दिलाता है, जुकाम में आराम मिलता है, मूत्र संबंधित रोग दूर होते हैं, त्वचा की रंगत निखारता है।

डायबिटीज से छुटकारा दिलाता है चना ताकतवर होने के साथ ही शरीर में एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर होता है। लेकिन इसका सेवन सुबह-सुबह खाली पेट करनाचाहिए-

चने का सत्तू डायबिटीज़ से बचाता है। एक से दो मुट्ठी ब्लड चने का सेवन ब्लड शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करने के साथ ही जल्द आराम पहुंचाता है-

एनीमिया की समस्या दूर होती है शरीर में आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की समस्या को रोजाना चने खाकर दूर किया जा सकता है। चने में शहद मिलाकर खाना जल्द असरकारक होता है। आयरन से भरपूर चना एनीमिया की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। चने में 27 फीसदी फॉस्फोरस और 28 फीसदी आयरन होता है जो न केवल नए बल्ड सेल्स को बनाता है, बल्कि हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है।

युवा महिलाओं को हफ्ते में कम से कम एक बार चना और गुड़ खाना चाहिए।

गुड़ आयरन का समृद्ध स्रोत है और चने में बड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है। ये दोनों मिलकर महिलाओं की माहवारी के दौरान होने वाले रक्त के नुकसान को पूरा करते हैं। तथा सभी महिलाओं को आने वाले माघ महीने में हर रोज कम से कम 40-60 मिनट धूप में बैठकर तिल के लड्डू या गजक खाने चाहिए, जिसमें कैल्शियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इससे उनके शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी पूरी हो जाएगी।

हिचकी में राहत दिलाए हिचकी की समस्या से ज्यादा परेशान हैं, तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धूम्रपान करने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। साथ ही चना आंतों इंटेस्टाइन की बीमारियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

बुखार में पसीना आने पर बुखार में ज्यादा पसीना आने पर भुने हुए चने को पीसकर, उसमें अजवायन मिलाएं। फिर इससे मालिश करें। ऐसा करने से पसीने की समस्या खत्म हो जाती है।

मूत्र संबंधित रोग में  भुने हुए चने का सेवन करने से बार-बार पेशाब जाने की बीमारी दूर होती है। साथ ही गुड़ व चना खाने से यूरीन से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या में राहत मिलती है। रोजाना भुने हुए चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाती है।

पुरुषों के लिए फायदेमंद चीनी-मिट्टी के बर्तन में रातभर भिगोए हुए चने को चबा-चबाकर खाना पुरुषों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पुरुषों की कई प्रकार की कमजोरी की समस्या खत्म होती है। जल्द असर के लिए भीगे हुए चने के साथ दूध भी पिएं। भीगे हुए चने के पानी में शहद मिलाकर पीने से पौरुषत्व बढ़ता है।

त्वचा की रंगत निखारता हैचना केवल हेल्थ के लिए ही नहीं, स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है- चना खाकर चेहरे की रंगत को बढ़ाया जा सकता है। वैसे चने की फॉर्म बेसन को हल्दी के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। नहाने से पहले बेसन में दूध या दही मिक्स करें और इसे चेहरे पर 15-20 लगा रहने दें। सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। रंगत के साथ ही कील-मुहांसों, दाद-खुजली और त्वचा से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं दूर होती हैं-

जुकाम में राहतगर्म चने को किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है।

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Thursday, October 22, 2015

सेक्स हार्मोन को भी प्रभावित करता है गुटखा और तम्बाखू -

लोग गुटका, पान मसाला, तंबाकू, धूम्रपान और इसी तरह की कितनी ही चीजों के आदी होते हैं। कुछ लोग तो ऐसी चीजों को खाने के लिए हरदम बेचैन रहते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा करके आप खुद को ही कुएं में डाल रहे हैं। यानी ऐसा करने से आप बीमारियों को खुद बुलावा दे रहे हैं-




गुटखे के पाउच की रंग-बिरंगी पैकिंग खोलकर अपने मुंह में डालें तो इस बात का भी ध्यान रखें कि इससे न केवल आपको मुंह का कैंसर हो सकता है-बल्कि इससे दांत भी खराब हो सकते हैं। इतना ही नहीं, गुटखे में मौजूद कई किस्म के रसायनों से हमारे डीएनए को भी नुकसान हो सकता है-

क्या आप जानतें हैं पान मसाला, तंबाकू और गुटका आपके शरीर पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इतना ही नहीं इनका प्रभाव कई बार इतना खतरनाक होता है कि आपको कैंसर तक हो सकता है। सिर्फ बीमारियां ही नहीं, इनसे व्याक्ति का हार्मोंन संतुलन भी बिगड़ने लगता है और सेक्स हार्मोंस भी प्रभावित होते हैं-

गुटका और आपका सेक्स हार्मोन्स :-



गुटका, तंबाकू और इसी तरह की अन्य चीजों से आपको मुंह के कैंसर का सबसे अधिक खतरा रहता है। इसके साथ ही आपकों मुंह की कई और समस्याएं भी हो सकती हैं। इतना ही नहीं गुटका इत्यादि चीजों से आपके दांत भी खराब हो जाते हैं और आपको सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा भी रहता है।

आपको गुटका, तंबाकू, पान इत्यादि खाने से इसीलिए भी बचना चाहिए क्योंकि इनके निर्माण में कई तरह के रसायन और खुशबुदार कलर्स का इस्तेमाल होता है जिससे आपके हार्मोंस तो प्रभावित होते ही हैं साथ ही आपके डीएनए को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

शोधों में ये बात साबित हो चुकी है कि गुटका व इसी तरह की अन्य चीजों के सेवन से शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि ये नए नहीं हैं क्योंकि पहले भी कई शोधों में तंबाकू और गुटके के नुकसान साबित हो चुके है। इसके साथ ही इनसे होने वाले दांतों के नुकसान भी साबित हो चुके है।

दुनियाभर के देशों में भारत के लोगों को मुंह का कैंसर व अन्य तरह के कैंसर का सबसे अधिक खतरा रहता है, इसका सबसे बड़ा कारण भारतीयों द्वारा गुटके का अधिक से अधिक प्रयोग। दरअसल, गुटके में मिलाया जाने वाला तंबाकू, सुपारी, चूना, नशीले पदार्थ और कत्था इत्यादि से शरीर के एंजाइम्स पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे शरीर के हर हिस्से में पाए जाने वाले इन एंजाइम्स की कार्यशैली और कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

क्या आप जानते हैं शरीर में मौजूद एंजाइम्स हार्मोंस के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में एंजाइम्स को सेक्स हार्मोंस को बनाने में उस समय दिक्क‍तें आने लगती हैं जब गुटके के प्रभाव से एंजाइम्स की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

इतना ही नहीं गुटके के कारण शरीर में मौजूद टॉक्सिन की प्रक्रिया भी बाधा होती है क्योंकि गुटके से टॉक्सिन बनाने वाले हार्मोंस की प्रक्रिया में भी बाधा होने लगती है।

हमारे कहने का अर्थ है गुटके के खाने से डायरेक्ट और इनडायरेक्ट सेक्स हार्मोंस बहुत प्रभावित होते है। इतना ही नहीं जो पुरूष बहुत अधिक गुटके का सेवन करने लगते हैं, या लगातार गुटका खाने लगते हैं उनके नंपुसक होने की संभावना दुगुनी हो जाती है। यानी गुटके से कई और बीमारियों के साथ ही सबसे अधिक नेगेटिव प्रभाव सेक्स हार्मोंस पर पड़ता है और यदि गर्भवती महिलाएं गुटके का सेवन करती हैं तो उनके होने वाले बच्चे पर इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है।

आप तम्बाखू गुटके से बचे तो आपको किसी डॉक्टर से नापुंसक होने की दवा नहीं पूछनी पड़ेगी न ही आपके पैसे की बर्बादी होगी .

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उपचार और प्रयोग -

दिमागी ताकत व तरावट लानेवाला योग -

बहुत से विद्यार्थी (Student ) मुझे अक्सर पूछते है कि आप हमें दिमागी ताकत (Strength of mind ) और तरावट(Dewiness ) के लिए कोई फार्मूला बताये तो आज एक पौष्टिक (Nutritious ) योग आपको बता रहे है जिसके खाने से आपको दिमागी तरावट और मस्तिस्क को ताकत भी मिलेगी -











नुस्खा इस प्रकार है :- 



सामग्री :-


बबूल की गोंद- 500 ग्राम

घी - 100 ग्राम

मुनक्का- 250 ग्राम

बादाम - 100 ग्राम

मिश्री - 250 ग्राम 



बनाने की विधि :-



सबसे पहले 500 ग्राम बबूल की गोंद (Acacia gum ) शुद्ध घी में तलें व फुल जाने पर निकाल के बारीक़ पीस लें तथा अब इसमें 250 ग्राम पिसी मिश्री मिला लें - 250 ग्राम बीज निकाला हुआ मुनक्का (Raisins ) और 100 ग्राम बादाम (Almond ) की गिरी दोनों को कूट-पीसकर इसमें मिला लें -


मात्रा :-


आप इसे सुबह नाश्ते के रूप में इसे दो चम्मच अर्थात लगभग 20-25 ग्राम खूब चबा-चबाकर खायें - फिर एक गिलास मीठा दूध घूँट –घूँट करके पी लें -अच्छी तरह खुलकर भूख लगने पर ही भोजन करें - ये प्रयोग दिन में एक बार नियमित कुछ दिन करे - आपकी याददाश्त (memory ) और मस्तिष्क का विकास तीव्र होने लगेगा -

उपचार और प्रयोग-

Wednesday, October 21, 2015

नींद न आये या अधिक नींद आये तो क्या करे -

जिनके घर में अनिष्ट शक्तियों का कष्ट होता है या घर में कोई वास्तु दोष होता है  उनके घर के सदस्यों को या तो नींद नहीं आती या अत्याधिक नींद आती है या दिन भर आलस बना रहता है तो आपको ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए यह जान लेते हैं - बिना किसी अतिरिक्त दवा के -




यदि नींद अधिक आती हो या नींद नहीं आती हो तो एक बात सुस्पष्ट है कि घर का वातावरण अशुद्ध है अतः घर में वास्तु शुद्धि के सारे उपाय नियमित करें -

सबसे पहले ये उपाय करे :-



सबसे पहले आप अपने घर में एक तुलसी के पौधे को लगायें तथा घर एवं आसपास के परिसर को स्वच्छ रखें |

रात को अपने घर में दो दिन नीमपत्ती की धुनी जलाएं या फिर घर में कंडे या लकड़ी से अग्नि प्रज्वलित कर धुना, लोबान एवं गूगुल जलाएं |

घर में नामजप करें या संतों के भजन-स्त्रोत्र -पठन या सात्त्विक नाम जप की ध्वनि रिकार्डर चलायें |

घर में नियमित गौ मूत्र का छिड़काव् करें ये आस पास के सभी निगेटिव वाइरस को खत्म करने की छमता रखता है- पुराने ज़माने में लोग जब मकान कच्चे हुआ करते थे तो गाय के गोबर से आँगन इत्यादि को लीपते थे उसका लाजिक भी यही था घर के आस पास निगेटिव वाइरस को समाप्त करना लेकिन गाय के मूत्र में आज भी वही गुण विधमान है ये एक प्राक्रतिक फिनायल है-

आप जैसे भी अपने घर कलह क्लेश टालें, वास्तु देवता "तथास्तु" कहते रहते हैं हैं अतः क्लेश से क्लेश और बढ़ता है और धन का नाश होता है जिस घर में क्लेश होता है वहां कभी सुख सम्पति नहीं आती है इसलिए कहावत है "जहाँ सुमति तहां सम्पति नाना ,जहाँ कुमति तहां विपति निधाना"

जब कभी भी -सत्संग प्रवचन का आयोजन करें - अतरिक्त स्थान घर में हो तो धर्मकार्य हेतु या साप्ताहिक सत्संग हेतु वह स्थान किसी संत या गुरु के कार्य हेतु अर्पण करें यदि ये भी न हो सके तो एक बार नवरात्रि में माता की आरती पाठ इत्यादि आयोजन करे जिस घर में कोई भी एक व्यक्ति हनुमान चलिषा या हनुमान अष्टक का पाठ कर लेता है उसके घर में कलह, विपति, बीमारी आदि कोसो दूर रहती है सिर्फ पांच मिनट का पाठ आपके जीवन को सुरक्षित और संपन्न करता है और निर्मल विचार की ओर उन्मुक्त करता है .जो व्यक्ति रात को सोते समय एक भी चलिषा के दोहे को मन ही मन सुमिरन करके विश्राम करता है उसे कभी बुरे स्वप्न नहीं आते है -.

संतों के चरण घर में पड़ने से घर की वास्तु 70% तक शुध्द हो जाती है अतः संतो के आगमन हेतु अपनी अपनी भक्ति बढ़ाएं मगर ढोगी साधू संतो से दूर रहे उत्तम संतो के अंदर लालच नहीं होता है वो अनायास ही किसी के घर में पदार्पण नहीं करते है न ही व्यापार में लिप्त होकर किसी वस्तु को भक्तो को बेचने हेतु प्रोत्साहित करते है-

 .

आप प्रसन्न एवं संतुष्ट रहें- घर के सदस्यों का प्रसन्नचित रहने से घर की 30% शुद्धि हो जाती है क्लेश को स्थान न दे आने वाले मेहमान का निस्वार्थ भाव से स्वागत करे ये सोच कर इसमें भी वही प्रभु विद्धमान है जो सब में है मगर उसकी नियत को भी पहचाने कही वो आपके अनिष्ट का प्रतिभागी तो नहीं -

रात में सोते समय हो सके तो दिन भर बिछे चादर पर न सोयें क्योंकि घर में अनिष्ट शक्तियों के कष्ट होने पर वे बिछावन पर पहले से ही कई फुट का सूक्ष्म काला आवरण निर्माण कर देते हैं और ऐसे में सोने के लिए प्रयास करते समय बुरे विचार आना, नींद न आना, नींद आने के पश्च्चात भयानक स्वप्न आना , अगले दिन उठते समय संपूर्ण शरीर में वेदना होना या उठने के लिए अत्यधिक प्रयास करने पर ही उठ पाना , उठने के पश्चात तरोताजा न अनुभव कर पाना और थकावट अनुभव करना जैसे कष्ट यदि होते हों तो समझ लें कि रात्रि में हम पर अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण हुए हैं - इस हेतु क्या प्रयास कर सकते हैं इससे भी हम आपको अवगत कराते है- .

सोते समय स्वच्छ चादर और हो सके तो सफ़ेद चादर बिछा कर सोयें -सोने से पहले हाथ पैर स्वच्छ जल से धो लें और फिर सोने जाएँ-कमरे को पूर्ण अन्धकार कर न सोयें - लाल या नीला या हरे रंग के night बल्ब जला कर न सोयें इन रंगों के बल्ब अनिष्ट शक्तियों को आकृष्ट करते हैं - हलके पीले या सफ़ेद माध्यम प्रकाश देने वाले बल्ब जला कर सो सकते हैं -

यदि कष्ट तीव्र हो तो अपनी क्षमता अनुसार घी या तेल के दीप जलाकर सोयें और दीप से प्रार्थना करें कि उसके प्रकाश से पूर्ण रात्रि आपका अनिष्ट शक्तियों से रक्षण हो -

किसी संत के आश्रम से लाकर अगरबत्ती अपने बिछावन के थोडा दूर जलाकर सोयें -

पैर दक्षिण दिशा की ओर कदापि न हों इस इससे दक्षिण से आनेवाली राज-तम प्रधान लहरिओं को हमारी पैर की उँगलियाँ सोख लेती है जिससे कष्ट का प्रमाण बढ़ जाता है -

नग्न होकर कदापि न सोयें इससे भी अनिष्ट शक्तियों का कष्ट बढ़ जाता है-

सोने से पूर्व पूर्ण दिवस जो भी अच्छा या बुरा हमारे द्वारा हो उसका आत्म निवेदन अपने गुरु या इष्ट को अवश्य करें -और प्रार्थना करे कल का दिन आप मुझे मार्ग निर्देश दे  क्युकि जीवन में सच्चा गुरु अंतर द्रष्टि रह कर भी आपका पथ प्रदर्शक है -

किसी होटल में या अन्य किसी के घर पर सोना पड़े तो अपने ओढने और बिछाने वाला चादर अपने साथ अवश्य रखें अन्य किसी के बिछावन पर न सोयें चाहे वह कितना भी महंगा क्यों न हो - यह मुद्दा उन लोगों ने विशेषकर ध्यान में रखनी चाहए जो अधिकतर यात्रा पर रहते हैं, निर्धारित स्थल पर पहुँचते ही अपने इष्ट का या गुरु का फोटो होटल के कमरे में लगा दें इससे वहां के वास्तु की शुद्धि होने लगेगी और रात्रि होने तक वास्तु कुछ स्तर तक पवित्र हो जायेगा -

सबसे महत्व पूर्ण है कि सोने से पूर्व बिछावन पर बैठकर 15 मिनट अपने गुरुमंत्र का या इष्टदेवता का मंत्र जपकर सोयें और प्रार्थना इस प्रकार करें - हे भगवन, अभी 15 मिनट जो मैं जप करने जा रहा हूँ  उस जप से आज संपूर्ण रात्रि मेरे अनिष्ट शक्तियों से रक्षण हो और मैं सुबह निर्धारित समय पर उठ पाऊं ऐसी आप कृपा करें रात भर मेरे चारों आपके शस्त्रों से कवच निर्माण हो ऐसी आप कृपा करें - ध्यान में रखें कि लेटकर यह कवच हेतु जप न करने क्योंकि यह जप पूर्ण करने से पहले ही अनिष्ट शक्तियां हमें सुला देती हैं जिससे कि  उनका काम रात्रि में सरलता से होता रहे और वे हमें संपूर्ण रात्रि कष्ट देते रहे -

अपने बिछावन के चारों ओर सात्त्विक नामजप कि पट्टियाँ लगा सकते हैं या फिर रात्रि में सोने से पूर्व संत लिखित ग्रन्थ का वाचन कर सो सकते हैं या रात्रि में अपने लैपटॉप पर या cd प्लयेर पर नामजप की cd 'repeat ' लगाकर सो सकते हैं या किसी यज्ञ कि विभूति या मंदिर से प्राप्त विभूति को चुटकी भर लेकर अपने बिछवान के चारो ओर सोने से पूर्व फूँक सकते हैं -

जो लोग इंटर नेट का प्रयोग करते है देर रात तक... वो अपने जीवन में दो चीज खो रहे है पहला अपना स्वास्थ और पौरुष दूसरा मानसिक शांति... उपयोग करे पर देर रात नहीं या फिर सुबह जल्दी उठ कर भी आप सर्च कर सकते है उस वक्त मानसिक शान्ति जादा होती है मगर  युवा वर्ग नहीं समझता है और बाद में दवा लेता पाया जाता है बाद में दवा के साइड इफेक्ट की दवा ढूंढता रहता है -

किसी आश्रम द्वारा लाई गई विभूति का टीका लगा कर सो सकते हैं या फिर हनुमान जी के चरणों का सिंदूर का तिलक लगा के सोये तो आपको कभी भी बुरे स्वप्न नहीं आयेगे और नकारात्मक उर्जा भी घर से दूर होती जायेगी ये सिंदूर आप पहले से भी ला के रख सकते है रोज जाने की आवश्यकता नहीं होगी -

सोने से पूर्व नमक पानी का उपाय कर सकते हैं जल में नमक डाले और दोनों पैर पन्द्रह मिनट रक्खे फिर सो जाए- आपको अच्छी नींद आएगी और दिन भर की थकावट से भी आराम होगा -

जो लोग अपने कमरे में फ़िल्मी नायक या नायिकाओं के चित्र या अन्य तामसिक चित्र लगाते है उनको ये सलाह है उन चित्रों से मन विचलित होता है सोने के कमरे में येसा चित्र न लगाए अगर आप किसी देवी देवता का चित्र लगाते है तो विशेष ध्यान रक्खे कि सोते वक्त आपका पैर उनकी तरफ न पड़े आपकी दाई तरफ हो और सुबह नींद खुलने पे उनका दर्शन हो .


निंद्रा को कैसे यज्ञकर्म बनाए :-



आप निद्रा को भी एक यज्ञकर्म बना सकते हैं  यदि सोते समय नाम जप करते हुए सोते है तो उसकी मानसिक आवर्ती रात भर चलती रहती है और सुबह आपको प्रतीत होगा आपने सारी रात नाम जप किया है आपका ये प्रयोग आपको एक साथ दो चीजों का प्रतिफल देता है पहला ये आपको नींद अच्छी आएगी दूसरा आप जो मानसिक जप कर रहे थे आपको जीवन की सभी कठिनाइयो से दूर कर देगा -मेरे द्वारा दिया ज्ञान देखने में आपको भले ही सूक्ष्म लगे लेकिन सिर्फ दस दिन में ही आपको इसका प्रभाव स्वयं महसूस होगा -

इस प्रकार निद्रा का समय भी थोड़े समय में साधना हेतु उपयोग में आने लगेगा और जब सुबह उठाने पर सर्वप्रथम आपका ध्यान नामजप परजाए तो समझ लें कि संपूर्ण रात्रि आपका जप चल रहा था |

ये कुछ येसे प्रयोग थे जो हमने आपके साथ शेयर किये जो जीवन में हमने स्वयं प्रयोग किये और लाभ लिए है वैसे भी आज के युग में जीविकोपार्जन के बाद पत्नी और बच्चो की डिमांड के बाद किसी पे भी समय नहीं है कि वो कुछ कर सके मगर सोते समय एक छोटा सा प्रयास आपके जीवन में चार चाँद लगा सकता है मगर मित्र गन ध्यान दे "हथेली में सरसों न उगाए ,जो निराशा में जीते है उन्हें निराशा ही मिलती है "

उपचार और प्रयोग -

Wednesday, October 14, 2015

पुरुष मटर सोच समझ कर खाए-Men conscious eating peas

मटर का सीजन आने वाला है भारत में कोई दिन बिना मटर खाये नहीं जाता होगा अमीर हो गरीब हो सभी का फेवरिट है -और मटर-पुलाव -मटर-पनीर की सब्जी तो लोग बड़े चाव से खाते है पर क्या आपको पता है कि मटर पुरुषो को नामर्द भी बनाती है -






वास्तव में मौसम की चीज का उपयोग उसके मौसम में ही करना उत्तम कहा गया है क्युकि बेमौसम की चीजे आपको अनेक बीमारियों से ग्रसित कर देती है क्युकि बेमौसम उत्पन्न की जाने वाली चीजो को पचाने के लिए हमारे शरीर में उचित रस उत्पन्न नहीं होता है -



मटर खाने के फायदे और नुकसान(Advantages and disadvantages of eating peas ):-



जी हाँ मटर ( Peas ) पुरुषों को बाँझ (Sterile ) बनाती है मटर पौरुष हारमोन (Masculine hormones ) को निष्क्रिय करती है इसके तेल में लैंगिक हारमोन विरोधी (Anti Sexual hormones )  गुण पाया जाता है जो पुरुष को बाँझ बना देता है-

महिलाए यदि जादा मटर का सेवन करती है तो वो लड़की को जादा जन्म देती है लड़का उनको बड़ी मुश्किल से होता है क्युकि मटर भ्रूण (Fetus ) बनते समय पौरुष हारमोन को निष्क्रिय कर देती है -

उपरोक्त दो नुकसान से खुद को बचा के आप भरपूर मटर खाइए या फिर संभल कर प्रयोग करे - इसको खाने से शरीर में गैस बनना वायु का प्रकोप होना ,डकार आना ,कब्ज रहना,पेट फूलनाआदि भी होता है -


अब जाने मटर के लाभ (The benefits of peas ):-


मटर स्त्रियो के लिए कभी कभी अमृत (Amrat ) बन जाती है। अगर नवजात शिशु (Newborn Baby ) के लिए दूध (Milk ) न उतर रहा हो तो खूब हरी मटर खाएं ,बच्चा पेट भर  कर दूध पियेगा। 



अगर नारी को पीरियड की  रुकावट (The interruption period ) आ रही है तो मटर खाएं रुकावट दूर हो जायेगी-


मटर का प्रयोग Beauty निखारने के लिए कीजिये। मटर उबाल कर पीस कर शरीर पर उबटन (Empasm ) लगाएं  आपका रंग निखार जाएगा  बस उसमे एक चुटकी हल्दी पाउडर (turmeric powder ) मिला लीजिये तो स्किन हेल्दी भी हो जायेगी-


पैर के तलुओं (Foot Tluon ) में या पेट में या माथे (Head ) में अर्थात शरीर में कहीं भी जलन हो रही हो तो हरी मटर पीस कर लेप कर दीजिये-


अक्सर ठंड के मौसम में कुछ लोगो की अंगुलियाँ सूज जाती है- ऎसी दशा में हरी मटर उबाल कर उसके पानी में एक चम्म्च तिल का तेल मिला दीजिये और सूजे हुए हाथ या पैर की अंगुलियां इसी पानी में डलवाइए-सूजन उतर जायेगी और दर्द भी ख़त्म-


मटर कफ और पित्त के दोषों को शांत भी करती है। कच्ची मटर खाने से कब्ज नहीं होती-


मटर खाने से मोटापा बढ़ता है -यह खून और मज्जा दोनों बढ़ाती है -इसलिए मोटे व्यक्ति मटर से परहेज करें-

उपचार और प्रयोग-

Tuesday, October 13, 2015

पत्ता गोभी के स्वास्थ्य लाभ-Healthy Benefits of Cabbage

पत्ता गोभी (Cabbage ) को बंद गोभी के नाम से भी जाना जाता है इसे सुपर फ़ूड भी कहा जाता है -स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना चाहते हैं तो पत्तागोभी को अपने डाइट का हिस्सा बनाना सबसे बेहतर है-पत्तागोभी पेट को साफ रखने में बहुत कारगर है-



कच्चे पत्तागोभी के ज्यूस में Aisosainets होते हैं जो आपके शरीर में एस्ट्रोजिन मेटाबोलिज्म की प्रकिया को तेज करते हैं और आपको फेफडों के कैंसर(Lung Cancer )-प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer ) ,कोलोन कैंसर (Colon Cancer ) एवं स्तन कैंसर (Breast cancer ) से बचाए रखते हैं-










उपयोगिता(Utility):-


आपकी प्लेटलेट्स काउंट (Platelets count ) घट गई है तो आपको पूरी पत्ता गोभी एक सुबह और एक शाम को सिर्फ दस दिन उबाल पीना शुरू कर दीजिये और चमत्कार देखिये आपका प्लेटलेट्स काउंट किस कदर पूरा हो जाता है-

पत्‍ता गोभी आपके शरीर में इम्‍यूनिटी सिस्‍टम (Immunity System ) को मजबूत बनाती है। आपको पता है कि चूँकि इसमें विटामिन सी (vitamin C ) भरपूर मात्रा में होता है जिससे Body का इम्‍यूनिटी सिस्‍टम काफी मजबूत हो जाता है।


पत्‍ता गोभी के सेवन से अल्‍माइजर (Almaijr ) जैसी Problem दूर हो जाती है। इसमें Vitamin K भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे अल्‍माइजर की समस्‍या दूर हो जाती है-

मोटापे (Bulkiness ) से परेशान लोगो के लिए भी इसका सेवन लाभदायक है इसके सेवन से Weight को भी कम किया जा सकता है। एक कप पकी वंदगोभी में सिर्फ 33 कैलोरी होती है जो Weight नहीं बढ़ने देती। वंदगोभी का Soup शरीर को ऊर्जा देता है लेकिन Fat की मात्रा का घटा देता है।

पत्‍ता गोभी में काफी ज्‍यादा मात्रा में Anti -Okseedent  होते है जो Skin की सही देखभाल करने के लिए पर्याप्‍त होते है-

पत्ता गोभी कैंसर की रोकथाम करने और उसे होने से बचाने में मदद करता है चूँकि इसमें Dindolimethen (DIM) ,Lupel , Slforen and indole-3, Carbinol (13 C) जैसे लाभदायक तत्‍व होते है। ये सभी Cancer से बचाव करने में सहायक होते है-

जो लोग पत्ता गोभी का सेवन करते है उनको मोतियाबिंद (Glaucoma ) का खतरा कम होता है। इसके लगातार सेवन से बॉडी में Beta carotene बढ़ जाता है जिससे आंखे सही रहती है-

पत्ता गोभी पेप्टिक अल्‍सर(Peptic ulcers ) के इलाज में सहायक होती है। इस रोग से पीडित व्‍यक्ति अगर वंदगोभी का नियमित सेवन करें तो उसे आराम मिल सकता है क्‍योंकि इसमें Glutamine होता है जो Anti- ulcer होता है-

इसमें Lactic acid काफी मात्रा में होती है जो Muscles के Damage होने पर उसे जल्दी Recover करने में काफी सहायक होती है-

पत्ता गोभी में फोलिक एसिड (Folic acid ) भी होता है जिसमें Anemia यानी खून की कमी को दूर करने का खास गुण होता है। फोलिक एसिड में नए Blood cells का निर्माण करता है-

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