Showing posts with label Anus-Bladder-Stomach-Kidney. Show all posts
Showing posts with label Anus-Bladder-Stomach-Kidney. Show all posts

Wednesday, April 08, 2015

पथरी घरेलू उपचार -Stones Home Remedies

पथरी घरेलू उपचार -Stones Home Remedies:-



अम्लता (Acidity ) बढ़ जाने पर लवण (Salt ) जमा होता है और ये फिर जमकर पथरी (Calculus) बन जाते है कई दिनों तक मूत्र (Urine ) में जलन होती है जब ध्यान नहीं दिया जाता तो यही स्थिति भयावह हो जाती है -






तेज गर्मी में काम करने से व घूमने से उष्ण प्रकृति के पदार्थों के अति सेवन से मूत्राशय पर गर्मी का प्रभाव हो जाता है, जिससे पेशाब में जलन होती है।


कभी-कभी जोर लगाने पर पेशाब होती है, पेशाब में भारी जलन होती है, ज्यादा जोर लगाने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब होती है। इस व्याधि को आयुर्वेद में मूत्र कृच्छ कहा जाता है। लेकिन इसका उपचार है-

घरेलू उपचार (Home remedies ):-


बाजार में मिलने वाला कलमी शोरा (Nitre ) बड़ी इलाइची (Black cardamom ) के दाने इन दोनों को समान मात्रा में चूर्ण करके एक शीशी में भर कर रख ले -मलाई रहित ठंडा दूध व पानी 150 -150 मिलीलीटर दोनों को ले के इस 300 एम एल पानी को बनाया हुआ एक चम्मच चूर्ण फांक कर यही आपस में मिलाया दूध पिए इस प्रकार की तीन खुराक लेनी है सुबह-दोपहर-शाम । दो दिन ये प्रयोग करे आपके पेशाब में पैदा हुई जलन समाप्त हो जाती है ये मुँह के छाले व पित्त सुधरता है। शीतकाल में दूध में कुनकुना पानी मिलाएँ-


मूत्र रोग संबंधी सभी शिकायतों यथा प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब का रुक-रुक कर आना-पेशाब का अपने आप निकलना (युरीनरी इनकाण्टीनेन्स)-नपुंसकता, मूत्राशय की पुरानी सूजन आदि में गोखरू 10 ग्राम, जल 150 ग्राम, दूध 250 ग्राम को पकाकर आधा रह जाने पर छानकर नित्य पिलाने से मूत्र मार्ग की सारी विकृतियाँ दूर होती हैं ।


सिर्फ 6 ग्राम पपीते को जड़ को पीसकर 50 ग्राम पानी मिलकर 21 दिन तक प्रातः और सायं पीने से पथरी गल जाती है।


सात दिन तक गौदुग्ध के साथ गोक्षुर पंचांग (Caltrap Almanac ) का सेवन कराने में पथरी टूट-टूट कर शरीर से बाहर चली जाती है । मूत्र के साथ यदि रक्त स्राव भी हो तो गोक्षुर चूर्ण को दूध में उबाल कर मिश्री के साथ पिलाते हैं ।


खाली गोमूत्र के सेवन से भी पथरी टूट कर निकल जाती है-मात्रा 20 मिलीलीटर प्रतिदिन है साथ ही यवक्षार ( जौ की भस्म ) का सेवन करें -मूली और उसकी हरी पत्तियों के साथ सब्जी का सुबह सेवन करें-


मेहंदी की छाल को उबाल कर पीने से पथरी घुल जाती है-


15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।


जितना हो सके पका हुआ जामुन खाए ये पथरी से निजात दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पथरी होने पर पका हुआ जामुन खाना चाहिए।


पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को sugar में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से (stone) की से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर प्यास के रास्ते से बाहर निकल जाती है।इसका सेवन एक दिन में एक बार ही करें।  और प्याज़ के स्वास्थ्य लाभ की पोस्ट नीचे की लिंक पे देखे-


प्याज़ के स्वास्थ्य लाभ - Health Benefits of Onion


सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे की पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है। आम के पत्ते छांव में सुखाकर बहुत बारीक पीस लें और आठ ग्राम रोज पानी के साथ लीजिए, फायदा होगा ।


बेल पत्थर (Bell Stone ) को पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह काली मिर्च खाएं। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन ऐसे सात काली मिर्च तक पहुंचे।आठवें दिन से काली मिर्च की संख्या घटानी शुरू कर दें और फिर एक तक आ जाएं। दो सप्ताह के इस प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है। याद रखें एक बेल पत्थर दो से तीन दिन तक चलेगा।


पित्त की थेली (Gall bladder ) से पथरी निकालने के लिए पहले पांच दिन रोज चार गिलास एप्पल जूस (Apple Juice ) ले और साथ ही चार या पांच सेव खाए फिर छटे दिन डिनर न ले बल्कि इस छटे दिन शाम छ:बजे एक चम्मच सेंधा नमक (Magnesium sulfate ) एक गिलास गर्म पानी से ले फिर दुबारा दो घंटे आठ बजे एक चम्मच सेंधा नमक एक गिलास गर्म पानी से ले फिर रात को दस बजे आधा कप जेतून का तेल (Olive oil )या तिल का तेल (Sesame oil ) आधा कप नीबू ( Lemon juice ) के रस में मिलके पी ले सुबह आपको स्टूल में आपको हरे रंग के पत्थेर दिखेगे-


आजकल किडनी में पथरी पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है-आयुर्वेद व घरेलू चिकित्सा में किडनी की पथरी में कुलथी (Horsegram ) को फायदेमंद माना गया है। गुणों की दृष्टि से कुल्थी पथरी एवं शर्करानाशक (Sugar Destroyer ) है। वात एवं कफ का शमन करती है और शरीर में उसका संचय रोकती है। कुल्थी में पथरी का भेदन तथा मूत्रल दोनों गुण होने से यह पथरी बनने की प्रवृत्ति और पुनरावृत्ति रोकती है। इसके अतिरिक्त यह यकृत व पलीहा के दोष में लाभदायक है। मोटापा भी दूर होता है-



बनाए :-


250 ग्राम कुल्थी दाने (Kulthy seeds ) कंकड़-पत्थर निकाल कर साफ कर लें। रात में तीन लिटर पानी में भिगो दें। सवेरे भीगी हुई कुल्थी उसी पानी सहित धीमी आग पर चार घंटे पकाएं। जब एक लिटर पानी रह जाए  तब नीचे उतार लें। फिर तीस ग्राम से पचास ग्राम (पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का उसमें छोंक लगाएं। छोंक में थोड़ा-सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। पथरी नाशक औषधि तैयार है-


प्रयोग विधि:- 


दिन में कम-से-कम एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर यह सारा सूप पी जाएं। 250 ग्राम पानी अवश्य पिएं। एक-दो सप्ताह में गुर्दे तथा मूत्राशय की पथरी गल कर बिना ऑपरेशन के बाहर आ जाती है कुछ दिन लगातार सेवन करते रहना राहत देता है।

यदि भोजन के बिना कोई व्यक्ति रह न सके तो सूप के साथ एकाध रोटी लेने में कोई हानि नहीं है। गुर्दे में सूजन की स्थिति में जितना पानी पी सकें -पीने से दस दिन में गुर्दे का प्रदाह ठीक होता है। यह कमर-दर्द की भी रामबाण दवा है।

कुल्थी की दाल साधारण दालों की तरह पका कर रोटी के साथ प्रतिदिन खाने से भी पथरी पेशाब के रास्ते टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है। यह दाल मज्जा (हड्डियों के अंदर की चिकनाई) बढ़ाने वाली है।


पथरी में क्या खाए (What to eat stones ):-



कुल्थी के अलावा खीरा, तरबूज के बीज, खरबूजे के बीज, चौलाई का साग, मूली, आंवला, अनन्नास, बथुआ, जौ, मूंग की दाल, गोखरु आदि खाएं। कुल्थी के सेवन के साथ दिन में 6 से 8 गिलास सादा पानी पीना, खासकर गुर्दे की बीमारियों में बहुत हितकारी सिद्ध होता है।


पथरी में क्या न खाएं (Do not eat stones ):-



पालक, टमाटर, बैंगन, चावल, उड़द, लेसदार पदार्थ, सूखे मेवे, चॉकलेट, चाय, मद्यपान, मांसाहार आदि। मूत्र को रोकना नहीं चाहिए। लगातार एक घंटे से अधिक एक आसन पर न बैठें।


कुल्थी का पानी भी लाभदायक है :-



कुल्थी का पानी विधिवत लेने से गुर्दे और मूत्रशय की पथरी निकल जाती है और नयी पथरी बनना भी रुक जाता है। किसी साफ सूखे, मुलायम कपड़े से कुल्थी के दानों को साफ कर लें।  किसी पॉलीथिन की थैली में डाल कर किसी टिन में या कांच के मर्तबान में सुरक्षित रख लें।

कुल्थी का पानी बनाने की विधि:- 



किसी कांच के गिलास में 250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुल्थी डाल कर ढक कर रात भर भीगने दें। प्रात: इस पानी को अच्छी तरह मिला कर खाली पेट पी लें। फिर उतना ही नया पानी उसी कुल्थी के गिलास में और डाल दें, जिसे दोपहर में पी लें। दोपहर में कुल्थी का पानी पीने के बाद पुन: उतना ही नया पानी शाम को पीने के लिए डाल दें।

इस प्रकार रात में भिगोई गई कुल्थी का पानी अगले दिन तीन बार सुबह, दोपहर, शाम पीने के बाद उन कुल्थी के दानों को फेंक दें और अगले दिन यही प्रक्रिया अपनाएं। महीने भर इस तरह पानी पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी धीरे-धीरे गल कर निकल जाती है।

सहायक उपचार- कुल्थी के पानी के साथ हिमालय ड्रग कंपनी की सिस्टोन की दो गोलियां दिन में 2-3 बार प्रतिदिन लेने से शीघ्र लाभ होता है। कुछ समय तक नियमित सेवन करने से पथरी टूट-टूट कर बाहर निकल जाती है। यह मूत्रमार्ग में पथरी, मूत्र में क्रिस्टल आना, मूत्र में जलन आदि में दी जाती है।
(स्वदेशी चिकित्सा सार से साभार)

उपचार और प्रयोग-

Sunday, March 29, 2015

यूरिक एसिड बढ़ने का घरेलू उपचार -Increased uric acid remedies

यदि किसी कारणवश गुर्दे की छानने की क्षमता कम हो जाए -तो यह यूरिया में यूरिक एसिड बदल जाता है- जो कि बाद में हड्डियों में जमा होजाता है जिस कारण व्यक्ति को दर्द रहने लगता है-




यूरिक एसिड प्‍यूरिन के टूटने से बनता है- वैसे तो यूरिक एसिड शरीर से बाहर पेशाब के रूप में निकल जाता है-परन्तु किसी कारण-वश जब यूरिक एसिड जब शरीर में रह जाए तो धीरे -धीरे इसकी मात्रा शरीर के लिए नुकसान दायक हो जाती है -




यूरिक अम्ल क्या होता है :-


कार्बन,हाईड्रोजन,आक्सीजन और नाईट्रोजन तत्वों से बना यह योगिक जिस का अणुसूत्र C5H4N4O3.यह एक विषमचक्रीय योगिक है जो कि शरीर को प्रोटीन से एमिनोअम्ल के रूप मे प्राप्त होता है. प्रोटीनों से प्राप्त ऐमिनो अम्लों को चार प्रमुख वर्गों में विभक्त किया गया है

उदासीन ऐमिनो अम्ल
अम्लीय ऐमिनो अम्ल
क्षारीय ऐमिनो अम्ल
विषमचक्रीय ऐमिनो अम्ल.

यह आयनों और लवण के रूप मे यूरेट और एसिड यूरेट जैसे अमोनियम एसिड यूरेट के रूप में शरीर मे उपलब्ध है. प्रोटीन एमिनो एसिड के संयोजन से बना होता है। पाचन की प्रक्रिया के दौरान जब प्रोटीन टूटता है तो शरीर में यूरिक एसिड बनता है जब शरीर मे Purine nucleotides टूट जाती है तब भी यूरिक एसिड बनता है. प्युरीन क्रियात्मक समूह होने के कारण यूरिक अम्ल Aromatic compound  होते हैं. शरीर मे यूरिक अम्ल का स्तर बढ़ जाने की स्तिथि को ( hyperuricemia ) कहते हैं.  हम प्रोटीन कहाँ से प्राप्त करते है और प्रोटीन क्यों जरूरी हो शरीर के लिए ये जानना भी जरूरी हो जाता है ....?

मनुष्यों और अन्य जीव जंतुओं के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी आहार है. इससे शरीर की नयी  कोशिकाएँ और नये ऊतक बनते हैं पुरानी कोशिकाओं और उत्तको की टूटफूट की मरम्मत के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी आहार है.  प्रोटीन के अभाव से शरीर कमजोर हो जाता है और कईं रोगों से ग्रसित  होने की संभावना बढ़ जाती है। प्रोटीन शरीर को  ऊर्जा भी प्रदान करता है. वृद्धिशील शिशुओं,बच्चो,किशोरों और गर्भवती स्त्रियों के लिए अतरिक्त प्रोटीन भोजन की मांग ज्यादा होती है परन्तु 25 वर्ष की आयु के बाद कम शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्तियों के लिए अधिक मात्रा मे प्रोटीन युक्त भोजन लेना उनके लिए यूरिक अम्लों की अधिकताजन्य दिक्कतों का खुला निमंत्रण साबित होते हैं.


रेडमीट(लालरंगकेमांस),सीफूड,रेडवाइन,दाल,राजमा,मशरूम,गोभी,टमाटर,मटर,पनीर,भिन्डी,अरबी,चावलआदि के अधिक मात्रा में सेवन से भी यूरिक एसिड बढ जाता है।

उच्च यूरिक एसिड के कारण :-



शरीर में यूरिक ऐसिड बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं.....

* भोजन के रूप मे लिए जाने वाले प्रोटीन प्युरीन और साथ मे उच्च मात्रा मे शर्करा का लिया जाना रक्त मे यूरिक एसिड की मात्रा को बढाता है.

* कई लोगों मे वंशानुगत कारणों को भी यूरिक एसिड के ऊँचे स्तर के लिए जिम्मेवार माना गया है.

* गुर्दे द्वारा सीरम यूरिक एसिड के कम उत्सर्जन के कारण  भी इसका स्तर रक्त मे बढ़ जाता है.

* उपवास या तेजी से वजन घटाने की प्रक्रिया मे भी अस्थायी रूप से यूरिक एसिड का स्तर आश्चर्यजनक स्तर  तक वृद्धि कर जाता हैं.

* रक्त आयरन की अधिकता भी यूरेट स्तर को बढ़ाती है जिस पर आयरन त्याग यानी रक्तदान से नियंत्रण किया जा सकता है.

* पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं या डायबटीज़ की दवाओं के प्रयोग से भी यूरिक ऐसिड बढ़ सकता है.

उच्च यूरिक एसिड के नुकसान :-



इसका सबसे बड़ा नुकसान है शरीर के छोटे जोड़ों मे दर्द जिसे गाउट रोग के नाम से जाना जाता है. मान लो आप की उम्र 25 वर्ष से ज्यादा है और आप उच्च आहारी हैं रात को सो कर सुबह जागने पर आप महसूस करते है कि आप के पैर और हाथों की उँगलियों अंगूठों के जोड़ो मे हल्की हल्की चुभन जैसा दर्द है तो आप को यह नहीं मान लेना चाहिये कि यह कोई थकान का दर्द है आप का यूरिक एसिड स्तर बड़ा हुआ हो सकता है. तो अगर कभी आपके पैरों की उंगलियों, टखनों और घुटनों में दर्द हो तो इसे मामूली थकान की वजह से होने वाला दर्द समझ कर अनदेखा न करें यह आपके शरीर में यूरिक एसिड बढने का लक्षण हो सकता है. इस स्वास्थ्य समस्या को गाउट आर्थराइट्सि कहा जाता है.

गाउट आर्थराइट्सि गठिया का एक रूप :-



गाउट एक तरह का गठिया रोग ही होता है. जिस के कारण शरीर के छोटे ज्वाईन्ट्स प्रभावित होते हैं और
विशेषकर पैरों के अंगूठे का जोड़ और उँगलियों के जोड़ व उँगलियों मे जकड़न रहती है. हालाँकि इससे एड़ी, टख़ने, घुटने, उंगली, कलाई और कोहनी के जोड़ भी प्रभावित हो सकते हैं. इसमें बहुत दर्द होता है. जोड़ पर सुर्ख़ी और सूजन आ जाती है और बुख़ार भी आ जाता है.  यह शरीर में यूरिक ऐसिड के बढ़ने से पैदा होती है.

(पेशियों में जमा यूरिक एसिड क्रिस्टल, मस्क्युलर रिह्यूमेटिज्म के रूप में सामने आता है, तो जोड़ों के बीच जमा एसिड क्रिस्टल आरथ्राइटिस के रूप में जोड़ों के बीच एसिड क्रिस्टल जमा होने से चलने-फिरने पर चुभने जैसा दर्द और टीस होती है जोड़ों में जकड़न आ सकती है.)

यह बढ़ा हुआ यूरिक एसिड रक्त के साथ शरीर के अन्य स्थानों मे पहुँच जाता है. खास तौर पर हड्डियों के संधि भागों मे जाकर रावों के रूप मे जमा होना  शुरू हो जाता है. यह  जन्म देती है साध्य रोग शरीर के छोटे जोड़ों मे दर्द गाउट Gout को.

जोड़ो मे जमा यूरिक एसिड के क्रिस्टल :-



अगर यूरिक ऐसिड बढ़ जाए तो वह बहुत नन्हें-नन्हे क्रिस्टलों के रूप में जमा हो जाता है. हड्डियों मे ख़ासतौर से जोड़ों के आस पास.  ये क्रिस्टल बहुत ही धारदार होते हैं.  जो की जोड़ों की चिकनी झिल्ली में चुभते हैं.  चुभन और भयंकर दर्द पैदा करते हैं.   गाउट रोग के कारण जोड़ों को घुमाने या गति उत्पन्न करने में कठिनाई महसूस होती है. ठंडी या शीत हवाओं के कारण पीड़ा बढ़ जाती है. इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है की इसमें रात में दर्द बढ़ जाता है और सुबह शरीर अकड़ता है.

व्यक्ति की किडनी भीतरी दीवारों की लाइनिंग क्षतिग्रस्त हो तो ऐसे में यूरिक एसिड बढने की वजह से किडनी में स्टोन भी बनने लगता है.

यूरिक एसिड के असंतुलन से ही गठिया जैसी समस्‍याएं हो जाती है। उच्‍च यूरिक एसिड की मात्रा को नियंत्रित करना अति आवश्‍यक होता है। नियंत्रण के लिए यूरिक एसिड़ बढ़ने के कारण को जानना आवश्‍यक है। अगर आपको यह समस्‍या आनुवांशिक है तो इसे बैलेंस किया जा सकता है लेकिन अगर शरीर में किसी प्रकार की दिक्‍कत है जैसे - किडनी का सही तरीके से काम न करना आदि तो डॉक्‍टरी सलाह लें और दवाईयों का सेवन करें। शरीर में हाई यूरिक एसिड का अर्थ होता है कि आप जो भी भोजन ग्रहण करते है उसमें प्‍यूरिन की मात्रा में कमी है जो शरीर में प्‍यूरिन की बॉन्डिंग को तोड़ देती है और यूरिक एसिड बढ़ जाता है। यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के कुछ टिप्‍स निम्‍म प्रकार हैं...

अगर शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा लगातार बढ़ती है तो आपको भरपूर फाइबर वाले फूड खाने चाहिए। दलिया, पालक, ब्रोकली आदि के सेवन से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा नियंत्रित हो जाती है..

यह प्रयास करें कि अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीया जाए, इससे रक्त में मौजूद अतिरिक्त यूरिक एसिड मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है.

यदि दर्द बहुत ज्यादा है तो दर्द वाले स्थान पर बर्फ को कपडे मे लपेट कर सिंकाई करने से फायदा होता है.
खान-पान की आदत बदलें शरीर में जमा अतिरिक्त यूरिक एसिड को उदासीन करने के लिए खानपान में क्षारीय   पदार्थों की मात्रा को बढ़ाना चाहिए। फलों, हरी सब्जियों, मूली का जूस, दूध, बिना पॉलिश किए गए अनाज इत्यादि में अल्कली की मात्रा अधिक होती है

शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को कम करने के लिए हर दिन 500 मिलीग्राम विटामन सी लें. एक दो महीने में यूरिक एसिड काफी कम हो जाएगा.

जैतून के तेल में बना हुआ भोजन, शरीर के लिए लाभदायक होता है। इसमें विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है जो खाने को पोषक तत्‍वों से भरपूर बनाता है और यूरिक एसिड को कम करता है। आश्‍चर्य की बात है, लेकिन यह सच है।खाना बनाने के लिए बटर या वेजटेबल ऑयल के बजाए कोल्ड प्रेस्ड जैतून के तेल का इस्तेमाल करें. तेल को गर्म कर देने पर इससे जल्द ही दुर्गध आने लगती है. दुर्गधयुक्त फैट शरीर के विटामिन ई को नष्ट कर देता है. यह विटामिन यूरिक एसिड के लेवल को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक होता है. जैतून के तेल के इस्तेमाल से शरीर में अतिरिक्त यूरिक एसिड नहीं बनेगा.

अजवाइन के बीज का अर्क भी गठिया और यूरिक एसिड की समस्या का यह एक प्रसिद्ध प्राकृतिक उपचार है. अजवाइन के बीज का इस्तेमाल गठिया रोग के उपचार में लंबे समय से किया जाता रहा है. अजवाइन में दर्द को कम करने, एंटीऑक्सीडेंट और डाइयूरेटिक गुण पाया जाता है. साथ ही इसे यूरेनरी एंटीसेप्टिक भी माना जाता है. कई दुर्भल मामलों में नींद न आने की समस्या, व्याग्रता और नर्वस ब्रेकडाउन का उपचार भी इससे किया जाता है. इसके बीज का इस्तेमाल जहां कई तरह के हर्बल सप्लीमेंट्स में किया जाता है वहीं इसकी जड़ भी काफी उपयोगी होती है.

बेकरी के फूड स्‍वाद में लाजबाव होते है लेकिन इसमें सुगर की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है। इसके अलावा, इनके सेवन से शरीर में यूरिक एसिड़ भी बढ़ जाता है। अगर यूरिक एसिड कम करना है तो पेस्‍ट्री और केक खाना बंद कर दें।

पानी की भरपूर मात्रा से शरीर के कई विकार आसानी से दूर हो जाते है। दिन में कम से कम दो से तीन लीटर पानी का सेवन करें। पानी की पर्याप्‍त मात्रा से शरीर का यूरिक एसिड पेशाब के रास्‍ते से बाहर निकल जाएगा। थोड़ी - थोड़ी देर में पानी को जरूर पीते रहें।


चेरी में एंटी - इंफ्लामेट्री प्रॉपर्टी होती है जो यूरिक एसिड को मात्रा को बॉडी में नियंत्रित करती है। हर दिन 10 से 40 चेरी का सेवन करने से शरीर में उच्‍च यूरिक एसिड की मात्रा नियंत्रित रहती है, लेकिन एक साथ सभी चेरी न खाएं बल्कि थोड़ी - थोड़ी देर में खाएं।

हर दिन ली जाने खुराक में कम से कम 500 ग्राम विटामिन सी जरूर लें। विटामिन सी, हाई यूरिक एसिड को कम करने में सहायक होता है और यूरिक एसिड को पेशाब के रास्‍ते निकलने में भी मदद करता है। यकृत की शुद्धि के लिए नींबू अक्सीर है। नींबू का साईट्रिक ऐसिड भी यूरिक एसिड का नाश करता है।




एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन: लाल शिमला मिर्च, टमाटर, ब्लूबेरी, ब्रोकली और अंगूर एंटीऑक्सीडेंट विटामिन का बड़ा स्रोत है. एंटीऑक्सीडेंट विटामिन फ्री रेडिकल्स अणुओं को शरीर के अंग और मसल टिशू पर आक्रमण करने से रोकता है, जिससे यूरिक एसिड का स्तर कम होता है.

शरीर में यूरिक एसिड  की मात्रा बढने पर इसे कम करना आसान नहीं होता । लेकिन शतावर (asparagus) की जड़ का चूर्ण 2-3 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन दूध या पानी के साथ लिया जाए , तो यूरिक एसिड घटना प्रारम्भ हो जाता है और शरीर की कमजोरी भी दूर होती है ।


गाजर और चुकन्दर का जूस भी पीते रहें इससे और भी जल्दी लाभ होगा ।



सेब का सिरका भी रक्त का पी एच वैल्यू बढ़ाकर हाई यूरिक एसिड लेवल को कम करता है. पर सेब का सिरका कच्चा, बिना पानी मिला और बिना पाश्चरीकृत होना चाहिए. हेल्थ फूड स्टोर से आप इसे आसानी से हासिल कर सकते हैं-

उपचार और प्रयोग -

Friday, February 20, 2015

पेशाब में जलन का घरेलू उपचार - Home Redemy For Irritation In Urine Area

पेशाब में जलन होना आम समस्‍या है कभी-कभी जोर लगाने पर पेशाब होती है, पेशाब में भारी जलन होती है, ज्यादा जोर लगाने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब होती है। इस व्याधि को आयुर्वेद में मूत्र कृच्छ कहा जाता है। लेकिन बहुत से लोग इसे नजरअंदाज कर जाते हैं। कभी-कभी यह कुछ समय के लिये ही होती है और कभी यह महीनो तक चलती है। यह बीमारी महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है-




इस समस्‍या के कई कारण हो सकते हैं जैसे, मूत्र पथ संक्रमण, किडनी में स्‍टोन या डीहाइड्रेशन आदि। आइये जानते हैं कि पेशाब में जलन को किस तरह से घरेलू उपचार से ठीक किया जा सकता है। पेशाब में जलन होने के कई कारण होते हैं जो कि बहुत से लोगो को पता ही नही होता है और वे उसके लिये कुछ भी नहीं करते।


घरेलू उपचार :-



सबसे पहले तो खूब सारा पानी पिये नहीं तो शरीर में पानी की कमी हो जाएगी और पेशाब पीले रंग की दिखाई पड़ने लगेगी। दिन में कुछ घंटो के भीतर 2-3 गिलास पानी पिये। अगर पेशाब करने के बाद अधिक देर तक जलन हो तो आपको मूत्र पथ संक्रमण है।


खट्टे फल यानी की सिट्रस फ्रूट खाइये क्‍योकि इसमें सिट्रस एसिड होता है जो कि मूत्र संक्रमण पैदा करने वाले बैक्‍टीरिया को मारता है।


आमला का रस भी पेशाब की जलन को ठीक करने में सहायक है। या इलायची और आंवले का चूर्ण समान भाग में मिलाकर पानी से पीने पर मूत्र की जलन ठीक होती है।


नारियल का पानी डीहाइड्रेशन तथा पेशाब की जलन को ठीक करता है। आप चाहें तो नारिल पानी में गुड और धनिया पाउडर भी मिला कर पी सकते हैं।


पलास के फूल सूखे या हरे पानी के साथ पीसकर थोड़ा सा कलमी शोरा मिलाकर नाभि के नीचे पेडू पर लगाने से ५.१० मिनट में पेशाब खुलकर आने लगता है।


आधा गिलास चावल के माण्ड में चीनी मिलाकर पिलायें, इससे जलन दूर होगी।


अनार का शर्बत नित्य दो बार पियें। पेशाब की जलन ठीक हो जायेगी। फालसा पेशाब की जलन को दूर करता है।


पाँच बादाम की गिरी भिगोकर छीलकर इसमें सात छोटी इलाइची स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीसकर एक गिलास पानी में घोलकर पियें।


संभोग करते वक्‍त प्रोटेक्‍शन बरते क्‍योंकि योनि में सूखापन आ जाने की वजह से पेशाब में जलन होने लगती है। यदि आप लुब्रिकेंट का प्रयोग कर रहे हैं तो वाटर बेस वाले लुब्रिकेंट का प्रयोग करें ना कि रसायन युक्‍त का।


एक पानी के गिलास में 1 चम्‍मच धनिया पाउडर मिला कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह उसे छान लें और उसमें चीनी या फिर गुड मिला कर पी लें।


जननांग की स्वच्छता बनाए रखें। कई बार, योनि या लिंग में संक्रमण होने की वजह से भी मूत्र मार्ग को प्रभावित करते हैं। यदि आपको यह समस्‍या हो चुकी है तो अब से कुछ सावधानियां बरते जैसे, दिन में 2-3 बार जननांग को धोएं।


यदि आपको किडनी स्‍टोन है तो पेशाब में जलन होगी। इसके लिये आपको बीयर पीनी चाहिये जिससे कि किडनी का स्‍टोन गल सके। लेकिन सुबह बीयर पीने से डीहाइड्रेशन हो सकता है इसलिये इसे नारियल पानी के साथ मिला कर पीजिये।


ताजे मक्के के भुट्टे पानी मेंं उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन में लाभ होता है।


पेशाब की जलन में कच्चे दूध में पानी मिलाकर रोज पिएं, लाभ होगा।  ठंडे पानी या बर्फ के पानी में कपड़ा भिगोकर नाभि के नीचे बिछायें, रखें। लाभ होगा।


कलमी शोरा, बड़ी इलायची के दाने, मलाईरहित ठंडा दूध व पानी। कलमी शोरा व बड़ी इलायची के दाने महीन पीसकर दोनों चूर्ण समान मात्रा में लाकर मिलाकर शीशी में भर लें। उसके बाद एक भाग दूध व एक भाग ठंडा पानी मिलाकर फेंट लें, इसकी मात्रा 300 एमएल होनी चाहिए। एक चम्मच चूर्ण फांककर यह फेंटा हुआ दूध पी लें। यह पहली खुराक हुई। दूसरी खुराक दोपहर में व तीसरी खुराक शाम को लें। बस दो दिन तक यह प्रयोग करने से पेशाब की जलन दूर होती है व मुँह के छाले व पित्त सुधरता है। शीतकाल में दूध में कुनकुना पानी मिलाएँ।


ककड़ी गुणों का भंडार है। यह शीतल व पाचक है। ककड़ी खाने से पेशाब खुलकर लगती है। गर्मी के दिनों यह लू से बचाव में सहायक है। ककड़ी के बीजों में स्टार्च, तेल, शर्करा और राल पाए जाते है। ककड़ी में क्षारीय तत्व भी पाए जाते है, जो मूत्र संस्थान की कार्यप्रणाली के सुचारु रूप से संचालन में सहायक हैं। ककड़ी पेशाब की जलन को दूर करने में सहायक है। बदहजमी की स्थिति में ककड़ी के 8 से 10 बीजों का मट्ठे के साथ सेवन करने से राहत मिलती है। ककड़ी खाने केबाद 20 मिनट तक पानी न पिएं।


पिसी हुई हल्दी को एक-एक चम्मच सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।


तीन आँवलों का रस पानी में मिलाकर सुबह-शाम चार दिन पीने से बार-बार पेशाब जाना बंद हो जाता है।


एक केला खाकर आँवले के रस में शक्कर मिलाकर पिएं। लाभ होगा। अकेला केला खाने से भी लाभ होता है।


सेब खाने से रात को बार-बार पेशाब जाना बंद हो जाता है।


बूढ़े आदमी बार-बार पेशाब जाते हों तो नित्य छुआरे खिलायें। रात को छुआरे खाकर दूध पिएं।


रात को बार-बार पेशाब जाना शाम को पालक की सब्जी खाने से कम हो जाता है।


एक छटाँक भुने, सिके चने खाकर, ऊपर से थोड़ा सा गुड खायें। दस दिन लगातार खाने से बहुमूत्रता कम हो जाती है। वृद्धों को अधिक दिन तक यह सेवन करना चाहिए।


250 ग्राम गाजर का रस नित्य तीन बार पिएं। पेशाब का रंग पीला हो तो शहतूत के रस में शक्कर मिलाकर पीने से रंग साफ हो जाता है।


गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब बनना बंद हो जाए तो मूली का रस दो औंस प्रति मात्रा पीने से वह फिर बनने लगता है।


नींबू के बीजों को पीसकर नाभि पर रखकर ठण्डा पानी डालें। रुका हुआ पेशाब होने लगता है।


जीरा और चीनी—दोनों को समान मात्रा में पीसकर दो चम्मच फंकी लेने से लाभ होता है।


केले के तने का रस चार चम्मच, घी दो चम्मच मिलाकर नित्य दो बार पिलाने से पेशाब खुलकर आता है।


यदि बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब आए, प्यास लगे तो आठ ग्राम पिसी हुई हल्दी नित्य दो बार पानी से फंकी लें। लाभ होगा। एक कप तेज गर्म पानी में से आधा कप पानी अलग लेकर इसमें गुलाबी रंग के सदाबहार के तीन फूल पाँच मिनट तक पड़े रहने दें। पाँच मिनट बाद फूल निकाल कर फेंक दें और पानी नित्य सात दिन पिएं और आधा कप गरम पानी और पिएं, लाभ होगा।


जामुन की गुठली का चूर्ण आधा चम्मच शाम को पानी के साथ लेने से पेशाब में शर्करा आना ठीक हो जाता है। जामुन की गुठली और करेले सुखाकर समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और एक चम्मच सुबह शाम पानी से फंकी लें।


१५ ग्राम करेले का रस, १०० ग्राम पानी में करीब ३ महीने पिलाना चाहिए। छाया में सुखाए हुए करेलों का चूर्ण ६ ग्राम दिन में एक बार लेने से मूत्र में शर्करा आना बंद हो जाती है।


भिन्डी के डॉड काट लें। इन डॉडों को छाया में सुखाकर कूटकर मैदा की छलनी से छान लें। इसमें समान मात्रा में मिश्री मिलाकर आधा चम्मच भूखे पेट ठंडे पानी से रोज लें महुमेह में लाभ होगा।


अगर मधुमेह कन्ट्रोल में नहीं है जौ, चना, गेहूं (तीन किलो जौ, एक किलो गेहूँ, आधा किलो चना को मिलाकर पिसवा लें) इसकी रोटियाँ खानी चाहिए।

 डायबिटीज में कमजोरी मालूम पड़ने लगती है। कमजोरी दूर करने के लिए हरा कच्चा नारियल चबायें। काजू, मूँगफली और अखरोट भिगाेकर खाएँ। प्यास अधिक होने पर पानी में नींबू निचोड़कर पिलाने से लाभ होता है। यह तीन बार नित्य पिएं।


होमियोपैथिक चिकित्सा:-



डायबिटीज-इसीपीड्स(इसमें चीनी विल्कुल नही रहती) अधिक मात्र में और जल्दी जल्दी पेशाब होने के साथ पेशाब में यूरिया निकलना, उसके साथ प्यास, शीर्णता और बेचैनी रहना। इस तरह के मूत्र सबंधी बीमारी में हेलोनियस ३०,२०० काफी लाभप्रद है।


पेशाब रुक रुक कर होना, मानो मूत्र यंत्र में पक्षाघात हो गया हो।  प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि हो गयी हो तो इसके लिए कोनायम ३० का सेवन दिन में तीन बार करने से बीमारी में राहत  मिल जाती है। इस तरह की बीमारी में सेबलसेरु ३० भी काफी लाभप्रद है।


पेशाब करते वक्त नही बल्कि अन्य समय में मूत्राशय में जलन होने पर स्टेफिसेग्रिया ३० रामबाण अौषधी का काम करता है।


पेशाब का वेग बना रहना, रात के समय ही यह वेग ज्यादा रहना। वेग रहने पर भी मूत्राशय की शक्ति घट जाना, जिस कारण बहुत देर बैठने पर भी पेशाब का धीरे धीरे होना,पेशाब होने के बाद भी बूंद बूंद पेशाब टपका करना, आग की तरह पेशाब का गरम होना लक्षणों में केलि कार्ब ३० शक्ति की दवा का तीन बार चार चार गोली का सेवन करना चाहिए।


मूत्राशय के भीतर एक प्रकार का दर्द होता है,मानो  मूत्राशय फूल उठा हो बार बार और जल्दी जल्दी पेशाब का होना, पेशाब में बदबू रहती है, रोगी के शरीर पर सूजन आ जाती है और वह सो नही पाता  है, इस तरह की बीमारी में मैजलिस क्यू या ३ शक्ति की दवा का प्रयोग करें चाहिए।


रात में बार बार पेशाब बहुत मात्र में होना,एकाएक इतने जोर से पेशाब का लगना  मानों कपड़े में हो जायेगा,, बिछोने में ही पेशाब का हो जाना और ऐसा समझना की ठीक पेशाब की जगह पर ही पेशाब कर रहें हैं; किन्तु नींद खुलने पर मालूम होना की  था ऐसी स्थिति में क्रियोजोटम ६X शक्ति से १००० शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए।


पेशाब करते समय जोर लगाना, मूत्रावरोध, जलन, मूत्राशय ग्रीवा में दर्द,मूत्र पथरी निकलने के समय भयंकर दर्द, इसमें बायोकेमिक दवा मैग्नेशिया फास १२X काफी लाभप्रद है।  चार चार गोली ग्राम पानी के साथ लेने से रोग की तीव्रता में लाभदायक सिद्ध होती है।


बहुत मात्रा में पीले रंग का पेशाब का होना, छीकते या खांसते समय, या अनजाने में चलते चलते पेशाब का निकलना, पेशाब करते समय किसी के अगल बगल रहने पर पेशाब का न उतरना, ऐसी परिस्थिति में नेट्रम म्यूर ३X से उच्च शक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।


बहुमूत्र रोग की प्रधान परिक्षित दवा नेट्रम फास १२X है।


पेशाब होने के पहले और बाद में मूत्र नली में जलन होने पर रोग कोई भी हो वल्गेरिस Q पाँच बून्द दो ५० मिली पानी में मिला कर तीन समय लें, शर्तिया लाभप्रद है।

उपचार और प्रयोग -