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Wednesday, August 26, 2015

मधुमेह है -एक मधुमालती का पौधा लगाये-

मधुमालती एक बहुत ही सौम्य प्रकृति का पौधा है । लताएं कम भूमि और कम पानी में अधिक हरियाली प्रदान करती है व छाया देती है साथ ही रंग रंगीले फूलों से घर आंगन की शोभा भी बढ़ती है ।




इस कारण इन्हें घरों या कार्यालयों के प्रवेश स्थल, दीवारों के साथ साथ या किनारों पर लगाना बहुत ही उपयोगी रहता है । मधुमालती एक ऐसी लता है जो साल भर हरी रहती है और इस पर लाल, गुलाबी व सफेद रंग के मिश्रित गुच्छों के रूप में फूल आते हैं जिनमें भीनी खुशबू होती है ।


इसकी डालियाँ नर्म होती है जिन्हें आसानी से  काटा छांटा जा सकता है । यह लता बहुत कम देख भाल मांगती है और एक बार जड़ पकड़ लेने के बाद पानी नहीं देने पर भी चलती रहती है ।

ये लता संग हरियाली के साथ  पर्यावरण संरक्षण का काम करेगी, बल्कि घरों की खूबसूरती भी बढ़ाएगी । लताएं वातावरण से कार्बन डाई आॅक्साइड अवशोषित कर हमें आक्सीजन प्रदान करती ही है, इनके पत्ते अपनी सतह पर धूल कण रोक कर हवा में धूल के कणों की मात्रा भी कम करत हैं ।

लताओं के पत्ते पानी को वाष्पोत्सर्जित करते है जिससे हवा का तापमान और सूखापन घटता है । लताएं घनी होती हैं, इस कारण दीवारों पर धूप की मार कम पड़ती है । नतीजा घरों का तापमान सामान्य बना रहता है । मधुमालती भी एक ऐसी ही लता है जो साल भर हरी रहती है और इसके फूलों के गुच्छों से भीनी भीनी खुशबू आती रहती है । मालती या मधुमालती के फूल बहुत सुन्दर होते है ।



जाने  इसके  रोग में उपयोग :-
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मधुमालती फूल के फूल और पत्तियों का रस मधुमेह के लिए बहुत अच्छा है ।

इसके फूलों से आयुर्वेद में वसंत कुसुमाकर रस नाम की दवाई बनाई जाती है । इसकी 2-5 ग्राम की मात्रा लेने से कमजोरी दूर होती है और हारमोन ठीक हो जाते हैं ।

प्रमेह, प्रदर, पेट दर्द, सर्दी जुकाम और मासिक धर्म आदि सभी समस्याओं का यह समाधान है । प्रमेह या प्रदर मे इसके 3-4 ग्राम फूलों का रस मिश्री के साथ लें ।

शुगर की बीमारी में करेला, ,खीरा, टमाटर के साथ मालती के फूल डालकर जूस निकालें और सवेरे खाली पेट लें या केवल इसकी 5-6 पत्तियों का रस ही ले , वह भी काम करेगा ।

मधुमालती की बेल कई घरों में लगी होंगी इसके फूल और पत्तियों का रस मधुमेह के लिए बहुत अच्छा है . इसके फूलों से आयुर्वेद में वसंत कुसुमाकर रस नाम की दवाई बनाई जाती है . इसकी 2-5 ग्राम की मात्रा लेने से कमजोरी दूर होती है और हारमोन ठीक हो जाते है . प्रमेह , प्रदर , पेट दर्द , सर्दी-जुकाम और मासिक धर्म आदि सभी समस्याओं का यह समाधान है 
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प्रमेह या प्रदर में इसके 3-4 ग्राम फूलों का रस मिश्री के साथ लें .

कमजोरी में भी इसकी पत्तियों और फूलों का रस ले सकते हैं .

पेट दर्द में इसके फूल और पत्तियों का रस लेने से पाचक रस बनने लगते हैं . यह बच्चे भी आराम से ले सकते हैं .

सर्दी ज़ुकाम के लिए इसकी एक ग्राम फूल पत्ती और एक ग्राम तुलसी का काढ़ा बनाकर पीयें . यह किसी भी तरह का नुकसान नहीं करता . यह बहुत सौम्य प्रकृति का पौधा है .

पेट दर्द में इसके फूल और पत्तियों का रस लेने से पाचक रस बनने लगते हैं । सर्दी जुकाम के लिए इसकी एक ग्राम फूल पत्ती और एक ग्राम तुलसी का काढ़ा बनाकर पीयें ।

Wednesday, June 10, 2015

मधुमेह के रोगियों के लिए चने का सत्तू रामबाण-

चना, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, चावल, सिंघाड़ा, राजगीरा, गेहूं आदि को बालू में भूनने के बाद उसको चक्की में पीसकर बनाए गए चूर्ण (पावडर) को सत्तू कहा जाता है।


ग्रीष्मकाल शुरू होते ही भारत में अधिकांश लोग सत्तू का प्रयोग करते हैं। खासकर दूर-दराज के छोटे क्षेत्रों व कस्बों में यह भोजन का काम करता है।

चने वाले सत्तू में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है और मक्का वाले सत्तू में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। इसी प्रकार सभी का अपना-अपना गुणधर्म है| इन सभी प्रकार के सत्तू का अकेले-अकेले या सभी को किसी भी अनुपात में मिलाकर सेवन किया जा सकता है।

सत्तू के विभिन्न नाम:-
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भारत की लगभग सभी आर्य भाषाओं में सत्तू शब्द का प्रयोग मिलता है, जैसे- पाली प्राकृत में सत्तू, प्राकृत और भोजपुरी में सतुआ, कश्मीरी में सोतु, कुमाउनी में सातु-सत्तू, पंजाबी में सत्तू, सिन्धी में सांतू, गुजराती में सातु तथा हिन्दी में सत्तू एवं सतुआ।

यह इसी नाम से बना बनाया बाजार में मिलता है। गुड़ का सत्तू व शक्कर  का सत्तू दोनों अपने स्वाद के अनुसार लोगों में प्रसिद्ध हैं। सत्तू एक ऐसा आहार है जो बनाने, खाने में सरल है, सस्ता है, शरीर व स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और निरापद भी है।

विभिन्न प्रकार के सत्तू:-
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जौ का सत्तू :-
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जौ का सत्तू शीतल, अग्नि प्रदीपक, हलका, दस्तावर (कब्जनाशक), कफ तथा पित्त का शमन करने वाला, रूखा और लेखन होता है। इसे जल में घोलकर पीने से यह बलवर्द्धक, पोषक, पुष्टिकारक, मल भेदक, तृप्तिकारक, मधुर, रुचिकारक और पचने के बाद तुरन्त शक्ति दायक होता है। यह कफ, पित्त, थकावट, भूख, प्यास और नेत्र विकार नाशक होता है।

जौ-चने का सत्तू :-
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चने को भूनकर पिसवा लेते हैं और चौथाई भाग जौ का सत्तू मिला लेते हैं। यह जौ चने का सत्तू है। इस सत्तू को पानी में घोलकर, घी-शकर मिलाकर पीना ग्रीष्मकाल में बहुत हितकारी, तृप्ति दायक, शीतलता देने वाला होता है।

चावल का सत्तू :-
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चावल का सत्तू अग्निवर्द्धक, हलका, शीतल, मधुर ग्राही, रुचिकारी, बलवीर्यवर्द्धक, ग्रीष्म काल में सेवन योग्य उत्तम पथ्य आहार है।

जौ-गेहूँ चने का सत्तू :-
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चने की दाल एक किलो, गेहूँ आधा किलो और जौ 200 ग्राम। तीनों को 7-8 घंटे पानी में गलाकर सुखा लेते हैं और जौ को साफ करके तीनों को अलग- अलग घर में या भड़भूंजे के यहां भुनवा कर, तीनों को मिला लेते हैं और पिसवा लेते हैं। यह गेहूँ, जौ, चने का सत्तू है।

सेवन विधि :-
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इनमें से किसी भी सत्तू को पतला पेय बनाकर पी सकते हैं या लप्सी की तरह गाढ़ा रखकर चम्मच से खा सकते हैं। इसे मीठा करना हो तो उचित मात्रा में देशी शक्कर या गुड़ पानी में घोलकर सत्तू इसी पानी से घोलें। नमकीन करना हो तो उचित मात्रा में पिसा जीरा व सेंधा नमक पानी में डालकर इसी पानी में सत्तू घोलें। इच्छा के अनुसार इसे पतला या गाढ़ा रख सकते हैं। सत्तू अपने आप में पूरा भोजन है, यह एक सुपाच्य, हलका, पौष्टिक और तृप्तिदायक शीतल आहार है, इसीलिए इसका सेवन ग्रीष्म काल में किया जाता है।

चिकित्सा विज्ञान में सत्तू के लाभ :-
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चिकित्सा विज्ञान की कई खोजों में यह दावा किया गया है कि पेट की बीमारियों तथा मधुमेह के रोगियों के लिए चने का सत्तू रामबाण है।

कीटनाशक युक्त जहरीले बहुब्राण्ड शीतल पेय पीने से शरीर में कई बीमारियां होती हैं, लेकिन चने के सत्तू का सेवन ख़ासकर गर्मी के मौसम में पेट की बीमारियों तथा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। ख़ासकर यह मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण है।

कई डॉक्टर कहते हैं कि चने के सत्तू का सेवन हर आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं, लेकिन जोड़ों के दर्द के रोगी को इसके सेवन से बचना चाहिए।

जहां एक तरफ बहुब्राण्ड शीतल पेय कम्पनियां भीषण गर्मी में अपने ग्राहकों को रिझाने तथा अपने ब्राण्ड का प्रचार करने के लिए समाचार पत्रों, टीवी के माध्यम से प्रचार करके लोगों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं उसी के बीच अपनी गुणवत्ता तथा स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण सत्तू बिना किसी प्रचार के मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद जैसे महानगरों सहित पूरे भारत में पुनः लोगों की ख़ास पसन्द बन गया है।

एक ओर कोकाकोला, पैप्सी, लिमका आदि पेयजल पीने से शरीर में वसा की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण कई बीमारियां हो सकती हैं, तो दूसरी ओर चने के सत्तू के सेवन से खासकर गर्मी के मौसम में पेट की बीमारियों तथा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलता है. विशेष रूप से डायबीटीज के मरीजों के लिए यह विशेष गुणकारीहै.आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार चने का सत्तू गर्मी के मौसम में तापमान को नियंत्रित करने के साथ साथ स्वास्थ्यवर्धक भी है।

जानकारों का कहना है कि सत्तू के सेवन से ख़ासकर गर्मी के मौसम में पेट की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। चने से बनने वाले सत्तू के गुणकारी परिणाम से आज यह आम वर्ग के साथ साथ सुविधा सम्पन्न लोगों की पहली पसन्द बनता जा रहा है।


बाज़ार में बिकने वाले शीतल पेय पदार्थ लोगों को आकर्षित तो कर सकते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में संतुष्ट करके स्वास्थ्य नहीं दे सकते बल्कि हानिकारक होते है, जबकि चने से बना सत्तू गर्मी से निजात दिलाने के साथ साथ शरीर के लिए काफ़ी लाभदायक है और इसी का परिणाम है कि आज सत्तू पीने वालों में सभी वर्गों के लोग आते हैं और सत्तू का सेवन करते हैं।

मोटापे में भूख लगने पर जौ एवं चने से निर्मित सत्तू का सेवन करने पर भूख तो शांत होती ही है साथ ही लंबे समय तक क्षुधा शांत रहती है। साधारणतया सत्तू में गुड़ या शक्कर पानी में घोलकर सेवन किया जाता है। डायबिटीज के रोगी चाहें तो गुड़ या शक्कर के स्थान पर नमक भी डालकर स्वादिष्ट बना सकते हैं।


 सत्तू से हम पेय, परांठे, कचौरी तो बनाते ही हैं लेकिन सत्तू से स्वादिष्ट लड्डू भी बहुत आसानी से और बहुत जल्दी बनकर तैयार हो जाते हैं. किसी त्यौहार पर यदि आपको तुरत फुरत मिठाई बनानी हो तो सत्तू के लड्डू बना लीजिये. सभी को बहुत पसंद आयेगे.

सामग्री:-
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सत्तू - 2 कप (250 ग्राम)
बूरा या चीनी पाउडर- 1.5 कप (200 - 250 ग्राम)
घी - 1 कप (200 ग्राम)
छोटी इलायची - 7-8
पिस्ते - 10-12
काजू - 20-25
बादाम - 20-25

विधि:-
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कढा़ई में घी डालकर पिघला लीजिए, घी पिघलने के बाद सत्तू डालकर अच्छी तरह मिक्स करते हुए, लगातार चलाते हुये, मीडियम और धीमी आग पर हल्का सा भून लीजिए. सत्तू 5-6 मिनिट में अच्छी महक के साथ भुन कर तैयार हो जाता है, गैस बंद कर दीजिए और मिश्रण को अलग प्याले में निकाल लीजिए, ताकि ये जल्दी से ठंडा हो जाय., अगर भुने हुये सत्तू को बहुत जल्दी ठंडा करना हो तो इसे फ्रिज में रखकर ठंडा किया जा सकता है.

काजू, पिस्ते और बादाम को छोटे-छोटे टुकडों में काट कर तैयार कर लीजिए. इलायची को छील कर पाउडर बना लीजिए. सत्तू के ठंडा होने पर इसमें बूरा, कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ते(थोडे़ से पिस्ते बचा कर रख लें) और इलायची पाउडर डाल दीजिए और सभी चिजों को अच्छी तरह मिलाकर मिक्स करके तैयार कर लीजिए. लड्डू बनाने के लिये मिश्रण तैयार है.

मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा हाथ में लीजिये और दबा दबा कर अपने मन पसन्द आकार के लड्डू बना कर थाली में रखिये. सारे मिश्रण से लड्डू बना कर थाली में रख लीजिये. सभी लड्डूओं पर पिस्ते के टुकडे़ सजाएं. बहुत ही अच्छे और स्वादिष्ट सत्तू के लड्डू बनकर तैयार, परोसिये और खाइये. बचे हुये लड्डू कन्टेनर में भर कर रख लीजिये और 2 महिने तक खाते रहिये.

गरम सत्तू में बूरा नहीं मिलाएं क्योंकि ऎसा करने से मिश्रण बहुत पतला हो जाता है और लड्डू बनाना बांधना मुश्किल हो जाता है

चने के सत्तू का बाज़ार कितना बड़ा है इसका कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है, लेकिन इसकी खपत से माना जा रहा है कि इसका रोज़ाना का करोड़ों रुपए का व्यापार होता है और देश में हजारों लोगों को इससे रोजगार प्राप्त होता है|

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

Saturday, June 06, 2015

मधुमेह के रोगी को अलसी केसे खाना है ....!


* डायबिटीज या मधुमेह एक चयापचय विकृति या रोग है जिसमें ब्लड शुगर की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, क्योंकि शरीर में ब्लड शुगरको नियंत्रित करने वाले इंसुलिन हार्मोन का बनना कम हो जाता है और/या इंसुलिन अपने कार्य को ठीक से नहीं कर पाता है।







डायबिटीज में अलसी कैसे खायें?

 * डायबिटीज के रोगियों के लिए अलसी एक आदर्श और अमृत तुल्य भोजन है, क्योंकि यह जीरो कार्ब भोजन है। अलसी ब्लड शुगर नियंत्रित रखती है, डायबिटीज के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करती हैं। चिकित्सक डायबिटीज के रोगी केा कम शर्करा और ज्यादा फाइबर लेने की सलाह देते हैं। अलसी में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इस कारण अलसी सेवन से लंबे समय तक पेट भरा हुआ रहता है, देर तक भूख नहीं लगती है। यह बी. एम. आर. केा बढ़ाती है, शरीर की चर्बी कम करती है और हम ज्यादा कैलोरी खर्च करते हैं। अतः मोटापे के रोगी के लिये अलसी उत्तम आहार है।

उपरोक्त सभी बातों का सीधा अर्थ हैः-
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ऊर्जा का सर्वोत्तम स्रोत है

 इससे शरीर में वसा का कम होना

 स्नायु कोशिकाओं में थकान नहीं होना

 ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों की उपयोगिता में वृद्धि

 स्वास्थ्य में वृद्धि

 यानी छरहरी बलिष्ठ मांसल देह

अब जाने डायबिटीज में अलसी कैसे खायें:-
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* संतुलित भोजन में अलसी का समावेश आसान, सस्ता और दूरदर्शी कदम है, लेकिन इसके परिणाम बड़े चमत्कारी मिलते हैं।यदि आप ज्यादा फाइबर लेने के आदी नहीं हैं तो अलसी को  कम मात्रा से शुरू करें और फिर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं।

* अलसी का सेवन करने से पहले इसे पीसना जरूरी है। इसे मिक्सर के ड्राई ग्राइंडर में दरदरा पीसें। इसे दही, दूध, सब्जी, दलिया, सलाद आदि के साथ भी लिया जा सकता है। पानी भी ज्यादा पीयें। डायबिटीज के रोगी को पूरा फायदा लेने के लिए रोजाना 30 से 60 ग्राम अलसी खाना चाहिये।

अलसी की रोटी :-
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* डायबिटीज के रोगी को रोज सुबह 20 ग्राम और शाम को 20 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। अलसी को पीस कर आटे में मिला कर रोटी बना कर खाना चाहिये। यही खाने का सबसे अच्छा तरीका है।

अलसी का तेल :-
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* अलसी के तेल को भी दही या पनीर में मिला कर लिया जा सकता है। यह भी याद रखें कि अलसी के तेल में सिर्फ फैट्स होते हैं। फाइबर, प्रोटीन, लिगनेन, विटामिन और खनिज तत्व हमें सिर्फ बीज द्वारा ही प्राप्त होते हैं।

आगे आपको दुसरे पोस्ट में बतायेगे कि अलसी कैंसररोधी  प्रधान आहार भी है ...!

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

Sunday, February 15, 2015

मधुमेह का एक सरल सफल प्रयोग ....!

* ये एक येसा प्रयोग है जो आसान भी और सफल भी है करे और लाभ ले । बहुत ही आसानी से बन जाती है परंतु बहुत प्रभावशाली है। यह चिकित्सा मधुमेह मे जरूर लाभ करती है

* विजयसार नाम से एक लकड़ी है ये हमारे भारत में मध्य प्रदेश से लेकर पूरे दक्षिण भारत मे पाया जाता है। इसकी लकड़ी के टुकड़े हर जड़ी बूटी बेचने वाले पर आसानी से मिल जाते है। इसकी लकड़ी का रंग हल्का लाल रंग से गहरे लाल रंग का होता है।


* इस संजीवनी फार्मूले को बाजार में लाने के बजाय फाइलों में कैद रखा गया है। तर्क यह है कि जिस पौधे विजयसार से यह दवा विजयसार बनी है, उसकी उपलब्धता कम है। इसलिये कोई दवा कंपनी इस फार्मूले को खरीदने के लिये तैयार नहीं जबकि विजयसार के मनुष्यों पर क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं। 

* यह दवा नये मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है ही, साथ में उन रोगियों जिन्हें मधुमेह रोधी दवा खाने से दवा खाने से कोई लाभ नहीं होता, उनके लिये भी अचूक है। फिर भी इस फार्मूले को कोई दवा कंपनी लेने को तैयार नहीं। क्योंकि जिस पेड़ विजयसार से यह दवा बनी है, उसकी संख्या कम है। तर्क है कि कंपनियों को कच्चा माल नहीं मिलेगा। तो देशभर की जरूरत के लिये दवा कैसे बन पाएगी! बस, तब से दवा का फार्मूला फाइलों में कैद है। वैज्ञानिक अध्ययनों से इस बात की पुष्टि तो होती है कि इस पौधे की संख्या देश में घट रही है क्योंकि इसकी लकड़ी का व्यवसायिक महत्व है तथा वन विभाग ने इस संरक्षित पौधों की श्रेणी में रखा है।

* आप बाजार से आधा किलो विजयसार की लकड़ी के टुकड़े बाजार से ले आए। जिसमे घुन ना लगा हो। इसे लाकर सूखे कपड़े से साफ कर ले। अगर टुकड़े बड़े है तो उन्हे तोड़ कर छोटे (गेहु /चने के आकार के) टुकड़े बना ले।फिर आप एक मिट्टी का बर्तन ले और इस लकड़ी के छोटे छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को दो कप या एक गिलास पानी में डाल दे । सुबह तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी ले और दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दे शाम को इस पानी को उबाल कर छान ले। फिर इसे ठंडा होने पर पी ले।

* इसकी मात्रा रोग के अनुसार घटा या बढ़ा भी सकते है अगर आप अग्रेजी दवा का प्रयोग कर रहे है तो एक दम न बंद करे बस धीरे -धीरे कम करते जाए अगर आप इंस्युलीन के इंजेक्शन प्रयोग करते है वह 1 सप्ताह बाद इंजेक्शन की मात्रा कम कर दे। हर सप्ताह मे इंस्युलीन की मात्रा 2-3 यूनिट कम कर दे।

विजयसार की लकड़ी से बने गिलास में रात में पानी भर कर रख दिया जाता है सुबह भूखे पेट इस पानी को पी लिया जाता है विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं l विजयसार को ना केवल आयुर्वेद बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में बहुत उपयोगी मानता है

* प्रत्येक मधुमेह के रोगी को 15 दिन मे 1 बार पेट साफ की दवाई जरूर लेनी चाहिए।

* यह किसी को भी हानि नहीं करता केवल लाभ ही करता है. यह दवा सिर्फ 12 सप्ताह में मधुमेह को ठीक कर देती है। विजयसार अम्रत रस है मधुमेह रोगियों के लिए ....!

मधुमेह नाशक पाउडर :-
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* इसके लिए गिलोय,गुड़मार,कुटकी,बिल्व पत्र,जामुन की गुठली, हरड़, चिरायता,आंवला, काली जीरी,तेज पत्र,बहेड़ा नीम पत्र एवं अन्य जड़ी बूटियों को एक निश्चित अनुपात में लेकर पाउडर बनाया जाता है जो की डायबिटीज में बहुत फायदेमंद साबित होता है l उपरोक्त उपाय जरुरत के अनुसार उपयोग करने चाहियें ,खून में शुगर का लेवल कम ना हो जाये इसलिए समय समय पर शुगर चैक करते रहना चाहिए l

आयुर्वेद में बसंत कुसुमाकर रस,शिलाजत्वादि वटी,चन्द्र प्रभा वटी , शुद्ध शिलाजीत तथा अन्य अनेक दवाओं का प्रयोग किया जाता है ये दवाइयाँ डायबिटीज में बहुत फायदेमंद होती हैं लेकिन इन्हे चिकित्सक की राय से ही सेवन करना चाहिए l

Wednesday, October 08, 2014

मधुमेह रोग से राहत मिलती है -

सदाबहार ( सदाफूली ) की तीन -चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने 

से मधुमेह रोग से राहत मिलती है | सदाबहार ( सदाफूली ) के पौधे के चार 

पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी 

लें | इससे मधुमेह ,मिटता है | यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक 

करना चाहिए -


आधे कप गरम पानी में सदाबहार ( सदाफूली ) के तीन ताज़े गुलाबी फूल 05 मिनिट तक भिगोकर रखें | उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें | यह प्रयोग 08 से 10 दिन तक करें | अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ -



मधुमेह को नियंत्रण करने के कुछ आसन से घरेलू उपाय:-
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तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इनसुलिन के लिये सहायक होते है । इसलिए शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते को प्रतिदिन खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।


10 मिग्रा आंवले के जूस को 2 ग्राम हल्दी के पावडर में मिला लीजिए। इस घोल को दिन में दो बार लीजिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।


काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है। मधुमेह के रोगियों को काले नमक के साथ जामुन खाना चाहिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।


लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें।

उपचार और प्रयोग-