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Friday, August 14, 2015

डर जो युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर बना रहा -

युवाओं में महिलाओं की अपेक्षा शारीरिक संबंधों के प्रति उनकी रुचि कहीं अधिक होती है |  और  इसमें कोई दो राय भी नहीं है कि प्रेम या विवाहित संबंधों में भी किसी पुरुष की दिलचस्पी शारीरिक संबंधों के प्रति ही ज्यादा रहती है.पुरुषों के विषय में ऐसा माना जाता है कि वह सेक्सुअली बहुत ज्यादा सक्रिय रहते हैं - लेकिन क्या आप जानते हैं खुद को पर्फेक्ट समझने वाले पुरुष भी सेक्स से जुड़ी कुछ बातों को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं. कुछ बातें हैं जो उनके अंदर भी डर पैदा कर देती हैं कि कहीं ऐसा हो गया या ऐसा ना हुआ तो - अब वो बातें क्या हैं हम आपको बताते हैं-


अगर मैं अपने पार्टनर को संतुष्ट ना कर पाया तो ये पुरुषों में व्याप्त सबसे कॉमन या आम डर है कि कहीं उन्होंने अपनी पार्टनर को असंतुष्ट छोड़ दिया तो-

शारीरिक संबंधों के मामले में पुरुष खुद को पर्फेक्ट समझते हैं, लेकिन उन्हें अंदर ही अंदर यह बात सताती रहती है कि अगर वह अपने पार्टनर को चरम सुख दे पाने में असफल हुए तो वह एक अच्छे सेक्स पार्टनर नहीं रह जाएंगे. निश्चित तौर पर इस भावना का असर उनकी इगो पर पड़ता है-

समाधान:-
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मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि पुरुषों को इस बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए. वे जितना सोचेंगे उतना परेशान होंगे इसीलिए बिना किसी परेशानी के उन्हें बस अपने साथी को प्यार करना चाहिए-

 दूसरा एक कारण पर्फेक्ट सेक्स ना कर पाना ये सोचना भी है -  आप मानें या ना मानें लेकिन सेक्स में महारथ हासिल करने के लिए ज्यादातर पुरुष पोर्न फिल्मों की साइटों का सहारा लेते हैं. वह जो कुछ देखते हैं वही सब दोहराने की कोशिश करते हैं और अगर वो एक्ट वो ना कर पाए तो उन्हें कमतर होने का अहसास होता है-

समाधान:-
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मनोचिकित्सकों का कहना है कि सेक्स के दौरान अकसर पुरुष अपनी तुलना पोर्न एक्टर से करते हैं लेकिन कभी कुछ चीजें भावनाओं और प्रेम से प्रेरित होकर भी सोचनी चाहिए-न कि पोर्न एक्टर बनने का प्रयास करे -क्युकि पोर्न फिल्मो में जो होता है वो ड्रग को लेकर बनाई गई फिल्मे है जो बिजनेस के लिए होती है आप अगर उनके बाद के जीवन को देखे तो अंतिम समय उनका दुर्भाग्य-पूर्ण होता है -आप उनको देख कर अपना जीवन खराब न करे-

एक तीसरा डर युवाओं में ये भी धारणा कर रहा है कि उसके सेक्स के बाद अगर वो उसे प्रेगनेन्ट नहीं कर सका तो उसका पार्टनर क्या सोचेगा -या वो पितृत्व ना ग्रहण कर पाया तो -समाज, परिवार और अपने पत्नी की नजरों में वह अक्षम साबित नहीं होना चाहते इसीलिए वह इस चिंता में भी रहते हैं-

समाधान:-
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-विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी वजह से महिला गर्भधारण नहीं कर पा रही है तो कुछ टेस्ट करवाकर समस्या का समाधान पाया जा सकता है. इतना ही नहीं कभी-कभार गलत खानपान और जीवनशैली की वजह से भी स्पर्म प्रभावित होते हैं. डॉक्टरी सलाह द्वारा इन सभी परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है-आपकी जादा मानसिक चिंता भी आपके स्पर्म को प्रभावित करती है इसलिए स्वास्थ्य जीवन जीने के लिए -उत्तम आहार और उत्तम आयुर्वेद हर्बल यौगिक दवा का सहारा ले -एलोपेथी की घातक दवाये आपको छणिक लाभ दे सकती है लेकिन उसके साइड इफेक्ट बहुत है -

चौथा एक डर जो अंदर ही अंदर युवाओं को खाता है -उनको लगता है कि बचपन और युवा-वस्था में किया गया मस्टरबेशन(हस्त-मैथुन ) उनकी विवाह के बाद की लाइफ को प्रभावित करेगा जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है -अगर वर्तमान समय में उन्हें सेक्सुअल प्रॉब्लम का सामना करना पड़ रहा है तो वह इसके लिए पूर्व में किए गए मस्टरबेशन को जिम्मेदार मानते हैं-

समाधान:-
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विशेषज्ञों का कहना है कि मस्टरबेशन से पुरुष की सेक्स लाइफ पर कोई असर नहीं पड़ता. इसीलिए मस्टरबेशन की चिंता छोड़ पुरुषों को अपनी सेक्सुअल लाइफ एंजॉय करनी चाहिए-बस इतना ध्यान रक्खे कि अधिकतम सीमा किसी भी चीज की अहितकारी है -

युवाओं के जल्द जवान होने की सोच का परिणाम-


आज-कल के युवा बहुत तेजी से जवानी की दहलीज पर कदम रखने की ओर बढ़ रहे है और ये युवा अक्सर सपनों की दुनिया में जीते हैं-


वे सेक्स को लेकर बहुत ज्यादा उत्साही होते हैं और इस अति उत्साह में कई गलतियां भी कर जाते हैं. वे ऐसी-ऐसी हरकतें कर बैठते हैं, जिसका उन्हें बाद में खामियाजा भुगतना पड़ता है.


कई बार सेक्स के बारे में जानने की चाहत में बाहरी नुकसान तो कम होता है, लेकिन उन्हें नैतिकता का नुकसान जरूर उठाना पड़ता है.


आइये हम आपको युवाओ की करी जाने वाली गलतियों से भी अवगत कराते है -


कुछ युवा पार्कों में कपल्स के पास जाकर उन्हें परेशान करते है ये सेक्स और रिलेशनशिप को लेकर ये युवा बहुत ज्यादा उत्साही होते हैं. इसी उत्साह में वे पार्कों, सिनेमाघरों आदि में एकांत में बैठे प्रेमी जोड़े के पास जाकर उन्हें परेशान करते हैं. सेक्स से जुड़ी अपनी कुंठाओं के चलते वे किसी भी तरह से लड़की को हासिल करना चाहते हैं. यही कोशिश परेशानी का सबब है और उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है.


युवाओं को लगता है कि महिलाओं के अंडरगार्मेंट्स किसी दूसरी दुनिया की चीजें हैं. वे छिप-छिप कर उन्हें देखने की कोशिश करते रहते हैं. कई बार बाहर सूख रहे अंडरगार्मेंट्स पर कमेंट करना और कई बार आसपास मौजूद लड़कियों के अंडरगार्मेंट्स में झांकने की कोशिश उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल सकती है.


जिज्ञासावश या कुंठा के कारण युवा और भी कई गलतियां कर जाते हैं. उनमें से एक ये भी है कि अगर उन्हें कहीं से किसी अनजान लड़की का फोन नंबर मिल जाए तो वे उस पर ब्लैंक कॉल करने लगते हैं. अश्लील मैसेज और वीडियो शेयर करके भी लड़कियों को परेशान करने से बाज नहीं आते. ऐसे में वे कभी भी साइबर क्राइम के जाल में फंस सकते हैं.


सेक्स एजुकेशन की सड़कछाप किताबें पढ़ना सेक्स के बारे में जानने की इतनी ललक इन युवाओं में होती है कि वे कहीं से भी इसके बारे में जानने की फिराक में रहते हैं. इसके लिए वे इंटरनेट से लेकर सड़क -छाप सेक्स एजुकेशन की किताबों तक का सहारा लेते हैं. ‘मस्तराम’ टाइप की ये किताबें उन्हें सेक्स एजुकेशन कितना देती हैं, इस पर कोई दावा तो किताब छापने वाले भी नहीं कर सकते. लेकिन ये किताबें उनमें सेक्स से जुड़ी कुंठाएं जरूर भर देती हैं.


लड़कियों के स्कूल के बाहर घूमना-फिरना और उनकी छुट्टी के वक्त रास्ते में खड़े होने जैसी हरकतें भी इस उम्र में देखी जाती हैं. इस बीच लड़कियों को छेड़ना, उन पर फब्तियां कसना जैसी हरकतें करके उन्हें लगता है कि वे अब बड़े हो गए हैं और उनकी यह हरकतें उन्हें लड़कियों की नजर में ऊंचा उठा रही हैं. लेकिन ये हरकतें उन्हें पिटवाने के साथ ही पुलिस के चक्कर में भी फंसा सकती हैं|


अपनी उत्सुकता को शांत करने के लिए ये युवा महिलाओं के वॉशरूम में ताक-झांक करने से भी बाज नहीं आते. सेक्स के बारे में अपने ज्ञान की कुंजी को मोटा करने के लिए वे महिलाओं के वॉशरूम में जाकर उसे करीब से देखने भी पहुंच जाते हैं. असल में वे जानना चाहते हैं कि महिलाओं के वॉशरूम पुरुषों के वॉशरूम से अलग कैसे होते हैं. यह गलती भी कई बार उन्हें भारी पड़ जाती है |


इस उम्र में सेक्स को लेकर युवा बहुत ज्यादा उत्सुक होते हैं और ऐसे में वे पब्लिक प्लेस में लड़कियों से चिपकने की भी कोशिश से बाज नहीं आते. भीड़ भरी बस हो या मेट्रो और बड़े मेले, ये युवा लड़कियों के ज्यादा से ज्यादा करीब पहुंचकर उन्हें छूने की हर कोशिश करते हैं. ऐसे में लड़किेयों से चिपकना, उन्हें जबरदस्ती छूने की कोशिश करना कई बार इन युवाओं को कानून के पचड़ों में फंसा देता है. इसके अलावा पब्लिक के बीच सरेआम जिल्लत का भी सामना करना पड़ जाता है.


जैसे-जैसे मोबाइल और इंटरनेट क्रांति आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे ये बीमारी भी बढ़ रही है. यौवन की दहलीज पर कदम रखने की तरफ बढ़ रहे युवा गलती से इस जाल में फंस जाते हैं.


वे मनोरंजन के लिए और सेक्स के बारे में जानने के लिए अश्लील वीडियो का सहारा लेते हैं. उनकी यह गलती तब और बढ़ जाती है, जब वे ऐसे वीडियो दोस्तों के साथ शेयर भी करने लगते हैं. ऐसे में उनके कानून के जाल में फसंने की गुंजाइश बहुत ज्यादा होती है.


इस उम्र में हम-उम्र लड़कियों से दोस्ती होना आम बात है. लेकिन तेजी से जवान हो रहे लड़के हर मुमकिन कोशिश करते हैं कि उनकी गर्लफ्रेंड किसी तरह बेडरूम तक पहुंच जाए. ऐसे में वे अपने दोस्तों तक से लड़ पड़ते हैं. वे दोस्ती के इस रिश्ते में सेक्स खोजने की भरसक कोशिश करते हैं. कई बार तो यह कोशिश जबरदस्ती तक पहुंच जाती है. कच्ची समझ के कारण ऐसा कदम उठाने के कारण उन्हें जुवेनाइल होम की सैर भी करनी पड़ सकती है.


सेक्स से जुड़ी अपनी कुंठाओं को पूरा करने के लिए युवा हद से ज्यादा हस्तमैथुन करने लगते हैं. हालांकि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि हस्तमैथुन से किसी तरह की कोई कमजोरी आती है. लेकिन बार-बार इस क्रिया से उनकी सेक्स से जुड़ी कुंठाएं और बढ़ती जाती हैं, जो आगे चलकर उनके लिए घातक हो सकती हैं. उनके खुद के लिए और समाज के लिए भी.


परिणाम :-
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आजकल के युवा बिंदास लाइफ जीना पसंद करते हैं। उन्हें अपनी लाइफ में किसी का भी हस्तक्षेप पसंद नही है। 72 फीसदी युवाओं को बिंदास लाइफ, नशा और सेक्स पसंद है।  युवाओं को शादी से पहले सेक्स संबंध गलत नहीं लगते। सर्वे में 72 फीसदी युवाओं ने माना कि अगर रजामंदी हो तो शादी से पहले सेक्स को वे गलत नही मानते।


ये है जल्द से जल्द जवान होने की सोच का परिणाम की शादी से पहले ही नामर्दी की दवा खोजे देखे जाते है और असमय ही बुढ़ापे की तरफ अग्रसर हो जाते है |


पहले के लोग जो संयम से अपने शरीर की रक्षा करते थे उनकी उम्र के साथ-साथ शारीरिक छ्मताये भी होती थी पैसठ सत्तर साल की उम्र में भी संभोग करने में सक्षम पाए जाते थे आज के युवाओ में पूरी उम्र भी इतनी नहीं रह गई है तीस साल में ही खुद का खेल खतम कर लेते है |


क्या आप बता सकते है कि जो लड़की को शादी करके घर में लाते है उसकी इक्छाओ की पूर्ति करना और संतुष्ट करना आपकी नेतिक जिम्मेदारी नहीं है फिर सोचे कि ये कसूर आखिर किसका है ...?

Tuesday, August 11, 2015

हाइड्रोसील -अण्डकोषों में पानी भरना -

अण्डकोषों में पानी भर जाने का कारण :-



संभोगक्रिया अधिक करने के कारण भी कभी-कभी अण्डकोषों में पानी भर जाता है।

भारी वजन उठाने, अधिक पैदल चलने, अंगों को तोड़ने या अंगड़ाई लेने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

यह रोग किसी व्यक्ति को यौन अंगों में विजातीय द्रव्यों (दूषित मल) के इकट्ठा हो जाने के कारण होता है।



गलत तरीके से खान-पान की आदतें तथा समय पर खाना न खाने के कारण यह रोग व्यक्ति को हो जाता है।

रोग जो दवा से दबाए गए हो या फिर संभोग सबंधी उत्तेजना को एक दम से रोक देने के कारण भी यह रोग हो जाता है।

मल-मूत्र के वेग को रोकने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

इस रोग में रोगी के अण्डकोषों में पानी भर जाता है जिसके कारण उसके अण्डकोष में सूजन आ जाती हैं। जब यह रोग किसी व्यक्ति को होता है तो उसके केवल एक ही तरफ के अण्डकोष में पानी भरता है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।


अण्डकोषों में पानी भर जाने का लक्षण :-



प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति के अण्डकोषों में दर्द होने लगता है। रोगी के अण्डकोष का एक भाग सूज जाता है, कभी-कभी तो ये इतने बढ़ जाते है कि व्यक्ति को चलने फिरने में दिक्कत होने लगती है। यदि रोगी व्यक्ति के अंडकोष में सूजन के साथ तेज दर्द होने लगता है तो समझना चाहिए कि रोगी व्यक्ति को हाइड्रोसील अण्डकोषों में पानी भर जाने का रोग हो गया है। जब यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है तो इसके कारण जननेन्द्रिय की सारी नसें कमजोर और ढीली पड़ जाती हैं जिसके कारण रोगी व्यक्ति को उल्टी तथा मितली भी होने लगती है और कब्ज भी रहने लगती है।


प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-



इस रोग को ठीक करने के लिए पीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 4 बार सेवन करना चाहिए तथा इस जल का सेवन करने से पहले रोगी व्यक्ति को एक घण्टे तक लाल प्रकाश और उसके बाद कम से कम 2 घण्टे तक नीला प्रकाश अण्डकोष पर डालना चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कम से कम 2 सप्ताह तक प्रतिदिन संतरे का रस या अनार का रस पीना चाहिए। रोगी को कच्चे सलाद में नींबू डालकर सेवन करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए।

रोगी व्यक्ति को कटिस्नान, मेहनस्नान, सूखा घर्षण, गर्म एवं नमक स्नान (नमक मिले पानी से स्नान) करना चाहिए। इससे यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

इस रोग से पीड़ित रोगी को खुली हवा में व्यायाम करना चाहिए तथा इसके साथ सूर्य स्नान भी करना चाहिए। इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से रोग बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।

अन्य उपाय:-


पांच ग्राम काली मिर्च और दस ग्राम जीरे का चूर्ण आपस में मिलाके एक पेस्ट बनाए और इस पेस्ट को गर्म करे फिर इस पेस्ट में आप इतना गर्म पानी मिलाये कि एक पतला घोल बन जाए अब इस घोल को बढे हुए अंडकोषों पर लेप करके सो जाए इस प्रकार तीन-चार दिनों तक करने से फायदा दिखेगा जब तक पूर्ण आराम न हो करे-

Monday, August 03, 2015

मासिक धर्म के दोष-

हमारी माताओं -बहनो को मासिक धर्म (Periods) से सबन्धित समस्याएँ होना साधारण बात है अक्सर माहवारी की अनियमिता हो जाती है ,अर्थात कई बार रक्तस्त्राव बहुत अधिक हो जाता है और कई बार क्या होता है बिलकुल ही नहीं होता और कभी कभी ऐसा भी होता है की ये 2-3 दिन होना चाहिए लेकिन 1 ही दिन होता है ,और कई बार 15 दिन ही दुबारा आ जाता है  और कई बार 2 महीने तक नहीं आता -




माताओं और बहनों के लिए मासिक - धर्म चक्र की अनियमिता की जितनी सभी समस्याएँ है इसकी हमारे आयुर्वेद मे बहुत ही अच्छी और लाभकारी ओषधि है वो है अशोक के पेड़ के पत्तों की चटनी -

लेकिन एक बात याद रखे आशोक का पेड़ दो तरह का है एक तो सीधा है बिलकुल लंबा ज़्यादातर लोग उसे ही अशोक समझते है जबकि वो नहीं है एक और होता है पूरा गोल होता है और फैला हुआ होता है वही असली अशोक का पेड़ है जिसकी छाया मे माता सीता ठहरी थी -

तो आप इस असली अशोक के 5-6 पत्ते तोड़िए उसे पीस कर चटनी बनाओ अब इसे एक से डेढ़ गिलास पानी मे कुछ देर तक उबाले तथा इतना उबाले की पानी आधा से पौन गिलास रह जाए .फिर उसे बिलकुल ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिये और फिर उसको बिना छाने हुए पीये ! सबसे अच्छा है सुबह खाली पेट पीना -

कितने दिन तक पीना है ?

30 दिन तक लगातार पीना उससे मासिक धर्म (periods ) से सबन्धित सभी तरह की बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं ! ये सबसे अधिक अकेली बहुत ही लाभकारी दवा है ! जिसका नुकसान कोई नहीं है -और अगर कुछ माताओ-बहनो को 30 दिन लेने से थोड़ा आराम ही मिलता है ज्यादा नहीं मिलता तो वो और अगले 30 दिन तक ले सकती है वैसे लगभग मात्र 30 दिन लेने से ही समस्या ठीक हो जाती है -

ये तो हुई महवारी मे अनियमिता की बात ! अब बात करते पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द की. बहुत बार माताओ -बहनो को ऐसे समय मे बहुत अधिक शरीर मे अलग अलग जगह दर्द होता है कई बार कमड़,दर्द होना ,सिर दर्द होना ,पेट दर्द पीठ मे दर्द होना जंघों मे दर्द होना ,स्तनो मे दर्द,चक्कर आना ,नींद ना आना बेचैनी होना आदि तो ऐसे मे तेज pain killer लेने से बचे क्योंकि इनके बहुत अधिक side effects है , एक बीमारी ठीक करेंगे 10 साथ हो जाएगी और बहुत से pain killer तो विदेशो मे 20 वर्षो से ban है जो भारत मे बिकती है -

तो आयुर्वेद मे भी इस तरह के दर्दों की तात्कालिक (instant relief ) दवाये है जिसका कोई side effect नहीं है ! तो पीरियडस के दौरान होने वाले दर्दों की सबसे अच्छी दवा है गाय का घी ,अर्थात देशी गाय का घी ! एक चम्मच देशी गाय का घी को एक गिलास गर्म पानी मे डालकर पीना ! पहले एक गिलास पानी खूब गर्म करना जैसे चाय के लिए गर्म करते है बिलकुल उबलता हुआ ! फिर उसमे एक चम्मच देशी गाय का घी डालना ,फिर ना मात्र सा ठंडा होने पर पीना ,चाय की तरह से बिलकुल घूट घूट करके पीना ! बिलकुल सिप सिप करके पीना है ! तात्कालिक (instant relief ) एक दम आराम आपको मिलेगा और ये लगातार 4 -5 दिन जितने दिन पीरियड्स रहते है पीना है उससे ज्यादा दिन नहीं पीना ! ये पीरियडस के दौरन होने वाले सब तरह के दर्दों के लिए instant relief देता है सामान्य रूप से होने वाले दर्दों के लिए अलग दवा है -

एक बात जरूर याद रखे घी देशी गाय का ही होना चाहिए , विदेशी जर्सी, होलेस्टियन ,फिरिजियन भैंस का नहीं -देशी गाय की पहचान है की उसकी पीठ गोल सा ,मोटा सा हम्प होता है -कोशिश करे घर के आस पास पता करे देशी गाय का -उसका दूध लाकर खुद घी बना लीजिये ! बाजारो मे बिक रहे कंपनियो के घी पर भरोसा ना करें -या भारत की सबसे बड़ी गौशाला जिसका नाम पथमेड़ा गौशाला है जो राजस्थान मे है यहाँ 2 लाख से ज्यादा देशी गाय है इनका घी खरीद लीजिये ये पूरा देशी गाय के दूध से ही बना है ! काफी बड़े शहरो मे उपलब्ध है !

राजीव भाई  का एक और नुस्खा है -

अंत जब तक आपको जीवन मे आपको मासिक धर्म रहता है आप नियमित रूप से चूने का सेवन करें-

गीला चूना , जो पान वाले के पास से मिलता है कितना लेना है - गेहूं के दाने जितना ही  ले -

इसे कैसे लेना है .?

बढ़िया है की सुबह सुबह खाली पेट लेकर काम खत्म करे आधे से आधा गिलास पानी हल्का गर्म करे गेहूं के दाने के बराबर चूना  डाले चम्मच से हिलाये पी जाए-

इसके अतिरिक्त दही मे ,जूस मे से सकते है बस एक बात का ध्यान रखे कभी आपको पथरी की समस्या रही तो चूने  का सेवन ना करे-

ये चुना बहुत ही अच्छा है बहुत ही ज्यादा लाभकरी है मासिक धर्म मे होने वाली सब तरह की समस्याओ के लिए-

इसके अतिरिक्त आप जंक फूड खाने से बचे , और नियमित सैर करे-

Sunday, August 02, 2015

स्वप्न दोष में लाभ दायक-

जो लोग स्वप्नदोष से पीड़ित है उनको निम्नलिखित में से कोई एक प्रयोग अवस्य आजमाना चाहिए -



लहसुन की दो कुली टुकड़े करके पानी से निगल जाएं। इससे स्वप्र दोष नहीं होगा। यह प्रयोग रात को सोते समय हाथ-पैर धोकर रोज करें।

आंवले का मुरब्बारोज खाने से स्वप्र दोष में लाभ होता है।

कांच के गिलास में बीस ग्राम पिसा हुआ सुखा आंवला डाले। इसमें साठ ग्राम पानी भरें और फिर बारह घंटे भीगने दें। फिर छानकर इस पानी में एक ग्राम पीसी हुई हल्दी मिलाएं और पीएं।

केला स्वप्न दोष और प्रमेह में लाभदायक है। दो केले खाकर ऊपर से एक पाव गरम दूध तीन महीनें तक रोज पीएं।

पिसे हुए अनार के छिलके पांच ग्राम सुबह और शाम लेने से स्वप्न दोष नहीं होता।

प्याज दस ग्राम सफेद प्याज का रस, अदरक का रस आठ ग्राम, शहद पांच ग्राम, घी तीन ग्राम मिलाकर रात्रि को सोते समय पीने से स्वप्र दोष नहीं होता।

धनिये को पीसकर मिश्री मिलाकर ठण्डे जल से लेने से स्वप्र दोष नहीं होता।

तुलसी की जड़ के छोटे-छोटे टुकड़े पीसकर पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।

सुखा धनिया कूट, पीसकर छान लें। इसमें समान मात्रा में पीसी हुई चीनी मिलाएं। सुबह भूखे पेट रात के पानी से एक चाय की चम्मच फक्की लें और एक घंटे तक कुछ न खाएं पीएं।

Friday, July 24, 2015

यौन दुर्बलता भी एक समस्या -

आज के युग में हमारे प्रदूषित खान -पान की वजह से और स्वयं के गलत हरकतों के कारण युवक-युवतियां असमय ही दुर्बलता के शिकार होते जा रहे है और फिर इस तरह की समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने से घबराते हैं।


ऐसे में घरेलू उपाय को अपनाकर सेक्स लाइफ को बुस्ट अप कर सकते हैं:-



आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।

लहसुन आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपकी सेक्स लाइफ को भी बढाता है| ऐसे में अगर आप लहसुन नहीं खा रहे हैं तो आज से ही खाना शुरू कर दीजिये| क्योंकि लहसुन की 2-3 कलियां और प्याज का प्रतिदिन सेवन से यौन- शाक्ति बढ़ती है। ऐसे में अगर आप सप्ताह में दो से तीन बार काले चने से बने खाद्य पदार्थों को प्रयोग में ला रहे है तो आपके लिए यह लाभकारी है|

15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।

एक सेब में हो सके जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।

15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से ज्यादा शक्तिशाली महसूस करेंगे।

कच्चा गाजर या इसका जूस भी यौन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है। हफ्ते में दो बार भिंडी और सहजन खाने से काफी फायदा होता है।

15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। इसे यौन-टौनिक के रूप मे इस्तेमाल करें। इसके अलावा आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करें।

बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करें।

इसके अलावा आप 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन लें।

घी के साथ उड़द की दाल को भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर इसकी खीर तैयार कर लें। इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है तथा संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है।

5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है|

100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें। इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें। रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास दूध पी लें। इसका सेवन करने से आपकी यौन शक्ति में आई दुर्बलता दूर हो जायेगी|

सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर
रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।

चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू तथा दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।

वीर्य अधिक पतला होने पर एक  चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है.

आयुर्वेद में भी क्रियात्मक क्षमता बनाए रखने की बहुत सी दवाएं हैं:-
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वसंत मालती:-
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स्त्री-पुरूष् दोनों में शारीरिक क्षमता और दुर्बलता, चाहे किसी कारण भी हो, नाशक स्वर्ण तथा मोती युक्त औष्ाधि है। ज्वरों के पश्चात के दौर्बल्य में भी अत्यंत उपयोगी है।

वसंत कुसुमाकर:-
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बलवर्घक, कामोत्तेजक, मधुमेह नियंत्रक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें सोना, मोती, कस्तूरी, चांदी आदि प्रयुक्त होते हैं।

वसंत तिलकरस:-
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विशेष् रूप से पुरूष् द्वारा उपयुक्त बलवर्घक वाजीकरण तथा कामोद्दीपक, स्वर्णमुक्ता आदि प्रधान औष्धियां हैं। वृहऊंगेश्वस, वंगेश्वर दोनों ही मूल्यवान दवाइयां हैं। स्त्रियों  के जननांगों के रोगों, श्वेत प्रदर, कामशीतलता आदि तथा पुरुषों  के दुर्बलता शीघ्रपतन, शुक्रमेह आदि में लाभदायक दवाएं हैं।

शक्रवल्लभ रस:-
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पुरुषों  द्वारा अधिक सेवनीय बलवर्घक पौष्टिक उत्तेजक वाजीकर औष्धियां हैं। इसमें भी सोना, मोती आदि मूल्यवान दवाएं डाली जाती हैं।

शतावरी मोदक:-
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प्रमुख रूप से स्त्रियों  द्वारा सेवन की जाने वाली यह औषधि शक्तिवर्घक स्तन रोग नाशक जननांगों के प्रदरों व गर्भाशय शिथिलता नाशक है।

शिलाजीत शुद्ध:-
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स्त्रियों  व पुरुषों के सभी रोगों में उपयोगी। निरंतर प्रयोग से सभी रोग होने से रोकता है। बुढ़ापा थामता है दीर्घजीवन देता है।

शुक्रमातृकावटी व शिवा गुटिका:-
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अधिकतर पुरुषों को वीर्यविकारों, मूत्ररोगों, वायुविकारों, प्रोस्टेट वृद्धि आदि में दिया जाता है। शिव गुटिका स्त्रियों  के कमरदर्द, थकान और मूत्र रोगों में उपयोगी है।

मदनानंद मोदक, नारी गुटिका, कौंचपाक, मूसलीपाक, मदनमोदक ये दवाइयां पुरूष्ाों द्वारा विशेष कर यौन शक्ति वृद्धि बनाए रखने व पूरे वर्ष के लिए पुष्टि प्रदान के लिए प्रयुक्त होती है। इनमें कुछ नशीले पदार्थ भांग, अफीम आदि में प्रयुक्त किए जाते हैं। कामेश्वर, कामचूड़ामणि, मन्मथ रस ये स्त्री व पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। शक्ति, बल सामथ्र्य तथा कार्यक्षमता वर्घक बलवर्घक दवाइयां हैं।ये सामान्यत: नीम-हकीम तथा बिना चिकित्सक के परामर्श से इनका प्रयोग नौजवान लड़के ज्यादा करते हैं।

रतिवल्लभ मूंगपाक, सौभाग्यशुंठी ये दोनों दवाइयां मुख्यत: स्त्रियों  के सेवनार्थ बनी हैं। प्रथम ये दवाये  जननांगों को शक्ति, पुष्टि संकोच, गर्भाधान योग्य बनाती हैं। सोहाग सोंठ प्रसव के बाद की दुर्बलता, पीड़ा कमरदर्द, थकान, ज्वर को मिटाती है। आयुर्वेद में कामोत्तेजक, स्तंभक, वाजीकरण शक्तिवर्घक तथा स्त्री के स्त्रीत्व को पुष्पित और प्रशस्त रखने वाली दवाओं की कमी नहीं है।

Sunday, July 19, 2015

सेक्स को सनक न बनाये -

जी हाँ खाने के की तरह सेक्‍स भी लाइफ का इंपॉर्टेंट पार्ट है। लेकिन किसी भी चीज की अति अंतत: बुरे परिणाम ही देती है-



कई बार आपने अपने पार्टनर को मन न होने पर भी सेक्‍स के लिए तैयार किया होगा। हालांकि सेक्‍स करने में तभी मजा आता है, जो दोनों तैयार हों। क्‍या आप ज्‍यादातर पार्टनर को उसकी मर्जी के बगैर सेक्‍स के लिए मजबूर करते हैं, तो सोचिए कहीं आपको सेक्स की सनक तो नहीं सवार है।

हर कोई सेक्‍स को अपने तरीके से एंज्‍वॉय करता है। सेक्स में कुछ चीजे जिन्हें आप पसंद करते हों जरूरी नहीं पार्टनर को भी उसमें मजा आता हो। इसलिए कुछ भी नया ट्राइ करने या फिर सिर्फ अपने मजे के लिए कुछ न करें। यदि किसी चीज के लिए पार्टनर इनकार भी कर दे, तो नाराज होने से बेहतर है कि आप उनके मन की बात समझें और सम्मान करें।

सेक्‍स में एनर्जी लेवल बहुत मायने रखता है। हो सकता है कि आपकी एनर्जी लेवल बहुत अधिक हो, लेकिन पार्टनर की भी इतनी ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। यदि पार्टनर रोज सेक्स के लिए तैयार न हो या फिर जल्दी थक जातीं हों तो उनका ख्याल रखें। सेक्स में दोनों पार्टनर की खुशी और संतुष्टि मायने रखती है। महीने के कुछ दिनों में औरतें यूं भी सेक्स नहीं करना चाहती हैं। इसलिए ऐसा न हो कि आपकी सनक उनके लिए सजा ही बन जाए।

सेक्स का दर्द हमेशा तकलीफ देता है मजा नहीं। लेकिन कुछ मर्द ऐसा मानते हैं कि सेक्स के दौरान महिलाओं को जितना दर्द दिया जाए उन्हें मज़ा आता है। यह गलत सोच है। कुछ महिलाओं को सेक्स के दौरान दर्द को लेकर यूं भी मनोवैज्ञानिक डर रहता है। वहीं अगर आप उन्हें अपनी तरफ से यही देना चाहेंगे तो उनके लिए बेडरूम बिल्कुल भी आरामदायक जगह नहीं रहेगी।

आपके लिए पॉर्न फिल्म  देखना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक साबित होता है, इस बात की तस्‍दीक कई वैज्ञानिक कर चुके हैं। यदि आप भी दिन में कई घंटे मोबाइल पर पॉर्न फिल्में देखकर बिताते हैं औऱ वैसी ही फैंटेसी पाल रहे हैं। तो फिर एक बार आपको सोचने की जरूरत है। पॉर्न फिल्मों में काम करने वाले लोग प्रफेशनल होतें है। अपने पार्टनर से वैसी ही अपेक्षाएं रखना अतार्किक है। इसलिए वाइल्ड फैंटेसी को जीवन में साकार करने की जगह प्यार और आपसी तालमेल को जगह दें।

अश्लीलता देखना और अपने पार्टनर को दिखाना शुरूं में तो अच्छा लगता है लेकिन देखने में आया है कि कुछ समय बाद ये एक आवश्यकता बन जाती है और इसके बगेर आप या आपका पार्टनर उत्तेजित नहीं होता है और आगे चल कर आपकी ये मज़बूरी आपके लिए घातक हो जाती है इसलिए पोर्न से बचे आदत न बनाए .

आप को अपने पार्टनर के मूड  को और तकलीफ को समझना ही आपके  वैवाहिक जीवन को सफल बनाता है न कि आपकी एक सनक...?

योनि के ढीलेपन का उपचार -

प्रकृति ने स्त्री व पुरुष दोनो को ही शरीर- रुपी वरदान दिया है।वह अपने आप में अनुपम है।और उसके प्राकृतिक रुप में ही वह आनन्ददायक है और फिर यह बात हम अगर सेक्स अंगो के वारे में कह रहे हैं तो इस बात का महत्व और भी बढ़ जाता है-


योनि स्त्री का प्रमुख सेक्स अंग है और संभोग के समय प्राकृतिक रुप से स्त्री व पुरुष को जो आनन्द प्राप्त होता है ।उसमें योनि का अपना महत्व पूर्ण योगदान है।किन्तु कई कारणों से बच्चे को जन्म देते समय या सेक्स में अधिकता से  जव योनि के आकार में वृद्धि हो जाती है तब स्त्री व पुरुष के संभोगानन्द मे कमी आ जाती है-


योनी का ढीलापन:-
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गलत अवस्था में संभोग करने से योनि फैल जाती हैं।

बच्चे के जन्म क बाद माॅ की योनि का आकार पुराने रुप में नहीं आ पाता।

संभोग की इच्छा न होने पर भी योनि फैल जाती हैं।

प्रेम संबंध में पड कर भी कुछ लङकियाॅ शादी से पहले अपना कुॅवारापन खो देती हैं।

पति सहवास में अति करने, अप्राकृतिक एवं असुविधापूर्ण आसनों में अति वेग के साथ सहवास करने, अति प्रसव करने और शरीर के कमजोर एवं शिथिल होने के कारण स्त्रियों का योनि मार्ग ढीला, पोला और विस्तीर्ण हो जाता है, जिससे सहवास करते समय सुख एवं आनन्द की अनुभूति नहीं होती।

ऐसी स्थिति में प्रायः पति लोग सहवास क्रिया में रुचि नहीं ले पाते और कोई-कोई पति पर स्त्रीगमन की ओर उन्मुख हो जाते हैं। विलासी एवं रसिक स्वभाव के पति घर की सुन्दर नौकरानियों से ही यौन संबंध कायम कर लेते हैं। इस व्याधि को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय उपयोगी एवं कारामद सिद्ध हुए हैं।


योनि के ढीलेपन के कई कारण निम्न हैं:-
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खतरनाक सेक्स आसनों का ना जानकारी में प्रयोग भी स्त्री की योनि पर प्रभाव डाल देता है। अत्यधिक संभोग, योनिगत स्रावों की अधिकता भी इस रोग के पैदा होने का कारण हो सकता है।  वैसे योनि का ढीला पन योनि के मांसपैशियों के तंतु ढीले हो जाने से होता है।चाहै कारण कोई भी क्यों न हो। इस रोग का प्रभाव दोनो पार्टनरों पर पड़ता है।और रोग की अधिकता में योनि के बाहर निकलने का खतरा रहता है। कैसे मालुम हो कि योनि ढीली है।

शारीरिक दुर्वलता या शिथिलता की स्थिति में स्त्री की योनि कमजोरी के कारण फैल जाती है।

अप्राकृतिक संभोग या जबरन पुरुष साथी द्वारा ताकत से संभोग करने पर योनि की दीवारों पर क्षोभ उत्पन्न हो जाने के कारण से भी योनि शिथिल या ढीली हो सकती है।

बार बार प्रसव के कारण भी योनि ढीली हो जाती है।

वैसे तो यह मालुम करना कोई कठिन काम नही है यह ज्यादा तर आपका पुरुष साथी बता ही देता है फिर भी अगर आपको इसमे कुछ संदेह है तो आप इस तरीके से भी पता लगा सकती हैं ।

सिकोड़ कर देखो कि क्या यह पूरी तरह बंद हो पा रही है।अगर नही तो पार्टनर की बात सही है।

आप अपनी एक उंगली योनि के भीतर रख कर देख सकती हैं कि क्या आपको उत्तेजना हो रही है अगर नही तो पार्टनर की बात सही है। और भी गम्भीर स्थिति तब है जवकि आपकी योनि के ओष्ठ खुले हुय़े हैं।


योनि के ढीलापन का घरेलु उपचार:-
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आप पेशाब करते समय कुछ समय के लिये पेशाब को रोके रहें तथा फ़िर चालू करे ऐसा जब भी पेशाब करने जाऐं तभी 3-4  बार करें इससे योनि की पेशियां सुद्रड़ होती हैं। वज्रासन की स्थिति में बैठकर शंखचालिनी मुद्रा और मूल बंध लगाने का अभ्यास नियमित करने से भी योनि संकोच होता है।

भांग को कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। इस चूर्ण को 5-6 ग्राम (एक छोटा चम्मचभर) मात्रा में, एक महीन मलमल के साफ सफेद कपड़े पर रखकर छोटी सी पोटली बनाकर मजबूत धागे से बांध दें। धागा लम्बा रखें, ताकि धागे को खींचकर पोटली बाहर खींची जा सके। रात को सोते समय इस पोटली को पानी में डुबोकर गीली कर लें एवं योनि मार्ग में अन्दर तक सरकाकर रख लें और सुबह निकालकर फेंक दें। लाभ न होने तक यह प्रयोग जारी रखें।


एक प्रयोग आजमाए:-
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माजूफल का चूर्ण- 100 ग्राम

मोचरस का चूर्ण- 50 ग्राम

लाल फिटकरी -25 ग्राम


सबको कूट-पीसकर मिलाकर रखें। पहले 20 ग्राम खड़े मूंग 3 कप पानी में खूब उबालें और बाद में छानकर इस पानी से डूश करें। एक रूई का बड़ा फाहा पानी में गीला कर निचोड़ लें और इस पर ऊपर बताया चूर्ण बुरककर यह फाहा सोते समय योनि में रखें। इन दोनों में से कोई एक प्रयोग कुछ दिन तक करने से योनि तंग और सुदृढ़ हो जाती है।

हरा माजूफल,फिटकरी के आग पर किये हुऐ फूले व गुलाव के फूल बराबर मात्रा मे लेकर वारीक से वारीक पीस लें।इसे योनि में रखकर एक वारीक सा कपड़ा ढीला ढाला सा बाँध ले।यह प्रक्रिया लगातार फायदा न होने तक करें।

ढाक के गोंद की बत्ती बनाकर योनि में रखें।

आँवले पेड़ की छाल पानी मे 24 घण्टा पानी में भिगोकर इस पानी से ही योनि को धोऐं कुछ दिनों इस प्रयोग को लगातार बिना नागा किये करने से योनि निश्चित ही स्वभाविक अवस्था में आ जाएगी।यह कार्य आप रोजाना नहाते समय कर सकती हैं।

तीन हिस्सा फिटकरी व एक हिस्सा माजूफल का गूदा एक भाग पीसकर किसी मखमल के कपड़े की पोटली बनाकर रात को सोते समय योनि में रखने से योनि सिकुड़ जाती है।

शंखचालनी मुद्रा तथा मूलबंध का अभ्यास करना और मूत्र विसर्जन करते समय रोक-रोककर पेशाब करना, ये तीन उपाय योनि को चुस्त- दुरुस्त, सशक्त और संकीर्ण बनाते हैं। नियमित रूप से थोड़ी देर वज्रासन पर बैठकर शंखचालनी मुद्रा व मूलबंध लगाने का अभ्यास करना चाहिए।

स्त्री रोगों की परम हितकारिणी आयुर्वेदिक औषधि सुपारी पाक इस रोग में भी अपना अनूठा प्रभाव दिखाती है तो सुपारी पाक- 5 से 10 ग्रा. सुबह व शाम को दूध से सेवन करें।तथा शाम को बंग भस्म 1 रत्ती, सेमल के फूल का गोंद अर्थात मोचरस- 1 ग्रा.,शहद के साथ मिलाकर चाट लें।

श्रोणितल की पेशियों में कमजोरी आने से योनि में कसाव कम हो जाता है और ढीलापनमहसूस होने लगता है. योनि की पेशियां चुस्त दुरुस्त बनाने से योनि का ढीलापन दूर किया जा सकता है और चरम योनसुख की आनंदानुभूति जागृत की जा सकती है. इसके लिये एक साधारण सा व्यायाम है जिससे प्यूबोकाक्सीजियस पेशी मजबूत होती जाती है. जिससे योनि का ढ़ीलापन दूर होता जाता है.इस व्यायाम को कहीं भी , कभी भी और किसी भी मुद्रा में किया जा सकता है. 


इसके लिये करना यह होता है कि मूत्र प्रवाह रोकने वाली पेशी को अंदर की ओर ठीक वैसे भींचे जैसे कि मूत्र के वेग को रोक रही हों. अगले तीन सेकेण्ड तक प्यूबोकाक्सीजियस पेशी को इसी प्रकार अंदर ही अंदर भींचे रखें. फिर अगले 3 सेकेण्ड के लिये शरीर को ढीला छोड़ दें. अब एक बार फिर प्यूबोकाक्सीजियस पेशी को 3 सेकेण्ड तक अंदर भींचे. फिर 3 सेकेण्ड के लिये पेशी को ढीला छोड़ दें. यह व्यायाम 10-10 बार सुबह शाम करें और फिर बढ़ाते हुए 25-25बार सुबह और शाम करें. अभ्यास हो जाने पर तेज गति से करने लगें.इस व्यायाम से 2-3 माह में ही आप अपने भीतर बड़ा परिवर्तन महसूस करने लगेंगी. इसे करते रहने से आपके श्रोणिगुहा के अंगों को समुचित आवलंबन मिलता रहेगा.

आप शादी करने जा रहे है -

सेक्स विज्ञान की जानकारी से लोग पहले परहेज करते थे लेकिन अब समय के परिवर्तन के साथ लोगो में इसकी रूचि बढती जा रही है क्युकि अज्ञानता के कारण पति-पत्नी का सामंजस्य नहीं बेठता है तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है -



शादी एक ऐसा बंधन है, जी दो दिलों, दो आत्माओं को एक सूत्र में बांधता है। यह यौन जीवन के शुरूआत की हरी झंडी भी है, जिसका मकसद गृहस्थी व जिम्मेदारियों का संतुलन व विकास लाना होता है। अगर शादी यौन जीवन के शुरुआत की सामजिक व कानूनी स्वीकृति है, तो इसे नजरंदाज करना ठीक नहीं है।

अधिकाश युवक भावी पत्नी को लेकर तरह-तरह के ख्यालों में खोये रहते हैं। उनमें कुछ बातें ऐसी भी होती हैं, जो उन्हें तनाव व दुःख में डुबो देती हैं। जैसे शिश्न के आकार, उत्थान, टेढापन, लिंग पर उभरी नसों का होना, वृषण कोष का आकार, वीर्य की मात्रा व पतलापन, सम्भोग क्षमता, समय, स्त्री जननांगो के बारे में अज्ञानता, सेक्स तकनीक, शीघ्र स्खलन आदि के बारे में सोच-सोचकर वे दुःख में घिर जाते हैं। सौ में से अस्सी  प्रतिशत मामलों में युवक हस्तमैथुन से उपजी काल्पनिक नपुंसकता को लेकर चिंतित रहते हैं।

इसी प्रकार युवतियों में शादी से पूर्व प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान होने वाले दर्द रक्तस्त्राव के बारे में चिंता रहती है। कुछ युवतियों में इस बात का भय रहता है की प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान काफी दर्द होगा, खून बहेगा.... आदि। इस चिंता के कारण कुछ लड़कियां यौन संबंध के दौरान असहज हो जाती हैं। परिणाम स्वरुप यौन संबंधों में मिलने वाले आनंद के स्थान पर संबंध बनाने में ही दिक्कत आती है। संभावित दर्द व रक्त स्त्राव की कल्पना मात्र से ही लड़की अपने आपको तथा योनि द्वार को इतना कस लेती हैं की संभोग हो पाना ही कठिन हो जाता है।

युवक-युवतियों में ऐसी स्थिति को दूर करने के लिये उन्हें उचित ज्ञान-विज्ञान व तकनीकी को समझाए जाने की जरूरत है। साथ ही उनकी इस धारणा को बदलने की जरूरत है, जो उनमें भय व अंधविश्वास की जड़ है। यहाँ संक्षेप में शादी से पूर्व और शादी के बाद की स्थितियों पर गौर करते हुए कुछ आवश्यक बातों पर प्रकाश डाल रहे हैं, ताकि लड़के-लडकियां इसे आत्मसात करके सहजता से नए यौन-जीवन का सुखद शुभारम्भ कर सकें-

पत्नी के साथ संभोग के लिये मन में उत्साह, शारीरिक सक्रियता, आत्मबल, आत्मविश्वास व आत्मा नियंत्रण आवश्यक है। बाकी बातें गूढ़ हैं, जैसे की शिशन छोटा, टेढा होना, शीघ्र स्खलन आदि। हाँ, पुरूष को स्त्री जननांगों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

उसी प्रकार से दुल्हन को यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए की प्रथम सहवास के समय जो हल्का-सा दर्द होता है, वह संभोग में मिलने वाले आनंद के मुकाबले में कहीं नहीं ठहरता। दर्द सिर्फ क्षण भर के लिये होता है, फिर गायब हो जाता है। यह कोई ऐसा दर्द नहीं की दुल्हन बेहोश हो जाए।

प्रथम सहवास के दौरान कौमार्य झिल्ली फटती है और रक्तस्त्राव होता है। लेकिन वह मामूली-सा। योनीद्वार पर एक पतली झिल्ली होती है, जिसे हाईमन कहते हैं। योनिद्वार इससे ढका होता है। युवक-युवतियों को यह जान लेना चाहिए की झिल्ली की उपस्थिति का कौमार्य से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्कूल-काँलेज में होने वाले खेल-कूद, साइकिल चलाने, दौड़ने आदि के दौरान यह झिल्ली फट सकती है। अतः झिल्ली का फटना कौमार्य नष्ट होना हरगिज नहीं माना जाता चाहिए।

दूल्हा-दुल्हन को प्रथम सहवास के दौरान कमरे में अन्धेरा नहीं रखना चाहिए। अन्धकारक के दौरान दोनों को शारीरिक संरचना (जननांगों के बारे में) का ज्ञान नहीं हो पाता। उसके अलावा अन्धकार के कारण स्त्री-पुरूष को एक-दूसरे से मिलने वाली उत्तेजना तथा आकर्षण का लाभ नहीं मिल पाता।

सुहागरात को कक्ष में प्रवेश करने से पूर्व पुरूष अपने मन में यह संकल्प करके न जाए की उसे हर हाल में दुल्हन के साथ यौन संबंध कायम करना है। यह जरूरी नहीं है की पहली रात में ही यौन संबंध स्थापित किया जाए। यह सब पति-पत्नी की सहमति, इच्छा, वातावरण आदि पर निर्भर करता है। दुल्हन का स्वभाव होता है की वह पहले प्यार चाहती है, फिर सेक्स। पुरूष को उसकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

सुहागरात को पति हो या पत्नी, दोनों में से किसी को भी अपने पूर्व संबंधों (अगर भूलवश ऐसा हो) के बारे में चर्चा नहीं करनी चाहिए। विवाहित संबंध परस्पर विश्वास व सहयोग के तालमेल पर टिके होते हैं। इस विश्वास को पहली रात में ही तोड़ने की चेष्टा न करें।

यौन संबंध स्थापित करने से पूर्व पुरूष दुल्हन का मूड देखकर उसे इसके लिये तैयार करे। चूंकि स्त्रियाँ स्वभाव से ही लज्जाशील व संकोची होती हैं, अतः वह जल्दी तैयार नहीं होती। इसके लिये पुरूष को ही पहल करने की जरूरत पड़ती है। पति, स्त्री से प्यार करे, उसे हौले से आलिंगन में ले, स्त्री के बालों को सहलाए, उसे चूमे, स्त्री का सिर अपनी गोदी में रखकर उसकी आँखों के समक्ष एक रोमांटिक सीन तैयार करे, शेरो-शायरी करे, साथ ही स्त्री के अंगों पर हाथ फेरता रहे। कुछ देर के प्रयास में स्त्री का मूड बनने लगेगा। इसके बाद प्यार व फोर प्ले शुरू कर देना चाहिए। हालांकि पहली रात में युवक इतने बेसब्र होते हैं की वे जल्द से जल्द दुल्हन का जिस्म पा लेना चाहते हैं। वे खुद पर ज्यादा देर तक नियंत्रण में नहीं रख सकते। पर उन्हें याद रखना चाहिए की फर्स्ट इम्प्रेसन का प्रभाव पूरी उम्र बना रहता है। पत्नी का दिल जीतने और सफल संभोग के लिये थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझदारी आवश्यक है।

जब लगे की स्त्री काम विहल्ल होती जा रही है, जैसे की स्त्री आँख मूंदने लगे। चुम्बनों का आदान -प्रदान करने लगे, अपनी टाँगे पुरूष की टांगों पर फेंकने की चेष्टाएं समेत उसके शारीरिक गतिविधियों में यौन बदलाव आते ही पुरूष को संभोग का कार्य शुरू कर देना चाहिए। संभोग में सहज आसनों का प्रयोग करना चाहिए अथवा दोनों की सहमति होने पर ही आगे बढना चाहिए।

जिस प्रकार पुरूष को स्त्री जननांगों का ज्ञान होना चाहिए आवश्य है, उसी तरह स्त्री को भी पुरूष के जननांगों के बारे में जानकारे होना जरूरी है। उत्तेजित अवस्था में लिंग मोटा व लंबा हो जाता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि योनि की दीवारें लचीली होती हैं। वह आसानी से प्रवेश के समय फ़ैल जाती हैं। इसलिए लिंग प्रवेश को लेकर मन में किसी तरह की कोई चिंता न पालें पति का सहयोग करें, लज्जाशील अवश्य रहें, मगर इतना भी नहीं की पति को आगे बढ़ने में परेशानी हो। संभोग के लिये तत्पर होने पर शरीर को ढीला छोड़ दें।

संभोग के बाद पति-पत्नी को तुरंत एक दूसरे से अलग नहीं हो जाना चाहिए। चूंकि यह पहली रात होती है, अतः संभोग के बाद प्यार व वार्तालाप करें, घर-गृहस्थी की चर्चा कर सकते हैं, अनुशासन व पारिवारिक सामंजस्य पर बातें करें। बीच-बीच में चुम्बन-आलिंगन करते रहें। पत्नी को ऐसे लगेगा की वह अजनबियों के बीच में नहीं है तथा उसका पति उसके दिल में रहता है।

अतः यदि आपका विवाह होने जा रहा है, और आप सुखी दाम्पत्य जीवन जीना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम अपनी गलतफहमियों व शंकाओं का समाधान करें, अच्छी यौन विज्ञान की पुस्तक पढ़ें अथवा किसी कुशल सेक्स विशेषज्ञ से परामार्श करें। अभी से ही आने वाले कल की तैयारे में जुट जाएं।

Wednesday, July 15, 2015

जाँघों के कालेपन से परेशान -

पुरुष और महिलाएं दोनों डार्कनेस को हटाने के लिए और जाँघों को खूबसूरत बनाने के लिए ये टिप्स अपना सकते हैं



जांघों के कालेपन से बचने का अच्छा तरीका है पावों की त्वचा की सही देखभाल। जांघों के कालेपन को कम करने के लिए आप घरेलु उपचार जैसे नीम्बू, शहद, हल्दी, बेसन, ग्वारपाठा, जैतून का तेल आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं और स्किन को गोरा बना सकते हैं।

खीरे के टुकड़ों को रोजाना पांच मिनट तक जाँघों पर रगड़ें। स्किन लाइटनिंग और मॉइस्चराइजिंग तत्व के होने से काली स्किन और जांघें निखर जाएंगी। इसको ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए इसमें कुछ नींबू की बूंदें भी मिला लें और फिर इस्तेमाल करें।

त्वचा की अशुद्धियों को गहराई तक हटाने के लिए पपीते के स्क्रब को इस्तेमाल किया जा सकता है। पपीते का पेस्ट बना लें और इसे स्किन पर परत की भांति लगा लें। अपनी त्वचा को चमकदार बनाने के लिए एक नरम बाल खड़े ब्रश का उपयोग कर इस घरेलु नुस्खें का इस्तेमाल करें।

अपनी जाँघों पर शहद लगाएं और पांच मिनट तक रगड़ें, फिर 20 मिनट तक इसे छोड़ दें। बेहतर परिणाम के लिए इस क्रिया को हर सप्ताह दोहराएं।

एक आलू लें और इसे पीस लें। अब इस आलू के जूस को जाँघों पर मलकर सूखने के लिए छोड़ दें। काली त्वचा पर यह एंजाइम काम करेगा और इसे सफ़ेद और सुन्दर बनाएगा।

हल्दी में संतरे का जूस मिलकर स्क्रब तैयार कर लें। संतरे के जूस में विटामिन सी की प्रचुरता होती है और हल्दी में मौजूद तत्व डार्क स्किन से निजात दिलाने में मददगार हैं। त्वचा से यह पेस्ट हटाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें।

नींबू का इस्तेमाल त्वचा को साफ़ करने, मृत कोशिकाओं और अन्य अशुद्धियों को हटाने के लिए उपयोगी है। नींबू के रस को सीधे त्वचा पर नहीं रगड़ें। नींबू के रस में एसिड होने के कारण इससे त्वचा जल सकती है या लाल हो सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए इसमें पानी मिलाएं और पतले नींबू के रस को डार्क एरिया पर पांच मिनट तक लगाये और फिर पानी से धों लें।

एलो वेरा के रस को गोल गोल क्लॉक वाइज और एंटी- क्लॉक वाइज घुमाकर पांच मिनट तक लगाये और सूखने के लिए छोड़ दें। त्वचा से इस रस को हटाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। जब आप इस रस को सूखने तक त्वचा पर लगते हैं तो इससे पौष्टिक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को मिलते हैं जिससे इसको ठीक होने में मदद मिलती है।

एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करने और त्वचा की गन्दगी को हटाने की खूबी के कारण टमाटर ने यह प्रसिद्धि हांसिल की है। क्या आप जानते हैं कि बहुत से ब्यूटीसियन्स त्वचा से ऑयल को हटाने और मृत कोशिकाओं को हटाने के लिए टमाटर का सुझाव देते हैं? टमाटर का पेस्ट बनाकर इसे त्वचा पर पांच मिनट तक लगाएं और फिर 20 मिनट तक स्किन पर ही बाँध लें। यह डार्कनेस को काम करेगा और उन्हें गोरा बनाएगा।

Friday, July 10, 2015

किशोरियों के स्तन वृद्धि को बढाने के उपाए-

लड़कियों में स्तन का उभार आना सामान्य तौर पर 10 से 12 वर्ष की आयु में ही शुरू हो जाता है और यह प्रक्रिया 18 वर्ष की आयु तक जारी रहती है। यद्द्पि खास तरह के ऊतकों एवं वसा (चर्बी) से निर्मित स्तन का ऊतकीय विकास वयःसंधि काल में ही पूरा हो जाता है।




किशोरियों में योवन आरम्भ के समय प्राकृतिक परिवर्तन अपना समय लेता है और आप धीरे धीरे स्तनों के आकार में परिवर्तन महसूस करते हैं . इसे कुछ समय दीजिये और शांत रहिये , स्तनों को बढ़ने में लगने वाले समय के लिए चिंता मत कीजिये. लेकिन यदि आप स्तनों को जल्दी बढ़ाना चाहती हैं, तो आप कुछ चिकित्सा पद्धति का अनुसरण कर सकती हैं.

किशोरियों के स्तन बढ़ाने के लिए उपाय:-
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कुछ मुख्य उपायों में से एक उपाय हैं वजन बढ़ाना. जब आपका वजन बढ़ता हैं तो धीरे धीरे आपके स्तनों का आकर भी बढ़ता हैं . आप अपने चिकित्सक को हौर्मोंस का स्तर जांचने के लिए भी बोल सकते हैं यदि आपको ऐसा लगता हैं की आपके स्तन बहुत ही धीमी गति से बढ़ रहे हैं . कुछ व्यायाम करें जो आपके स्तनों की वृद्धि में मददगार हो.

वजन बढ़ने के लिए आप मूंगफली, चीज़, मक्खन, दही, नाशपाती और दुसरे स्वास्थ्यकर भोज्य पदार्थ खा सकते हैं. आप जिम जाकर देख सकते हैं और वहां कुछ अच्छा समय बिता सकते हैं. आपका प्रशिक्षक आपकी मदद सही कसरत करने में कर सकता है जो उसे आवश्यक लगे. 13-15 पुश- अप्स करें, भारोत्तोलन और दूसरी छाती की कसरत करें जो छाती की मांसपेशियों को खींच सके.

पुश-अप्स आपके अग्र भाग को ज़मीन से सटाकर और हाथों को ज़मीन पर समतल रखकर किया जा सकता है. अपने पैरो को फर्श पर सीधा रखे और हथेली की सहायता से स्वयं को ऊपर उठाइए और धीरे धीरे नीचे लाइए. यह प्रकिया कम से कम 13 से 15 बार दोहराए और आप अपने हाथों और छाती को मज़बूत और स्वस्थ  महसूस करेंगे. गाँव में कुँए से पानी खींचना भी छाती की मांसपेशियों के खिंचाव में मदद कर सकता है, जिससे आपके स्तन तेज़ी से बढ़ेंगे.

चेस्ट प्रेसेस डम्बल्स या वज़न को दोनों तरफ रखकर और ऊपर उठाकर किया जा सकता है. चटाई पर सीधे खड़े हो जाइये और दोनों घुटनों को मोड़िये और दोनों हाथों में वज़न लीजिये. धीरे से उन्हें आपके कन्धों के स्तर तक उठाइए और फिर वापस पुरानी स्थिति में लाइए. यह दिन में 10-15 बार दोहराइए और आप आसानी से परिवर्तन देख सकते हैं.

एक और व्यायाम है छाती संकुचन है - अपने पैरो को कुल्हो के बराबर दुरी पर रख कर सीधे खड़े हो जाइये. स्नान तोलिये के दोनों छोर पकडिये और अपने हाथो को सीधा फैलाईये तोलिये के छोरो को विपरीत दिशाओ में दोनों हाथो में खिचिये. ठीक उसी तरह जेसे आप रस्साकसी खेलते है. आप 30 सेकंड से एक मिनट तक रुक सकते है और यह व्यायाम 3 बार करे.

एक और चेस्ट व्यायाम आपके घर बिना अधिक प्रयास के किया जा सकता है. कुर्सी के बीचो बीच बैठ जाइये और अपनों भुजाओ से समान वजन उठाइए. अपने हाथो वजन सहित सीधा कंधे के स्तर तक उठाइए और धीरे से नीचे  लाइए, ध्यान  रखिये के आपके हाथ आपस में पास होने चाहिए. और आपके निचले शरीर के तरफ हाथो का मुख होना चाहिए. यह व्यायाम एक दिन में 12 बार और 3 सेट में करे. आप रात में ब्रा का उपयोग टाल सकती है.

प्रतिदिन पपीते का रस और दुध पीना स्तनों की वृद्धि का प्रक्रतिक तरीका है. इन दोनों में उपस्थित प्रोटीन , विटामिन और पोषक तत्व स्तन वर्धि को बढाएंगे. ताज़ा पपीता खाना एक दूसरा अच्छा तरीका है.

स्वास्थयप्रद भोजन कीजिये जिसमे प्रोटीन भरपूर मात्रा में हो जेसे अंडे, मूंगफली का मक्ख्हन, मछली, सुपारी, दूध और मुर्गी का मांस. प्रोटीन से भरपूर भोज्य पदार्थ ढूंढिए और उन्हें प्रतिदिन खाने की कोशिश कीजिये. शक्कर, संश्लेषित भोज्य पदार्थ, सोडा, फ़ास्ट फ़ूड इत्यादि कम से कम खाइए. इसके स्थान पर बहुत सा पानी पीजिये.

अपने स्तनों की प्रतिदिन या हर रात मालिश कीजिये, यह वास्तव में स्तनों के ऊतकों की मदद करेगा. एक टेबल स्पून अलसी के बीज स्तनों की वृद्धि में बहुत मददगार होता है. स्तनों की शीघ्र वृद्धि के आहार उपचार जिनका आपको अनुसरण करना चाहिए

ऐसे भोज्य पदार्थ जिसमे अस्ट्रोजन अधिक हो, स्तन वृद्धि के लिए बहुत लाभकारी होता है. हौर्मोंस की विषमता भी स्तन वृद्धि के पीछे बहुत बड़ा कारण है. आइये कुछ अस्ट्रोजन की अधिकता वाले भोज्य पदार्थ देखें.

फल और सब्जियां :-
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इनमें अस्ट्रोजन अधिक पाया जाता है. खजूर, चेरी, सेब और आलूबुखारा प्रतिदिन खाने के साथ खाना चाहिए.

मेथी:-
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यह स्तन वृद्धि के लिए सिद्ध तथा उत्तम जड़ी है. इसलिए ऐसा भोजन करने की कोशिश कीजिये जिसमे मेथी का घटक हो. मेथी की पत्तियां दूध में भी वृद्धि करती हैं.

सोयाबीन:-
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सोया उत्पाद जैसे सोया दूध, सोया मक्खन, सोया कॉफ़ी, सोया ब्रेड आदि में अस्ट्रोजन का स्तर उच्च होता है. स्तन वृद्धि में ये सोया उत्पाद अच्छा परिणाम देंगे.

अलसी  बीज:-
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ये स्तन वृद्धि में बहुत प्रभावकारी पाए गए हैं. आप बहुत सारे दुसरे बीज भी स्तन वृद्धि में उपयोग कर सकते हैं जैसे पपीते के बीज, सौंफ के बीज, सूरजमुखी के बीज इत्यादि.

मटर और फलियाँ:-
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आप मटर और फलियों से प्राकृतिक अस्ट्रोजन प्राप्त कर सकते हैं. राजमा, लाल राजमा, लिमा बीन्स, छोले और अम्जोद, प्रोटीन भोज्य पदार्थों के साथ खाया जाना चाहिए जो स्तन वृद्धि में मददगार होता है.

जैतून:-
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जैतून और जैतून का तेल स्तन वृद्धि का सर्वोत्तम उपचार हैं. वर्जिन जैतून का तेल और काला  जैतून स्तन वृद्धि के लिए सर्वोत्तम हैं. आप स्तन वृद्धि के लिए दूसरे तेल भी उपयोग कर सकते हैं जैसे- कच्चे अखरोट का तेल, अलसी का तेल, अवोकेडो तेल और तिल का तेल.


हमेशा धीरज रखिये, स्तनों का आकार धीरे-धीरे बढ़ेगा और यह आपको जल्दी ही पता चल जाएगा. ख़ास तौर पर तब जब आप यौवन आरम्भ से गुज़र रहे हों, स्तनों के आकार वृद्धि में कुछ समय लगेगा.

बड़े स्तनों के लिए अमल में लाये जा सकने वाले सुझाव:-
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बार बार स्तनों की मालिश कीजिये, इससे स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन आकर्षक बनते हैं.

सॉफ्ट ड्रिंक, चाय, कॉफ़ी, शराब आदि का उपभोग टालिए, इससे स्तन वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

जंक फ़ूड मत खाइए. यह स्तन वृद्धि पर असर डालता है. बहुत सारा पानी पीजिये और नियमित रूप से कसरत कीजिये.

Wednesday, June 17, 2015

असुरक्षित यौन संबंध -

असुरक्षित यौन संबंधों के चलते कई बीमारियां फैल रही हैं-



इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है जानकारी का अभाव। अधिकतर लोग सावधानियों के प्रति जागरुक नहीं होते। और इसी वजह से कई तरह की परेशानियों में घिर जाते हैं।


असुरक्षित यौन संबंधों को लेकर लोगों में कई प्रकार की दुविधा होती है। सही स्रोतों से जानकारी के अभावों में युवा अक्‍सर इसे लेकर अनिश्‍चितता में रहते हैं। वह यही सोचते हैं कि यौन संबंधों का मतलब है सेक्स के दौरान सावधानियां बरतना। 


लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है यौन संचारित रोगों को जानना, संक्रमण की संभावनाओं इत्यादि के बारे में जागरूक होना। आइए जानें असुरक्षित यौन संबंध आखिर है क्या। 


असुरक्षित यौन संबंध:-
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असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है, सेक्स के दौरान सावधानियां न बरतना। इन सावधानियों में जरूरी है कि सेक्स जोर-जबरदस्ती से न किया जाए।


माहवारी के दौरान सेक्स करने से संक्रमण की संभावना बढ जाती है।एक से ज्यादा साथी फिर चाहे वह महिला हो या पुरूष के साथ संबंध बनाने से संक्रमण हो सकता है।


असुरक्षित यौन संबंधों के दौरान यौन संचारित रोगों के होने का खतरा बना रहता है।बहुत अधिक कंट्रासेप्टिक पिल्स का सेवन, पहली बार सेक्स के दौरान कंडोम का सेवन न करना असुरक्षित यौन संबंधों के अंतगर्त आता है।


प्रोफेशनल सेक्स वर्कर से संपर्क बनाने से भी संक्रमण की संभावना रहती है।


सामूहिक रूप से सेक्स‍ करना यानी एक ग्रुप में आपस में एक-दूसरे के साथ सेक्स करना भी असुरक्षित यौन संबंधों के अंतर्गत शामिल है।


वाइफ स्‍वैपिंग यानी एक दूसरे के पार्टनर को एक रात के लिए बदलने से भी असुरक्षित यौन संबंधों का खतरा रहता है।पुरूष या महिला में से किसी को यौन संबंधी इंफेक्शेन होने से भी संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।


ओरल सेक्स से भी इंफेक्शन होने का खतरा लगातार बरकरार रहता है। इसीलिए ओरल सेक्स में साफ-सफाई का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।सेक्स के दौरान, सेक्स से पहले खासतौर पर सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं। असुरक्षित यौन संबंध के कारण होने वाली बीमारियों की सूची लंबी है, लेकिन थोड़े संयम और सावधानी अपनाकर इनसे बचा जा सकता है।

Monday, June 15, 2015

पुरुषो में बढ़ता स्तन -

ये बीमारी अब महिलाओं तक ही सीमित नहीं है अब एक प्रतिशत पुरुषो में भी देखने को मिल रही है पुरुषो में भी स्तन बढ़ने की समस्या आज जादा ही दिखाई पड़ने लगी है -उसका ख़ास कारण हमारे खान-पान का प्रभाव है -मार्केट में उपलब्ध हारमोंस इंजेक्सन द्वारा उगाई जाने वाली सब्जी और फलो का प्रभाव किशोरियों में ही नहीं पुरुषो में भी प्रभाव उत्पन्न कर रहा है .



पुरुष बढ़े हुए स्तनों नहीं है एक मुसीबत वास्तव में, लेकिन कुछ मामले काफी कठिन है, हो सकता है जब विशेष रूप से दर्दनाक उत्तेजना पुरुषों है। इसके अलावा, रोगियों द्वारा इस स्थिति के कारण परेशानी महसूस कर सकते हैं।

पुरुषों में ब्रेस्ट में वृद्धि पुरुष और महिला हॉर्मोन्स एंड्रोजेंस और ऑस्ट्रोजेन में असंतुलन के कारण होता है। इसे मेडिकल में गाइनेकोमैस्टिया के नाम से जाना जाता है। यह ज्यादातर 19 से 25 साल के लड़कों में होता है लेकिन कुछ मामलों में ज्यादा उम्र के पुरुषों में भी होता है। लोगों में एक आम गलत धारणा यह है कि पुरुषों में फीमेल हॉर्मोन्स नहीं होते। पुरुषों में फीमेल हॉर्मोन्स होते हैं लेकिन बहुत ही कम मात्रा में। हॉर्मोनल असंतुलन प्राकृतिक तौर पर तब होता है जब मरीज का शरीर फीमेल हॉर्मोन्स के प्रति ज्यादा संवेदशनशील होता है, लेकिन ऐसे मामले दुर्लभ हैं। ज्यादातर मामलों में इसका कारण बाहरी होता है, जैसे खराब पोषण, स्टेरॉयड और शारीरिक अक्षमता।

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर दूध देने वाले और नॉन वेज के लिए प्रयोग किए जाने वाले जानवरों के तेज और ज्यादा उत्पादन के लिए उन्हें दिए जाने वाले ग्रोथ हॉर्मोन्स भी हॉर्मोनल अंसुतलन का कारण हैं। शारीरिक श्रम की कमी इस परेशानी को बढ़ाने वाली होती है।

कुछ लोग ज्यादा फिट होने और सुपरस्टार जैसा दिखने के लिए सिक्स पैक्स बनाने के चक्कर में शॉर्टकट अपनाते हैं और स्टेरॉड्स युक्त न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स का प्रयोग करते हैं। इन प्रॉडक्ट्स के प्रयोग से शरीर में एंड्रोजेंस पैदा होने लगता है। ऑस्ट्रोजेंस से जुड़ी ऐक्टिविटी में बढ़ोतरी पुरुषों में ब्रेस्ट की वृद्धि के रूप में सामने आती है।

भारत में 25 से 31 प्रतिशत महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित रहती हैं। ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक रिसर्च के अनुसार सौ में एक पुरुष में भी ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण पाए जाते हैं। इसलिए आज हम आपको ऐसे 7 फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें डाइट में शामिल करने से स्तन कैंसर जैसी बीमारी का खतरा कम हो जाता है।

कुछ सावधानी से आप इनसे काफी हद तक बच सकते है पुरुषो को ब्रेस्ट केंसर से बचने के लिए कुछ ये फूड्स खाना चाहिए -

पीले या नारंगी रंग के फलों और सब्जियों (पीली शिमला मिर्च, कद्दू और खरबूजे) में एक स्ट्रॉन्ग एंटी-ऑक्सीडेंट होता है, जो ब्रेस्ट कैंसर उत्पन्न करने वाले कारक को शरीर से बाहर करता है। इसलिए अपनी डाइट में रोज एक पीला फल या सब्जी शामिल कर ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से बचा जा सकता है। येलो के अलावा हरी सब्जियां जैसे ब्रोकली और गोभी भी शरीर से ब्रेस्ट कैंसर के सेल्स को हटाती हैं।

महिलाओं के शरीर में बैड एस्ट्रोजेन्स का ज्यादा निर्माण होने से ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ती है। दालों में फाइबर की अधिक मात्रा होती है, जिनसे बैड एस्ट्रोजेन्स शरीर से दूर होते हैं। इसलिए दाल, चावल, ओट्स और दूसरे अनाज खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है। साथ ही, फाइबर पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है। डाइट में फाइबर की अधिक मात्रा शामिल करने से हानिकारक टॉक्सिन्स शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

अनार में आयरन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा तो होती ही है, साथ ही यह ब्रेस्ट कैंसर उत्पन्न करने वाले कारक जैसे एस्ट्रोजेन्स का निर्माण होने से रोकता है। अनार खाने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसे छीलकर खाएं, लेकिन अगर आप इसके दानें निकालने में आलस करते हैं, तो इसका जूस भी फायदेमंद होता है।

बेरी (एवोकैडो, बरबेरी, ब्लूबेरी, अंगूर, स्ट्राबेरी और क्रैनबेरी आदि) न सिर्फ टेस्टी होती है, बल्कि इसमें मौजूद इलाजिक एसिड ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को कम करता है। ब्रेस्ट कैंसर के अलावा बेरी से दूसरे टाइप के कैंसर होने का खतरा भी कम रहता है।

अखरोट में कई पोषक गुण होते हैं, जो शरीर के लिए हर तरह से फायदेमंद हैं। अखरोट में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो शरीर में कैंसर उत्पन्न करने वाले कारक ट्यूमर को बनने से रोकता है। आप अखरोट को नाश्ते में अंकुरित अनाज के साथ भी खा सकते हैं या शाम को स्नैक्स के रूप में भी।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण:-
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आप खुद भी ब्रेस्ट में गांठ की पहचान कर सकते  हैं।  ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण क्या हो सकते हैं:-

ब्रेस्ट में गांठ और समय के साथ इसका आकार बढ़ना।

ब्रेस्ट का असामान्य तरीके से बढ़ना।

बगल में सूजन आना।

निप्पल का आकार बिगड़ना।

निप्पल का लाल पड़ना या उनसे खून आना।

इस प्रकार के लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ताकि  जांच के बाद  सुनिश्चित होने पे तुरंत उपाय किया जा सके .

इसके कारण:-
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जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की समस्या 50 साल के बाद शुरू होती है।

अगर परिवार में या क्लोज़ रिलेटिव में किसी को ब्रेस्ट कैंसर की समस्या है, तो यह बीमारी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है।

स्तन में किसी प्रकार के गांठ का बनना।

मोटापा स्तन कैंसर की एक बड़ी वजह बन सकती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ओवरवेट महिलाओं में पीरियड्स के दौरान हाई लेवल के एस्ट्रोजेन्स बनते हैं, जिससे कैंसर हो सकता है।

हेल्दी डाइट फॉलो करने के अलावा ब्रेस्ट कैंसर रोकने के कुछ दूसरे उपाय भी करने चाहिए, जैसे-

रेग्युलर एक्सरसाइज करें और शरीर को स्वस्थ रखें।

पुरुष एल्कोहल और स्मोकिंग से दूरी बना लें।

हार्मोन्स रिप्लेसमेंट थेरेपी न करवाएं। इससे ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ती है।

रेग्युलर चेकअप करवाएं और ज़रा सा भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

जो महिलाएं किसी कारणवश अपने बच्चों को स्तनपान नहीं करा पातीं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है ।

Sunday, May 10, 2015

मासिक धर्म का रुक जाना-

मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है| यदि मासिक धर्म में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में अन्य विकार उत्पन्न हो जाते हैं| इसका कारण शरीर के भीतर किसी रोग का होना भी हो सकता है|


इसके सुचारु रूप से न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित रह जाती है|कारण शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी - इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता|

पहचान:-
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गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं|

करे ये  प्रयोग :-
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दो चम्मच बथुआ के बीज 1 गिलास पानी में उबालें। आधा पानी बच जाने पर छानकर पीने से रुका हुआ मासिकधर्म खुलकर साफ आता है।

तीन ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है|

दूब घास का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी खुल जाती है|

कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|

ग्वारपाठे (एलोवेरा ) का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें|

10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|

3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें|

50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ - सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं| जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|

बरगद की जटा, मेथी और कलौंजी - सब 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें| फिर आधा किलो पानी में सब चीजें डालकर काढ़ा बनाएं| जब पानी आधा रह जाए तो छानकर शक्कर डालकर पी जाएं|

प्याज का सूप एक कप बनाएं| उसमें थोड़ा- सा गुड़ घोल लें| इस पीने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|दिन में तीन बार 2-2 ग्राम थोडा  गरम पानी से सेवन करना चाहिए| इससे मासिक धर्म खुल जाता है|

ज्वार के भुट्टे को जलाकर इसकी राख को छान लें। इस राख को 3 ग्राम की मात्रा में पानी से सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म चालू होने से लगभग एक सप्ताह पहले देना चाहिए। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें। इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से
खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4 गोलियां बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक
गोली का सेवन माहवारी शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले स्त्री को सेवन करना चाहिए। मासिक-धर्म शुरू होने के बाद इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर एक  चम्मच घी के साथ मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक-धर्म
में अधिक खून आना बंद होता है। विदारीकन्द के 1 चम्मच चूर्ण को घी और चीनी के साथ मिलाकर चटाने से मासिक-धर्म में अधिक खून आना बंद हो जाता है।

2-3 महीने तक भी मासिक-धर्म के न होने पर और पेट में भी दर्द रहने पर एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम को खाना खाने के बाद सोते समय 30 दिनों तक पियें।

नोट: इस प्रयोग के दौरान आलू और बैगन नहीं खाना चाहिए।


उलटकंबल की जड़ की छाल का गर्म चिकना रस 2 ग्राम की मात्रा में कुछ समय तक रोज देने से हर तरह के कष्ट से होने वाले मासिक-धर्म में लाभ
मिलता है।

उलटकंबल की जड़ की छाल को 6 ग्राम लेकर 1 ग्राम कालीमिर्च के साथ पीस कर रख लें। इसे मासिक धर्म से 7 दिनों पहले से और जब तक मासिक-धर्म होता रहता है तब तक पानी के साथ लेने से मासिक-धर्म नियमित होता है। इससे बांझ पन दूर होता है और गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है।

अनियमित मासिक-धर्म के साथ ही, गर्भाशय, जांघ और कमर में दर्द हो तो उलटकंबल की जड़ का रस 4 ग्राम निकालकर चीनी के साथ सेवन करने से 2 दिन में ही लाभ मिलता है।

उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को जौ कूट यानी पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा उचित मात्रा में दिन में 3 बार लेने से कुछ ही दिनों में मासिक-धर्म नियमित समय पर होने लग जाता है। इसका प्रयोग मासिक धर्म शुरू होने से 7 दिन पहले से मासिक-धर्म आरम्भ होने तक दें।

उलटकंबल की जड़ की छाल का चूर्ण 4 ग्राम और कालीमिर्च के 7 दाने सुबह-शाम पानी के साथ मासिक- धर्म के समय 7 दिन तक सेवन करें। 2 से 4 महीनों तक यह प्रयोग करने से गर्भाशय के सभी दोष मिट जाते हैं। यह प्रदर और बन्ध्यत्व की सर्वश्रेष्ठ औषधि है।

Tuesday, March 10, 2015

सदाबहार जवानी रक्खे बरकार -

अगर आप अपने बेडरूम में उदासी का सामना कर रहे है तो संभावना है की आप पति -पत्नी अपने यौन स्वास्थ के लिए पर्यात ध्यान नहीं दे पा रहे है तो झल्लाहट में मत आएये.



आप अपने यौन जीवन की बुझती हुई लापता चिंगारी को फिर से जगाकर पहले के जूनून की तरह हर रात का भरपूर आनंद ले कर अपने वैवाहीक जीवन को पुन: खुशहांल बना सकते है लेकिन उसके लिए आपको कुछ मेहनत करनी होगी सेक्स पावर बढाने के कुछ कारगर उपाय है इन्हें आजमाकर आप बिना रूकावट वैवाहिक लाइफ का भरपूर आनंद ले सकते है -


आज के खान-पान और नकली सामग्री के चलते सभी लोगो में सेक्स की छमता में काफी कमी हो गई है लेकिन कुछ थोड़ी सावधानी करे तो हम अपनी शक्ति को सलामत रख सकते है -


क्या करे :-
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सबसे पहली सावधानी कि आप अपना पेट हमेशा साफ़ रहे अगर पेट साफ़ नहीं है तो सेक्स छमता में कमी आ सकती है और कई रोग हो सकते है |


रात में सोने से पहिले दो- तीन खजूर और कुनकुना दूध पिए इससे पेट तो साफ़ होगा ही साथ ही सेक्स छमता भी असाधारण रूप से बड जाएगी |


शायद बहुत कम लोग जानते होगे की तरबूज का बीज- देसी वियाग्रा का काम करता है- क्या आप जानते है कि अरबी लोग इतने गरम क्यों होते है क्योकि वो लोग रोजाना तरबूज का बीज खाते है अरबी भाषा में इसे मगज कहते है तो आप तरबूज के बीज का उपयोग इस प्रकार करे आप इसे रोज बीस से पच्चीस ग्राम सेवन करे और साथ ही दूध का सेवन करे -


हम आपको एक आसान उपाय और बताते है लहसुन की 5-6 कलिया देसी घी में फ्राई कर के रोजाना खाए 15 से 20 दिन में इसका रिजल्ट आपको मिल जायेगा लेकिन इसका सेवन ठंडी के सीजन में ही करना चाहिये क्योकि लहसुन की तासीर गरम होती है अगर आप रोजाना लहसुन का सेवन करते है तो बहुत सारी बीमारियां  आपके पास आने से डरेगी साथ ही लहसुन ब्लड प्रेसर में भी फायेदेमंद है तो देरी किस बात की आज से ही लहसुन का सेवन सुरु कर दे-

Sunday, February 08, 2015

रंग भी प्रभावित करता है सेक्स लाइफ को -

जी हाँ हमारे जीवन में हमारी सेक्स लाइफ को भी प्रभावित करता है जब भी हम इस प्रकार के रंगों का चयन करते है अपने बेड रूम के लिए तो उसका प्रभाव भी हमारे मन मस्तिष्क पे पड़ता है -


जिन लोगो के बेडरूम या बिस्तर की चादर जामुनी रंग की होती है उनकी सेक्स लाइफ ज्यादा उत्तेजक और लंबी होती है . इस रंग का प्रयोग करने वाले सप्ताह में अमूमन 3.5 बार सेक्स करते हैं। एक सर्वे जो 2000 से अधिक व्यस्क जोड़ों पर किए गए इस सर्वे से पता चलता है.


दूसरा उत्तेजक रंग है लाल। जिन भी लोगों ने अपने बेडरूम या बिस्तर पर लाल रंग का प्रयोग किया है वे भी सेक्स में अधिक लिप्त होते हैं। बेडरूम में लाल रंग का इस्तेमाल करने वाले आमतौर पर सप्ताह में औसतन 3.2 बार सेक्स करते हैं।



नीले या आसमानी रंग का इस्तेमाल करने वाले इस श्रेणी में तीसरे नंबर पर आते हैं। नीले रंग के बेडरूम या चादर इस्तेमाल करने वाले जोड़े अमूमन सप्ताह में 3.1 बार सेक्स करते हैं।



सबसे कम उत्तेजक रंग माना गया है ग्रे या स्लेटी रंग, इस अध्ययन से पता चला है कि स्लेटी रंग का इस्तेमाल करने वाले जोड़े आमतौर पर सेक्स के मामले में उदासीन होते हैं। यह लोग सप्ताह में सिर्फ 1.8 बार ही सेक्स करते हैं।

Saturday, January 24, 2015

माहवारी चक्र की अवधि में बदलाव -

अनियमित माहवारी और देर से माहवारी आने का अर्थ है माहवारी चक्र की अवधि में बदलाव होना। सामान्यतया महिला में मासिक चक्र की अवधि 28 से 30 दिनों तक की होती है। हर महिला के मासिक चक्रों में 8 दिनों का अंतर होता है। लेकिन 8 से 20 दिनों तक के अंतर को अनियमित माहवारी कहा जाता है।


ज्यादातर अनियमित माहवारी के लक्षण होते हैं, जल्दी-जल्दी माहवारी आना, दाग लगना, रक्त के थक्कों का आना। यह समस्या हार्मोन में असंतुलन के कारण हो सकती है और आसानी से ठीक हो जाती है। कुछ महिलाओं के जीवन में बिना कारण ही उन्हें किसी किसी महीने माहवारी नहीं होती। साल में किसी एक महीने में माहवारी का ना आना सामान्य है, लेकिन दो से तीन बार माहवारी में अनियमितता होना सही नहीं, उसका उपचार करने की जरूरत है।

आयुर्वेद के अनुसार महिला की माहवारी में अनियमितता के पीछे सबसे अधिक जिम्मेदार कारक अस्वस्थ खानपान और खाने का ठीक से न पचना है। अगर खाना सही तरीके से नहीं पच पाया तो यह शरीर में मौजूद टॉक्सिंस के उत्पादन को प्रभावित करता है। और यही टॉक्सिंस रक्त कोशिकाओं में मिल जाता है जिसके कारण खून में रुकावट और ठहराव हो जाता है। आयुर्वेद के जरिये पाचन संबंधी इन्हीं विकारों को दूर करके
अनियमित माहवारी को नियमित किया जा सकता है।

करे कुछ ये प्रयोग :-
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पुरानी किशमिश को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे लगभग 200 मिली पानी में रातभर भिगोयें, सुबह इसे उबालकर रख लें। जब यह एक चौथाई
की मात्रा में रह जाए तो छानकर इसका सेवन कीजिए।

तिल है फायदेमंद काला तिल 5 ग्राम लेकर गुड़ में मिलाकर माहवारी शुरू होने से 4 दिन पहले सेवन करें, जब मासिक धर्म शुरू हो जाए तो इसे बंद कर दें, इससे माहवारी न तो देर से आयेगी और न ही अनियमित होगी।

 चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीस लीजिये, इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले सेवन कीजिए। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर दीजिए, इससे मासिक धर्म समय पर होगा।

असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर इसे बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले लें, जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तब इसका सेवन न करें।

रेवन्दचीनी 3 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक- धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार दूर हो जाते हैं।

आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4 गोलियां बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गोली का सेवन मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले करें, मासिक-धर्म शुरू होने के बाद इसका सेवन बंद कर दीजिए, इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर 1 चम्मच घी के साथ मिला लीजिए, इसे रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक- धर्म में अधिक खून आना बंद होता है और माहवारी नियमित हो जायेगी।

 आप अनियमित माहवारी की समस्या से अगर जूझ रही हैं तो एक बार चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।