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Sunday, September 06, 2015

क्या शुभ और क्या अशुभ है -

पुरानी परंपराओं का नाम देते हुए हमारे घर के बूढ़े-बुज़ुर्ग कुछ बातों को लेकर शुभ-अशुभ की अवधारणा से हमें परिचय अक्सर कराते रहते हैं। उनके इन कथनों में कितनी सचाई है, इसपर चर्चा करना बेकार है, क्योंकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन बातों में अटूट यकीन रखते हैं। आइए जानें, रोजमर्रा की जिंदगी में लोग किन चीजों का होना शुभ मानते हैं और किनका अशुभ-


हमारी संस्कृति में अंधविश्वास को भी एक खास जगह दी गई है। ऐसा नहीं कि केवल गांव के लोग ही इन चीजों में यकीन रखते हैं, बल्कि कई बार शहर के और खूब पढ़े-लिखे लोग भी इन चीजों को मानने से इनकार नहीं करते। आपने कभी न कभी अपनों से जरूर सुना होगा कि बिल्ली ने रास्ता कट दिया, यह अशुभ है या फिर बिल्ली रो रही है तो यह भी अशुभ है। क्या आपने कभी कुत्तों के बारे में सुना है- ये प्रस्तुतिकरण आप के ऊपर थोपा नहीं जा रहा है - जो लोग नहीं मानते है -उनको कोई जरुरत नहीं कि वो  माने -

कहते हैं घर से निकलते ही यदि आप बचना चाहकर भी वर्षा से भीग जाएं तो समझ लीजिए आपका आर्थिक संकट जल्द ही दूर होनेवाला है।

कहा जाता है कि अगर सुबह-सुबह जागते ही शंख, घंटा आदि का स्वर सुनाई दे तो अत्यंत शुभ होता है। इसी तरह वीणा का स्वर सुनाई दे तो इसे भी शुभ संकेत माना जाता है।

पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्नान करना शुभ माना जाता है तथा अन्य दिशाओं की ओर मुख करके स्नान करना अशुभ होता है।

अगर आप संध्याकाल में यात्रा के लिए निकलें और बन्दर दिखायी पड़े तो आपकी यात्रा मंगलमय होगी।इसी तरह दिन में कहीं जाते वक्त अगर बंदर दिखे तो यह शुभ प्रतीक है। कार्य में सफलता मिलेगी।

अगर आप कहीं जा रहे हैं और अचानक बिल्ली आपका रास्ता काट दे तो यह अशुभ होता है। ऐसे में यात्रा को टाल देना ही सही रहता है।

यदि आप भोजन कर रहे हैं और उसी समय कुत्ते का रोना सुनाई दे, तो वह बेहद अशुभ होता है।

ऐसा माना जाता है कि किसी मकान की छत पर यदि उल्लू बैठ जाए तो उस घर पर कोई संकट आने वाला है।

किसी कार्य के आरम्भ में अथवा यात्रा में मोर की आवाज सुनाई दे तो उस कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी।

यदि आप कहीं जा रहें और आपने सूअर देख लिया तो यह शुभ होता है और जिस भी कार्य के लिए आप जा रहे हैं वह कार्य पूरा होगा।

यदि आप कहीं जा रहें हैं और उस समय आपको कोई टोक दे तो जिस कार्य हेतु जा रहें है, उसमें असफलता ही हाथ लगेगी।

कहते हैं कि कपड़ा पहनते वक्त या फिर जब आप घर से बाहर कहीं जा रहे हों उस वक्त यदि आपकी जेब से सिक्का नीचे गिर पड़े तो यह शुभ संकेत होता है। कई लोगों का तो यहां तक कहना है कि यह आपको धन मिलने का संकेत देती है।

कुछ पुराने लोग ऐसा भी कहते हैं कि यदि आप किसी को पैसे दे रहे हों और आपके हाथ से पैसा छूट जाए तो इसे भी शुभ संकेत ही समझें।

कहीं जाते वक्त आपका कपड़ा किसी दरवाजे या किसी पेड़-पौधे में फंस जाए तो इसे हमारे पूर्वज अशुभ मानते थे।

कुछ लोग दूध को भी शकुन-अपशकुन के साथ जोड़कर देखते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि घर का कोई सदस्य यदि घर से बाहर जा रहा हों तो उनके खाने में दूध की चीजें या फिर उनके नजर के सामने दूध रखना भी अपशकुन होता है।

यदि राह चलके कोई चिड़िया आपके सिर पर बीट कर दे तो इसे शुभ संकेत ही माना जाता है। इसके पीछे मान्यता यह है कि आपको जल्द ही आर्थिक फायदा मिलने वाला है।

आप किसी काम से घर से निकलने के लिए तैयार हों और सामने कोई कुत्ता आकर अचानक बेवजह खूब भौंकने लग जाए तो यह शुभ संकेत नहीं है।

यदि आप किसी खास प्रयोजन से घर से बाहर निकल रहे हों और घर के सामने आपको कुत्ता अपना शरीर खुजलाता नजर आ जाए तो समझें कि आपका वह खास काम बिगड़ भी सकता है।

कभी किसी यात्रा पर निकलने के दौरान यदि सामने कोई कुत्ता मुंह में हड्डी दबाए नजर आ जाए तो समझिए कि आपको उस यात्रा में तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए पहले से ही सतर्क होकर चलें।

यदि आपको शाम के बाद या रात के समय कई कुत्तों के मिलकर रोने की आवाज सुनाई दे तो यह बहुत बड़ा अपशकुल माना गया है। माना जाता है कि यह किसी न किसी की होनेवाली मौत या सामूहिक विपत्ति की सूचना देता है हमें।

यदि कहीं पर बेवजह बहुत सारे कुत्ते इकट्ठे हो जाएं और जोर-जोर से भौंकनें लगें तो समझना चाहिए कि वहां रह रहे लोगों की आपस में जमकर लड़ाई-झगड़ा होने का संकेत है यह।

कुत्ता यदि खुद में मग्न बैठा हो, लेकिन आप पर नजर पड़ते ही चौंक जाए तो समझ लें कि आपके रास्ते में कुछ विघ्न पैदा होनेवाला है।

पालतू कुत्ता यदि बार-बार आपकी गाड़ी पर चढ़कर या गाड़ी की ओर मुड़कर भौंके तो यह एक अशुभ संकेत देता है। दुर्घटना आदि का संकेत देता है यह।

Sunday, August 23, 2015

घर में नकारात्मक ऊर्जा की छाया हो तो पूजा में भी बाधा पड़ती है-

सामान्यतया हममें जो भी आस्तिक हैं ,वे अपने घर-परिवार-कार्यस्थल आदि पर सामान्य पूजा -पाठ करते रहते हैं ,ईश्वर में श्रद्धा रखते हैं और बिना किसी विशेष उद्देश्य के अपनी मंगलकामना के साथ अपनी क्षमता के अनुसार अपने ईष्ट आदि को प्रसन्न रखने का प्रयास भी करते हैं -



समय-समय पर मंदिर ,दरगाह -गिरजाघर भी आते जाते रहते हैं |यहांतक तो सब सामान्य चलता रहता है और कोई विशेष परिवर्तन नहीं महसूस होता -जो भाग्य में है जो ग्रह स्थितियां होती हैं मिलता है ,कभी कम कभी पूरा मिलता है सामान्य व्यक्ति समझ भी नहीं पता की कम मिल रहा है या पूरा |किन्तु जब कभी किसी विशिष्ट उद्देश्य के साथ ,संकल्पित हो कोई पूजा-अनुष्ठान-साधना शुरू की जाती है अनेकानेक बाधाएं शुरू हो जाती हैं ,घर में कलह हो सकता है ,कार्यों में व्यवधान हो सकता है ,दुर्घटनाएं हो सकती हैं ,अशुभ-अमंगल शकुन होने लगते हैं, पूजा-साधना के समय लगता है जैसे कोई और भी हो साथ में ,कोई आगे से चला गया -कोई पीछे से चला गया .कभी छाया सी महसूस हो सकती है ,कभी आग लग सकती है ,और भी बहुत कुछ डरावना हो सकता है , ऐसे में व्यक्ति घबरा जाता है और पूजा-साधना बीच में छोड़ने की सोचने लगता है | तब क्यों होता है -

आइये क्यों होता है ऐसा इस पर विचार करें तो कुछ कारण समझ में आते हैं:-


सबसे मुख्य कारण इसका होता है की जब आप पूजा-आराधना-साधना एक निश्चित संकल्प और पद्धति के साथ शुरू करते हैं तो मानसिक बल ,मंत्र ,पूजा पद्धति ,ईश्वरीय ऊर्जा के आगमन से सकारात्मक ऊर्जा का आसपास संचार होने लगता है ,,ऐसे में अगर आपके आसपास नकारात्मक ऊर्जा का संचार या छाया हुई तो उसे सकारात्मकता से कष्ट होता है और वह उत्पात या उपद्रव शुरू कर देता है जिससे उसकी उग्रता से स्थितियां उपद्रवकारी होने लगती हैं -एक समस्या शुरू होने से दूसरी समस्याएं क्रमशः उत्पन्न होने लगती हैं और व्यक्ति घबरा जाता है और सोचने लगता है उससे जरुर गलती हो रही है और स्थितियां बिगड़ रही हैं -पर मूल कारण वह नहीं समझ पाता की कोई और नहीं चाहता की परिवर्तन हो अतः वह ऐसा कर रहा है -क्योकि परिवर्तन और सकारात्मकता के संचार से उसे स्थान छोड़ना पड़ जायेगा |


यद्यपि इससे इनकार नहीं किया जा सकता की कभी कभी ऐसा पूजा-पाठ की गलतियों अथवा आ रही ऊर्जा को न संभाल पाने के कारण भी होता है |पर मुख्य कारण नकारात्मक ऊर्जा ही होती है |यह नकारात्मक ऊर्जा पित्र दोष हो सकता है -बाहर से आई आत्माएं हो सकती हैं -पितरों के साथ जुडी कोई आत्मा हो सकती है -किसी पर आसक्त कोई आत्मा हो सकती है -वास्तु दोष के कारण उत्पन्न नकारात्मक उर्जायें हो सकती है -तांत्रिक अभिचार के कारण आई नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है अथवा अन्य किसी प्रकार की भी नकारात्मकता हो सकती है |


यदि आपके परिवार की उन्नति रुक जाए -अवनति दिखने लगे -कलह-उपद्रव अनावश्यक हो -कार्यों में व्यवधान हो -अशुभ-अमंगल शकुन अधिक होने लगे -बुरे स्वप्न आये -सपनो में भय लगे -कभी छाया आदि लगे आसपास या घर में -बच्चे बिगड़ने लगे -परिवार में सौमनस्य समाप्त होने लगे -पति-पत्नी में अनावश्यक कलह हो -शारीरिक स्वास्थय में अनावश्यक उतार-चढाव आये बार बार -कोई बीमार भी हो और कारण भी न समझ में आये -हर काम में असफलता मिलने लगे -पैसे की आय पर्याप्त होने पर भी पूर्ती मुश्किल से हो -समझ में न आये कहाँ खर्च हो रहे हैं -आय-व्यय में असंतुलन आ जाए -कर्जों की स्थिति आये -बार-बार कार्य-व्यवसाय में उतार-चढाव-हानि-लाभ हो -कहीं स्थिरता न रहे तो समझना चाहिए की आप किसी न किसी प्रकार से नकारात्मक उर्जाओं की चपेट में हैं और आपको इनका उपचार करना चाहिए -


कोई भी मनुष्य के जीवन में उसके द्वारा किये गए कर्मो का-इस जन्म में हो या पिछले जन्म में हो -नकारात्मक उर्जा समय-समय पर प्रताड़ित भी करती है -लेकिन मनुष्य अन्तर्यामी नहीं -इसलिए समझ नहीं पाता है -


इनके उपचार का सबसे अच्छा उपाय सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ाना है ,जिसका एक माध्यम पूजा-साधना है |यदि घर में या आप पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है या उपरोक्त लक्षण घर में या आप पर हैं तो पूजा-साधना पर उपद्रव भी हो सकते हैं -विघ्न आ सकते हैं -अतः पहले से सोचे रहें की ऐसा होगा और सतर्क रहें -अपने कार्य-व्यवहार को संतुलित रखे और विवादों से बचें -एक बार जब साधना-अनुष्ठान शुरू कर दें तो बीच में कदापि न छोड़ें [ यह जरुर पहले सुनिश्चित कर लें की आप गलती से भी पूजा में गलती न करें ,कुछ दिन में सब सामान्य होने लगेगा और आपकी साधना-अनुष्ठान पूर्ण होने पर सफलता की भी आप उम्मीद कर सकते हैं -सकारात्मकता बढने से परिवर्तन जरुर होंगे और लाभ भी होंगे.

Thursday, August 20, 2015

व्यापार बढ़ा सकता है ये प्रयोग -


कहते है कि अगर नजर लग जाए आपके फलते -फूलते व्यापार को तो बिक्री बंद हो जाती है क्युकि आज के समय में कोई भी किसी की तरक्की और आमदनी से खुश नहीं होता है और किसी के फलते फूलते व्यापार को सिर्फ इतना ही कह देना काफी होता है -अरे यार आपका धंधा तो बहुत बढ़िया चल रहा है -


आपने देखा होगा किसी फलते - फूलते हरे -भरे व्रक्ष पे भी बुरी नजर पड़ जाए तो सूखता चला जाता है इसलिए हमारे बुजुर्ग कहा करते थे तीन चीज छिपा के करनी उत्तम है एक धन को छिपा के रखना अगर आप धन किसी के सामने रखोगे तो भी बुरी नजर लग जाती है व्यापार कितना भी फल-फुल रहा हो समझदार लोग व्यापार में रोना रोते ही रहते है - खाना भी किसी के सामने खाने  से नजर लग जाती है -और आपका पेट खराब हो  जाता है इसकी भी एक पहचान है -अगर आपका पेट खराब है -और बदबूदार मल हो रहा है समझे नजर लगी है -तीसरा पत्नी के साथ काम-क्रीडा भी प्रतिबंधित है-सुंदरता  पे भी नजर लग  जाती  है और महिलाओं की तबियत खाराब रहती है - खेर हम बात व्यापार की  कर रहे  है -


तो आप को निम्न-लिखित उपाय करना चाहिए और अपने व्यापार को बढ़ाये -


व्यापार बढ़ाने के लिए :-शाबर मन्त्र
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                         "भंवर वीर तू मेरा चेला, खोल दूकान कहा कर मेरा |
                         उठै जो डंडी बिकै जो माल, भंवर वीर , सोखे नहिं जाये  ||"


ये शाबर मन्त्र दुकान बंधन हटाने और व्यापार वृद्धि के लिए लाभ दायक प्रयोग है.इसे नवरात्री में करें तो विशेष लाभ होगा.


अब अपने सामने काली उड़द या काली मिर्च के 1008 दाने रख लें. प्रतिदिन 1008 बार जाप करें.दूकान में कर सकें तो वहां करें न कर सकें नहीं तो घर पर करें. सामने गुग्गुल या धुप जलाकर रखें. पूर्णिमा के दिन अपनी दूकान पर जाएँ. साथ में वे दाने भी ले जाएँ. धुप या अगरबत्ती जलाकर 1008 बार मन्त्र पढ़ें. उन दानों को दूकान में बिखेर दें. कुछ दाने अपनी कुसी और तिजोरी के पास भी डालें. बचे दानों को काले कपडे की पोटली में बांधकर लटका दें.


अगर ये प्रयोग आप नवरात्रि से पहले करना चाहे तो रविवार को और मंगलवार को हफ्ते में दो बार भी प्रयोग करने से भी बंद व्यापार में लाभ मिलना शुरू हो जाता है -

गुरु कृपा से लाभ होगा.

Monday, August 10, 2015

आकड़ा (मदार ) का पौधा मुख्य-द्वार पे लगाये -

 साधारणतया: आकडे का पौधा सभी जगह देखने को मिल जाता है ये अपने आप ही उग जाता है बहुत से लोग इसे उपयोगी नहीं मानते है इसे आक,अकौआ ,मदार आदि विभिन्न नामो से पुकारते है -


शहरी क्षेत्रों में भी यह आसानी से दिखाई दे जाता है। यह पौधा जहरीला होता है। आंकड़े के पौधे से सफेद दूध भी निकलता है। इस पौधे से प्राप्त होने वाले फूलों और फलों को शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। आंकड़े के कई उपाय भी बताए गए हैं, जिनसे धन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।


हम आपको कुछ इसके प्रयोग बता रहे है  जिनको सिर्फ विश्वास के साथ करने पे सफलता मिलती है -


-यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से परेशान है तो वह रवि पुष्य नक्षत्र (हिंदी पंचांग से इस नक्षत्र की जानकारी मिल सकती है) के दिन आंकड़े एवं अरण्ड की जड़ निमंत्रण देकर तोड़कर ले आएं। जड़ तोड़ने से पहले जड़ को निमंत्रण दें कि आप हमारे साथ चलिए। इसके बाद घर पर इन जड़ों को गंगाजल से धोएं और सिंदूर आदि पूजन सामग्री अर्पित कर पूजन करें। पूजन के दौरान श्रीगणेशाय नम: मंत्र का जप 108 बार करें। पूजन हो जाने पर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से इन जड़ों को सात बार सिर से पैर तक वार लें। इसके बाद शाम के समय इन जड़ों को किसी सुनसान स्थान पर जाकर जमीन में गाढ़ दें। इस उपाय के बाद दवाएं असर करने लगेंगी और रोगी जल्दी ठीक हो सकता है।


-यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर की रक्षा नकारात्मक शक्तियों से, बीमारियों से, बुढ़ापे की परेशानियों से करनी है तो उसे ये उपाय अपनाना चाहिए। उपाय के अनुसार आंकड़े के पौधे की जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा गले में ताबीज के साथ धारण करना चाहिए। ध्यान रखें, ताबीज के लिए काले धागे का प्रयोग करें। मार्केट में कई प्रकार के ताबीज आसानी से मिल जाते हैं। अत: उस ताबीज में आंकड़े की जड़ को डालकर धारण करें। इस उपाय से आपके शरीर की रक्षा होगी, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह ताबीज किसी कवच के समान काम करता है।


-आंकड़े के फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आंकड़े पौधा मुख्यद्वार पर या घर के सामने हो तो बहुत शुभ माना जाता है। इसके फूल सामान्यत: सफेद रंग के होते हैं। विद्वानों के अनुसार कुछ पुराने आंकड़ों की जड़ में श्रीगणेश की प्रतिकृति निर्मित हो जाती है जो कि श्वेतार्क गणेश के नाम से जानी जाती है। गणेशजी के इस स्वरूप की पूजा करने से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं।

घर के सामने शुभ रहता है ये पौधा:-
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ज्योतिष के अनुसार जिस घर के सामने या मुख्यद्वार के समीप आंकड़े का पौधा होता है, उस घर पर कभी भी किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा वहां रहने वाले लोगों को तांत्रिक बाधाएं कभी नहीं सताती। घर के आसपास सकारात्मक और पवित्र वातावरण बना रहता है जो कि हमें सुख-समृद्धि और धन प्रदान करता है। ऐसे लोगों पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है और जहां-जहां से लोग कार्य करते हैं वहीं से इन्हें धन लाभ प्राप्त होता है। आज कल शहरो में लोगो के मुख्य द्वार पे आपको सफ़ेद आंकड़े के पौधे लगे हुए दिख जायेगे-

आप सभी स्वस्थ रहे -

Sunday, July 19, 2015

क्या आप तर्जनी ऊँगली से उठा सकते है नब्बे किलो का पत्थर ....?

 * जी हाँ क्या आप तर्जनी अंगुली से 90 कि.ग्रा. वजन के पत्थर को अपने सर तक उठा सकते है.?

* अमूमन ज्यादा तर लोगों का जबाव नहीं में ही होगा। लेकिन महाराष्ट्र में पुणे स्थित 'बाबा हजरत कमर अली की दरगाह' में यह चमत्कार आप कर सकते है।





* यहां अंगुली से 11 भक्त उठाते हैं चमत्कारी पत्थर....!

यहां है चमत्कारी दरगाह:-
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* हजरत कमर अली दरवेश बाबा की दरगाह पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर स्थित शिवपुर गांव में है। यहां पर आज से 700 वर्ष पहले सूफी संत हजरत कमर अली को दफनाया गया था।

* हजरत कमर अली एक सूफी थे जिनका निधन मात्र 18 साल की उम्र में हो गया था। उन्हें उनकी मृत्यु के पश्चात संत की उपाधि से सम्मानित किया गया था।

* इस दरगाह में सूफी संत की चमत्कारिक शक्तियां आज भी मौजूद हैं। यहां दरगाह परिसर में रखा करीब 90 कि.ग्रा. का पत्थर है। यदि इस पत्थर को 11 लोग सूफी संत का नाम लेते हुए अपनी तर्जनी अंगुली (इंडेक्स फिंगर) से उठाते है तो यह पत्थर आसानी से ऊपर उठ जाता है।

* लेकिन यदि इस पत्थर को दरगाह परिसर से बाहर ले जाकर उठाएं तो यह टस से मस भी नहीं होता है। भक्त इसका कारण दरगाह में आज भी विधमान हजरत कमर अली दरवेश बाबा की शक्तियों को मानते हैं।

* इसके अलावा भी इस पत्थर से एक और रहस्य जुड़ा है यदि लोग तर्जनी अंगुली के अलावा कोई दूसरी अंगुली का इस्तेमाल करें या लोगों की संख्या 11 से कम या ज्यादा हो तो भी पत्थर नहीं हिलता है।

* इस दरगाह पर साल भर सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोगों का तांता लगा रहता है। ख़ास बात यह है कि अन्य दरगाहों की तरह यहां पर महिलाओं को लेकर कोई बंदिश नहीं है। अन्य धार्मिक स्थलों की तरह यहां भी भक्तों की मान्यता है कि यहां मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है। सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है .
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

Sunday, July 05, 2015

गणेश की सवारी चूहा नहीं मारे तो येसे भगाए ....!

* अधिकांश घर ऐसे हैं जहां चूहों की समस्या एक आम बात है। चूहों के कारण कई बार अनाज के साथ ही कपड़ों और अन्य मूल्यवान चीजों का नुकसान हो जाता है।

* ऐसे में काफी लोग चूहों को मारने के लिए बाजार में मिलने वाली दवा का प्रयोग करते हैं। ये दवा खाकर चूहे घर में ही इधर-उधर मर जाते हैं, जिसकी बदबू पूरे घर में फैल जाती है।

इस समस्या से बचने के लिए यहां बताया जा रहा एक तांत्रिक उपाय करें, जिससे आपके घर से चूहे भाग जाएंगे:-
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* यदि आपके घर में चूहों के कारण अत्यधिक नुकसान होता है और उन्हें मारने से फैलने वाली बदबू से भी मुक्ति पाना चाहते हैं तो यह उपाय करें। उपाय के अनुसार बाजार से मिट्टी का एक घड़ा या मटका लेकर आएं। इसके बाद यह मटका घर लाकर इस प्रकार फोड़ें कि उसके कम से कम चार टुकड़े हो जाएं। मटके के चार टुकड़े लेकर काजल से उनके ऊपर चूहे भगाने का चमत्कारी मंत्र लिखें।

मंत्र:-
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ऊँ क्रौं क्रां।

* यह मंत्र मटके के टुकड़ों पर लिखने के बाद चारों टुकड़े घर के चारों कोनों में रख दें या गाड़ दें। यह एक तांत्रिक उपाय है। इस संबंध में किसी भी प्रकार की शंका या संदेह न करें, अन्यथा इसका प्रभाव निष्फल हो जाता है।


एक अन्य उपाय:-
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* जिस घर में चूहों के कारण परेशानियां रहती हैं और बार-बार वस्तुओं का नुकसान होता है उन्हें ऊंट के दाएं पैर का नाखुन का उपाय करना चाहिए। यदि कहीं से आपको ऊंट के दाएं पैर का नाखुन मिल जाए तो उसे अपने घर ले आएं और घर में जहां चूहे रहते हैं उस स्थान पर वह नाखुन रख दें। इस नाखुन को स्पर्श करते ही चूहे आपके घर से भागने लगेंगे।


* प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश का वाहन चूहा ही है। इसी वजह से अकारण चूहों को मारने से जीव हत्या पाप भी लगता है। अत: कोशिश यही करना चाहिए चूहों को घर से भगा दिया जाए। उन्हें मारने उचित नहीं है। यदि चूहे घर में ही मर जाते हैं तो घर में दुर्गंध फैल जाती है, जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। मरे हुए चूहों की बदबू से घर का वातावरण भी प्रदुषित हो जाता है।

* चूहे को धान्य अर्थात् अनाज का शत्रु माना जाता है और श्रीगणेश का उस नियंत्रण रहता है। अत: श्रीगणेश का वाहन मूषक यह संकेत देता है कि हमें भी हमारे अनाज, संपत्ति आदि को बचाकर रखने के लिए विनाशक जीव-जंतुओं पर नियंत्रण करना चाहिए। वहीं हमारे जीवन में जो लोग हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं उन पर भी पूर्ण नियंत्रण किया जाना चाहिए। ताकि जीवन की सभी समस्याएं समाप्त हो जाए और हम सफलताएं प्राप्त कर सके। इन सभी बातों को अपनाने से हमारे जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाएंगी। धन, संपत्ति और धर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं प्राप्त होंगी। घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलेगा।

* चूहा बिल में छिपकर रहने वाला अंधकार प्रिय प्राणी है। इस वजह से यह नकारात्मक और अज्ञानी शक्तियों का प्रतीक भी है। ये शक्तियां ज्ञान और प्रकाश से डरती हैं और अंधेरे में अन्य लोगों को हानि पहुंचाती हैं। जो व्यक्ति गणेशजी की कृपा प्राप्त करना चाहता है उसे इन सभी नकारात्मक शक्तियों और भावनाओं का त्याग करना होगा। तभी वह व्यक्ति ज्ञान और बुद्धि प्राप्त कर सकता है। अंधकार और नकारात्मक विचारों को छोडऩे के बाद व्यक्ति को जीवन के हर कदम पर सफलता ही प्राप्त होती है। जिस प्रकार चूहा हमेशा ही सर्तक और जागरुक रहता है उसी प्रकार हमें भी हर प्रकार की परिस्थितियों का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए और समस्याओं को तुरंत सुलझा लेना चाहिए।
उपचार स्वास्थ और प्रयोग-

Monday, April 13, 2015

गाय, पक्षी, कुत्ता, चींटियां और मछली से हमारे जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं..... !

जीवन से हर समस्या का समाधान शास्त्रों में बताया गया है। एक उपाय तो ये है कि हम अपनी मेहनत से और स्वयं की समझदारी इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें और दूसरा उपाय है धार्मिक कार्य करें।



हमें प्राप्त होने वाले सुख-दुख हमारे कर्मों का प्रतिफल ही है। पुण्य कर्म किए जाए तो दुख का समय जल्दी निकल जाता है।


शास्त्रों के अनुसार गाय, पक्षी, कुत्ता, चींटियां और मछली से हमारे जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं।


यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से गाय को रोटी खिलाएं तो उसके ज्योतिषीय ग्रह दोष नष्ट हो जाते हैं। गाय को पूज्य और पवित्र माना जाता है, इसी वजह से इसकी सेवा करने वाले व्यक्ति को सभी सुख प्राप्त हो जाते हैं।


इसी प्रकार पक्षियों को दाना डालने पर  आर्थिक मामलों में लाभ प्राप्त होता है। व्यवसाय करने वाले लोगों को विशेष रूप से प्रतिदिन पक्षियों को दाना अवश्य डालना चाहिए।


यदि कोई व्यक्ति दुश्मनों से परेशान हैं और उनका भय हमेशा ही सताता रहता है तो कुत्ते को रोटी खिलाना चाहिए। नियमित रूप से जो कुत्ते को रोटी खिलाते हैं उन्हें दुश्मनों का भय नहीं सताता है।


कर्ज से परेशान से लोग चींटियों को शक्कर और आटे डालें। ऐसा करने पर कर्ज की समाप्ति जल्दी हो जाती है।


जिन लोगों की पुरानी संपत्ति उनके हाथ से निकल गई है या कई मूल्यवान वस्तु खो गई है तो ऐसे लोग यदि प्रतिदिन मछली को आटे की गोलियां खिलाते हैं तो उन्हें लाभ प्राप्त होता है। मछलियों को आटे की गोलियां देने पर पुरानी संपत्ति पुन: प्राप्त होने के योग बनते हैं।


इन पांचों को जो भी व्यक्ति खाना खिलाते हैं उनके सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।


अंधविश्वाश को न मानने वाले कृपया इस पोस्ट को इग्नोर कर सकते है पर बेकार का तर्क या कमेन्ट न ही करे क्युकी "विश्वासं फल दायकं" वैसे भी भगवान् दिखता नहीं पर लोग मानते है उसी प्रकार श्रधा भी दिखती नहीं पर फल प्राप्त होता है।


उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

Sunday, March 15, 2015

असाध्य बीमारियों का इलाज है यहाँ -

रैसलपुर महाकाली दरबार में लग रही हजारों भक्तों की भीड़ -


पृथ्वी पर जड़ और चेतन हर पदार्थ में ज्ञान शक्ति के रूप में दैवीय शक्ति कार्य कर रही है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण माता महाकाली दरबार रैसलपुर में देखा जा सकता है।

यह दरबार वर्ष 1990 से निरन्तर है। आज जहां एक ओर विज्ञान द्वारा आधुनिक यंत्रों से मनुष्य के अन्दर उत्पन्न व्याधियों का बड़े शहरों में लाखों रुपया खर्च करके सी.टी. स्केन/ एमआरआई/ कार्डियोग्राफी जैसे अनेकों प्रकार की जांच करके पता लगाया जाता है वहीं यहां पर जांच का सटीक विवरण माताजी के दरबार में व्याधिग्रस्त मनुष्य के उपस्थित होने पर पलभर में कर दिया जाता है, इससे भी आगे उस व्यक्ति के साथ भूतकाल से घटित घटना/ तथा बीमारी उत्पन्न करने वाली प्रेत आत्मा का उल्लेख जो उस व्यक्ति को स्वप्न में दिखाई देकर प्रभावित करके काल का योग बना रही है उसके संकेत एवं प्रमाण दरबार में दिए जाते हैं।

विगत 21-22 वर्षों से माता जी के दरबार में देश-विदेश के अनेकों शहरों, गांवों के असंख्य निराश व्यक्ति जो कैंसर, एड्स, ट्यूमर, लकवा, किडनी, मिर्गी, हृदय रोग निसंतान और ऐसी जघन्न व्याधि जो मेडिकल साइंस से परे थी का इलाज सफलता पूर्वक कराकर व्याधिमुक्त हुए हैं और निरन्तर लोग उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। ईश्वरीय शक्ति के विद्यमान होने के प्रमाण हेतु दरबार में माताजी घोर ज्वाला, महाकाली के रूप में उदय होती है काली, दुर्गा आदि समस्त शक्तियां उनके अंश हैं- काल/अकाल उनकी भुजा में धारण हैं वे मनुष्यों के भाग्य उदय करती हैं, बनाती हैं। धनहीन को धनवान तथा भाग्यहीन को भाग्यवान भी वे बनाती हैं वे काल की भी काल हैं ऐसी माता महाकाली त्रिलोक जननी हैं और वे कण-कण में व्याप्त हैं। मनुष्य देह में निराकार एवं सत्व रूप में विद्यमान है। इस प्रकार वेदों/ पुराणों में वर्णित महाकाली की महिमा को साक्षात दरबार में देखा और अनुभव किया जा सकता है और उनके दर्शन पाकर मनुष्य जीवन की सार्थकता प्राप्त कर सकते हैं इसमें कोई संदेह नहीं है।आप भी एक बार महाकाली दरबार में आकर स्वयं प्रत्यक्ष अनुभव कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

कलयुग में शीघ्र प्रसन्न:-
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आज के युग में माँ महाकाली की साधना कल्पवृक्ष के समान है क्योंकि ये कलयुग में शीघ्र-अतिशीघ्र फल प्रदान करने वाली महाविद्याओं में से एक महा विद्या है। जो साधक महाविद्या के इस स्वरूप की साधना करता है उसका मानव योनि में जन्म लेना सार्थक हो जाता है, क्योंकि एक तरफ जहाँ माँ काली अपने साधक की भौतिक आवश्कताओं को पूरा करती हैं वहीं दूसरी तरफ उसे सुखोपभोग कराते हुए एक-छत्र राज प्रदान करती है। वैसे तो जबसे इस ब्रह्मांड की रचना हुई है तब से लाखों करोड़ों साधनाओं को हमारे ऋषियों द्वारा आत्मसात किया गया है पर इन सबमें से दस महाविद्याओं, जिन्हें मात्रिक शक्ति की तुलना दी जाती है, की साधना को श्रेष्ठतम माना गया है। जबसे इस पृथ्वी का काल आयोजन हुआ है तब से माँ महाकाली की साधना को योगियों और तांत्रिको में सर्वोच्च की संज्ञा दी जाती है।

साधक को महाकाली की साधना के हर चरण को पूरा करना चाहिए क्योंकि इस साधना से निश्यच ही साधक को वाक-सिद्धि की प्राप्ति होती है। वैसे तो इस साधना के बहुतेरे गोपनीय पक्ष साधक समाज के सामने आ चुके हैं परन्तु आज भी हम इस महाविद्या के कई रहस्यों से परिचित नहीं है। कामकला काली, गुह्य काली, अष्ट काली, दक्षिण काली, सिद्ध काली आदि के कई गोपनीय विधान आज भी अछूते ही रह गए। साधकों के समक्ष आने से, जितना लिखा गया है ये कुछ भी नहीं उन रहस्यों की तुलना में जो कि अभी तक प्रकाश में नहीं आया है और इसका महत्वपूर्ण कारण है इन विद्याओं के रहस्यों का श्रुति रूप में रहना, अर्थात ये ज्ञान सदैव सदैव से गुरु गम्य ही रहा है, मात्र गुरु ही शिष्य को प्रदान करता रहा है और इसका अंकन या तो ग्रंथों में किया ही नहीं गया या फिर उन ग्रंथों को ही लुप्त कर दिया काल के प्रवाह और हमारी असावधानी और आलस्य ने।

किसी भी शक्ति का बाह्य स्वरूप प्रतीक होता है उनकी अन्त: शक्तियों का जो कि सम्बंधित साधक को उन शक्तियों का अभय प्रदान करती हैं, अष्ट मुंडों की माला पहने माँ यही तो प्रदर्शित करती हैं कि मैं अपने हाथ में पकड़ी हुई ज्ञान खडग से सतत साधकों के अष्ट पाशों को छिन्न-भिन्न करती रहती हूं। उनके हाथ का खप्पर प्रदर्शित करता है ब्रह्मांडीय सम्पदा को स्वयं में समेट लेने की क्रिया का, क्योंकि खप्पर मानव मुंड से ही तो बनता है और मानव मष्तिष्क या मुंड को तंत्र शास्त्र ब्रह्माण्ड की संज्ञा देता है,अर्थात माँ की साधना करने वाला भला माँ के आशीर्वाद से ब्रह्मांडीय रहस्यों से भला कैसे अपरिचित रह सकता है। इन्ही रूपों में माँ का एक रूप ऐसा भी है जो अभी तक प्रकाश में नहीं आया है और वह रूप है माँ काली के अदभुत रूप महा घोर रावा का, जिनकी साधना से वीरभाव, ऐश्वर्य, सम्मान, वाक् सिद्धि और उच्च तंत्रों का ज्ञान स्वत: ही प्राप्त होने लगता है,अदभुत है माँ का यह रूप जिसने सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय रहस्यों को ही अपने आप में समेटा हुआ है और जब साधक इनकी कृपा प्राप्त कर लेता है तो एक तरफ उसे समस्त आंतरिक और बाह्य शत्रुओं से अभय प्राप्त हो जाता है वही उसे माँ काली की मूल आधार भूत शक्ति और गोपनीय तंत्रों में सफलता की कुंजी भी तो प्राप्त हो जाती है। वस्तुत: ये क्रियाएँ अत्यंत ही गुप्त रखी गयी हैं और सामन्य साधकों को तो इन स्वरूपों की जानकारी भी नही है परन्तु हमारी सदगुरु परम्परा में हमें सहजता से सभी रहस्यों का परिचय प्राप्त होता है। इनकी मूल साधना अत्यधिक ही दुष्कर मानी गयी है और श्मशान, पूर्ण तैयारी और कुशल गुरु मार्गदर्शन के बिना इसका अभ्यास भी नहीं करना चाहिए अन्यथा स्वयं के प्राण तीव्रता के साथ बाह्य्गामी होकर ब्रह्माण्डीय प्राणों के साथ योग कर लेते हैं और पुन: लौट कर साधक के मूल शरीर मैं नहीं आते हैं। परन्तु सदगुरुदेव की कृपा से हम सभी को इसे जानने देखने व उनके सामीप्य होने का सौभाग्य मिला है। आइये जानते हैं रैसलपुर महाकाली दरबार की महिमा के बारे में।

दरबार में लगती है भक्तों की अर्जी:-
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महाकाली के दरबार में सबसे पहले हर भक्त की एक अर्जी लगती है। जिसमें एक नारियल, 250 ग्राम गेहूं, अगरबत्ती, कपूर, पुष्प, प्रसाद एवं दक्षिणा होती है। दरबार में एक तरफ महिलाएं व दूसरे तरफ पुरुष लाइन से बैठते हैं। जिसका नंबर आता है वह अर्जी लेकर गद्दी के समक्ष बैठ जाता है। अपने दोनों हाथों को सिर से पैर के नीचे तक तीन बार फेरता है। इसके बाद मातारानी जी भक्तों की अक्षरस: समस्या स्वत: ही बताती हैं। इसके बाद वह उनका उपाय बताती हैं जिससे भक्त को तत्क्षण लाभ हो जाता है।

रक्षा कवच:-
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मातारानी जी ने भक्त को बताया कि रक्षा कवच धारण करें तो रक्षा कवच एक साल के लिए दरबार वहीं बनाकर द्वारा दिया जाता है। जिससे आने वाली बाधा या नहीं आकर सालभर तक रक्षा करती है। एक साल से पहले भक्त को दरबार में आकर पुन: रक्षाकवच को बदलवाकर धारण करना पड़ता है।

हवन योग से समस्या का हल:-
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जो जातक जटिल बीमारियों से ग्रस्त हैं, ऐसी बीमारियां जो डॉक्टर ठीक नहीं कर पाते तथा व्यक्ति निराश होकर घर बैठकर भगवान से प्रार्थना करता है, उस स्थिति में दरबार में आते ही रोगी को तत्काल फायदा मिल जाता है। इसी तरह किसी लड़का-लड़की की शादी नहीं हो रही और अनेक बाधाएं आ रही हैं, ऐसे मांगलिक कार्य दरबार में हवन योग से सही हो जाते हैं। इसमें हर जातक को एक विशिष्ट हवन कराना पड़ता है जिससे वह जटिल बीमारी से मुक्ति पा लेता है। इसी तरह हवन योग कराकर मांगलिक कार्य होने लगते हैं। भयंकर ऊपरी बाधाओं (जादू-टोना) से ग्रस्त जातक प्रसन्नत चित्त होकर अपना नियमित कर्म बड़े ही आराम से करने लगता है एवं दिनोंदिन तरक्की के मार्ग पर चलता रहता है।

भक्तों की होती है वीडियो रिकार्डिंग:-
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हर शनिवार को रात 10 बजे से लगने वाले महाकाली दरबार में आने वाले प्रत्येक भक्त की वीडियो रिकार्डिंग कई बर्षों से अनवरत जारी है। जिससे जातकों का विश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।

डायरी लेखन:-
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रैसलपुर महाकाली दरबार में एक सेवक- भक्त का नाम पता मोबाइल नंबर, बीमारी तथा मातारानी द्वारा बताए गए उपाय लिखता है। जब वह ठीक हो जाता है उसका भी विवरण लिखा जाता है। जिससे प्रत्येक भक्त का रिकार्ड बना रहे।

जटिल बीमारियां और उनका इलाज :-
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हर प्रकार का कैंसर, एडस, टीबी, लकवा, मानसिक रोग, मिर्गी, सफेद दाग, थाइराइड (घुटनों, कमर में पुराना दर्द), किडनी, हार्ट, पथरी, वबासीर, डायबिटीज (शुगर), महिलाओं की बीमारियां आदि अनेक प्रकार की जटिल बीमारियों का इलाज बड़ी ही सरलता से हो जाता है। जहां डॉक्टर हार मान जाते हैं वहां दरबार में मरीज रो-रोकर आता है और हंसकर जाता है।

सभी प्रकार की समस्याओं का निदान:-
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जातक की समस्या किसी भी प्रकार की हो, दरबार में आते ही वह छूमंतर हो जाती हैं। उद्योग-व्यापार में बरकत, नौकरी प्रमोशन, पारिवारिक कलह, पति-पत्नी में अनबन, शादी-विवाह की समस्या, कोर्ट-कचहरी के निकारण, दुश्मनी खत्म करना, पढ़ाई में मन नहीं लगना, किसी काम में मन नहीं लगना, ऊपरी बाधाओं से छुटकारा आदि हर समस्या जल्द ठीक हो जाती है।

मातारानी का सच्चा है ये दरबार:-
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जो भक्त रैसलपुर महाकाली दरबार में पहली बार आता है वह यहीं का होकर रह जाता है। उसे जब एहसास होता है कि हमारी समस्या को क्षणभर में ही समाप्त हो गई है। फिर वह घर पहुंचकर और दस लोगों को महाकाली दरबार के बारे में बताता है जिससे भक्तों का जुड़ाव अपने आप होता जाता है। यहां हजारों लोग अपनी मनोकामना पूरी कराने के लिए हर शनिवार को रात 8 बजे तक पहुंच जाते हैं।

कैसे पहुंचे दरबार:-
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माता महाकाली का दरबार रैसलपुर में स्थित है। यह स्थान होशंगाबाद-इटारसी राजमार्ग पर बना है। यहां रेलवे, बस व चार पहिया वाहन से पहुंचा जा सकता है। भक्त को इटारसी या इटारसी जंक्शन पर उतरना पड़ता है। यहां से मिनी बस, मैजिक, चार पहिया वाहन से लगभग 20 मिनट की रास्ता है। दरबार इटारसी-होशंगाबाद रोड पर राजश्री ढाबा के सामने बना है। भक्त इस तरह से आएं कि शनिवार रात 8 बजे तक दरबार में पहुंच जाएं। जिससे दरबार में आसानी से शामिल हो सकें।

जिन भक्तों का कहना समस्या ठीक हुई :-
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22 वर्षों से समस्या से ग्रस्त था। पानी में दूर तक बह गया था इसे स्वप्र में 2 नाग ने घेरा, पुन: 3 नागों ने घेरा तीसरा नाग फन फटकार-फंककार कर मार रहा था। 46 वर्ष की आयु के काल योग है फिर भी बचाने का वर्णन दिया गया (ऊपर से गिरने की घटना होगी) घर का वर्णन किया खुले भाग में देवी स्थान जो खजाना ढूंढने के कारण रुष्ठ थी उसे शांत करने का आदेश दिया तथा देवी को स्वप्र में आकर प्रसन्नता दिखाने का आदेश प्रमाण हेतु दिया। ढाई माह पश्चात् परेशानी दूर कर कर्मगति बढ़ाने का उल्लेख किया हमने 22 अक्टूबर 2011 को दरबार में आकर बताया  कि जो  वर्णन किया गया था सत्य पाया।
राजेश चौबे- जीवन कला बकतरा, मो. 9993190051

लकवा सही हो गया:-
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लकवा पेशेंट मस्तिष्क में 3 मि.मी. का धब्बा बताया आसन पर हाथ उठवाया चल नहीं पाता था चलवाया तथा अदृश्य ऑपरेशन कर धब्बा ढाई सेमी मीटर कम कर दिया- गोलियां बन्द करने के आदेश दिये। अब लकवा सही हो गया।
गणेशराम माली, भोपाल - मो. 89825020456

पुत्र की मुराद पूरी:-
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4 वर्षों से परेशान पुत्र मांगने आई 2 योग असफल हो गये डॉक्टरों से परीक्षण कराया जांच आशा छोड़ दी। माताजी ने बताया इन्हें स्वप्र के शिशु भागता दिखता है बन्धन होकर हवन योग के माध्यम से उपचार बताया। काम सफल हुआ।
प्रीति विश्वकर्मा- होशंगाबाद

उपचार सही हुआ:-
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आयुषि लगभग 3-4 वर्ष की अवस्था में बरामदे में 10 फिट ऊंचाई से गिर गई थी उसके पश्चात् तेज बुखार- होना वजन नहीं बढऩा तथा बोलना नहीं हो पा रहा था डॉक्टर्स ने ब्लड टेस्ट स्केंनिग व आई.क्यू टेस्ट करने के पश्चात् सिर की चोट और मन्दता बताया गया 6 वर्षों की अवस्था से एलोपेथिक/आयुर्वेदिक/ व अन्य चिकित्सा निरन्तर चल रही थी इस प्रकार 16 वर्ष की अवस्था तक कोई विशेष लाभ नहीं हुआ।  शारीरिक विकास अवरूद्ध होने के साथ उसके सोचने/बोलने में कोई फायदा नहीं हुआ। दिनांक 26-11-2011 को उसे माताजी के दरबार लाया गया माताजी द्वारा वर्णन किया गया कि 4 वर्ष की अवस्था में रात्रि में भयभीत आकृति की आत्मा के प्रहार से नीचे गिरी है तब से वह आत्मा सवार है पीछा कर रही है इस वजह से पिछले 13 वर्षों से इसका शारीरिक/मानसिक/ विकास नहीं पा रहा है श्री उपाध्याय का परिवार उन्हें 3-12-11 को दरबार में उपचार कराया तथा माताजी की कृपा से आयुषी के  बोलने में, खड़े होने चलने में, असाधारण परिवर्तन आया 13 वर्षों के लम्बे समय के कारण शरीर विकास में आई बिकलांगता में भी परिवर्तन हुआ और व्याधि से पूर्णत: मुक्त हुई।
- आयुषी उपाध्याय, बैरागढ़ भोपाल 9826162124

गले का कैंसर सही हो गया:-
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श्रीमति हेमा बाई पति श्री चम्पालाल 2-6-2012 को दरबार में उपस्थित हुई उन्हें 3 माह से गले में सूजन थी बहुत बड़ी गांठ हो गई थी उसे दबाने पर दर्द होता था कंठ के योग पर कील का मुख बन गया था पानी पीने में तक तकलीफ होती थी डॉक्टरों ने कैंसर की आशंका बताई माताजी ने सारा विवरण उल्लेख कर बताया कि इन्हें स्वप्र में मशान बीर नाग द्वारा 2-3 बार फूंक मारकर कैंसर रोग मनुष्य मृत्यु लोक अनुसार उत्पन्न किया है घर के समीप जलता दीपक, काला कोयला राख आदि मिली थी जो क्रिया की गई थी उस योग से रोग उत्पन्न हुआ माताजी द्वारा उन्हे पूर्ण स्वथ्य कर लाभ प्रदान किया 7-7-2012 तक पूर्ण रूप  रोग मुक्त हो चुकी और उनकी आवाज भी बन्द हो गई थी अब तो आसानी से बोलती है खाना,पीना अच्छा होने से शारीरिक स्वास्थ्य में भी परिवर्तन हुआ हैं।
हेमाबाई पति श्री चम्पालाल होशंगाबाद मो.न. 9691223305

कोमा से बाहर आया:-
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विपिन चौरे ग्राम चिल्लई निवासी के भाई रैसलपुर बस स्टेन्ड पर दुर्घटना रात्रि में हुई उन्हें गम्भीर स्थिति में उपचार हेतु भोपाल ले जाया गया सीटी स्केल करने पर कोई गम्भीर चोट मस्तिष्क नहीं पाई गई उपचार चलता रहा इन्दौर भी दिखाया गया रिपोर्ट लेकर बाम्बे के डॉक्टरों को दिखाया सबसे अच्छी दवाई लेने के पश्चात् भी 3 माह से कोमा स्थिति में हैं श्री विपिन चौरे के दिनांक 4-8-12 को  दरबार में उपस्थित होने पर सारा वृतान्त डाक्टरों द्वारा किया गया वर्णन का उल्लेख किया। जो कोमा स्थिति में हैं के बारे में बताया गयाा है कि उन्हें कालरूपी आत्म द्वारा फेंका गया है और वहंा उन्हें प्रभावित कर रही है यह भी वर्णन किया कि उन्हें शरीर के 3 स्थान पर चौक हैं एक स्थान सुन्न हैं तथा एक स्थान पर घाव होने लगा है और माताजी ने उन्हें उसी क्षण से लाभ देना प्रारम्भ किया जिसमें उन्हेें रक्त की गति ज्ञान गति सोच की गति तथा देखने की क्रिया का लाभ प्रारम्भ कर दिया।
- विपिन चौरे/ ग्राम चिल्लई मो.न. 9754643106 (4 अगस्त 2012)

पैर सुन्न था, सही हो गया:-
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मैं 18-8-12 को दरबार में उपस्थित हुआ उनका एक पैर पिछले 6 वर्ष से सुन्न अवस्था में था पैर में जरा भी हरकत नहीं होती थी मुड़ता नहीं था तथा छाती में साढ़े छ: माह दर्द रहता था। एक गठान भी थी बार-बार बुखार आकर पीड़ा होती थी डाक्टर के पास जांच कराने पर कैंसर बताया गया। माताजी ने दरबार में बताया कि  जागृत एवं निंद्रा अवस्था में इनकी छाती पर विगत एक माह से कोई  छाती पर बैठकर खींचता हैं खांसने पर तीव्र दर्द होता हैं दरबार में ही माताजी सुन्न पैर पर गति उत्यन्त की तथा छाती का दर्द को बन्द किया यह लाभ तत्काल दिया गया।
खुमानसिंह कुशवाहा  भोपाल :- मो.न. 8357077575

मेरी मुराद पूरी हुई:-
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मैं काफी समय से परेशान था। मां के दरबार में गया। यहां मैं हर शनिवार पांच बार गया। हमारी मुराद पूरी हो गई। यह दरबार सच्चा है।
अशोक सिन्हा (रेल्वे सर्विस) भोपाल 9826372048

रीड की हड्डी सही हो गई:-
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श्री जोगेन्द्र यादव भोपाल निवासी फौज में सर्विस करते हैं दिनांक 18-8-12 को दरबार में उपस्थित हुए डाक्टरों ने उनके उपचार/जांच करने पर बताया गया कि उनके 3 गुरिये (कमर के) 2 खन्ड में गेप आ गया है जिसके कारण उन्हें बैठने में दर्द होता था खड़े होने के पैरों कम्पन जलन होता हैं यह बीमारी पूरा शरीर ग्रसित होने का उल्लेख किया दरबार के माताजी ने बताया कि रात्रि 12.30 बजे के बाद 2 नारी जोड़े से स्वप्र में आकर इनके शरीर को प्रभावित करती है ये काल रूपी आत्मा ही बीमारी का मुख्य कारण हैं ये जिन्हें आसन पर शरीर से अलग कर कमर की पीड़ा पैरों का कम्पन,जलन दूर कर प्रमाणित किया कि दर्द देने वाली कालरूपी आत्मा हैं इस प्रकार माताजी द्वारा श्री जोगेन्द्र यादव को उक्त व्याधि से पूर्ण रूप से मुक्त कर स्वस्थ लाभ दिया गया।
- जोगेन्द्र यादव (फोज में सर्विस) भोपाल, मोबाइल नं.  992621621

दुर्बलता समाप्त हो गई, मैं चंगी हो गई:-
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स्वीटी को शारीरिक दुर्बलता चक्कर आना, खाना नहीं खाती थी बहुत ही अधिक शरीर क्षीण  हो गया था डाक्टरों से सारे परीक्षण कराने के पश्चात् उन्हें एच.आई.वी ग्रसित एड्स रोग बताया था माताजी के दरबार में उपस्थित होने के पश्चात् उसके खाने में भूख लगना खून बनना बन्द हो गया था वह चालू हो गया सभी दवाइंया बन्द होने के पश्चात् जो शरीर सूख गया था 15 दिवस में आश्चर्य रूप से परिवर्तन आकर स्वस्थ होने लगी बजन बड़ गया तथा शरीर से स्थूल होने लगी दरबार में माताजी द्वारा आदेश दिया गया था कि उनके दी गई रक्षा 6 माह तक शरीर से जुदा नहीं करें किंतु 3 माह पश्चात् रक्षा हटा दी गई और पुन: गम्भीर स्थिति में कमजोर हो गई दिनांक 25-8-12 को उनके पिता श्री साहिबराव दरबार में आकर प्रार्थना की एवं रक्षा प्राप्त की माताजी ने एक सप्ताह तक समय देकर चुकी दरबार में उपस्थित कराने का आदेश दिया।
- स्वीटी/साहिबराव, नासिक,  मो.न. 08805628138

विकलांगता खत्म हो गई:-
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अजय दीक्षित विगत 16 वर्षों से दाहिने पैर से विकलांग थे। डाक्टरों ने उनके जोड़ों के गेप से एक नली का दवना बताया तथा ऑपरेशन अति दुर्लभ बताया तथा खतरा होने की आशंका बताई। छेड़छाड़ करने पर बड़ी हानि होना बताया । माताजी ने दरबार में लकवा ग्रस्त पैर को जो 16 वर्षों से उठ नहीं पा रहा था समक्ष में उठवाया पैरों की उंगलियों से पकडऩे पर सेन्स नही था स्पर्श होने का मान कराया भी अजय को स्वप्र में विचित्र आकृति का मनुष्य दिखता हैं इसके उल्लेख किया पहले उन्हेें बैठने में कम्पन्न होता था सहारा लेना पड़ता था किन्तु आसन पर समक्ष में उक्त पैर में रक्त संचार का लाभ देकर पैर उठने तथा उसमें स्पर्श मान होने का लाभ दिया बैठने में बिनाा सहारे का और कम्पन ना होने का लाभ दिया।
- अजय दीक्षित भोपाल,  मो.न. 9752416602

किडनी सही हो गई:-
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मोहम्मद उर्फ पप्पू की पत्नी को पूर्ण चेतना नहीं थी बेहोशी को हालत मेे लेकर 25-8-12 को दरबार में उपस्थित हुये थे माताजी डाक्टरों ने जो परीक्षण उपरान्त बताया गया उसका पूर्ण विवरण का उल्लेख किया और डाक्टर  जो बताया उसके अनुसार उनकी पत्नी की एक किडनी 25.777 कार्य कर रही थी तथा दूसरी किडनी 100 खराब होकर कार्य करना बन्द कर दिया था डायलेसेस पर रखा गया था। दरबार में वर्णन किया गया कि आत्मा सता रही है घर में परेशानी बनी हुई हैं धन से क्षीण हो गया सोचा कार्य भूल जाता हैं घर के 10 सदस्यों में से 5 पर उक्त क्रिया का असर है उनकी पुत्री को भयानक आकृति दिखती है तथा ऐसा आभास होता हैं कि किसी ने धक्का दिया। पत्नी रात्रि में सोते समय भयभीत हो जाती है तथा डरावनी मुद्रा बना लेती हैं कई बार उन्हें विस्तर से उठाकर आत्मा द्वारा फेेंका गया- अस्पताल में भी फैंका गया उनकी पत्नी बैठ नहीं पाती थी उन्हें दरबार के 15-20 मिनिट तक बैठाया गया तथा जो किडनी 25. कार्य कर रही थी उसे कुछ ही क्षण में 80परसेंट कार्य योग्य बनाया तथा दूसरी किडनी जो पूर्ण खराब बताई थी उसे 40 परसेंट तक कार्य योग्य बनाया और बताया गया किडनी फेल्यूवर नही हैं आत्माऐं सता रही हैं यह लाभ तत्काल दिया गया भविष्य में उसे बिस्तर से कोई फेंकेगा नही, डरेगी नही, भयानकर आकृति नहीं दिखेगी बेहोशी से चेतन अवस्था में रहने का लाभ दिया
- मोहम्मद / पप्पू भोपाल,  मो.न. 9827095102

घर में अब शांति है:-
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घर में आशांति उन्हें स्वप्र में जल की धार में पल्टा हुआ सर्प दिखाई देता हैं अशांति/ व्याधियों के निराकरण हेतु शिखा बन्धन मुक्ति कराने हेतु 2 योग का वर्णन किया गया।
- अरुण रणधीर भोपाल,  मो.न. 9893366264

महाकाली दरबार का पता :-
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पंडित श्याम सुंदर चौरे (माताजी) संचालक एवं व्यवस्थापक

रैसलपुर महाकाली दरबार इटारसी-

होशंगाबाद रोड राजश्री ढाबा के पास

रैसलपुर (म.प्र.)

संपर्क मोबाइल : 0940753555, 08251065398

अधिक जानकारी के लिए इन सेवकगणों से संपर्क करें :-
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1. संदीप चौरे - 09691949993
2. हरिनारायण सोलंकी - 09926347329
3. रामनरेश चिमानिया- 09977997595
4. राजकुमार सोनी - 08827294576
5. दीपसिंह राजपूत - 09713911511
6. महेश सिंह पटेल - 08109228303
7. लखन बुधानी, जलगांव - 0942282789
8. विजय बजाज, जलगांव - 09595107833
9. मनमोहन शर्मा, अहमद नगर - 09960161111
10. दर्शन भाई, भोपाल - 09303625432
11. नवीन, भोपाल - 9827564080

उपरोक्त लेख मेरा  नहीं है सिर्फ जन-सेवार्थ प्रकाशित है न कि अंधविश्वास के  लिए आप सभी पाठक गण समझदार है अपने बुद्धि और विवेक का प्रयोग करते हुए फोन नंबर दिए गए है जानकारी  करे और अगर आपका दिल कहे तो एक बार जा  कर देखने में कोई बुराई नहीं है - हम तो कभी जा नहीं सके या समझे आवश्यकता नहीं पड़ी है -मगर सुना जरुर है कि लोगो को लाभ  हुआ है -जो लोग सच्चे मन से जाते है - माता  रानी आप पर कृपा करे -मेरी शुभ-कामना है -

Sunday, March 01, 2015

जीवन की समस्या दूर करे इन उपायों से -

जब कोई आदमी किसी परेशानी में फंस जाता है या किसी समस्या से छुटकारा नहीं मिलता है, तो हम किसी जानकार या बुजुर्ग व्यक्ति से इसकी चर्चा करते हैं। बुजुर्गों और अनुभवी लोगों के पास कभी-कभी ऐसे अभूतपूर्व टोटके निकल आते हैं, जिनको आजमाने से तत्काल ही मुसीबत से छुटकारा मिल जाता है। व्यावहारिक जीवन में इस प्रकार के टोटके अनेक लोगों द्वारा आजमाए जा चुके हैं। सिर्फ आवश्यकता है पूर्ण विश्वास की शंका होने पे फल -निष्फल में बदल जाता है - टोटके प्रभाव शाली है बस जिनसे किसी का अहित की अभिलाषा न की जाए -


हम नहीं कहते है कि हमारे मार्ग-दर्शन पे चले लेकिन श्रधा से किया गया कार्य सफलता की कुंजी है जिस प्रकार श्रद्धा और विश्वास से आप परीक्षा की तेयारी करते है और लगन -मेहनत का परिणाम प्राप्त होता है उसी प्रकार ये क्रियाये भी है -जिनको अंधविश्वास लगे कृपया करके इस पोस्ट पे कमेन्ट न करे .

ऐसे ही कुछ टोटके और उपाय हम यहां दे रहे हैं:-
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विवाह में विलंब होने पर:-
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यदि आप लड़की है और विवाह में विलंब हो रहा हो तो चांदी की एक ठोस गोली चांदी की ही चेन में पिरोकर शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को प्रातः गंगा जल व कच्चे दूध से पवित्र करके धूप दीप दिखाकर मंदिर में शिवलिंग या शिव-पार्वती के चरणों से छुआकर निष्ठापूर्वक प्रार्थना कर, गले में धारण कर लें। पहनने के पश्चात गरीबों को कुछ अवश्य खिलाएं। और लड़के के विवाह में विलंब हो रहा हो तो मिट्टी के कुल्हड़ में मशरूम ऊपर तक भर कर ढक्कन लगा कर किसी भी धार्मिक स्थान, मंदिर या मस्जिद में दान कर आएं। लड़का शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को सूर्यास्त से पूर्व विवाह शीघ्र होने की ईश्वर से प्रार्थना कर भोजन रसोईघर में बैठकर करे, रिश्ते आने लगेंगे।


व्यापार में समस्याओं को दूर करने के लिए:-
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यदि आपका  व्यापार नहीं चल रहा है तो आप जेब में चांदी का छोटा-सा ठोस हाथी सदा साथ रखें। याद रहे कि वह खोखला नहीं होना चाहिए, वरना लाभ नहीं मिल पाएगा। घर की नौकरानी को यदा-कदा मिष्ठान्न, कपड़े, चावल देते रहें। उसके साथ अच्छा बर्ताव करें व उसका आशीर्वाद लें, समस्याएं दूर होने लगेंगी और व्यापार गति पकड़ने लगेगा। तथा अमावस्या को मंदिर के बाहर बैठे भिखारियों को खीर बांटें, आशातीत लाभ प्राप्त होगा।


व्यवसाय में हानि होने पर:-
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यदि किसी के व्यवसाय में हानि हो रही हो, तो शुक्ल पक्ष के बुधवार को व्यवसाय स्थल पर लाल रेशमी कपड़े पर गणेश शंख स्थापित करें। शंख में गाय का दूध व जल भर कर उसके आधे से आचमन कर और आधा अपने व्यवसाय स्थल पर छिड़कें। शंख को स्थापित करने से पूर्व उसे शुद्ध कर उसाक रोली-कुमकुम से तिलक करें। फिर लडडू का भोग चढ़ाएं। श्रद्धापूर्वक यह उपाय करने पर बंद उद्योग भी शीघ्र चालू हो जाते हैं और जो घाटे में चल रहे होते हैं वे लाभ देने लगते हैं। बंद पड़े कारखानों को फिर से चालू करने के लिए यह टोटका सर्वोत्तम है। गणेश शंख को जिस ओर से भी देखें उसमें गणपति के दर्शन होने की अनुभूति होती है। यह शंख जहां स्थापित हो उस स्थान पर कोई संकट नहीं आता और शत्रु भी मित्र बन जाता है।


उच्च शिक्षा व करियर के लिए:-
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आप चाहते है अगर उच्च शिक्षा और केरियर में प्रगति तो चांदी का चैकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें। बुधवार को लाल कपड़े की थैली में सौंफ भरकर तकिए के नीचे रखें, साथ ही रविवार को तांबे का सिक्का सफेद या लाल धागे में गले में धारण करें। अच्छे सकारात्मक परिणाम के लिए सूर्यास्त के बाद रात्रि में दूध न लें। दिन में दूध-दही पनीर ले सकते हैं। दही व पनीर रात्रि को भी ले सकते हैं, पर दूध नहीं।


बीमार व्यक्ति को ठीक करने के लिए:-
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यदि घर में कोई बहुत बीमार हो, तो मोती शंख में जल भरकर पूजा घर में रखें और दवाई का सेवन मोती शंख के जल से करवाएं। बीमार के स्वास्थ्य में सुधार आने लगेगा और वह शीघ्र ही पूरी तरह ठीक हो जाएगा। मोती शंख दुर्लभ व अत्यंत खूबसूरत शंखों में से एक है।


बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने के लिए:-
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जिन बच्चों का पढ़ाई में मन न लगता हो, परीक्षा में नंबर कम आते हों वे यह सरल उपाय करें। अपने अध्ययन कक्ष में मां सरस्वती की तस्वीर अवश्य लगाएं तथा रोज पढ़ने बैठने से पूर्व उस तस्वीर पर गुलाब की 3 अगरबत्तियां जलाकर अवश्य घुमाएं व वहीं स्टैंड पर लगा दें और हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।

Friday, February 27, 2015

ऊपरी हवाओं से बचाव के लिए अनुभूत प्रयोग -


इस संसार में कुछ नकारात्मक उर्जा या अतृप्त शक्तियां मौजूद है जो कभी-कभी अचानक ही कमजोर या कम इक्षा शक्ति वाले लोगो को प्रभावित कर सकती है और व्यक्ति परेशान हो सकता है इस तरह किसी भी प्रकार पीड़ित व्यक्ति ये प्रयोग करके लाभ ले .




लहसुन के तेल में हींग मिलाकर दो बूंद नाक में डालने, नीम के पत्ते, हींग, सरसों, बच व सांप की केंचुली की धूनी देने तथा रविवार को काले धतूरे की जड़ हाथ में बांधने से ऊपरी बाधा दूर होती है।

इसके अतिरिक्त गंगाजल में तुलसी के पत्ते व काली मिर्च पीसकर घर में छिड़कने, गायत्री मंत्र के (सुबह की अपेक्षा संध्या समय किया गया गायत्री मंत्र का जप अधिक लाभकारी होता है) जप, हनुमान जी की नियमित रूप से उपासना, राम रक्षा कवच या रामवचन कवच के पाठ से नजर दोष से शीघ्र मुक्ति मिलती है। साथ ही, पेरीडॉट, संग सुलेमानी, क्राइसो लाइट, कार्नेलियन जेट, साइट्रीन, क्राइसो प्रेज जैसे रत्न धारण करने से भी लाभ मिलता है।

Thursday, February 26, 2015

आप भी मानते है क्या इन बातो को ....?

* भारत में कई अंधविश्वास और मान्यताएं हैं जिन्हें या तो धर्म से जोड़ा जाता है या उन्हें विश्वास बताया जाता है। कई लोगों का कहना है कि बिल्ली रास्ता काट दें तो आगे ना जाएं जबकि कई लोगों का मानना है कि कुत्ते के रोने से अनहोनी होती है। आज हमारे बीच कई ऐसे अंधविश्वास है जिनसे रोज आपका सामना होता है। आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही कुछ अंधविश्वास जो कि हमारे बीच में प्रचलित हैं।


* नींबू-मिर्च नींबू मिर्च आप भारत के कई घरों और दुकानों में नींबू मिर्च लटकी हुई देखी होगी। मिर्चो के साथ एक नींबू को लटकाना अच्छा  माना जाता है, लोगों का मानना है कि इससे बुरी नजर नहीं लगती है। लोग मानते है कि ऐसा करने से घर में या व्यवसाय में सुख-समृद्धि वापस आ जाती है।




* कहा जाता है कि अगर कुत्ता रोता है तो घर के लिए अशुभ होता है। मान्यता है कि घर के सामने घर की ओर मुंह करके कोई कुत्ता रोए तो उस घर पर किसी प्रकार की विपत्ति आने वाली है या घर के किसी सदस्य की मौत होगी। कहा जाता है कि घर के सामने सुबह के समय यदि कुत्ता रोए तो उस दिन कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। यदि किसी मकान की दीवार पर कुत्ता रोते हुए पंजा मारता दिखे तो समझा जाता है कि उस घर में चोरी हो सकती है या कोई संकट आ सकता है।


* सपनों से पता चलता है शुभ और अशुभ: अंधविश्वास का सबसे बड़ा उदाहरण है सपनें। लोग सपनों के आधार पर ही अपना भविष्य देख लेते है। कई लोग कहते हैं कि सपने में सांप दिख जाए तो अच्छा होता है, कोई कहता है कि सांप दिख जाए तो अशुभ होता है। हालांकि विज्ञान के अनुसार सपने आने के कई कारण है। साथ अच्छे-बुरे सपने आपकी मानसिक दशा पर निर्भर करते है


* मंगलवार, गुरुवार को बाल कटवाना अशुभ: समाज में पढ़े लिखे लोगों के होने के बाबजूद भी लोग इस अंधविश्वास को सबसे ज्यादा मानते है। कहा जाता है कि मंगलवार, गुरुवार, शनिवार को बाल नहीं कटवाने चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है। इतना ही नहीं अब तो सैलून भी मंगलवार या गुरुवार को बंद रहते हैं।



* माना जाता है कि अगर आप किसी काम से जा रहे हैं और कोई टोक दे या पूछे कि कहां जा रहो..? तो इसका मतलब आपका काम नहीं होगा। साथ ही अगर आप कहीं जा रहे हो और अगर आपके पीछे से कोई छींक दे तो आपका काम नहीं होगा। जबकि बछड़ा, बैल, सुहागिन, मेहतर और चूड़ी पहनाने वाला दिखाई दे तो शुभ होता है।


* कई लोगों मानना है कि अगर घर के बारह रखे जूतें या चप्पल उल्टे हो जाएं तो उन्हें तुरंत सीधा कर देना चाहिए। ऐसा ना करने पर आपकी किसी से लड़ाई होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही अगर आप चप्पल सीधी कर रहे हैं तो आपको दूसरी चप्पल का सहारा लेना चाहिए। हालांकि कई लोग जूतें-चप्पलों को नजर उतारने के लिए भी काम में लेते हैं।

* हिंदू धर्म में झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि शाम के वक्त और रात में झाड़ू लगाने से लक्ष्मी चली जाती है और व्यक्ति के बुरे दिन शुरू हो जाते हैं। इसलिए रात को झाड़ू नहीं लगानी चाहिए। साथ ही झाड़ू को खड़ा भी नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे घर में कलह होता है। खुले स्थान पर झाड़ू रखना अपशकुन माना जाता है इसलिए इसे छिपाकर रखा जाता है।

* बांस भले ही कई चीजें बनाने के काम में आता हो, लेकिन भारतीय सभ्यता में बांस को लेकर भी कई अंधविश्वास है। कहा जाता है कि अगर कोई बांस जलाता है तो उसका वंश नष्ट हो जाता है या घर में किसी की म्रत्यु  हो जाती है। हालांकि कई लोग बांस को शुभ मानते हैं



* बंदर का मुंह सुबह देखने से खाना नहीं मिलता..?ऐसे तो बंदर को भगवान हनुमान का प्रतीक माना जाता है, लेकिन माना जाता है कि अगर सुबह-सवेरे बंदर के दर्शन हो जाए तो दिनभर खाना नसीब नहीं होता है। जबकि शाम को बंदर दिख जाए तो शुभ होता है। बंदर का दाहिनी और बिल्ली का बाईं ओर दिखना शुभ होता है।


* ऐसी मान्यता हैं कि किसी सुनसान या जंगल की किसी विशेष भूमि कर पेशाब कर देने से भूत पीछे लग जाता है। ऐसे में कुछ लोग पहले थूकते हैं फिर पेशाब करते हैं और कुछ लोग कोई मंत्र वगैरह पढ़कर ऐसा करते हैं। साथ ही लोग नदी, पूल या जंगल की पगडंडी पर पेशाब नहीं करते। भोजन के बाद पेशाब करना और उसके बाद बाईं करवट सोना बड़ा हितकारक है।


* हमने अपने जीवन में कई बार करके इन बातो को समझा है और किसी हद तक कहूँ तो परिणाम सच और सार्थक ही पाया है मगर समझ नहीं आता ये सब अंधविश्वास है  या कोई वैज्ञानिक कारण ...आप ने कभी आजमाया है कभी इन चीजों को अगर हाँ तो क्या कहेगे आप ....?