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Wednesday, October 21, 2015

नींद न आये या अधिक नींद आये तो क्या करे -

जिनके घर में अनिष्ट शक्तियों का कष्ट होता है या घर में कोई वास्तु दोष होता है  उनके घर के सदस्यों को या तो नींद नहीं आती या अत्याधिक नींद आती है या दिन भर आलस बना रहता है तो आपको ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए यह जान लेते हैं - बिना किसी अतिरिक्त दवा के -




यदि नींद अधिक आती हो या नींद नहीं आती हो तो एक बात सुस्पष्ट है कि घर का वातावरण अशुद्ध है अतः घर में वास्तु शुद्धि के सारे उपाय नियमित करें -

सबसे पहले ये उपाय करे :-



सबसे पहले आप अपने घर में एक तुलसी के पौधे को लगायें तथा घर एवं आसपास के परिसर को स्वच्छ रखें |

रात को अपने घर में दो दिन नीमपत्ती की धुनी जलाएं या फिर घर में कंडे या लकड़ी से अग्नि प्रज्वलित कर धुना, लोबान एवं गूगुल जलाएं |

घर में नामजप करें या संतों के भजन-स्त्रोत्र -पठन या सात्त्विक नाम जप की ध्वनि रिकार्डर चलायें |

घर में नियमित गौ मूत्र का छिड़काव् करें ये आस पास के सभी निगेटिव वाइरस को खत्म करने की छमता रखता है- पुराने ज़माने में लोग जब मकान कच्चे हुआ करते थे तो गाय के गोबर से आँगन इत्यादि को लीपते थे उसका लाजिक भी यही था घर के आस पास निगेटिव वाइरस को समाप्त करना लेकिन गाय के मूत्र में आज भी वही गुण विधमान है ये एक प्राक्रतिक फिनायल है-

आप जैसे भी अपने घर कलह क्लेश टालें, वास्तु देवता "तथास्तु" कहते रहते हैं हैं अतः क्लेश से क्लेश और बढ़ता है और धन का नाश होता है जिस घर में क्लेश होता है वहां कभी सुख सम्पति नहीं आती है इसलिए कहावत है "जहाँ सुमति तहां सम्पति नाना ,जहाँ कुमति तहां विपति निधाना"

जब कभी भी -सत्संग प्रवचन का आयोजन करें - अतरिक्त स्थान घर में हो तो धर्मकार्य हेतु या साप्ताहिक सत्संग हेतु वह स्थान किसी संत या गुरु के कार्य हेतु अर्पण करें यदि ये भी न हो सके तो एक बार नवरात्रि में माता की आरती पाठ इत्यादि आयोजन करे जिस घर में कोई भी एक व्यक्ति हनुमान चलिषा या हनुमान अष्टक का पाठ कर लेता है उसके घर में कलह, विपति, बीमारी आदि कोसो दूर रहती है सिर्फ पांच मिनट का पाठ आपके जीवन को सुरक्षित और संपन्न करता है और निर्मल विचार की ओर उन्मुक्त करता है .जो व्यक्ति रात को सोते समय एक भी चलिषा के दोहे को मन ही मन सुमिरन करके विश्राम करता है उसे कभी बुरे स्वप्न नहीं आते है -.

संतों के चरण घर में पड़ने से घर की वास्तु 70% तक शुध्द हो जाती है अतः संतो के आगमन हेतु अपनी अपनी भक्ति बढ़ाएं मगर ढोगी साधू संतो से दूर रहे उत्तम संतो के अंदर लालच नहीं होता है वो अनायास ही किसी के घर में पदार्पण नहीं करते है न ही व्यापार में लिप्त होकर किसी वस्तु को भक्तो को बेचने हेतु प्रोत्साहित करते है-

 .

आप प्रसन्न एवं संतुष्ट रहें- घर के सदस्यों का प्रसन्नचित रहने से घर की 30% शुद्धि हो जाती है क्लेश को स्थान न दे आने वाले मेहमान का निस्वार्थ भाव से स्वागत करे ये सोच कर इसमें भी वही प्रभु विद्धमान है जो सब में है मगर उसकी नियत को भी पहचाने कही वो आपके अनिष्ट का प्रतिभागी तो नहीं -

रात में सोते समय हो सके तो दिन भर बिछे चादर पर न सोयें क्योंकि घर में अनिष्ट शक्तियों के कष्ट होने पर वे बिछावन पर पहले से ही कई फुट का सूक्ष्म काला आवरण निर्माण कर देते हैं और ऐसे में सोने के लिए प्रयास करते समय बुरे विचार आना, नींद न आना, नींद आने के पश्च्चात भयानक स्वप्न आना , अगले दिन उठते समय संपूर्ण शरीर में वेदना होना या उठने के लिए अत्यधिक प्रयास करने पर ही उठ पाना , उठने के पश्चात तरोताजा न अनुभव कर पाना और थकावट अनुभव करना जैसे कष्ट यदि होते हों तो समझ लें कि रात्रि में हम पर अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण हुए हैं - इस हेतु क्या प्रयास कर सकते हैं इससे भी हम आपको अवगत कराते है- .

सोते समय स्वच्छ चादर और हो सके तो सफ़ेद चादर बिछा कर सोयें -सोने से पहले हाथ पैर स्वच्छ जल से धो लें और फिर सोने जाएँ-कमरे को पूर्ण अन्धकार कर न सोयें - लाल या नीला या हरे रंग के night बल्ब जला कर न सोयें इन रंगों के बल्ब अनिष्ट शक्तियों को आकृष्ट करते हैं - हलके पीले या सफ़ेद माध्यम प्रकाश देने वाले बल्ब जला कर सो सकते हैं -

यदि कष्ट तीव्र हो तो अपनी क्षमता अनुसार घी या तेल के दीप जलाकर सोयें और दीप से प्रार्थना करें कि उसके प्रकाश से पूर्ण रात्रि आपका अनिष्ट शक्तियों से रक्षण हो -

किसी संत के आश्रम से लाकर अगरबत्ती अपने बिछावन के थोडा दूर जलाकर सोयें -

पैर दक्षिण दिशा की ओर कदापि न हों इस इससे दक्षिण से आनेवाली राज-तम प्रधान लहरिओं को हमारी पैर की उँगलियाँ सोख लेती है जिससे कष्ट का प्रमाण बढ़ जाता है -

नग्न होकर कदापि न सोयें इससे भी अनिष्ट शक्तियों का कष्ट बढ़ जाता है-

सोने से पूर्व पूर्ण दिवस जो भी अच्छा या बुरा हमारे द्वारा हो उसका आत्म निवेदन अपने गुरु या इष्ट को अवश्य करें -और प्रार्थना करे कल का दिन आप मुझे मार्ग निर्देश दे  क्युकि जीवन में सच्चा गुरु अंतर द्रष्टि रह कर भी आपका पथ प्रदर्शक है -

किसी होटल में या अन्य किसी के घर पर सोना पड़े तो अपने ओढने और बिछाने वाला चादर अपने साथ अवश्य रखें अन्य किसी के बिछावन पर न सोयें चाहे वह कितना भी महंगा क्यों न हो - यह मुद्दा उन लोगों ने विशेषकर ध्यान में रखनी चाहए जो अधिकतर यात्रा पर रहते हैं, निर्धारित स्थल पर पहुँचते ही अपने इष्ट का या गुरु का फोटो होटल के कमरे में लगा दें इससे वहां के वास्तु की शुद्धि होने लगेगी और रात्रि होने तक वास्तु कुछ स्तर तक पवित्र हो जायेगा -

सबसे महत्व पूर्ण है कि सोने से पूर्व बिछावन पर बैठकर 15 मिनट अपने गुरुमंत्र का या इष्टदेवता का मंत्र जपकर सोयें और प्रार्थना इस प्रकार करें - हे भगवन, अभी 15 मिनट जो मैं जप करने जा रहा हूँ  उस जप से आज संपूर्ण रात्रि मेरे अनिष्ट शक्तियों से रक्षण हो और मैं सुबह निर्धारित समय पर उठ पाऊं ऐसी आप कृपा करें रात भर मेरे चारों आपके शस्त्रों से कवच निर्माण हो ऐसी आप कृपा करें - ध्यान में रखें कि लेटकर यह कवच हेतु जप न करने क्योंकि यह जप पूर्ण करने से पहले ही अनिष्ट शक्तियां हमें सुला देती हैं जिससे कि  उनका काम रात्रि में सरलता से होता रहे और वे हमें संपूर्ण रात्रि कष्ट देते रहे -

अपने बिछावन के चारों ओर सात्त्विक नामजप कि पट्टियाँ लगा सकते हैं या फिर रात्रि में सोने से पूर्व संत लिखित ग्रन्थ का वाचन कर सो सकते हैं या रात्रि में अपने लैपटॉप पर या cd प्लयेर पर नामजप की cd 'repeat ' लगाकर सो सकते हैं या किसी यज्ञ कि विभूति या मंदिर से प्राप्त विभूति को चुटकी भर लेकर अपने बिछवान के चारो ओर सोने से पूर्व फूँक सकते हैं -

जो लोग इंटर नेट का प्रयोग करते है देर रात तक... वो अपने जीवन में दो चीज खो रहे है पहला अपना स्वास्थ और पौरुष दूसरा मानसिक शांति... उपयोग करे पर देर रात नहीं या फिर सुबह जल्दी उठ कर भी आप सर्च कर सकते है उस वक्त मानसिक शान्ति जादा होती है मगर  युवा वर्ग नहीं समझता है और बाद में दवा लेता पाया जाता है बाद में दवा के साइड इफेक्ट की दवा ढूंढता रहता है -

किसी आश्रम द्वारा लाई गई विभूति का टीका लगा कर सो सकते हैं या फिर हनुमान जी के चरणों का सिंदूर का तिलक लगा के सोये तो आपको कभी भी बुरे स्वप्न नहीं आयेगे और नकारात्मक उर्जा भी घर से दूर होती जायेगी ये सिंदूर आप पहले से भी ला के रख सकते है रोज जाने की आवश्यकता नहीं होगी -

सोने से पूर्व नमक पानी का उपाय कर सकते हैं जल में नमक डाले और दोनों पैर पन्द्रह मिनट रक्खे फिर सो जाए- आपको अच्छी नींद आएगी और दिन भर की थकावट से भी आराम होगा -

जो लोग अपने कमरे में फ़िल्मी नायक या नायिकाओं के चित्र या अन्य तामसिक चित्र लगाते है उनको ये सलाह है उन चित्रों से मन विचलित होता है सोने के कमरे में येसा चित्र न लगाए अगर आप किसी देवी देवता का चित्र लगाते है तो विशेष ध्यान रक्खे कि सोते वक्त आपका पैर उनकी तरफ न पड़े आपकी दाई तरफ हो और सुबह नींद खुलने पे उनका दर्शन हो .


निंद्रा को कैसे यज्ञकर्म बनाए :-



आप निद्रा को भी एक यज्ञकर्म बना सकते हैं  यदि सोते समय नाम जप करते हुए सोते है तो उसकी मानसिक आवर्ती रात भर चलती रहती है और सुबह आपको प्रतीत होगा आपने सारी रात नाम जप किया है आपका ये प्रयोग आपको एक साथ दो चीजों का प्रतिफल देता है पहला ये आपको नींद अच्छी आएगी दूसरा आप जो मानसिक जप कर रहे थे आपको जीवन की सभी कठिनाइयो से दूर कर देगा -मेरे द्वारा दिया ज्ञान देखने में आपको भले ही सूक्ष्म लगे लेकिन सिर्फ दस दिन में ही आपको इसका प्रभाव स्वयं महसूस होगा -

इस प्रकार निद्रा का समय भी थोड़े समय में साधना हेतु उपयोग में आने लगेगा और जब सुबह उठाने पर सर्वप्रथम आपका ध्यान नामजप परजाए तो समझ लें कि संपूर्ण रात्रि आपका जप चल रहा था |

ये कुछ येसे प्रयोग थे जो हमने आपके साथ शेयर किये जो जीवन में हमने स्वयं प्रयोग किये और लाभ लिए है वैसे भी आज के युग में जीविकोपार्जन के बाद पत्नी और बच्चो की डिमांड के बाद किसी पे भी समय नहीं है कि वो कुछ कर सके मगर सोते समय एक छोटा सा प्रयास आपके जीवन में चार चाँद लगा सकता है मगर मित्र गन ध्यान दे "हथेली में सरसों न उगाए ,जो निराशा में जीते है उन्हें निराशा ही मिलती है "

उपचार और प्रयोग -

Sunday, October 18, 2015

मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा देवी को प्रसन्न रखना चाहते हैं -

परम्परागत परम्पराए और नियम जो हमारे ऋषि-मुनियों ने हमारे लिए बताई है वो आज भी कई घरो में उनका नियम पूर्वक पालन होता है ये परम्पराये हमारे जीवन में आज भी उतनी ही फलदाई है लेकिन आज के इस दौर में आपा-धापी में हम इनको भूलते जा रहे है -




पहले घर में एक आँगन या चौपाल हुआ करता था जहाँ रोज शाम को घर के बूढ़े-बुजुर्ग बैठा करते थे और हमें अपनी पुरानी परम्पराओं से हमें अवगत कराते थे -आज पारिवारिक विघटन के कारण हम उनसे दूर होते जा रहे है और उनके द्वारा बताये सन्मार्ग और परम्पराओं से विहीन हो रहे है -

पैसा आप अर्जित कर तो लेते है लेकिन क्या आप उसका पूर्ण लाभ और संतुष्टता ले पा रहे है आता तो खूब है लेकिन जाने का रास्ता पहले बना के आता है - अगर आप चाहते है कि माता लक्ष्मी की कृपा और अन्नपूर्णा की कृपा आप पे सदैव बनी रहे तो करे ये उपाय -


आप देर रात जागते है इसलिए सुबह आपकी नींद नहीं खुलती है -जबकि ये बीमारियों के साथ-साथ आपको आलसी भी बना देती है -प्रात:काल की मधुर वेला की चलने वाली पवन से आप दूर हो रहे है जो स्वास्थ के लिए अनिवार्य है -आपकी दिनों-दिन उम्र घटती जा रही है - इसलिए सुबह उठने की आदत डाले कुछ देर टहले और हो सके तो घर में भजन या देवी-देवताओं का भजन इत्यादि सुने न की टी वी पे ऊंटपटांग गाने - कानो से सुना हुआ मन्त्र या भजन आपकी प्रवर्ती को निर्मल बनाता है बुरे विचारों से मुक्ति होती है -


सुबह उठते से सबसे पहले अपनी हथेलियों का दर्शन करना चाहिए। बिस्तर से नीचे भूमि पर पैर रखने से पहले धरती माता से पैर लगाने के लिए क्षमा मांगनी चाहिए- ये शास्त्रोक्त विधान है धरती हमारी माँ है जो हमारा सब कुछ वहन करते हुए भी सभी कुछ प्रदान करती है -


सुबह -सुबह घर की महिलाए जब भी सूर्य उदय से पहले झाड़ू लगाए तो ध्यान रक्खे कि झाड़ू को कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए हमेशा झाड़ू लगाने के बाद झाड़ू को छिपा के रक्खे और झाड़ू को कभी भी खड़ा न रक्खे -न ही झाड़ू के ऊपर से निकले -झाड़ू के बारे में जो लोग इन बातो का पालन नहीं करते है माँ लक्ष्मी की कृपा उनसे दूर होती है - झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है-जब यह घर की गंदगी, धूल-मिट्टी साफ करती है तो इसका मतलब यही है कि देवी महालक्ष्मी हमारे घर से दरिद्रता को बाहर निकाल देती है-जिस प्रकार धन को छुपाकर रखते हैं उसी प्रकार झाड़ू को भी घर में आने जाने वालों की नज़रों से दूर रखें-वास्तु विज्ञान के अनुसार जो लोग झाड़ू के लिए एक नियत स्थान बनाने की बजाय कहीं भी रख देते हैं-उनके घर में धन का आगमन प्रभावित होता है-इससे आय और व्यय में असंतुलन बना रहता है-आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है- झाड़ू को आप कभी भी भूल कर न जलाए वर्ना माँ लक्ष्मी की कृपा आप से रूठ जायेगी -



झाड़ू लगाने के बाद जो महिलाए घर में पोछा लगाती है उनको पानी में सेंधा नमक मिला लेना चाहिए फिर आप पोछा लगाए ये एंटी-बैक्टिरियल के साथ-साथ आपके घर की सभी नकारात्मक उर्जा को समाप्त कर देता है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है-

प्रतिदिन घर के पुरुष या महिलाओं को सुबह -सुबह आठ बजे से पहले पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंख करके नित्य की पूजा संपन्न कर लेनी चाहिए -भूमि पर बैठ कर पूजन नहीं करे जब भी पूजन करे अपने नीचे आसन अवस्य बिछाए -क्युकि हमारे शरीर की उर्जा भूमि में प्रवेश न करे -ध्यान से हमें जो उर्जा प्राप्त होती है वो भूमि में समाहित हो जाती है -आसन यदि कुश का हो तो उत्तम है कुश का आसन कभी भी अपवित्र नहीं होता -

आप पूजन करते समय साथ में जल का एक कलश भर कर रक्खे- कलश का भी विधिवत पूजन करें-देवी-देवताओं की प्रतिमा के साथ ही कलश पूजन करने पर आपको श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है-


पूजन करते समय ध्यान रखें कि आरती या दीपक या अगरबत्ती-माचिस की तीली-मोमबत्ती आदि अग्नि से संबंधित चीजें मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए-ये अग्नि देवता का अपमान है -जब भी पूजा करे पूजा में प्रयुक्त होने वाली धूप या हवन सामग्री या अगरबत्ती आदि को दक्षिण-पूर्व दिशा में ही रक्खे -घर के मुख्य-द्वार पर सीधे हाथ से स्वास्तिक अवस्य बनाए -स्वास्तिक बुरी नजर से बचाने के साथ-साथ श्री गणेश और साथ सभी देवताओं की कृपा बनी रहती है -

पढ़े-लिखे लोगो ने बहुत सी चीजो को मानने से इनकार किया है लेकिन तर्क और वितर्क से कुछ बातो को नकारा नहीं जा सकता है - लोग घरो में जूते-चप्पल को अव्यवस्थित रूप से इधर उधर रखते है जबकि हमेशा उनको व्यवस्थित ढंग से ही रखना चाहिए वहां अशांति का वास होता है दक्षिण के लोग जूते-चप्पल को कमरे से बाहर भी व्यवस्थित रूप से रखते है -वैज्ञानिक कारण भी है कि बाहर की धूल-मिटटी और वैक्टीरिया आदि बाहर ही रखना चाहिए और नकारात्मक उर्जा का प्रवेश भी नहीं होता है -




फैशन के दौर में लोग बेड पे खाने लगे है जो लोग नहीं जानते उनको बताना चाहता हूँ कि शैया को शवासन माना गया है इसलिए चारपाई या बिस्तर पे खाना अन्नपूर्णा का अपमान है आगे चल कर आपको मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है बुरे स्वप्न या नींद में कमी हो सकती है -भोजन भूमि पे जब भी करेगे मन -प्रसन्न रहेगा आप सिर्फ एक माह करके देखे क्या आनंद मिलेगा और कितनी आत्मिक शान्ति - रोग-मुक्ति भी -भोजन को एक पट्टे के उपर रख के भोजन करे इससे अन्नपूर्णा का सम्मान होता है और घर में बरकत भी होगी-



घर की महिलाए जब भी सुबह-शाम रोटी बनाएं तो पहली रोटी गाय के लिए निकालना चाहिए-अंतिम रोटी कुत्ते के लिए निकालें-जिन घरों में हर रोज यह काम किया जाता है-वहां देवी-देवताओं के साथ ही पितर देवता की भी कृपा बनी रहती है-


एक बात का विशेष ध्यान रक्खे कि आपके घर में अगर कही भी किसी भी कोने में मकड़ी के जले गंदगी या धूल-मिटटी है तो कृपा करके तुरंत ही हटाये वर्ना घर की समृद्धि नहीं रहेगी और आपको पूर्ण सुख नहीं प्राप्त होता है -


हर रोज सुबह-सुबह सूर्य की किरणें घर में आती है तो यह बहुत ही शुभ होता है। ऐसा होने पर घर के कई वास्तु दोष दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।




यदि आप अपने जीवन में छोटी-छोटी बातो का ख्याल रखते है तो निश्चित रूप से माँ लक्ष्मी एवं माँ अन्नपूर्णा का वास आपके घर में होगा और सुख-शान्ति का आगमन होगा -रोगों से मुक्ति होगी -

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Sunday, October 11, 2015

नवरात्र का वैज्ञानिक महत्व - Scientific-Reason-Navratri

हमारे देश में साल भर अलग-अलग प्रकार के उत्सव मनाने की परम्परा रही है जैसे दिवाली-दशहरा-होली-शिवरात्री और नवरात्रि आदि इनमे से कुछ उत्सव को हम रात्रि में ही मनाते है -इनका अगर कोई विशेष कारण नहोता तो ऐसे उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता है - नवरात्र का वैज्ञानिक आधार क्या है दरअसल नवरात्र शब्द से “नव अहोरात्रों (विशेषरात्रियों) का बोध” होता है और इस समय शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है क्योंकि  “रात्रि” शब्द सिद्धि का प्रतीकमाना जाता है -





 नवरात्र के दिन नवदिन नहीं कहे जाते हैं। लेकिन नवरात्र के वैज्ञानिक महत्व को समझने से पहले हम थोडा नवरात्र को समझे - मनीषियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है मतलब कि विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नौ दिन अर्थात नवमी तक और इसी प्रकार इसके ठीक छह मास पश्चात्  आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक नवरात्र मनाया जाता है । लेकिन फिर भी सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है और इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम,यज्ञ, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते हैं।

साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेषसिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। नवरात्रों में शक्ति के 51 पीठों पर भक्तों का समुदाय बड़े उत्साह से शक्ति की उपासना के लिए एकत्रित होता है और जो उपासक इन शक्ति पीठों पर नहीं पहुंच पाते वे अपने निवास स्थल पर ही शक्ति का आह्वान करते हैं।

अधिकांश उपासक शक्ति पूजा रात्रि में नहीं बल्कि, पुरोहित को दिन में ही बुलाकर संपन्न करा देते हैं। यहाँ तक कि सामान्य भक्त ही नहीं अपितु , पंडित और साधु-महात्मा भी अब नवरात्रों में पूरी रात जागना नहीं चाहते और ना ही कोई आलस्य को त्यागना चाहता है।आज कल बहुत कम उपासक ही आलस्य को त्याग कर आत्मशक्ति, मानसिक शक्ति और यौगिक शक्ति की प्राप्ति के लिए रात्रि के समय का उपयोग करते देखे जाते हैं जबकि मनीषियों ने रात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने औरसमझाने का प्रयत्न किया और अब तो यह एक सर्वमान्य वैज्ञानिक तथ्य भी है कि रात्रि मेंप्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं और, हमारे ऋषि – मुनि आज से कितने ही हजारों- लाखों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे ।

एक वैज्ञानिक रहस्य ये भी है कि अगर दिन में आवाज दी जाए, तो वह दूर तक नहीं जाती है , किंतु यदि रात्रि को आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है । इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों औररेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं । रेडियो इस बात का जीता – जागता उदाहरण हैजहाँ आपने खुद भी महसूस किया होगा कि कम शक्ति के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना अर्थात सुनना मुश्किल होता है जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है। इसका वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं ठीक उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है ।

इसीलिए ऋषि – मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है। मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के कंपन से दूर – दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है। यही रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों मेंसंकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं  उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि , उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है।

नवरात्र के पीछे का वैज्ञानिक आधार यह कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियाँ हैं जिनमे से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है और ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियाँ बढ़ती हैं अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए तथा शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तनमन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम “”नवरात्र”” है।

नवरात्र में नौ दिन या नौ रात को गिना जाना चाहिए ? तो मैं यहाँ बता दूँ कि अमावस्या की रात से अष्टमी तक या पड़वा से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम चलने से नौ रात यानी ‘नवरात्र’ नाम सार्थक है। चूँकि यहाँ रात गिनते हैं इसलिए इसे नवरात्र यानि नौ रातों का समूह कहा जाता है । रूपक के द्वारा हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है और इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है ।

इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुद्धि का पर्व नौ दिनमनाया जाता है और इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं। हालाँकि शरीर को सुचारू रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किन्तु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर छ: माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है जिसमे सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुध्दि, साफ सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुध्द होता है क्योंकि स्वच्छ मन मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।

जीवनी शक्ति रूपी दुर्गा के नौ रूप हैं:-

1.शैलपुत्री
2.ब्रह्मचारिणी
3. चंद्रघंटा
4. कूष्माण्डा
5. स्कन्दमाता
6. कात्यायनी
7. कालरात्रि
8. महागौरी
9. सिध्दीदात्री

इनका नौ जड़ी बूटी या ख़ास व्रत की चीजों से भी सम्बंध है जिन्हें नवरात्र के व्रत में प्रयोगकिया जाता है:-

1. कुट्टू (शैलान्न)
2. दूध-दही,
3. चौलाई (चंद्रघंटा)
4. पेठा (कूष्माण्डा)
5. श्यामक चावल (स्कन्दमाता)
6. हरी तरकारी (कात्यायनी)
7. काली मिर्च व तुलसी (कालरात्रि)
8. साबूदाना (महागौरी)
9. आंवला(सिध्दीदात्री)

ये नौ प्राकृतिक व्रत खाद्य पदार्थ हैं। बेटों वाले परिवार में या पुत्र की चाहना वाले परिवार वालों को नवमी में व्रत खोलना चाहिए ।

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Tuesday, September 22, 2015

मकड़ी के जाले तुरंत हटाये-Spider webs immediately deleted

वास्तु दोष के कारण कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। घर का मुख्य द्वार वास्तु दोषों से मुक्त हो, तो घर में सुख-समृद्धि रहती है। सभी तरह के मंगल कार्यों में वृद्धि होती है और परिवार के लोगों में आपसी समंजस्य बना रहता है-





इसी प्रकार वास्‍तु के अनुसार मकड़ी के जाले (Spider webs ) घर में बहुत अशुभ माने जाते हैं। अमूमन देखा जाता है घर के निचले हिस्सों की तो सफाई हो जाती है लेकिन छत या ऊपरी हिस्सों की ठीक से सफाई नहीं हो पाती। ऐसे में वहां मकड़ी द्वारा जाले बना लिए जाते हैं। घर में ये जाले होना अशुभ माना जाता है।


घर में मकड़ी के जाले नहीं होना चाहिए। ये अशुभ होते हैं।ये अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक कारण मौजूद हैं। मकड़ी के जालों की संरचना कुछ ऐसी होती है कि उसमें नकारात्मक ऊर्जा एकत्रित हो जाती है। इसलिए घर के जिस भी कोने में मकड़ी के जाले होते हैं, वह कोना या हिस्सा नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इस कारण घर में कलह-बीमारियां व अन्य कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं-


मकड़ी के एक जाले में असंख्य सूक्ष्मजीव रहते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पंहुचाते हैं। इसलिए कहा जाता हैं कि अगर घर में मकड़ी के जाले होते हैं तो घर की सुख-समृद्धि का नाश होने लगता है-


क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा के कारण घर का माहौल इतना अशांत हो जाता है कि व्यक्ति चाहकर भी अपने काम को मन लगाकर नहीं कर पाता है। इसलिए मकड़ी के जालों को अशुभ माना जाता है-

ये भी ध्यान रखें:-



समय देखने के लिए घड़ी ही एकमात्र साधन है। अपने घर या दफ्तर में बंद पड़ी घड़ियों को तुरंत हटा देना चाहिए। घड़ियों को हमेशा अच्छी हालत में रखें। बंद पड़ी घड़ी को मरम्मत करवाकर हमेशा चालू रखें।


रसोई में पूजा स्थान बनाना शुभ नहीं होता है। जिस घर में रसोई के अंदर ही पूजा का स्थान होता है, उसमें रहने वाले गरम दिमाग के होते हैं। परिवार के किसी सदस्य को रक्त संबंधी शिकायत भी हो सकती है।


रसोई और बाथरूम का साथ-साथ होना शुभ नहीं होता है। ऐसे घर में रहने वालों को जीवन काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। ऐसे घर की कन्याओं के जीवन में अशांति रहती है।

उपचार और प्रयोग-

Wednesday, September 02, 2015

जन्माष्टमी व्रत विधि -

जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि धर्म की पुन: स्थापना और अत्याचारी कंस का वध करने के लिए भगवान विष्णु जी ने कृष्ण जी का अवतार लिया था। लीलाधर भगवान श्री कृष्ण को माधव, केशव, कान्हा, कन्हैया, देवकी नन्दन, बाल गोपाल आदि कई नामों से जाना जाता हैं।


भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्सव है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं।


श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। भगवान श्रीकृष्ण विष्णुजी के आठवें अवतार माने जाते हैं। यह श्रीविष्णु का सोलह कलाओं से पूर्ण भव्यतम अवतार है। श्रीराम तो राजा दशरथ के यहाँ एक राजकुमार के रूप में अवतरित हुए थे, जबकि श्रीकृष्ण का प्राकट्य आततायी कंस के कारागार में हुआ था।


श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी व श्रीवसुदेव के पुत्ररूप में हुआ था। कंस ने अपनी मृत्यु के भय से बहिन देवकी और वसुदेव को कारागार में क़ैद किया हुआ था।  कृष्ण जन्म के समय घनघोर वर्षा हो रही थी। चारों तरफ़ घना अंधकार छाया हुआ था। श्रीकृष्ण का अवतरण होते ही वसुदेव–देवकी की बेड़ियां खुल गईं, कारागार के द्वार स्वयं ही खुल गए, पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए। वसुदेव किसी तरह श्रीकृष्ण को उफनती यमुना के पार गोकुल में अपने मित्र नन्दगोप के घर ले गए। वहां पर नन्द की पत्नी यशोदा को भी एक कन्या उत्पन्न हुई थी। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को ले गए। कंस ने उस कन्या को पटककर मार डालना चाहा। किन्तु वह इस कार्य में असफल ही रहा। श्रीकृष्ण का लालन–पालन यशोदा व नन्द ने किया। बाल्यकाल में ही श्रीकृष्ण ने अपने मामा के द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों को मार डाला और उसके सभी कुप्रयासों को विफल कर दिया। अन्त में श्रीकृष्ण ने आतातायी कंस को ही मार दिया। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का नाम ही जन्माष्टमी है।


कृष्णजन्म के सम्पादन का प्रमुख समय है ‘श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी की अर्धरात्रि’ (यदि पूर्णिमान्त होता है तो भाद्रपद मास में किया जाता है)। यह तिथि दो प्रकार की है–

बिना रोहिणी नक्षत्र की तथा रोहिणी नक्षत्र वाली।

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण की जयंती मनाई जाती है।

हिन्दू धर्मानुसार प्रत्येक मनुष्य को जन्माष्टमी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस साल जन्माष्टमी का व्रत 05 सितंबर, दिन शनिवार को रखा जाएगा।

जन्माष्टमी व्रत विधि :-
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व्रत के दिन प्रात: व्रती को सूर्य, सोम (चन्द्र), यम, काल, दोनों सन्ध्याओं (प्रात: एवं सायं), पांच भूतों, दिन, क्षपा (रात्रि), पवन, दिक्पालों, भूमि, आकाश, खचरों (वायु दिशाओं के निवासियों) एवं देवों का आह्वान करना चाहिए, जिससे वे उपस्थित हों। उसे अपने हाथ में जलपूर्ण ताम्र पात्र रखना चाहिए, जिसमें कुछ फल, पुष्प, अक्षत हों और मास आदि का नाम लेना चाहिए और संकल्प करना चाहिए–

‘मैं कृष्णजन्माष्टमी व्रत कुछ विशिष्ट फल आदि तथा अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए करूंगा।’

तब वह वासुदेव को सम्बोधित कर चार मंत्रों का पाठ करता है, जिसके उपरान्त वह पात्र में जल डालता है। उसे देवकी के पुत्रजनन के लिए प्रसूति-गृह का निर्माण करना चाहिए, जिसमें जल से पूर्ण शुभ पात्र, आम्रदल, पुष्पमालाएं आदि रखना चाहिए, अगर बत्ती  जलाना चाहिए और शुभ वस्तुओं से अलंकरण करना चाहिए तथा षष्ठी देवी को रखना चाहिए। गृह या उसकी दीवारों के चतुर्दिक देवों एवं गन्धर्वों के चित्र बनवाने चाहिए

भविष्यपुराण के अनुसार जन्माष्टमी व्रत के दिन मध्याह्न में स्नान कर एक सूत घर (छोटा सा घर) बनाना चाहिए। उसे पद्मरागमणि और वनमाला आदि से सजाकर द्वार पर रक्षा के लिए खड्ग, कृष्ण छाग, मुशल आदि रखना चाहिए। इसके दीवारों पर स्वस्तिक और ऊं आदि मांगलिक चिह्न बनाना चाहिए। सूतिका गृह में श्री कृष्ण सहित माता देवकी की स्थापना करनी चाहिए।

एक पालने या झूले पर भगवान कृष्ण की बाल गोपाल वाली तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। सूतिका गृह को जितना हो सके उतना सजाकर दिखाना चाहिए। इसके बाद पूर्ण भक्तिभाव के साथ फूल, धूप, अक्षत, नारियल, सुपारी ककड़ी, नारंगी तथा विभिन्न प्रकार के फल से भगवान श्री कृष्ण के बाल रुप की पूजा करनी चाहिए।

कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी की मध्य रात्रि या आधी रात को हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी के दिन अर्द्ध रात्रि के समय भगवान कृष्ण जी के जन्म-अवसर पर आरती करनी चाहिए और प्रसाद बांटना चाहिए। व्रती को नवमी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराकर उसे दक्षिणा दे कर विदा करना चाहिए। जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्तों को नवमी के दिन ही व्रत का पारण करना चाहिए।

जन्माष्टमी पूजन के मंत्र :-
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 " ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: "

उपरोक्त मंत्र का जाप दिन भर करते रहना चाहिए
                               
 " योगेश्वराय योगसम्भवाय योगपताये गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र द्वारा श्री हरि का ध्यान करें

 " यज्ञेश्वराय यज्ञसम्भवाय यज्ञपतये गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र द्वारा श्री कृष्ण की बाल प्रतिमा को स्नान कराएं

 " वीश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भवाय विश्वपतये गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र द्वारा भगवान को धूप ,दीप, पुष्प, फल आदि अर्पण करें

 " धर्मेश्वराय धर्मपतये धर्मसम्भवाय गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र से नैवेद्य या प्रसाद अर्पित करें

जन्माष्टमी व्रत का फल :-
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भविष्यपुराण के अनुसार जन्माष्टमी व्रत के पुण्य से जातक के सभी प्रकार की इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा माना जाता है कि जो एक बार भी इस व्रत को कर लेता है वह विष्णुलोक को प्राप्त करता है यानि मोक्ष को प्राप्त करता है।

जन्माष्टमी का त्यौहार का एक मनोरंजक पक्ष दही-हांडी भी है। यह प्रकार का खेल है जिसमें बच्चे भगवान कृष्ण द्वारा माखन चुराने की लीला का मंचन करते हैं। महाराष्ट्र और इसके आसपास की जगहों पर दही-हांडी की छठा देखते ही बनती है।

Sunday, August 30, 2015

आप भयानक सपने देखते है -

अमूमन लोगो को नींद में कई बार भयानक चीजें दिखाईं देतीं हैं। जिनको देखकर उठ खड़े होते हैं। उनकी प्रतिक्रिया कुछ ऐसी होती है।



जैसे उन्होंने कोई परेशनान बच्चा, भटकती आत्मा, कंकाल, अस्त्र-शस्त्र, जंगली जानवर आदि देख लिया हो। ऐसे सपनों के निदान के लिए कुछ अचूक और प्रभावशाली उपाय हैं। जिन्हें आजमाकर आप इस तरह के डरावने और भयानक सपनों से दूर रह सकते हैं।


यदि रात्रि में भयानक सपने आते हों या किसी भी प्रकार डर लगता हो, तो सिरहाने में पीपल की जड़ व उसकी टहनी का छोटा सा टुकड़ा ओम नमो भगवते वासुदेवाय जप करते हुए रखकर सोएं। बुरे सपनों का आना बंद हो जाएगा और डर भी दूर हो जाएगा। ध्यान रखें, जड़ व टहनी सूर्यास्त से पूर्व लानी है। सिरहाने रखने के पहले उसे गंगा जल से शुद्ध करके धूप दीप अवश्य दिखाएं। यह उपाय शुक्ल पक्ष के सोमवार या पूर्णिमा से शुरू करें। श्रद्धा व निष्ठा का होना जरूरी है।

सपने में आत्मा, कंकाल, अस्थियां के दिखने पर, सर्वप्रथम हम जिस घर में रहते हैं वहां दुर्गा पाठ का आयोजन रखें और ब्रह्मणों द्वारा कम से कम 51 या 101 पाठ जरूर करें। मुमकिन है इससे इस तरह के सपने आना दूर हो जाएंगे।

यदि संभव हो सकते प्रतिदिन सुंदरकांड या हनुमान चलीसा का पाठ करें या फिर हनुमानजी के मंदिर में जाकर प्रतिदिन सिंदूर तिलक करें या बटुक भैरव या हनुमान जी को चोला चढ़ाएं।

सोते वक्त तकिए के नीचे या शयन कक्ष में सोते वक्त दाहिने हाथ की ओर पानी से भरा तांबे का छोटा पात्र रखें।

उत्तर और दक्षिण दिशा की तरफ सिर रख के नहीं सोना चाहिए उससे भी सपने आते है .और सुबह सर भारी रहता है इसका एक वैज्ञानिक कारण भी है इस दिशा में मेगनेटिक फील्ड बनाता है जिससे हमारे शरीर का आयरन सिर और पैर की तरफ इकट्टा हो जाता है .

रसोई में आग्नेय कोण की ओर तेल का दीपक रखें। इस दीपक में सिंदूर डाल दें। दीपक की लौ समाप्त होने पार सिंदूर का हल्का तिलक लगाएं।

हनुमान चालीसा का एक पाठ करके सोये तो भी आपको भयानक सपने नहीं दिखेगे .

सपने में नदी, झरना, पानी दिखाई दे तो यह पितृ दोष होता है। क्योंकि अमूमन पितरों के स्थान नदियों व तालाबों के समीप ही बने होते हैं। इस दोष निवारण के लिए अमावस्या के दिन सफेद चावल, शक्कर व घी का मिश्रण पीपलल का पेड़ पर सूर्यास्त के बाद चढ़ाएं। ध्यान रखें कि चावल चढ़ाकर लौटते समय पीछे मुढ़कर न देखें और घर में प्रवेश करने से पूर्व हाथ-मुंह धोकर ही प्रवेश करें।

सपनो के फल के बारे में जाने :-
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अखरोट देखना – भरपुर भोजन मिले तथा धन वृद्धि हो
अनाज देखना -चिंता मिले
अनार खाना (मीठा ) – धन मिले
अजनबी मिलना – अनिष्ट की पूर्व सूचना
अजवैन खाना – स्वस्थ्य लाभ
अध्यापक देखना – सफलता मिले
अँधेरा देखना – विपत्ति आये
अँधा देखना – कार्य में रूकावट आये
अप्सरा देखना – धन और मान सम्मान की प्राप्ति
अर्थी देखना – धन लाभ हो
अमरुद खाना – धन मिले
अनानास खाना – पहले परेशानी फिर राहत मिले
अदरक खाना – मान सम्मान बढे
अनार के पत्ते खाना – शादी शीघ्र हो
अमलतास के फूल – पीलिया या कोढ़ का रोग होना
अरहर देखना – शुभ
अरहर खाना – पेट में दर्द
अरबी देखना – सर दर्द या पेट दर्द
अलमारी बंद देखना – धन प्राप्ति हो
अलमारी खुली देखना – धन हानि हो
अंगूर खाना – स्वस्थ्य लाभ
अंग रक्षक देखना – चोट लगने का खतरा
अपने को आकाश में उड़ते देखना – सफलता प्राप्त हो
अपने पर दूसरौ का हमला देखना – लम्बी उम्र
अंग कटे देखना – स्वास्थ्य लाभ
अंग दान करना – उज्जवल भविष्य , पुरस्कार
अंगुली काटना – परिवार में कलेश
अंगूठा चूसना – पारवारिक सम्पति में विवाद
अन्तेस्ति देखना – परिवार में मांगलिक कार्य
अस्थि देखना – संकट टलना
अंजन देखना – नेत्र रोग
अपने आप को अकेला देखना – लम्बी यात्रा
अख़बार पढ़ना, खरीदना – वाद विवाद
अचार खाना , बनाना – सिर दर्द, पेट दर्द
अट्हास करना – दुखद समाचार मिले
अध्यक्ष बनना – मान हानि
अध्यन करना -असफलता मिले
अपहरण देखना – लम्बी उम्र
अभिमान करना – अपमानित होना
अध्र्चन्द्र देखना – औरत से सहयोग मिले
अमावस्या होना – दुःख संकट से छुटकारा
अगरबत्ती देखना – धार्मिक अनुष्ठान हो
अगरबत्ती जलती देखना – दुर्घटना हो
अगरबत्ती अर्पित करना – शुभ
अपठनीय अक्षर पढना – दुखद समाचार मिले
अंगीठी जलती देखना – अशुभ
अंगीठी बुझी देखना – शुभ
अजीब वस्तु देखना – प्रियजन के आने की सूचना
अजगर देखना – शुभ
अस्त्र देखना – संकट से रक्षा
अंगारों पर चलना – शारीरिक कष्ट
अंक देखना सम – अशुभ
अंक देखना विषम – शुभ
अस्त्र से स्वयं को कटा देखना – शीघ्र कष्ट मिले
अपने दांत गिरते देखना – बंधू बांधव को कष्ट हो
आंसू देखना – परिवार में मंगल कार्य हो
आवाज सुनना – अछा समय आने वाला है
आंधी देखना – संकट से छुटकारा
आइना देखना – इच्छा पूरण हो , अछा दोस्त मिले
आइना में अपना मुहं देखना – नौकरी में परेशानी , पत्नी में परेशानी
आसमान देखना – ऊचा पद प्राप्त हो
आसमान में स्वयं को देखना – अच्छी यात्रा का संकेत
आसमान में स्वयं को गिरते देखना – व्यापार में हानि
आग देखना – गलत तरीके से धन की प्राप्ति हो
आग जला कर भोजन बनाना – धन लाभ , नौकरी में तरक्की
आग से कपडा जलना – अनेक दुख मिले , आँखों का रोग
आजाद होते देखना – अनेक चिन्ताओ से मुक्ति
आलू देखना – भरपूर भोजन मिले
आंवला देखना – मनोकामना पूर्ण न होना
आंवला खाते देखना – मनोकामना पूर्ण होना
आरू देखना – प्रसनता की प्राप्ति
आक देखना – शारारिक कष्ट
आम खाते देखना – धन और संतान का सुख
आलिंगन देखना पुरुष का औरत से – काम सुख की प्राप्ति
आलिंगन देखना औरत का पुरुष से – पति से बेवफाई की सूचना
आलिंगन देखना पुरुष का पुरुष से- शत्रुता बढ़ना
आलिंगन देखना औरत का औरत से – धन प्राप्ति का संकेत
आत्महत्या करना या देखना – लम्बी आयु
आवारागर्दी करना – धन लाभ हो नौकरी मिले
आँचल देखना – प्रतियोगिता में विजय
आँचल से आंसू पोछना – अछा समय आने वाला है
आँचल में मुँह छिपाना – मान समान की प्राप्ति
आरा चलता हुआ देखना – संकट शीघ्र समाप्त होगे
आरा रूका हुआ देखना- नए संकट आने का संकेत
आवेदन करना या लिखना – लम्बी यात्रा हो
आश्रम देखना – व्यापार में घाटा
आट्टा देखना – कार्य पूरा हो
आइसक्रीम खाना – सुख शांति मिल
इमली खाते देखना – औरत के लिए शुभ ,पुरुष के लिए अशुभ
इडली साम्भर खाते देखना – सभी से सहयोग मिले
इष्ट देव की मूर्ति चोरी होना – मृत्युतुल्य कष्ट आये
इश्तहार पढना – धोखा मिले, चोरी हो
इत्र लगाना – अछे फल की प्राप्ति, मान सम्मान बढेगा
इमारत देखना – मान सम्मान बढे, धन लाभ हो
ईंट देखना – कष्ट मिलेगा
इंजन चलता देखना – यात्रा हो , शत्रु से सावधान
इन्द्रधनुष देखना – संकट बढे , धन हानि हो
इक्का देखना हुकम का – दुःख व् निराशा मिले
इक्का देखना ईंट का -कष्टकारक स्तिथि
इक्का देखना पान का -पारवारिक क्लेश
इक्का देखना चिड़ी का – गृह क्लेश ,अतिथि आने की सूचना
उजाड़ देखना – दूर स्थान की यात्रा हो
उस्तरा प्रयोग करना – यात्रा में धन लाभ हो
उपवन देखना – बीमारी की पूर्व सूचना
उदघाटन देखना – अशुभ संकेत
उदास देखना – शुभ समाचार मिले
उधार लेना या देना – धन लाभ का संकेत
स्वयं को उड़ते देखना – गंभीर दुर्घटना की पूर्व सूचना
उछलते देखना -दुखद समाचार मिलने का संकेत
उल्लू देखना -दुखों का संकेत
उबासी लेना – दुःख मिले
उल्टे कपडे पहनना – अपमान हो
उजाला देखना – भविष्य में सफलता का संकेत
उजले कपडे देखना -इज्जत बढे , विवाह हो
उठना और गिरना – संघर्ष बढेगा
उलझे बाल या धागे देखना – परेशानिया बढेगी
उस्तरा देखना – धन हानि , चोरी का भय
ऊंघना – धन हानि , चोरी का भय
ऊंचाई पर अपने को देखना – अपमानित होना
ऊन देखना – धन लाभ हो
ऊंचे पहाड़ देखना – काफी मेहनत के बाद कार्य सिद्ध होना
ऊंचे वृक्ष देखना – मनोकामना पूरी होने में समय लगना
औषधी देखना – गलत संगति देखना
ऐनक लगते देखना – विद्या मिले, ख़ुशी इज्जत मिले
कब्र खोदना – धन पाए , मकान बनाये
कत्ल करना स्वयं का – अच्छा सपना है , बुरे काम से बचे
कद अपना छोटा देखना – अपमान सहना , परेशानी उठाना
कद अपना बड़ा देखना – भारी संकट आना
कसम खाते देखना – संतान का दुःख भोगना
कलम देखना – विद्या धन की प्राप्ति
कर्जा देना – खुशहाली आये
कर्जा लेना – व्यापार में हानि
कला कृतिया देखना – मान समान बढे
कपूर देखना – व्यापार में लाभ
कबाडी देखना – अच्छे दिनों की शुरूआत
कबूतर देखना – प्रेमिका से मिलना
कबूतरों का झुंड – शुभ समाचार मिले
कमल का फूल – ज्ञान की प्राप्ति
कपास देखना – सुख समृधि हो
कंगन देखना – अपमान हो
कदू देखना – पेट दर्द
कन्या देखना – धन वृद्धि हो
कफन देखना – लम्बी उम्र
कली देखना – स्वास्थ्य खराब हो
कछुआ देखना – शुभ समाचार मिले
कलश देखना – सफलता
कम्बल देखना – बीमारी आये
कपडा धोना – पहले रूकावट , फिर लाभ
कटा सिर देखना – शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी
कब्रिस्तान देखना – निराशा हो
कंघी देखना – चोट लगना , दांत या कान में दर्द
कसरत – बीमारी आने की सूचना
काली आँखे देखना – व्यापार में लाभ
काला रंग देखना – शुभ फल
काजू खाना – नया व्यापार शुरू हो
कान देखना – शुभ समाचार
कान साफ करना – अच्छी बातो का ज्ञान
काउंटर देखना – लेने देने में लाभ हो
कारखाना देखना – दुर्घटना में फसने की सूचना
काली बिल्ली देखना – लाभ हो
कुंडल पहने देखना – संकट हो
कुबडा देखना – कार्य में विघ्न
कुमकुम देखना – कार्य में सफलता
कुल्हाडी देखना – परिश्रम अधिक, लाभ कम
कुत्ता भोंकना – लोगो द्वारा मजाक उड़ना
कुत्ता झपटे – शत्रु की हार
कुर्सी खाली देखना – नौकरी मिले
कूड़े का ढेर देखना – कठिनाई के बाद धन मिले
किला देखना – ख़ुशी प्राप्त हो
कील देखना / ठोकना – परिवार में बटवारा हो
केश संवारना – तीर्थ यात्रा
केला खाना / देखना – ख़ुशी हो
केक देखना – अच्छी वस्तु मिले
कैमरा देखना – अपने भेद छिपा कर रखे
कोढ़ी देखना – धन का लाभ
कोहरा – संकट समाप्त हो
कोठी देखना – दुःख मिले
कोयल देखना / सुनना – शुभ समाचार
कोया देखना – शुभ संकेत
किसी ऊंचे स्थान से कूदना – असफलता
नर कंकाल देखना – उम्र बढने का संकेत
जप करना – विजय
कद लम्बा देखना – मृत्युतुल्य कष्ट हो
कद घटना – अपमान हो
कटोरा देखना – बनते काम बिगढ़ना
कनस्तर खाली देखना – शुभ
कनस्तर भरा देखना – अशुभ
कमंडल देखना – परिवार के किसी सदस्य से वियोग
करवा चौथ – औरत देखे तो आजीवन सधवा, पुरुष देखे तो धन धान्य संपूर
कागज कोरा – शुभ
कागज लिखा देखना – अशुभ
सफेद कुरता देखना – शुभ
अन्य रंग का कुरता देखना – अशुभ
कुर्सी पर स्वयं को बैठे देखना – नया पद, पदोनती
कुर्सी पर अन्य को बैठे देखना – अपमान
कब्र खोदना – मकान का निर्माण करना
कपूर देखना – व्यापार नौकरी में लाभ
कबूतर देखना – प्रेमिका से मिलन
कपडा बेचते देखना – व्यापार में लाभ
कपडे पर खून के दाग – व्यर्थ बदनामी
कछुआ देखना – धन आशा से अधिक मिलना
कमल ककडी देखना – सात्विक भोजन में आनंद, ख़ुशी मिले
कपास देखना – सुख, समृधि घर आये
करी खाना – विधवा से विवाह, विधुर से विवाह
कृपाण – धरम कार्य पूर्ण होने की सूचना
कान देखना – शुभ समाचार
कान कट जाना – अपनों से वियोग
काला कुत्ता देखना – कार्य मे सफलता
काउंटर देखना – लेन देन में लाभ
काली बिल्ली देखना – शुभ समाचार
पीली बिल्ली देखना – अशुभ समाचार
काना व्यक्ति देखना – अनकूल समय नहीं
कीडा देखना – शक्ति का प्रतीक
कुम्हार देखना – शुभ समाचार
केतली देखना – दांपत्य जीवन में शांति हो
केला देखना या खाना – शुभ समाचार
कैंची – अकारण किसी से वाद- विवाद होना
कोठी देखना – दुःख मिले
कोयला देखना – प्रेम के जाल में फँस कर दुःख पाए
कुरान- सुख शांति की भावना बढे
खरोंच लगना -शरीर स्वस्थ हो
खटमल देखना – जीवन में संघर्ष
खटमल मारना – कठिनाई से छुटकारा
खरबूजा देखना -सफलता मिले
ख़त पढ़ना – शुभ समाचार
खरगोश देखना – औरत से बेवफाई
खलिहान देखना – सम्मान बडे
खटाई खाना – धन हानि हो
खाली खाट देखना -बीमार पड़ने की सूचना
खाली बर्तन देखना – काम में हानि
खिलखिलाना – दुखद समाचार मिलने का संकेत
खिल्ली उडाना -लोगो से निराशा मिले
खिलौना देखना – आँखों को सुख मिले
खुजली होना – रोग से छुटकारा पाने का संकेत
ख़ुशी देखना – परेशानी बढे
खुशबू लगाना – सम्मान बढे
खून खराबा -सौभाग्य वृद्धि
खून देखना – धन मिले
खून की वर्षा देखना – देश में अकाल पड़े
खून में लोटना – धन-सम्पति प्राप्त होने का संकेत
खेल कूद में भाग लेना – भाग्यौनात्ति होना
खेत देखना -यात्रा हो , विद्या व् धन की वृद्धि
खेत काटते देखना – पत्नी से मन मुटाव होना
खोपडी देखना – बौधिक कार्यो में सफलता
गधा देखना -प्यार मिले
गधा लदा हुआ देखना – व्यापार में लाभ हो
गधे की चीख सुनना – दुख हो
गधे की सवारी करना – शुभ समाचार मिले
गाय देखना – धन लाभ हो
गाय या बैल पीले रंग की देखना – महामारी आने के लक्षण
गरम पानी देखना – बुखार या अन्य बीमारी आये
गंजा सिर देखना – परीक्षा में पास हो, सम्मान बड़े
गली देखना – सुनसान गली देखने से लाभ , भीड़ वाली गली देखने से मृत्यु का समाचार
गवाही देना -अपराध में फंसना
गमला देखना – खाली देखने पर झंझट , फूल खिले देखने पर शुभ
गलीचा देखना या उस पर बैठना – शोक में शामिल होना
ग्वाला /ग्वालिन देखना – शुभ फल
गाजर देखना – फसल अच्छी हो
गाड़ी देखना – यात्रा सार्थक हो
गलिया देते देखना – बदनामी हो
गायत्री पाठ करना – दुर्लभ स्वप्न मान सम्मान बड़े
गिलास देखना – घरेलू खर्चो में कमी होगी
गिनती करना – काम में हानि
गिरगिट देखना – झगडे में फसने का संकेत
गिलहरी देखना – बहुत शुभ
गीदढ़ देखना – शत्रु से भय मिले
गीली वस्तु देखना – लम्बी बीमारी आने के संकेत
गीता देखना – दुर्लभ समय
गुलाब देखना – सम्मान में वृद्धि
गुढ खाना – सफलता मिले
गुडिया देखना – जल्दी विवाह का संकेत
गुठली खाना या फेंकना – काफी धन आने की सूचना
गेंहू देखना – काफी मेहनत कर के कमाई होना
गेंद देखना – परेशानी होना
गेंदे का फूल देखना – मानसिक अशांति
गेरुआ वस्त्र देखना – समय शुभ है
गीता – कष्ट दूर हो
ग्रन्थ साहिब – धार्मिक कार्यो में रूचि हो
घडी देखना – यात्रा पर जाना
घडी गुम हो जाना – यात्रा का कार्यकर्म स्थगित होना
घर देखना (सजा हुआ ) – संपत्ति में हानि
घर देखना (खंडहर ) – संपत्ति में लाभ
घर में किसी और का प्रवेश देखना – शत्रु पर विजय
घर में आग देखना – सरकार से लाभ हो
घर सोने का देखना – घर में आग लगने का संकेत
घर लोहे का देखना – मान सम्मान बढेगा
घडा भरा देखना – धन लाभ हो
घंटे की आवाज़ सुनना – चोरी होने का संकेत
घंटाघर देखना – अशुभ समाचार
घाट देखना – तीर्थ यात्रा पर जाने का संकेत
घायल देखना – संकट से छुटकारा
घास देखना – लाभ होगा
घी देखना – धन दौलत बढे
घुटने टेकना – वाद विवाद में सफलता मिले
घुंघरू की आवाज सुनना – मान सम्मान बढेगा
घूंघट देखना – नया व्यापार शुरू हो
घोड़ा सजा हुआ देखना – कार्य में हानि
घोड़ा काला देखना -मान सम्मान बढेगा
घोड़ा या हाथी पर चड़ना – उन्नत्ति हो
चलता पहिया देखना – कारोबार में उन्नत्ति हो
चप्पल पहनना – यात्रा पर जाना
चक्की देखना – मान सम्मान बढेगा
चमडा देखना – दुःख हो
चबूतरा देखना -मान सम्मान बढेगा
चट्टान देखना (काली ) – शुभ
चट्टान देखना (सफेद ) – अशुभ
चपत मारना – धन हानि हो
चपत खाना – शुभ फल की प्राप्ति
चरबी देखना – आग लगने का संकेत
चलना जमीन पर -नया रोजगार मिले
चलना पानी पर – कारोबार में हानि
चलना आसमान पर – बीमारी आने का संकेत
चन्द्र ग्रहण देखना – सभी कार्य बिगडे
चमगादर उड़ता देखना – लम्बी यात्रा हो
चमगादर लटका देखना – अशुभ संकेत
चम्मच देखना – नजदीकी व्यक्ति धोखा दे
चप्पल देखना – यात्रा पर जाना
चटनी खाना – दुखो में वृद्धि
चरखा चलाना – मशीनरी खराब हो
चश्मा खोना – चोरी के संकेत
चांदी के बर्तन में दूध पीना – संम्पत्ति में वृद्धि हो
चारपाई देखना – हानि हो
चादर शरीर पर लपेटना -गृह क्लेश बढे
चादर मैली देखना – धन लाभ हो
चादर समेट कर रखना – चोरी होने का संकेत
चंचल आँखे देखना – बीमारी आने की सूचना
चांदी का सामान देखना – गृह क्लेश बढे
चोकलेट खाना -अच्छा समय आने वाला है
चाय देखना – धन वृद्धि हो
चावल देखना – कठिनाई से धन मिले
चाकू देखना – अंत में विजय
चित्र देखना – पुराने मित्र से मिलन हो
चिडिया देखना – मेहमान आने का संकेत
चींटी देखना – धन लाभ हो
चींटिया बहुत अधिक देखना – परेशानी आये
चील देखना – बदनामी हो
चींटी मारना – तुंरत सफलता मिले
चुम्बन लेना – आर्थिक समृधि हो
चुम्बन देना – मित्रता बढे
चुटकी काटना – परिवार में कलेश
चुंगी देना – चलते काम में रूकावट
चुंगी लेना – आर्थिक लाभ
चुडैल देखना -धन हानि हो
चूहा देखना -औरत से धोखा
चूहा फंसा देखना – शरीर को कष्ट
चूहा चूहे दानी से निकलते देखना – कष्ट से मुक्ति
चूहा मरा देखना – धन लाभ
चूहा मारना – धन हानि
चूडिया तोड़ना – पति दीर्घायु हो (औरत के लिए )
चूल्हा देखना – उत्तम भोजन प्राप्त हो
चूरन खाना – बीमारी में लाभ
चेचक निकलना – धन की प्राप्ति
चोर पकड़ना – धन आने की सूचना
चोटी पर स्वयं को देखना – हानि हो
चोराहा देखना – यात्रा में सफलता
चौकीदार देखना – अचानक धन आये
चौथ का चाँद देखना – बहुत अशुभ
छत देखना -मकान बने
छड़ी देखना – संतान से लाभ हो
छतरी लगाकर चलना – मुसीबतों से छुटकारा मिलना
छत्र देखना – राज दरबार में सम्मान मिले
छलनी देखना – व्यापार में हानि
छल्ला पहनना – शिक्षा में वृद्धि
छलांग लगाना – असफलता हाथ लगे
छम छम की आवाज़ आये – मेहमान आये
छाज देखना – सम्मान बढे
छाछ पीना -धन लाभ हो
छापाखाना देखना – धन लाभ
छात्रो का समूह देखना – शिक्षा में लाभ
छिपकली देखना – दुश्मन से कष्ट
छींक आना – अशुभ लक्षण
छुआरा खाना – धन लाभ हो
छुरा देखना – दुश्मन से भय हो
छोटे बच्चे देखना – इच्छा पूरण हो
जमघट देखना – कार्य की प्रशंषा मिलेगी
जयकार सुनना- संकट में पड़ना
जलना – मान सम्मान की प्राप्ति
ज्योतिष देखना – संतान को कष्ट
जटाधारी साधु देखना – शुभ लक्षण
जहाज देखना – दुर्घटना में फंसने का सूचक
खाली जंजीर देखना – इल्जाम लगेगा
स्वयं को जंजीर में जकडे देखना – समस्याओ से छुटकारा
जल देखना – संकट आएगा
जड़े देखना -शुभ स्वप्न
ज्वालामुखी देखना – स्थान परिवर्तन की पूर्व सूचना
जमीन खोदना – कठिनाई से लाभ हो
जंगल देखना – कष्ट दूर हो
जलेबी खाना – सुख सुविधाय बढे
जलता घर देखना -बीमारी परेशानी बढे
जलता मुर्दा देखना – शुभ समाचार
जादू देखना या करना -धन हानि
जाल देखना (मकडी का ) – शुभ लक्षण
जाल देखना ( मचली का ) -संकट का संकेत
जामुन खाना या देखना – यात्रा पर जाना पड़े
जलूस देखना -नौकरी में उनत्ति हो
जूए देखना या मारना – मानसिक चिंता
जूते से पीटना – मान सम्मान बढे
जूते से स्वयं पीटना – मान सम्मान मिलेगा
जेब खाली देखना -अशुभ है
जेब भरी देखना -खर्च अधिक होने का सूचक
जेल देखना – जग हँसी हो
जेल से छूटना – कार्य में सफलता
जोकर देखना – समय बर्बाद हो
झगडा देखना -शुभ समाचार
झरना देखना (ठंडे पानी का ) – शुभ है
झरना देखना (गर्म पानी का ) – बीमारी आये
झंडा देखना सफेद या मंदिर का -शुभ समाचार
झंडा देखना हरा – यात्रा में कष्ट
झंडा देखना पीला – बीमारी आये
झाडू लगाना – घर में चोरी हो
झुनझुना देखना – परिवार में ख़ुशी हो
टंकी खाली देखना – शुभ लक्षण
टंकी भरी देखना – अशुभ घटना का संकेत
टाई सफेद देखना – अशुभ
टाई रंगीन देखना – शुभ
टेलेफोन करना – मित्रो की संख्या में वृद्धि
टोकरी खाली देखना – शुभ लक्षण
टोकरी भरी देखना – अशुभ घटना का संकेत
टोपी उतारना – मान सम्मान बढे
टोपी सिर पर रखना – अपमान हो
डंडा देखना – दुश्मन से सावधान रहे
डफली बजाना – घर में उत्सव की सूचना
डाक खाना देखना – बुरा समाचार मिले
डाकिया देखना – शुभ सूचना मिले
डॉक्टर देखना – निराशा मिले
डाकू देखना – धन वृद्धि हो
तरबूज देखना – धन लाभ
तराजू देखना – कार्य निष्पक्ष पूर्ण हो
तबला बजाना – जीवन सुखपूर्वक गुजरे
तकिया देखना – मान सम्मान बढे
तलवार देखना – शत्रु पर विजय
तपस्वी देखना -मन शांत हो
तला पकवान खाना – शुभ समाचार मिले
तलाक देना – धन वृद्धि हो
तमाचा मारना -शत्रु पर विजय
तराजू में तुलना – भयंकर बीमारी हो
तवा खाली देखना – अशुभ लक्षण
तवे पर रोटी सेकना – संपत्ति बढे
तहखाना देखना या उसमे प्रवेश करना – तीर्थ यात्रा पर जाने का संकेत
ताम्बा देखना – सरकार से लाभ मिले
तालाब में तैरना – स्वस्थ्य लाभ
ताला देखना -चलते काम में रूकावट
ताली देखना – बिगडे काम बनेगे
तांगा देखना – सुख मिले, सवारी का लाभ हो
ताबीज बांधना – काम में हानि हो
ताबीज़ देखना – शुभ समय का आगमन
ताश देखना – मित्र अथवा पडोसी से लडाई हो
तारा देखना – अशुभ
तितली देखना – विवाह हो या प्रेमिका मिले
तितली उड़ कर दूर जाना – दांपत्य जीवन में क्लेश हो
तिल देखना – कारोबार में लाभ
तिराहा देखना – लडाई झगडा हो
त्रिशूल देखना – अच्छा मार्ग दर्शन मिले
त्रिमूर्ति देखना – सरकारी नौकरी मिले
तितली पकड़ना – नई संतान हो
तिजोरी बंद करना – धन वृद्धि हो
तिजोरी टूटती देखना – कारोबार में बढोतरी
तिलक करना – व्यापार बढे
तूफान देखना या उसमे फँसना – संकट से छुटकारा मिले
तेल या तेली देखना – समस्या बढे
तोलना – महंगाई बढे
तोप देखना -शत्रु पर विजय
तोता देखना – ख़ुशी मिले
तोंद बढ़ी देखना – पेट में परेशानी हो
तोलिया देखना – स्वस्थ्य लाभ हो
थप्पर खाना – कार्य में सफलता
थप्पर मारना – झगडे में फँसना
थक जाना – कार्य में सफलता मिले
थर थर कंपना -मान सम्मान बढे
थाली भरी देखना – अशुभ
थाली खाली देखना – सफलता मिले
थूकना – मान सम्मान बढे
थैली भरी देखना – जमीन जायदाद में वृद्धि
थैली खाली देखना – जमीन जायदाद में झगडा हो
दरवाजा बंद देखना – चिंता बढे
दही देखना -धन लाभ हो
दलिया खाना या देखना – स्वस्थ्य कुछ समय के लिए ख़राब हो
दरार देखना – घर में फूट
दलदल देखना – काम में आलस्य हो
दरवाजा खोलना – नया कार्य शुरू हो
दरवाजा गिरना – अशुभ संकेत
दक्षिणा लेना या देना – व्यापार में घाटा
दमकल चलाना – धन वृद्धि हो
दर्पण देखना – मानसिक अशांति
दस्ताना पहनना – शुभ समाचार
दहेज़ लेना या देना – चोरी की सम्भावना
दरजी को काम करते देखना – कोर्ट से छुटकारा
दवा खाना या खिलाना – अच्छा मित्र मिले
दवा गिरना – बीमारी दूर हो
दांत टूटना – शुभ
दांत में दर्द देखना -नया कार्य शुरू हो
दाडी देखना – मानसिक परेशानी हो
दादा या दादी देखना जो मृत हो – मान सम्मान बढे
दान लेना – धन वृद्धि हो
दान देना – धन हानि हो
दाह क्रिया देखना – सोचा हुआ कार्य बनने के संकेत
दातुन करना -कष्ट मिटे
दाना डालना पक्षियो को – व्यापार में लाभ हो
दाग देखना – चोरी हो
दामाद देखना -पुत्री को कष्ट हो
दाल कपड़ो पर गिरना -शुभ लक्षण
दाल पीना – कार्य में रूकावट
दाढ़ी सफेद देखना – काम में रूकावट
दाढ़ी काली देखना – धन वृद्धि हो
दियासिलाई जलाना – दुश्मनी बढे
दीपक बुझा देना – नया कार्य शुरू हो
दीपक जलाना – अशुभ समाचार मिले
दीवाली देखना – व्यापार में घाटा हो
दीपक देखना – मान सम्मान बढे
दुल्हन देखना – सुख मिले
दुकान करना – मान सम्मान बढे
दुकान बेचना – मानहानि हो
दुकान खरीदना – धन का लाभ होना
दुकान बंद होना – कष्टों में वृद्धि हो
दुपट्टा देखना – स्वस्थ्य में सुधार हों
दूल्हा /दुल्हन बनना – मानहानि हों
दूल्हा /दुल्हन बारात सहित देखना -बीमारी आये
दूरबीन देखना – मान सम्मान में हानि हों
दूध देखना – आर्थिक लाभ मिले
दुकान पर बैठना – प्रतिष्ट बढे,धन लाभ हों
देवता से मंत्र प्राप्त होना – नए कार्य में सफलता
देवी देवता देखना – सुख संपत्ति की वृद्धि होना
दोना देखना – धन संपत्ति प्राप्त होना
दोमुहा सांप देखना – दुर्घटना हों, मित्र द्वारा विश्वासघात मिले
दौड़ना – कार्य में असफलता हों
देवी देवता देखना – कृष्ण – प्रेम संबंधो में वृद्धि
देवी देवता देखना – राम – सफलता मिले
देवी देवता देखना – शिव – मानसिक शांति बढे
देवी देवता देखना – विष्णु – सफलता मिले
देवी देवता देखना – ब्रह्मा – अच्छा समय आने वाला है
देवी देवता देखना – हनुमान -शत्रु का नाश हो
देवी देवता देखना – दुर्गा – रोग दूर हो
देवी देवता देखना – सीता – पहले कष्ट मिले फिर समृधि हो
देवी देवता देखना – राधा – शारीरिक सुख मिले
देवी देवता देखना – लक्ष्मी – धन धन्य की प्राप्ति हो
देवी देवता देखना – सरस्वती -भविष्य सुखद हो
देवी देवता देखना – पार्वती – सफलता मिले
देवी देवता देखना – नारद -दूर से शुभ समाचार मिले
धमाका सुनना – कष्ट बढे
धतूरा खाना – संकट से बचना
धनिया हरा देखना – यात्रा पर जाना पढ़े
धनुष देखना – सभी कर्मो में सफलता मिले
धब्बे देखना – शुभ संकेत
धरोहर लाना या देखना – व्यापार में हानि हों
धार्मिक आयोजना देखना – शुभ संकेत
धागा देखना – कार्य में वृद्धि हों
धुरी देखना – मान सम्मान में वृद्धि हों
धुआ देखना – कष्ट बढे , परेशानी में फंसना पढ़े
धुंध देखना – शुभ समाचार मिले
धुन सुनना – परेशानी बढे
धूमधाम देखना – परेशानी बढे
धूल देखना – यात्रा हों
धोबी देखना – काम में सफलता मिले
धोती देखना – यात्रा पर जाना पड़े
नल खुला देखना – काम शीघ्र होगा
नल बंद देखना – काम कठिनाई से होगा
नरक देखना- कठिनाइयाँ बढे
नगीना देखना – सरकार से लाभ हों , शुभ समाचार मिले
नगाडा देखना – धन लाभ , प्रसिधी मिले
नमाज़ पढ़ते देखना – कष्ट दूर हों , शान्ति मिलेगी
नमक खाना – झगडे में फँसना
नमक देखना – बीमारी दूर हों , व्यापार में लाभ हों
नमकदानी देखना – गृहस्थी का सुख मिले
नशे में स्वयं को देखना – धन वृद्धि हों परन्तु परिशानिया बढे
नरगिस का फूल देखना – पारिवारिक सुख मिले
नदी नाले में गिरते देखना – अनेक संकट आने का संकेत
नक्कता मनुष्य देखना – धन तथा मान सम्मान बढे
नक़ल करना – काम में असफलता मिले
नक़ल करते देखना – यात्रा में रुकावट , काम बिगडे
नक्शा बनाना – नई योजनाये शुरू हों
नकसीर बहना – दिमागी परेशानिया आये
नकाब लगाना – गंभीर बीमारी आये
नट देखना – पारिवारिक सुख शाति मिले
नसवार सूंघना – मानसिक परिशानिया बढे
नदी देखना – भविष्य सुखद हों
नदी में स्नान करना – काम में सफलता मिले
नदी में गिरना – संकट के बाद सुख मिले
नहर खोदना – कार्य सम्बन्धी योजनाये मिले
नंगा होना – विलासिता बढे
नदी , वृक्ष, या पर्वत देखना – दुःख दूर हो , धन मिले
नाटक देखना – भविष्य अनिश्चित हो
नाखून टूटना – सफलता देरी से मिले
नाक बहुत बड़ी देखना – मान सम्मान बढे , प्रमोशन हो
नाखून देखना – काम में परेशानी हो
नाक से खून बहना – धन में वृद्धि हो
नाटक देखना – गृहस्थी का सुख मिले
नाटक में भाग लेना – धोखा मिले
नारियल देखना – धन लाभ हो , अच्छा भोजन मिले
नाक पर चोट लगना -मान सम्मान में हानि हो
नासूर देखना – बीमारी से छुटकारा मिले
नापतोल करना – व्यापार में हानि हो
नाग के बिल में जाते देखना – धन संग्रह हो
नाग के बिल से बाहर निकलते देखना – धन हानि हो
नाग का डंग मारना – मान सम्मान बढे
नाग का घर में देखना – देखे गए स्थान की पवित्रता का संकेत
नाग उठाये देखना – - संपत्ति प्राप्त का संकेत
नाना नानी देखना – पारिवारिक सुख बढे
नाडा बंधना या टूटना – पारिवारिक कलेश बढे
नाला देखना – गहरा संकट आये
नाव देख्ना – गृहस्थी का सुख मिले
नाव में बैठना – अनेक संकट आये
नाई से हजामत बनवाना – धोखा मिले
नारियल देख्ना – शुभ संकेत , धार्मिक आयोजना हो
नाला देख्ना – कार्य में सफलता मिले
नारद देख्ना – धन लाभ परन्तु लड़ाई झगडा हो
नाभि देख्ना – प्रगति तथा धन लाभ हो
निरादर देख्ना – मान सम्मान बढे
निशाना लगाना – पुरानी इच्छा पूर्ण हो
नितम्ब देख्ना – गृहस्थी का सुख मिले
नीम का व्रक्ष देख्ना -बिमारी दूर होना
नीलम देख्ना -शुभ समाचार मिले , दुश्मन परस्त हो
नींद में सोना या नींद से उठाना – धन लाभ हो
नीलकंठ देख्ना – मान सम्मान बढे , विवाह हो
नींबू काटना या निचोड़ना – धार्मिक कार्य हो
नुकीली चीज़ से चोट लगना – वाद विवाद में फसना
नुकीला जूता देखना – मान सम्मान बढे
नेवला देखना – संकट समाप्त हो , स्वर्णाभूषण मिले
परी देखना – सफलता मिले , स्वस्थ्य लाभ हो , मान सम्मान में वृद्धि हो , धन बढे
पहाड़ देख्ना – शत्रु पर विजय हो
पम्प से पानी निकालना – व्यवसाय में रुकावट आये
प्रसाद बाँटना – रोग कम हो , समृध्धि बढे
पहाड़ पर चढ़ना – मान सम्मान तथा धन बढे
पहाड़ से उतरना -व्यापार में मंदा हो
परदेशी देखना – मनोकामना पूरण हो
पटका बांधना – मान सम्मान तथा धन बढे
पटाखा देखना – ख़ुशी मिले
पलंग देखना – अपमानित होना पड़े
पनघट सूना देखना – कही से निमंत्रण आये
पनघट पर भीड़ देखना – परिवार में उत्सव हो
परिवार देखना – शुभ फल मिले
पनीर खाना – धन वृद्धि हो
पपीता खाना – पेट खराब हो
पहरेदार देखना – चोरी की सम्भावना
पंजीरी खाना – बीमारी आने की सूचना
परछाई देखना अशुभ समाचार
पगड़ी देखना – धन हानि हो
पर्दा सफेद देखना – मान – सम्मान में हानि
पर्दा काला देखना – धन वृद्धि हो
पर्स देखना – गुप्त कार्य पूरा हो
पहिया देखना – प्रगति तेज हो
पंडाल देखना – किसी बड़े उत्सव में शामिल होना
पत्तल देखना या उसमें खाना -शुभ लक्षण
पत्थर देखना या मारना – सरकार से लाभ हो
पत्र लिखना – परेशानी हो
प्याज खाना या खिलाना – दुर्भाग्य पूर्ण घटना घटे
प्रशंसा सुनना – अशुभ संकेत
प्रसाद बाँटना – शुभ फल मिले
प्याऊ बनवाना – धन वृद्धि हो
परीक्षा में बैठना – कार्य में असफलता
पतंग उडाना – लम्बी यात्रा हो
पढ़ना या पढाना – काम में सफलता
पकवान खाना या बनाना – दुखो में वृद्धि हो
पहिया देखना – यात्रा सफल हो
पानी देखना – सुख समृधि बढे
पानी पीते देखना – धन वृद्धि हो
पोलिश करना -नौकरी में तरक्की हो
पान का वृक्ष देखना – संतान की समृधि हो
पागल देखना – शुभ कार्य में वृद्धि हो
पानदान देखना – मित्रता में वृद्धि हो
पाउडर लगाना – मान सम्मान बढे
पार्वती माता देखना – सुख समृधि बढे
पायल बजते देखना – स्त्री से वियोग हो
पारितोषिक मिलना – अपमानित होना पढ़े
पालकी पर बैठना – स्वस्थ्य खराब हो
पालना देखना – पारिवारिक सुख मिले
पालना झुलाना – संतान के लिए कष्ट बढे
पार्सल लेना – अचानक लाभ मिले
पाताल देखना – मान सम्मान बढे , प्रशंसा मिले
पाद मरना या अनुभव करना – व्यापार में लाभ हो व्यवसायिक यात्रा
पार करना (तैरकर) – मान सम्मान बढे
पिटारा देखना – धन लाभ हो
पिजरा देखना – स्वस्थ्य खराब हो
पिजरा खाली देखना – धन वृद्धि हो
पिजरे में पक्षी देखना – गृह कलेश हो
पीपल देखना – शुभ सन्देश मिले
पीला रंग देखना स्वास्थ्य खराब हो
पीठ देखना – मित्र से लाभ हो
पीतल के बर्तन देखना – धन लाभ हो , व्यापार बढे
पीली सरसों देखना – सब प्रकार से शुभ हो
पुस्तकालय देखना – समृधि बढे
पुस्तक खोना – मानहानि हो
पुस्तक मिलना – मान सम्मान में वृद्धि हो
पुजारी बनना – जीवन में उन्नति हो
पुडिया बंधना – शारीरिक कष्ट बढे
पुरस्कार मिलना – हानि हो
पुल पार करना – धन लाभ हो
पुल टूटते देखना – संकट से छुटकारा हो
पूजा पाठ करना – सुख शान्ति तथा समृद्धि की सूचना
पूर्वज देखना – शुभ स्वप्ना , समृद्धि बढे
पूजा या प्रार्थना करना – मानसिक शान्ति मिले
प्रेम प्रस्ताव रखना – विवाह में विलंभ हो
पेड़ पौधे देखना – कार्य में लाभ हो
पेटी खोलना – चोरी की संभावना
पेशाब करना – संकट दूर हो , धनप्राप्ति हो
पेढा खाना – मुह में रोग हो
पैर कटे देखना – शत्रु पर विजय हो
पैर खुजलाना – यात्रा शीघ्र हो
पैबंद लगाना – कष्ट के पूर्व सूचना
पैसा मिलना – मुफ्त का धन मिले
पेन पेंसिल देखना – परीक्षा में उत्तीरण हो
पोचा लगाना – स्थान परिवर्तन हो
पोशाक पहनना – बीमारी आने का संकेत
फलाहार करना – सुख समृद्धि बढे
फटे कपडे देखना – धनहानि हो , चिंताए बढे
फ़कीर देखना – काम में सफलता मिले
फ़रिश्ता देखना – मनोकामना पूर्ण हो
फंदा लगाना या देखना – मुसीबतों से छुटकारा मिले
फफोला टूटना – मुसीबतें समाप्त हो
फवारा देखना – सभी मुसीबते दूर हो ,प्रसन्नता बढे
फाखता देखना – पत्नी की ओर से कष्ट मिले , मानसिक ग्लानी हो
फाटक देखना – मुकदमा समाप्त हो
फाटक पार करना -सफलता मिले
फिटकरी देखना – धन लाभ हो
फांसी लगाना – जीवन में दिशा परिवर्तन हो
फिरोजा रत्न देखना – शत्रुओं पर विजय हो
फूलवारी देखना – मनपसंद विवाह होना , ख़ुशी मिले
फुल्का खाते देखना – आर्थिक समृद्धि हो , परन्तु शोक समाचार मिले

Thursday, August 27, 2015

गालो का रंग भी बताता है -

किसी भी व्यक्ति के गालो का रंग देख कर आप  उसका स्वभाव समझ सकते है -अब  कहेगे ये क्या बात हुई है -जी हाँ ये सच है -ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शरीर के अंगो की बनावट किसी भी व्यक्ति का हाव-भाव उसकी आदत और उसका स्वभाव की जानकारी प्राप्त की जा सकती है -जिन भी ग्रह-नक्षत्रो का प्रभाव हमारे ऊपर सबसे अधिक होता है -उसी के अनुसार हमारे गुण-अवगुण होते है -




जिस भी व्यक्ति के गालो का रंग सफ़ेद रहता है वे अक्सर ही अस्वस्थ पाए जाते है किसी न किसी रोग से ग्रसित और त्रस्त ही रहते है -इस प्रकार  के लोगो में निराशा रहती है और आलसी भी हो  सकते है -अनिश्चिता की भावना प्रबल होती है -ये लोग हर कार्य अपने ही ढंग से करते रहते है -

जिन लोगो के गालो का रंग लाल है वो व्यक्ति थोड़े गुस्से वाले होते है -इनको छोटी-छोटी बातो में अक्सर क्रोध आ जाता है -लेकिन ये लोग साहसी-उत्तेजित-युद्ध-प्रिय भी होते है -ख़ास बात ये भी है कि ये किसी भी कार्य को बहुत ही अच्छी तरह पूर्ण भी करते है -क्युकि ये लोग संतुलित मानसिकता के होते है -किसी भी परिस्थिति में खुद को अच्छे से एडजस्ट भी कर  लेते है -हर कार्य करने की इनकी अपनी विशेष शेली होती है -इस प्रकार के लोग अपने जीवन में कई उपलब्धियां भी हासिल करते है -

ये तो मात्र एक उदाहरण है -किसी भी व्यक्ति के सम्बन्ध में सटीक बताने के लिए और उसके विषय में गहराई से अध्यन करने की आवश्यकता होती है - जब वह व्यक्ति आपके सामने हो -तो आपका विश्लेक्षण सटीक होगा -यदि आपने अध्यन किया है -

उपचार और प्रयोग-



Tuesday, August 25, 2015

दाम्पत्य सुख बढ़ाता है मनी प्लांट-

घर का हर हिस्सा तथा हर वस्तु उसमें रहने वाले लोगों के जीवन को किसी न किसी तरह से प्रभावित करती है। यहां तक कि घर में रखे फूल व पौधे भी परिवार के सदस्यों पर अपना असर डालते हैं।


घरों का सुंदरता बढ़ाने के लिये मनी प्लांट्स लगाए जाते हैं। ये शुक्र के कारक हैं। मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर होते हैं। फँगशुई के अनुसार बांस के पौधे सुख व समृद्धि के प्रतीक होते हैं।

मान्यता है कि जिसके घर में मनी प्लांट का पौधा लगा होता है उसके उसके घर में न केवल सुख-समृद्धि में इजाफा होता है बल्कि घर में धन का भी आगमन होता है| इसी वजह से कुछ लोग घरों में मनी प्लांट का पौधा लगाते हैं| घर में मनी प्लांट लगाने पर सुख-समृद्धि में होने के साथ धन का आगमन बढ़ता है। इसी के चलते लोग अपने घरों में यह पौधा लगाते हैं।

घर हो या आँगन यह प्लांट कहीं भी आसानी से लग जाता है। साथ ही यह केवल पानी में भी लगाया जा सकता है और इसके रखरखाव के लिए भी ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है। इसे घर के अंदर व बाहर दोनों जगह ही रखा जा सकता है।

वास्तु के अनुसार, यदि सही दिशा और सही जगह में मनी प्लांट का पौधा नहीं लगाया गया तो धनलाभ के बजाय हानि का सामना करना पड़ता है| वास्तु शास्त्रीयों का मानना है कि मनी प्लांट के पौधे के घर में लगाने के लिए आग्नेय दिशा सबसे उचित दिशा है। इस दिशा में यह पौधा लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का भी लाभ मिलता है। मनी प्लांट को आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाने का कारण ये है इस दिशा के देवता गणेशजी है जबकि प्रतिनिधि शुक्र हैं। गणेश जी अमंगल का नाश करने वाले हैं जबकि शुक्र सुख-समृद्धि लाने वाले। यही नहीं बल्कि बेल और लता का कारण शुक्र को माना गया है। इसलिए मनी प्लांट को आग्नेय दिशा में लगाना उचित माना गया है।

मनी प्लांट को कभी भी ईशान यानि उत्तर पूर्व दिशा में नहीं लगाना चाहिए, यह दिशा इसके लिए सबसे नकारात्मक मानी गई है। क्योंकि ईशान दिशा का प्रतिनिधि देवगुरू बृहस्पति को माना गया है। और शुक्र तथा बृहस्पति में शत्रुवत संबंध होता है। इसलिए शुक्र से संबंधित यह पौधा ईशान दिशा में होने पर नुकसान होता है। हालांकि इस दिशा में तुलसी का लगाया जा सकता है।

परिवार में यदि कोई बीमार हो तो उसके आस-पास ताजा फूल रखना शुभ है किंतु रात को वहां से हटा देना चाहिए।

गुलाब, चंपा व चमेली के पौधे मानसिक तनाव व अवसाद में कमी लाते हैं। इन्हें लगाना अच्छा होता है।
शयन कक्ष के नैऋत्य कोण में टेराकोटा या चीनी मिट्टी के फूलदानों में सूरजमुखी का पौधा मन में उल्लास पैदा करता है।

पौधे व फूलों का उपयोग घर के नुकीले कोणों व उबड़-खाबड़ जमीन को ढंकने के लिए भी किया जा सकता है।

घर में पूजा केसे करे -

हम सभी हिन्दुओं के घर में पूजन के लिए छोटे छोटे मंदिर बने होते है जहां की वो भगवान की नियमित पूजा करते है। लेकिन हममे में से अधिकांश लोग अज्ञानतावश पूजन सम्बन्धी छोटे- छोटे नियमों का पालन नहीं करते है। जिससे की हमे पूजन का सम्पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। आज हम आपको घर में पूजन सम्बन्धी कुछ ऐसे ही नियम बताएँगे जिनका पालन करने से हमे पूजन का श्रेष्ठ फल शीघ्र प्राप्त होगा।



घर के मंदिर में ज्यादा बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि यदि हम मंदिर में शिवलिंग रखना चाहते हैं तो शिवलिंग हमारे अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए। शिवलिंग बहुत संवेदनशील होता है और इसी वजह से घर के मंदिर में छोटा सा शिवलिंग रखना शुभ होता है। अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी छोटे आकार की ही रखनी चाहिए। अधिक बड़ी मूर्तियां बड़े मंदिरों के लिए श्रेष्ठ रहती हैं, लेकिन घर के छोटे मंदिर के लिए छोटे-छोटे आकार की प्रतिमाएं श्रेष्ठ मानी गई हैं।



पूजा करते समय किस दिशा की ओर होना चाहिए अपना मुंह ये भी जाने कि घर में पूजा करने वाले व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होगा तो बहुत शुभ रहता है। इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। यदि यह संभव ना हो तो पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होगा तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।

घर में मंदिर ऐसे स्थान पर बनाया जाना चाहिए, जहां दिन-भर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचती हो। जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा आती रहती है, उन घरों के कई दोष स्वतः ही शांत हो जाते हैं। सूर्य की रोशनी से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है।

यदि घर में मंदिर है तो हर रोज सुबह और शाम पूजन अवश्य करना चाहिए। पूजन के समय घंटी अवश्य बजाएं, साथ ही एक बार पूरे घर में घूमकर भी घंटी बजानी चाहिए। ऐसा करने पर घंटी की आवाज से नकारात्मकता नष्ट होती है और सकारात्मकता बढ़ती है।

पूजा में बासी फूल, पत्ते अर्पित नहीं करना चाहिए। स्वच्छ और ताजे जल का ही उपयोग करें। इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि तुलसी के पत्ते और गंगाजल कभी बासी नहीं माने जाते हैं, अत: इनका उपयोग कभी भी किया जा सकता है। शेष सामग्री ताजी ही उपयोग करनी चाहिए। यदि कोई फूल सूंघा हुआ है या खराब है तो वह भगवान को अर्पित न करें।

घर में जिस स्थान पर मंदिर है, वहां चमड़े से बनी चीजें, जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए। मंदिर में मृतकों और पूर्वजों के चित्र भी नहीं लगाना चाहिए। पूर्वजों के चित्र लगाने के लिए दक्षिण दिशा क्षेत्र रहती है। घर में दक्षिण दिशा की दीवार पर मृतकों के चित्र लगाए जा सकते हैं, लेकिन मंदिर में नहीं रखना चाहिए। पूजन कक्ष में पूजा से संबंधित सामग्री ही रखना चाहिए। अन्य कोई वस्तु रखने से बचना चाहिए।

घर के मंदिर के आसपास शौचालय होना भी अशुभ रहता है। अत: ऐसे स्थान पर पूजन कक्ष बनाएं, जहां आसपास शौचालय न हो। यदि किसी छोटे कमरे में पूजा स्थल बनाया गया है तो वहां कुछ स्थान खुला होना चाहिए, जहां आसानी से बैठा जा सके। खास कर बेड रूम में न हो तो अच्छा है अगर किसी कारण से बनाये तो रात को सोते समय पर्दे से अवश्य ही ढक दे मंदिर को .

रोज रात को सोने से पहले मंदिर को पर्दे से ढंक देना चाहिए। जिस प्रकार हम सोते समय किसी प्रकार का व्यवधान पसंद नहीं करते हैं, ठीक उसी भाव से मंदिर पर भी पर्दा ढंक देना चाहिए। जिससे भगवान के विश्राम में बाधा उत्पन्न ना हो।

वर्षभर में जब भी श्रेष्ठ मुहूर्त आते हैं, तब पूरे घर में गौमूत्र का छिड़काव करना चाहिए। गौमूत्र के छिड़काव से पवित्रता बनी रहती है और वातावरण सकारात्मक हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार गौमूत्र बहुत चमत्कारी होता है और इस उपाय घर पर दैवीय शक्तियों की विशेष कृपा होती है। ये नकारात्मक उर्जा को और वाइरस को खत्म करता है .

खंडित मूर्तियां हो तो उसे पूजा के स्थल से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है। इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि सिर्फ शिवलिंग कभी भी, किसी भी अवस्था में खंडित नहीं माना जाता है।

सदैव दाएं हाथ की अनामिका एवं अंगूठे की सहायता से फूल अर्पित करने चाहिए। चढ़े हुए फूल को अंगूठे और तर्जनी की सहायता से उतारना चाहिए। फूल की कलियों को चढ़ाना मना है, किंतु यह नियम कमल के फूल पर लागू नहीं है।

तुलसी के बिना ईश्वर की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। तुलसी की मंजरी सब फूलों से बढ़कर मानी जाती है। मंगल, शुक्र, रवि, अमावस्या, पूर्णिमा, द्वादशी और रात्रि और संध्या काल में तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए।तुलसी तोड़ते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि उसमें पत्तियों का रहना भी आवश्यक है।

स्फटिक आर्थिक तंगी का नाश करता है-

जी हाँ विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दिलाने वाला और विघ्रो को मिटाने वाला होता है।



स्फटिक एक रंगहीन, पारदर्शी, निर्मल और शीत प्रभाव वाला उपरत्न है। इसको कई नामों से जाना जाता है जैसे- 'सफ़ेद बिल्लौर', अंग्रेज़ी में 'रॉक क्रिस्टल', संस्कृत में 'सितोपल', शिवप्रिय, कांचमणि और फिटक आदि। इसे फिटकरी भी कहा जाता है। सामान्यत: यह काँच जैसा प्रतीत होता है, परंतु यह काँच की अपेक्षा अधिक दीर्घजीवी होता है। कटाई में काँच के मुकाबले इसमें कोण अधिक उभरे होते हैं।

इसकी प्रवृत्ति ठंडी होती है। अत: ज्वर, पित्त-विकार, निर्बलता तथा रक्त विकार जैसी व्याधियों में वैद्यजन इसकी भस्मी का प्रयोग करते हैं। स्फटिक को नग के बजाय माला के रूप में पहना जाता है। स्फटिक माला को भगवती लक्ष्मी का रूप माना जाता है।

स्फटिक की रासायनिक संरचना सिलिकॉन डाइऑक्साइड है। तमाम क्रिस्टलों में यह सबसे अधिक साफ, पवित्र और ताकतवर है। स्फटिक शुद्ध क्रिस्टल है, या फिर यह भी कहा जा सकता है कि अंग्रेज़ी में शुद्ध क्वार्टज क्रिस्टल का देसी नाम स्फटिक है। 'प्योर स्नो' या 'व्हाइट क्रिस्टल' भी इसी के नाम हैं। यह सफ़ेदी लिए हुए रंगहीन, पारदर्शी और चमकदार होता है। यह सफ़ेद बिल्लौर अर्थात रॉक क्रिस्टल से हू-ब-हू मिलता है।

इसकी ख़ास विशेषताएँ:-



स्फटिक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पहनने वाले किसी भी पुरुष या स्त्री को एकदम स्वस्थ रखता है। इसके बारे में यह भी माना जाता है कि इसे धारण करने से भूत-प्रेत आदि की बाधा से मुक्त रहा जा सकता है। कई प्रकार के आकार और प्रकारों में स्फटिक मिलता है। इसके मणकों की माला फैशन और हीलिंग पावर्स दोनों के लिहाज से लोकप्रिय है। यह इंद्रधनुष की छटा-सी खिल उठती है। इसे पहनने मात्र से ही शरीर में इलैक्ट्रोकैमिकल संतुलन उभरता है और तनाव-दबाव से मुक्त होकर शांति मिलने लगती है। स्फटिक की माला के मणकों से रोजाना सुबह लक्ष्मी देवी का मंत्र जप करना आर्थिक तंगी का नाश करता है। स्फटिक के शिवलिंग की पूजा-अर्चना से धन-दौलत, खुशहाली और बीमारी आदि से राहत मिलती है तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती हैं।

रुद्राक्ष और मूंगा के साथ पिरोया गया स्फटिक का ब्रेसलेट खूब पहना जाता है। इससे व्यक्ति को डर और भय नहीं लगता। उसकी सोच-समझ में तेजी और विकास होने लगता है। मन इधर-उधर भटकने की स्थिति में, सुख-शांति के लिए स्फटिक पहनने की सलाह दी जती है। कहते हैं कि स्फटिक के शंख से ईश्वर को जल तर्पण करने वाला पुरुष या स्त्री जन्म-मृत्यु के फेर से मुक्त हो जता है।

ज्वर, पित्त-विकार, निर्बलता तथा रक्त विकार जैसी व्याधियों में वैद्यजन इसकी भस्मी का प्रयोग करते हैं। स्फटिक कंप्यूटर से निकलने वाले ‘बुरे’ रेडिएशन (यानी हानिकारक विकिरण) को अपनी ओर खींचकर सोख लेती है । स्फटिक को नग के बजाय माला के रूप में पहना जाता है।

इसके उपयोग इस प्रकार हैं:-



लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इसे पूजा स्थल में रखें-

इसे स्फटिक मणि भी कहा जाता है। स्फटिक बर्फ के पहाड़ों पर बर्फ के नीचे टुकड़े के रूप में पाया जाता है। यह बर्फ के समान पारदर्शी और सफेद होता है। यह मणि के समान है। इसलिए स्फटिक के श्रीयंत्र को बहुत पवित्र माना जाता है। यह यंत्र ब्रम्हा, विष्णु, महेश यानि त्रिमूर्ति का स्वरुप माना जाता है।

स्फटिक श्रीयंत्र का स्फटिक का बना होने के कारण इस पर जब सफेद प्रकाश पड़ता है तो ये उस प्रकाश को परावर्तित कर इन्द्र धनुष के रंगों के रूप में परावर्तित कर देती है।

यदि आप चाहते है कि आपकी जिन्दगी भी खुशी और सकारात्मक ऊर्जा के रंगों से भर जाए तो घर में स्फटिक श्रीयंत्र स्थापित करें। यह यंत्र घर से हर तरह की नेगेटिव एनर्जी को दूर करता है। घर में पॉजिटिव माहौल को बनाता है। जिस घर में यह यंत्र स्थापित कर दिया जाता है वहां पैसा बरसने लगता है साथ ही जो भी व्यक्ति इसे स्थापित करता है उसके जीवन में नाम पैसा दौलत शोहरत सब कुछ होता है। बस इसे विधान से स्थापित करवाए .

स्फटिक में दिव्य शक्तियां या ईश्वरीय पावर्स मौजूद होती हैं। इस कदर कि स्फटिक में बंद एनर्जी के जरिए आपकी तमन्नाओं को ईश्वर तक खुद-ब-खुद पहुंचाता जता है। फिर यह धारण करने वाले के मनमर्जी मुताबिक काम करता जता है और आपके दिमाग या मन में किसी किस्म के नकारात्मक विचार हरगिज नहीं पनप पाते।

स्फटिक की माला के मणकों से रोजना सुबह लक्ष्मी देवी का मंत्र जप करना आर्थिक तंगी का नाश करता है। स्फटिक के शिवलिंग की पूज-अर्चना से धन-दौलत, खुशहाली, बीमारी से राहत और पॉजिटिव पावर्स प्राप्त होती हैं।

रुद्राक्ष और मूंगा संग पिरोई स्फटिक का ब्रेसलेट हीलिंग यंत्र के तौर पर खूब पहना जाता है। इससे डर-भय छूमंतर होते देर नहीं लगती। सोच-समझ में तेजी और विकास होने लगता है। मन इधर-उधर भटकने की स्थिति में, सुख-शांति के लिए स्फटिक के पेंडेंट पहनने की सलाह दी जती है और बताते हैं कि स्फटिक के शंख से ईश्वर को जल तर्पण करने वाला या वाली जन्म-मृत्यु के फेर से मुक्त हो जता है। साथ-साथ खुशकिस्मती आपके घर-आंगन में वास करने लगती है।

एक खास बात और है-अगर आपके बेटे या बेटी का पढ़ाई-लिखाई में मन न लगे और एकाग्रता के अभाव के चलते वह पढ़ाई में कमजोर हो तो फौरन स्फटिक का पिरामिड उसके स्टडी टेबल या स्टडी रूम में रखने से उत्तम नतीजे आने लगते हैं। यही नहीं, स्फटिक यंत्र के सहारे तमाम रुकावटें हटती जती हैं। आपको सही समझ-बूझ से नवाजता है स्फटिक।

यह विविध वास्तु दोषों के निराकरण के लिए श्रेष्ठतम उपाय है.। श्री यंत्र पर ध्यान लगाने से मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है.। उच्च यौगिक दशा में यह सहस्रार चक्र के भेदन में सहायक माना गया है.। कार्यस्थल पर इसका नित्य पूजन व्यापार में विकास देता है.। घर पर इसका नित्य पूजन करने से संपूर्ण दांपत्य सुख प्राप्त होता है.। पूरे विधि विधान से इसका पूजन यदि प्रत्येक दीपावली की रात्रि को संपन्न कर लिया जाय तो उस घर में साल भर किसी प्रकार की कमी नही होती है.।

अपने आसपास के वातावरण में इनका प्रयोग किया जा सकता है जैसे ऑफिस में मेज पर रखकर या रोगी के बिस्तर के आसपास या तकिए के नीचे रखकर ऊर्जा शक्ति के क्षेत्र को बढाया जा सकता है।

शक्तिवर्घक प्रकृति का यह अनमोल सुरक्षा कवच मन, रोग एवं भावनाओं के उद्वेग को शांत कर शरीर व मन की शिथिलता को दूर कर स्वास्थ्य लाभ देता है, आत्मविश्वास और निर्भयता प्रदान कर व्यक्तित्व को निखारता है तथा आघ्यात्मिक विकास में सहयोग करता है।

स्फटिक श्रीयंत्र:-



श्री विद्या से संबंधित तंत्र ब्रह्माण्ड का सर्वश्रेष्ठ तंत्र है जिसकी साधना ऐसे योग्य साधकों और शिष्यों को प्राप्त होती है जो समस्त तंत्र साधनाओं को आत्मसात कर चुके हों-

श्री विद्या की साधना का सबसे प्रमुख साधन है श्री यंत्र - श्री यंत्र प्रमुख रूप से ऐश्वर्य तथा समृद्धि प्रदान करने वाली महाविद्या त्रिपुरसुंदरी महालक्ष्मी का सिद्ध यंत्र है. यह यंत्र सही अर्थों में यंत्रराज है. इस यंत्र को स्थापित करने का तात्पर्य श्री को अपने संपूर्ण ऐश्वर्य के साथ आमंत्रित करना होता है | जो साधक श्री यंत्र के माध्यम से त्रिपुरसुंदरी महालक्ष्मी की साधना के लिए प्रयासरत होता है, उसके एक हाथ में सभी प्रकार के भोग होते हैं, तथा दूसरे हाथ में पूर्ण मोक्ष होता है. आशय यह कि श्री यंत्र का साधक समस्त प्रकार के भोगों का उपभोग करता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है. इस प्रकार यह एकमात्र ऐसी साधना है जो एक साथ भोग तथा मोक्ष दोनों ही प्रदान करती है, इसलिए प्रत्येक साधक इस साधना को प्राप्त करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है.|

अन्य लाभ-



कंप्यूटर पर कार्य करने वालों को सलाह दी जाती है कि वे स्फटिक धारण करें या अपने निकट रखें । स्फटिक कंप्यूटर से निकलने वाले ‘बुरे’ रेडिएशन (यानी हानिकारक विकिरण) को अपनी ओर खींचकर सोख लेती है ।

इसकी माला धारण करने से विवादों और समस्याओं से मुक्ति मिलती है और शत्रु भय नहीं रहता.

इसकी माला धारण करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है.

पूजा स्थान में इसकी माला मन्त्रों से सिद्ध कर , गंगा जल से धो कर पूजा करने से , इसे तिजोरी में रखने से और इसकी माला से लक्ष्मीजी का मन्त्र जप करने से घर में लक्ष्मी स्थिर होती है. तिजोरी का मुंह उत्तर की तरफ होना चाहिए.

जिन्दगी में खुशी और सकारात्मक ऊर्जा के लिए घर में स्फटिक श्रीयंत्र स्थापित करें। यह यंत्र घर से हर तरह की नेगेटिव एनर्जी को दूर करता है। घर में पॉजिटिव माहौल बनाता है। - श्रीयंत्र को अगर किसी विद्यार्थी के कमरे में स्थापित किया जाए तो एकाग्रता बढ़ाने के साथ ही मानसिक तनाव नहीं होता है।

इस यंत्र से करियर में जबरदस्त सफलता दिलवाने के साथ ही आप जिस भी क्षेत्र मे हैं, उसमें आपके प्रदर्शन में सुधार लाता है।

मन इधर-उधर भटकने की स्थिति में, सुख-शांति के लिए स्फटिक पहनने की सलाह दी जाती है।

स्फटिक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पहनने वाले किसी भी पुरुष या स्त्री को एकदम स्वस्थ रखता है। इसके बारे में यह भी माना जाता है कि इसे धारण करने से भूत-प्रेत आदि की बाधा से मुक्त रहा जा सकता है।

शुभ मुहूर्त में सिद्ध किया हुआ स्फटिक शिवलिंग के नित्य अर्चन से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है, बिगड़े काम बन जाते है, और सभी प्रकार के रोगों का नाश होता है.

भगवान शिव का सबसे प्रिय रत्न होने के कारण स्फटिक गणेश भी बहुत प्रिय है।

इसके प्रभाव से ग्रहों के अशुभ दूर हो जाता है।

घर का हर कार्य बिना रुकावट के सम्पन्न हो जाए इसके लिए घर के मुख्य दरवाजे के ऊपर स्फटिक गणेश को स्थापित करने से इच्छा अनुसार लाभ होता है।

Thursday, August 20, 2015

व्यापार की उन्नति और सफलता के लिए-


मनुष्य अपनी उन्नति के लिए व्यवसाय शुरू करता है, किंतु कई बार यह देखने में आता है कि व्यक्ति मेहनत तो बहुत करता है, परंतु उतना लाभ उसको नहीं मिलता। जिससे वह हमेशा दुखी रहता है।आज हम आपको इस लेख में बताने का प्रयास कर रहे है कि किस -किस राशि के लोग व्यापार कर रहे है उनको क्या सावधानियां करनी चाहिए तथा क्या उपाय और मन्त्र तथा क्या टोटके भी है थोडा सा प्रयास से आपका व्यापार उन्नति की तरफ बढे तो आपका पारिवारिक जीवन सुखी होता है और मानसिक शांति आती है ..!


लगन और विश्वाश के साथ कुछ मन्त्र और प्रयोग जो आपको करने में आसान लगे अपनाए यहाँ ये पूर्ण प्रभावी मन्त्र उन सभी के लिए दिया जा रहा है जो व्यापार में घोर निराशा में डूबे है करे और ईश्वर के आशीर्वाद से व्यापार में अत्यंत लाभ मिलेगा।लेकिन पहले हम जानते है राशियों के अनुसार आप क्या करे क्युकि अक्सर देखा गया है कि कई लोगों के मन में अपना खुद का बिजनेस करने और सफल उद्यमी बनने की तमन्ना होती है। लेकिन कई बार बेहतर रिसर्च और जमीनी स्तर पर सारी तैयारियां करने के बाद भी व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती।


इसके पीछे ज्योतिषीय कारण भी हो सकते हैं। क्योंकि हर राशि की अपनी एक अलग खासियत होती है जो व्यक्ति को बिजनेस की दुनिया में सफल बना सकती है। जाने ...!


मेष (Aries)- मेष राशि के जातकों में जन्म से लीडरशिप क्वॉलिटी होती है और उन्हें किसी चीज का प्रभारी बनना अच्छा लगता है। हालांकि इनमें कूटनीतिक आचरण की कमी होती है। सफल व्यवसाय करने के लिए जरुरी है कि मेष राशिवाले लोगों और परिस्थितियों को चतुराई से हैंडल करना सीखें।

वृष (Tauras)- वृष राशि वाले अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन अधिकतर समय यह लोग पुराने और रुढ़िवादी तरीकों पर ही ज्यादा भरोसा करते हैं। अपने व्यापार को नई ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए जरुरी है कि वृष राशि के लोग नई तकनीक और नए दृष्टिकोण का इस्तेमाल करें।

मिथुन (Gemini)- इस राशिवालों की खासियत यह है कि यह लोग किसी को भी कोई भी काम करने के लिए आसानी से राजी कर सकते हैं। लेकिन कई बार जरुरत से ज्यादा बोलने की वजह से किसी रहस्य की बात को छिपाकर नहीं रख पाते। बिजनेस में सफल होने के लिए जरुरी है कि मिथुन राशिवाले सहनशील बनें और स्थिर रहना सीखें।

कर्क (Cancer)- व्यापार-व्यवसाय के प्रति गहरी रुचि की वजह से कर्क राशिवाले अपने क्लायंट को खुश रखने जानते हैं। लेकिन कई बार गुजरते समय के साथ ये लापरवाह हो जाते हैं और बिजनेस में दिलचस्पी खो देते हैं। अपने व्यवसाय को ऊंचाईयों पर बनाए रखने के लिए जरुरी है कि कर्क राशिवाले व्यवसाय में अपनी लय और दिलचस्पी बरकरार रखें।

सिंह (Leo)- सिंह राशिवाले बेहतर नेता, संयोजक और प्रबंधक होते हैं। लेकिन कई बार अनिश्चितता या नुकसान होने पर यह जल्दी घबरा जाते हैं और खुद को परेशानी में डाल लेते हैं। व्यापार में सफल होने के लिए जरुरी है कि ये समय के साथ चलना सीखें। साथ ही दूसरों पर अपनी बात थोपने की बजाए उनके विचार और सुझावों को भी सुनना चाहिए।

कन्या (Virgo)- कन्या राशिवाले पर्फेक्शनिस्ट होते हैं और घटिया काम उनसे बर्दाश्त नहीं होता। ये चाहते हैं कि लोग इनकी निपुणता और उत्कृष्टता की बराबरी करें। रुकावटें आने पर ये बड़ी जल्दी उदास हो जाते हैं। व्यवसाय में सफल होने के लिए जरुरी है कि कन्या राशिवाले अपनी भावनाओं और स्वभाव पर काबू रखें।

तुला (Libra)- अपने कूटनीतिक आचरण और बेहतर संपर्कों की वजह से तुला राशिवाले बिना समय गंवाए अपने व्यवसाय के लिए क्लायंट और निवेशकों को तैयार कर लेते हैं। लेकिन उनकी हिचकिचाहट और उतावलापन कई बार दूसरों को हैरान कर देती है। सकारात्मक नजरिया और दृढ़ दृष्टिकोण के साथ तुला राशिवाले अपने व्यापार को ऊंचाईयों तक ले जा सकते हैं।

वृश्चिक (Scorpio)- बिजनेस में सफल होने के लिए वृश्चिक राशिवाले कई बार लंबे समय तक बिना रुके प्रेशर में काम कर लेते हैं। वे अपने जुनून का कुछ इस तरह अनुसरण करते हैं कि दूसरे लोग कई बार उन्हें गलत समझ लेते हैं। व्यापार में सफल होने के लिए जरुरी है कि वृश्चिक राशि वाले लोगों और परिस्थितियों को चतुराई से हैंडल करना सीखें।

धनु (Sagittarius)- धनु राशिवाले किसी प्रोजेक्ट को शुरू तो पूरे उत्साह के साथ करते हैं लेकिन यदि उसका परिणाम आने में थोड़ा वक्त लगता है तो वो तुरंत ही पहले वाले को छोड़कर दूसरे प्रोजेक्ट में लग जाते हैं। कई बार इनका व्यवहार अविवेकी हो जाता है। यदि धनु राशिवाले व्यापार में सफल होना चाहते हैं तो उन्हें सीखना होगा कि किस तरह एक काम को खत्म करने के बाद ही दूसरे काम की ओर बढ़ें।

मकर (Capricorn)- मकर राशिवाले व्यवसाय में चुपचाप, विचार और विमर्श और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ते हैं। वो ऐसा पद या दर्जा हासिल करना पसंद करते हैं जहां उन्हें संचालन का ज्यादा से ज्यादा अधिकार मिल सके। उनके इस व्यवहार को कई बार उनके साथी ही गलत समझ लेते हैं। अपनी भावनाओं पर पूरा नियंत्रण ही मकर राशिवालों के लिए बिजनेस में सफल होने का मूल मंत्र है।

कुंभ (Aquarius)- इस राशि के लोग कड़ी मेहनत करने वाले और बेहद उत्साही होते हैं जो अपने व्यवसाय को सफल बनाने के लिए पूरा जोर लगा देते हैं। कई बार दबाव और चिंता में ये लोग बेहद आक्रामक और असभ्य व्यवहार कर देते हैं। कुंभ राशिवालों के लिए बिजनेस में सफल होने के दो मूल मंत्र हैं। अपने गुस्से पर काबू पाना और तनाव से कैसें निपटें ये सीखना।

मीन (Pisces)- मीन राशि के जातक अक्सर जोश और मोह-माया से प्रभावित होते हैं। और अक्सर इनका व्यापार कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और मुनाफे से भरा होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में ये लोग कई बार हकीकत से दूर हो जाते हैं। सफल बिजनेस के लिए जरुरी है कि मीन राशि वाले बेहतर प्लानिंग करें और हकीकत के धरातल पर रहें।


अब आप जाने कि व्यापार में मंदी है या उन्नति नहीं हो रही है या घाटा हो रहा है तो क्या करे इनको आप खुद कर सकते है किसी धूर्त पाखंडी लोगो के चक्कर में पड़ कर और नुकसान न करे ...!


अगर आपका व्यापार-व्यवसाय मंदा चल रहा है। किसी भी काम के शुरू करने के बाद उसमें ऐसा लाभ नहीं मिलता जैसा सोच रहे हैं, दुकान खुब सजाधजा कर रखने पर भी उसमें ग्राहक नहीं आते तो अब चिंता की बात नहीं है। हम आपको ऐसे कुछ सिद्ध टोटके बता रहे हैं जिससे थोड़े से प्रयास से आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे। लेकिन इन प्रयोगों को करने से पहले आपको मन में कुछ बातें ठाननी पड़ेंगी। एक, हमेशा सत्य बोलेंगे, दूसरों का अहित नहीं करेंगे और तीसरा हमेशा अपना श्रेष्ठतम परिणाम देंगे। जब आप कोई टोटका प्रयोग में ला रहे हों तो इसके बारे में किसी को बताए नहीं, इससे टोटके का प्रभाव कम हो जाता है। इन टोटकों को आजमाइए, लाभ जरूर मिलेगा।


व्यापार बढाने के लिए :-
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शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें-ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही-और पूजा घर में अभिमंत्रित श्री यंत्र रखें-तथा शुक्रवार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें-दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना(घुघरी ) लें- अब उसके तीन हिस्से कर लें- उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें- दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें या किसी अपाहिज या गरीब भिखारी को दे दे  और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें - यह प्रयोग आप 40 दिन तक करें- कारोबार में लाभ होगा-मगर दुकान में काम करने वाले नौकर को अपशब्द न प्रयोग करे जहाँ तक कोशिश करे कि खुश दिखे ...!


शनिवार को पीपल के पेड़ से एक पत्ता तोड़ लाएं, उसे धूप-बत्ती दिखाकर अपनी दुकान की गद्दी  जिस पर आप बैठते हैं, उसके नीचे रख दें। सात शनिवार तक लगातार ऐसा ही करें। जब गद्दी  के नीचे सात पत्ते इकट्ठे हो जाएं तो उन्हें एक साथ किसी तालाब या कुएं में बहा दें। व्यवसाय चल निकलेगा।


किसी ऐसी दुकान जो काफी चलती हो वहां से लोहे की कोई कील या नट आदि शनिवार के दिन खरीदकर, मांगकर या उठाकर ले आएं। काली उड़द के 10-15 दानों के साथ उसे एक शीशी में रख लें। धूप-दीप से पूजाकर ग्राहकों की नजरों से बचाकर दुकान में रख लें। व्यवसाय खुब चलेगा।


शनिवार को सात हरी मिर्च और सात नींबू की माला बनाकर दुकान में ऐसे टांगें कि उस पर ग्राहक की नजर पड़े।


व्यापार स्थल पर किसी भी प्रकार की समस्या हो, तो वहां श्वेतार्क गणपति तथा एकाक्षी श्रीफल की स्थापना करें। फिर नियमित रूप से धूप, दीप आदि से पूजा करें तथा सप्ताह में एक बार मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद यथासंभव अधिक से अधिक लोगों को बांटें। भोग नित्य प्रति भी लगा सकते हैं।


यदि आपको लगता है कि आपका कार्य किसी ने बांध दिया है और चाहकर भी उसमें बढ़ोतरी नहीं हो रही है व सब तरफ से मन्दा एवं बाधाओं का सामना करना पड़रहा है। ऐसे में आपको साबुत फिटकरी दुकान में खड़े होकर 31 बार वार दें और दुकान से बाहर निकल कर किसी चौराहे पर जाकर उत्तर दिशा में फेंक कर बिना पीछे देखें वापस आ जाएं। नजरदूर हो जाएगी और व्यापार फिर से पूर्व की भांति चलने लगेगा।


व्यापार व कारोबार में वृद्धि के लिए आप एक नीबू लेकर उस पर चार लौंग गाड़ दें और उसे हाथ में रखकर निम्नलिखित मंत्र का 21 बार जप करें। जप के बाद नीबू को अपनी जेब में रख कर जिनसे कार्य होना हो, उनसे जाकर मिलें।


"ओइम क्ली श्री हनुमते नमः"

इसके अतिरिक्त शनिवार को पीपल का एक पत्ता गंगा जल से धोकर हाथ में रख लें और गायत्री मंत्र का 21 बार जप करें। फिर उस पत्ते को धूप देकर अपने कैश बॉक्स में रख दें। यह क्रिया प्रत्येक शनिवार को करें और पत्ता बदल कर पहले के पत्ते को पीपल की जड़ में में रख दें। यह क्रिया निष्ठापूर्वक करें, कारोबार में उन्नति होगी।


आपके व्यापार में मंदी आ गयी है या नौकरी में मंदी आ गयी है तो यह करें। किसी साफ़ शीशी में सरसों का तेल भरकर उस शीशी को किसी तालाब या बहती नदी के जल में डाल दें। शीघ्र ही मंदी का असर जाता रहेगा और आपके व्यापार में जान आ जाएगी।


कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें... ! अवश्य लाभ होगा .....!


उपरोक्त प्रयोग के साथ-साथ ये भी करे व्यापार की सफलता के लिए :-
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दुकान के भवन में ईशान कोण को बिल्कुल खाली रखें। पानी की व्यवस्था इस कोण में करें। प्रातः दुकान खोलते वक्त पीने का पानी भरकर रखें व पांच तुलसी के पत्तें इस पानी में डालकर रखें।


पूजा स्थान भी ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रखें।


ईशान कोण की स्वच्छता ग्राहकों को आकर्षित करती है इसलिए इस स्थान को साफ- सुथरा बनाए रखें।


दुकान में भारी सामान या जूते-चप्पल ईशान कोण में रखें हुए हैं तो तुरन्त हटा दें क्योकिं ये व्यापार में भारी नुकसान करवाने वाला होता हैं। ऐसा कोई सामान यदि है तो उसे दक्षिण-पश्चिम दिशा में व्यवस्थित करें।


दुकान में माल का भण्डारण उत्तर दिशा में करें। लंबे समय तक रखे जाने वाले माल को दक्षिण में, स्टॉक खत्म करने वाले माल को वायव्य कोण में स्थान दें।


अग्नि से संबंधित चीजें बिजली का मीटर, स्विच बोर्ड और इनवर्टर आदि की व्यवस्था आग्नेय कोण में करें।


सीढ़ियां ईशान कोण के अतिरिक्त किसी भी दिशा में रख सकते हैं।


दुकान के मालिक का बैठने का स्थान नैऋत्य कोण में या दक्षिण दिशा में इस प्रकार हो कि मुख पूर्व या उत्तर में रहें।