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Friday, September 18, 2015

दंश-विष के लिए प्रयोग -

भौंरी, मक्खी, मधुमक्खी के दंश के लिए आप ये प्रयोग करे :-



तुलसी के पत्तों को नमक के साथ पीसकर लगाने से भौंरों के दंश की वेदना मिट जाती है।

मधुमक्खी भौंरी के दंशप्रभावित स्थान पर गाय के गोबर का तीन दिन लेप करने से लाभ होता है।

बगई कीड़ा -बैल, कुत्ते अथवा घोड़े पर बैठने वाली बगई नामक पीली मक्खी यदि मनुष्य के कान में घुस जाये तो शुद्ध घी का हलुआ या सेवफल का टुकड़ा कान के आगे बाँधकर रखने से वह स्वतः निकल जाती है।

सर्प दंश के लिए तपाये हुए लोहे से डंकवाले भाग को जला देने से नाग का प्राणघातक जहर भी उतर जाता है। सर्पदंश की जगह पर तुरंत चीरा करके विषयुक्त रक्त निकालकर पोटेशियम परमैंगनेट भर देने से जहर फैलना एवं चढ़ना बंद हो जाता है। साथ में मदनफल (मिंडल) का 1 तोला चूर्ण गरम या ठण्डे पानी में पिला देने से वमन होकर सर्पविष निकल जाता है। मिचाईकंद का टुकड़ा दो ग्राम मात्रा में घिसकर पिलाना तथा दंशस्थल पर लेप करना सर्पविष की अक्सीर दवा है।

मेष राशि का सूर्य होने पर नीम के दो पत्तों के साथ एक मसूर का दाना चबाकर खा जाने से उस दिन से लेकर एक वर्ष तक साँप काटे तो उसका जहर नहीं चढ़ता।

साँप के काटने पर शीघ्र ही तुलसी का सेवन करने से जहर उतर जाता है एवं प्राणों की रक्षा होती है।


जिस व्यक्ति को सर्प ने काटा हो उसे कड़वे नीम के पत्ते खिलायें। यदि पत्ते कड़वे न लगें तो समझें कि सर्प विष चढ़ा है। छः सशक्त व्यक्तियों को बुलाकर दो व्यक्ति मरीज के दो हाथ, दो व्यक्ति दो पैर एवं एक व्यक्ति पीछे बैठकर उसके सिर को पकड़े रखे। उसे सीधा सुला दें एवं इस प्रकार पकड़ें कि वह जरा भी हिल न सके।


इसके बाद पीपल के हरे चमकदार 20-25 पत्तों की डाली मँगवाकर उसके दो पत्ते लें। फ़िर ‘सुपर्णा पक्षपातेन भूमिं गच्छ महाविष।’ मंत्र जपते हुए पत्तों के डंठल को दूध निकलनेवाले सिरे से धीरे-धीरे मरीज के कानों में इस प्रकार डालें कि डंठल का उँगली के तीसरे हिस्से जितना भाग ही अंदर जाय अन्यथा कान के परदे को हानि पहुँच सकती है। जैसे ही डंठल का सिरा कान में डालेंगे, वह अंदर खिंचने लगेगा व मरीज पीडा से खूब चिल्लाने लगेगा, उठकर पत्तों को निकालने की कोशिश करेगा। सशक्त व्यक्ति उसे कसकर पकड़े रहें एवं हिलने न दें। डंठल को भी कसकर पकड़े रहें, खिंचने पर ज्यादा अंदर न जानें दे। जब तक मरीज चिल्लाना बंद न कर दे तब तक दो-दो मिनट के अंतर से पत्ते बदलकर इसी प्रकार कान में डालते रहें। सारा जहर पत्तें खिंच लेंगे। धीरे-धीरे पूरा जहर उतर जायेगा तब मरीज शांत हो जायेगा। यदि डंठल डालने पर भी मरीज शांत रहे तो जहर उतर गया है ऐसा समझें। जहर उतर जाने पर नमक खिलाने से खारा लगे तो समझें कि पूरा जहर उतर गया है। मरीज को राहत होने पर सौ से डेढ़ सौ ग्राम शुद्ध घी में 10-12 काली मिर्च पीसकर वह मिश्रण पिला दें एवं कानों में बिल्वादि तेल की बूँदे डाल दें ताकि कान न पकें। कम से कम 12 घण्टे तक मरीज को सोने न दें। उपयोग में आये पत्तों को या तो जला दें या जमीन में गाड़ दें क्यों कि उन्हें कोई जानवर खाये तो मर जायेगा। इस प्रयोग के द्वारा बहुत मनुष्यों को मौत को मुख में से वापस लाया गया है। भले ही व्यक्ति बेहोश हो गया हो या नाक बैठ गयी हो, फिर भी जब तक जीवित हो तब तक यह प्रयोग चमत्कारिक रूप से काम करता है।

जहर पी लेने पर....कितना भी खतरनाक विषपान किया हो, नीम का रस अधिक मात्रा में पिलाकर या घोड़ावज (वच) का चूर्ण या मदनफल का चूर्ण या मुलहठी का चूर्ण या कड़वी तुम्बी के गर्भ का चूर्ण एक तोला मात्रा में पिलाकर वमन (उलटी) कराने से लाभ होगा। जब तक नीला-नीला पित्त बाहर न निकले तब तक वमन कराते रहें।

बिच्छू दंश के लिए पत्थर पर दो-चार बूँद पानी की डालकर उस पर निर्मली या इमली के बीज को घिसें। उस घिसे हुए पदार्थ को दर्दवाले स्थान पर लगायें एवं जहाँ बिच्छू ने डंक मारा हो वहाँ घिसा हुआ बीज चिपका दें। दो मिनट में ही बिच्छू का विष नष्ट हो जायेगा और रोता हुआ मनुष्य भी हँसने लगेगा।

पोटेशियम परमैंगनेट एवं नींबू के फूल (साइट्रिक एसिड) को बारीक पीसकर अलग-अलग बॉटल में भरकर रखें। बिच्छू के डंक पर मूँग के दाने जितने नींबू के फूल का पाउडर एवंपोटेशियम परमैंगनेट का मूँग के दाने जितना पाउडर रखें। ऊपर से एक बूँद पानी भी डालें। थोड़ी देर में उभार आकर विष उतर जायेगा। यह अदभुत दवा है।

कान खजूरा के लिए आकड़े का दूध लगाने से कान खजूरे का दंश मिटता है।

नमक का पानी सहने योग्य गर्म करके कान में डालने से कानखजूरा मर जाता है।

यदि कानखजूरा शरीर पर चिपक गया हो तो उसके ऊपर सरसों का तेल डालने से वह मर जाता है या आँच देने से छूट जाता है।

स्थावर विष:-



नीलाथोथा:-



गेहूँ के आटे में खूब घी डालकर एवं शक्कर मिलाकर हलुआ बनाकर खिला देने से नीले थोथे के जहर का असर नहीं होता।



तेजाब (Acid):-




पानी में चूना घोलकर दो-तीन बार कपड़छन करके अथवा चूने का निथारा हुआ पानी 40 ग्राम पिलाने से तेजाब का खराब प्रभाव नहीं पड़ता।

स्थावर-जंगम विष:-



चौलाई के 20 से 50 मि.ली. रस पिलाने से अथवा उसकी जड़ की 5 से 10 ग्राम चटनी में आधा से 2 ग्राम काली मिर्च डालकर खिलाने से अथवा रोगी को चौलाई की सब्जी खिलाने से सब प्रकार के स्थावर-जंगम विष दूर होते हैं।

जंगम विष:-



थूहर (थोर):-



ठण्डे पानी में मिश्री या शक्कर मिलाकर पिलावें व लगावें।

इमली के पत्तों के घिसकर लेप करें।

धतूरे का विष:-



तिल का 20 से 50 मि.ली. तेल 50 से 200 मि.ली. गर्म पानी में मिलाकर पिलायें।

दूध में मिश्री डालकर पिलायें।

मनुष्य ने जितनी मात्रा में धतूरे के बीज, फूल अथवा पत्ते खाये हो उतनी ही मात्रा में कपास के बीज, फूल या पत्ते पीसकर पिलाने से लाभ होता है।

भाँग का विष:-


दही खिलाने से लाभ होता है।

अफीम का विष:-



दो रूपये भार(20 ग्राम) शक्कर एवं उतना ही घी गर्म करके पिलायें।

सुहागे का पावलीभार (2.5 ग्राम) कपड़छन चूर्ण खिलायें।

तम्बाकू का विष :-



तमाकू चढ़ने पर प्याज का 5 से 20 मि.ली. रस पिलाने से लाभ होता है।

अफीम, कुचला, धतूरा, तमाकू आदि से किसी भी प्रकार का जहर खा लेने पर तुलसी के पत्तों के 10 से 40 मि.ली. रस में 5 से 20 ग्राम घी मिलाकर खाने से लाभ होता है।

जमालघोटा:-



200 ग्राम बकरी के दूध मे उतना ही ठण्डा पानी मिलाकर उसमें 50 ग्राम शक्कर मिलाकर पिलाने से जमालघोटे के कारण होते दस्त बंद हो जाते हैं।

लूता (ब्लस्टर-जिसकी पेशाब से फफोले हो जाते हैं) का विष:-



नींबू, घास और हल्दी को पानी के साथ पीसकर लगाने से लूता का विष नष्ट हो जाता है।

जीरे को पानी में पीसकर लगाने से लाभ होता है।

कुत्ते का विष:-



आकड़े के दूध, गुड़ एवं तेल का लेप करने से पागल कुत्ते के काटने का जहर नहीं चढ़ेगा।

खरखोड़ी (केक्टसनुमा बिना काँटेवाली वनस्पति) का दूध रोटी पर लगाकर खिलाने से या कड़वी तुम्बी का गर्भ पानी में घोलकर पिलाने से वमन-विरेचन होकर पागल कुत्ते के काटने से आनेवाला पागलपन मिट जाता है।

दीमक से निजात :-



काले जीरे को कपड़े अथवा पुस्तकों के बीच में रखने से अथवा चंदन की लकड़ी को अलमारी में रखने से दीमक नहीं लगते।

चींटी-चींटे, काक्रोच आदिः लहसुन के चूर्ण की पोटली खिड़की पर रखने से काक्रोच आदि जन्तु दूर होते हैं।

खटमल, मच्छर आदि जंतु तुलसी की सुगंध सहन नहीं कर सकते।

उपचार और प्रयोग-

Tuesday, August 18, 2015

सर्प -विष का उपाय -

सबसे पहले साँपो के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये ! कि अपने देश भारत मे 550 किस्म के साँप है ! जैसे एक कोबरा  है ,वाइपर है ,कीरेत है ! ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं ! इनमे से मुश्किल से 10 साँप है जो जहरीले है-




बाकी सब बिना जहर है! इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा -बिलकुल चिंता मत करिए -

लेकिन साँप के काटने का डर इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) और कि कई बार आदमी हार्ट अटेक से मर जाता है -जहर से नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है ! तो डर इतना है मन मे ! तो ये डर निकलना चाहिए !

सबसे जहरीला साँप है उसका नाम है russell viper  उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra ! king cobra जिसको आप कहते है काला नाग -

ये 4 तो बहुत ही खतरनाक और जहरीले है इनमे से किसी ने काट लिया तो 99 % chances है कि death होगी !

थोड़ी होशियारी दिखाये तो आप रोगी को बचा सकते हैं-

साँप जब भी काटता है तो उसके दो दाँत है जिनमे जहर है जो शरीर के मास के अंदर घुस जाते हैं | और खून मे वो अपना जहर छोड़ देता है | तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है|! मान लीजिये हाथ पर साँप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा | ऐसे ही अगर पैर पर काट लिया तो फिर ऊपर की और heart तक जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा | कहीं भी काटेगा तो दिल तक जाएगा | और पूरे मे खून मे पूरे शरीर मे उसे पहुँचने मे 3 घंटे लगेंगे |

मतलब ये है कि रोगी 3 घंटे तक तो नहीं ही मरेगा | जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से मे बाकी सब जगह पर जहर पहुँच जाएगा तभी उसकी death होगी otherwise नहीं होगी | तो 3 घंटे का time है रोगी को बचाने का और उस तीन घंटे मे अगर आप कुछ कर ले तो बहुत अच्छा है |

आप क्या कर सकते हैं -



घर मे कोई पुराना इंजेक्शन (injection) हो तो उसे ले और आगे जहां सुई(needle) लगी होती है वहाँ से काटे | सुई(needle) जिस पलास्टिक मे फिट होती है उस प्लास्टिक वाले हिस्से को काटे | जैसे ही आप सुई के पीछे लगे पलास्टिक वाले हिस्से को काटेंगे तो वो injection एक सक्षम पाईप की तरह हो जाएगा | बिलकुल वैसा ही जैसा होली के दिनो मे बच्चो की पिचकारी होती है | इसी injection को आप बीच से कट कर दीजिये बिलकुल बीच कट कर दीजिये 50% इधर 50% उधर | तो आगे का जो छेद है उसका आकार और बढ़ जाएगा और खून और जल्दी से उसमे भरेगा |

उसके बाद आप रोगी के शरीर पर जहां साँप ने काटा है वो निशान ढूँढे | बिलकुल आसानी से मिल जाएगा क्यूंकि जहां साँप काटता है वहाँ कुछ सूजन आ जाती है और दो निशान जिन पर हल्का खून लगा होता है आपको मिल जाएँगे | अब आपको वो injection( जिसका सुई वाला हिस्सा आपने काट दिया है) लेना है और उन दो निशान मे से पहले एक निशान पर रख कर उसको खीचना है | जैसी आप निशान पर injection रखेंगे वो निशान पर चिपक जाएगा तो उसमे vacuum crate हो जाएगा | और आप खींचेगे तो खून उस injection मे भर जाएगा | बिलकुल वैसे ही जैसे बच्चे पिचकारी से पानी भरते हैं | तो आप इंजेक्शन से खींचते रहिए |और आप first time निकलेंगे तो देखेंगे कि उस खून का रंग हल्का blackish होगा या dark होगा तो समझ लीजिये उसमे जहर मिक्स हो गया है |

तो जब तक वो dark और blackish रंग blood निकलता रहे आप खिंचीये | तो वो सारा निकल आएगा | क्यूंकि साँप जो काटता है उसमे जहर ज्यादा नहीं होता है 0.5 मिलीग्राम के आस पास होता है क्यूंकि इससे ज्यादा उसके दाँतो मे रह ही नहीं सकता ! तो 0.5 ,0.6 मिलीग्राम है दो तीन बार मे आपने खीच लिया तो बाहर आ जाएगा | और जैसे ही बाहर आएगा आप देखेंगे कि रोगी मे कुछ बदलाव आ रहा है थोड़ी consciousness (चेतना) आ जाएगी | साँप काटने से व्यकित unconsciousness हो जाता है या semi consciousness हो जाता है और जहर को बाहर खींचने से चेतना आ जाती है | consciousness आ गई तो वो मरेगा नहीं | तो ये आप उसके लिए first aid (प्राथमिक सहायता) कर सकते हैं |


सर्प काटने पे करे ये प्रयोग-



जिस व्यक्ति को सर्प ने काटा हो उसे कड़वे नीम के पत्ते खिलायें। यदि पत्ते कड़वे न लगें तो समझें कि सर्प विष चढ़ा है। छः सशक्त व्यक्तियों को बुलाकर दो व्यक्ति मरीज के दो हाथ, दो व्यक्ति दो पैर एवं एक व्यक्ति पीछे बैठकर उसके सिर को पकड़े रखे। उसे सीधा सुला दें एवं इस प्रकार पकड़ें कि वह जरा भी हिल न सके।

इसके बाद पीपल के हरे चमकदार 20-25 पत्तों की डाली मँगवाकर उसके दो पत्ते लें। फ़िर ‘सुपर्णा पक्षपातेन भूमिं गच्छ महाविष।’ मंत्र जपते हुए पत्तों के डंठल को दूध निकलनेवाले सिरे से धीरे-धीरे मरीज के कानों में इस प्रकार डालें कि डंठल का उँगली के तीसरे हिस्से जितना भाग ही अंदर जाय अन्यथा कान के परदे को हानि पहुँच सकती है।

जैसे ही डंठल का सिरा कान में डालेंगे, वह अंदर खिंचने लगेगा व मरीज पीडा से खूब चिल्लाने लगेगा, उठकर पत्तों को निकालने की कोशिश करेगा। सशक्त व्यक्ति उसे कसकर पकड़े रहें एवं हिलने न दें। डंठल को भी कसकर पकड़े रहें, खिंचने पर ज्यादा अंदर न जानें दे।

जब तक मरीज चिल्लाना बंद न कर दे तब तक दो-दो मिनट के अंतर से पत्ते बदलकर इसी प्रकार कान में डालते रहें। सारा जहर पत्तें खिंच लेंगे। धीरे-धीरे पूरा जहर उतर जायेगा तब मरीज शांत हो जायेगा। यदि डंठल डालने पर भी मरीज शांत रहे तो जहर उतर गया है ऐसा समझें।

जहर उतर जाने पर नमक खिलाने से खारा लगे तो समझें कि पूरा जहर उतर गया है। मरीज को राहत होने पर सौ से डेढ़ सौ ग्राम शुद्ध घी में 10-12 काली मिर्च पीसकर वह मिश्रण पिला दें एवं कानों में बिल्वादि तेल की बूँदे डाल दें ताकि कान न पकें। कम से कम 12 घण्टे तक मरीज को सोने न दें। उपयोग में आये पत्तों को या तो जला दें या जमीन में गाड़ दें क्यों कि उन्हें कोई जानवर खाये तो मर जायेगा।

इस प्रयोग के द्वारा बहुत मनुष्यों को मौत को मुख में से वापस लाया गया है। भले ही व्यक्ति बेहोश हो गया हो या नाक बैठ गयी हो, फिर भी जब तक जीवित हो तब तक यह प्रयोग चमत्कारिक रूप से काम करता है।

विष पी लेने पे करे ये उपाय :-



कितना भी खतरनाक विषपान किया हो, नीम का रस अधिक मात्रा में पिलाकर या घोड़ावज (वच) का चूर्ण या मदनफल का चूर्ण या मुलहठी का चूर्ण या कड़वी तुम्बी के गर्भ का चूर्ण एक तोला मात्रा में पिलाकर वमन (उलटी) कराने से लाभ होगा। जब तक नीला-नीला पित्त बाहर न निकले तब तक वमन कराते रहें।


सर्प दंश का विष नष्ट करने हेतु सरल उपाय:-


तपाये हुए लोहे से डंकवाले भाग को जला देने से नाग का प्राणघातक जहर भी उतर जाता है।

सर्पदंश की जगह पर तुरंत चीरा करके विषयुक्त रक्त निकालकर पोटेशियम परमैंगनेट भर देने से जहर फैलना एवं चढ़ना बंद हो जाता है। साथ में मदनफल (मिंडल) का 1 तोला चूर्ण गरम या ठण्डे पानी में पिला देने से वमन होकर सर्पविष निकल जाता है। मिचाईकंद का टुकड़ा दो ग्राम मात्रा में घिसकर पिलाना तथा दंशस्थल पर लेप करना सर्पविष की अक्सीर दवा है।

मेष राशि का सूर्य होने पर नीम के दो पत्तों के साथ एक मसूर का दाना चबाकर खा जाने से उस दिन से लेकर एक वर्ष तक साँप काटे तो उसका जहर नहीं चढ़ता।

साँप के काटने पर शीघ्र ही तुलसी का सेवन करने से जहर उतर जाता है एवं प्राणों की रक्षा होती है।

उपचार और प्रयोग-

Sunday, September 28, 2014

कुत्ता काटने पर चिकित्सा -

अगर घरेलु कुत्ता काटे तो कोई दिक्कत नही है पर पागल कुत्ता कटे तोसमस्या है। सड़क वाला कुत्ता काटले तो आप जानते है नही उसकोइंजेक्शन दिए हुए है या नही, उसने काट लिया तो आप डॉक्टर के पासजायेंगे फिर वो 14 इंजेक्शन लगाएगा वो भी पेट में लगाता है, उससे बहुतदर्द होता है और खर्च भी हो जाता है कम से कम 50000 तक कई बार,गरीब आदमी के पास वो भी नही है ।





कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंतामत करिए बिलकुल ठीक होगा वो आदमी बस उसको एक दावा दे दीजिये। दावा का नाम है Hydrophobinum 200 और इसको 10-10 मिनट परजिव में तिन ड्रोप डालना है । कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दावादे दीजिये और भूल जाइये के कोई इंजेक्शन देना है। इस दावा को सूरजकी धुप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। 



रेबिस सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटनेसे रेबिस नही होता। आवारा कुत्तों अगर काट दिया है तो राजीव भाई केअनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दावा दे सकते हैलेकिन उससे कुछ नही होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हमपरिसान रहते है, और कुछ डर डॉक्टरों ने बिठा रखा है के इंजेक्शन तोलेना ही पड़ेगा। अपने शारीर में थोड़े बहुत resistance सबके पास हैअगर कुत्ते के काटने से उनके लार ग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये है तो उनको ख़तम करने के लिए हमारे रक्त में काफी कुछ है और वो ख़तम करहि लेता है । लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो जाती है हमको confirm नही होता जबतक 20000-50000 खर्च नही कर लेते येउस समय लिए राजीव भाई ने ये दावा लेने की बात कही है। और इसकाएक एक ड्रोप 10-10 मिनट में जीभ  पे तिन बार डाल के छोड़ दीजिये । 30मिनट में ये दावा सब काम कर देगा ।

कई बार कुत्ता घर के बच्चों से साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप उस जखम में थोडा हल्दी लगा दीजियेपर साबुन से उस जखम को बिलकुल मत धोये नही तो वो पक जायेगा;हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antititetanatic, Antiinflammatory है।

भाई राजीव दीक्षित द्वारा -

Saturday, September 13, 2014

जहरीला कीड़ा डंक मार दे तो क्या करे -

मौसम बेमौसम में कीड़े, उड़ते रहते है और कभी कभी काट भी लेते है। विभिन्न प्रकार की चींटियॉ भी काट खाती है। इनके काटने से काफी जलन होता है। आक्रांत स्थान पर काफी सूजन हो जाती है।



मधुमक्खियाँ भी बड़े जोर से काट खाती है और यह कभी कभी खतरनाक भी होता है। कुछ कीड़ों का डंक सूजन के साथ साथ काफी जलन और बेचैनी पैदा करने वाला होता है जिसका सही समय पर इलाज आवश्यक है।

बाजार मे मिलने बाली कीड़ों के काटने की दवा से तुरंत आराम नही मिल पाता है, कभी कभी डाक्टर से सलाह लेना आवशयक हो जाता है।लेकिन तुरंत आराम के लिए कुछ घरेलु उपाय भी अपनाएं जा सकते हैं...

विषैले कीड़े के काटने पर प्याज पीसकर शहद में मिलाकर काटे हुए स्थान पर लगाएं।

दंश के स्थान पर नीबू का रस लगाएं।

आम की गुठली पानी के साथ घिसकर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।

दंश स्थान पर आक के दूध का लेप करने से राहत मिलती है।

अनार के पत्तों को पीस कर लगाने से लाभ होता है।

जहरीले जन्तु के काट लेने पर दंश स्थान पर लगाने से विष शमन होने लगता है।

विषैले दंश के स्थान  पर नमक  का पानी डालकर रगड़ें।

तुलसी के पत्तों को शरीर पर लगाएं और पत्तों को पीसकर इसका रस रोगी को पिलाएं।

विषैले कीड़े, मधुमक्खी या बिच्छु के काटने पर नीम की पत्तियों को पीस कर लेप करें। नीम के पत्तों को चबाएं।

मिट्टी की गीली पट्टी बांधे।

दिलासलाई का मसाला पानी में घिसकर लगाएं।

पुदीने की पत्ती चबाएं।

उपचार और प्रयोग-