Friday, October 30, 2015

पहले से अब रोग जादा क्यों बढ़ गए -

आज से पहले लोगो की आयु क्यों जादा होती थी -क्युकि खान -पान शुद्ध हुआ करता था हर व्यक्ति पैदल या सायकिल से जादा चलता था इसलिए शारीरिक एक्सरसाइज हो जाती थी भोजन पच जाया करता था ,पहले के लोग सुबह बिस्तर से जल्दी उठ जाते थे सुबह की शुद्ध हवा शरीर को तरोताजा रखती थी -





पहले- घर की महिलाये मुँह अँधेरे उठ जाती थी और अपने ही हाथो से घर का सारा काम अपने ही हाथो से करती थी, कपडे घोने से लेकर खाना बनाने तक मेहमान नवाजी में अपना अहोभाग्य  समझा करती थी , क्योंकि उसमे सामने वाले की तृप्त आत्मा से दुआ निकलती थी रिश्तो का मतलब बेमानी नहीं हुआ करता था- .

लेकिन आज-  9 बजे बहु या पत्नी को बेड टी की अपेक्षा हमेशा दुसरो से होती है नास्ता में  मेगी, पास्ता ,मैकरोनी ने जगह ले ली है , जिसमे सबसे जादा पेट को नुक्सान करने के गुण पाये जाते है -

घर में गृह लक्ष्मी को काम नहीं करना पड़े इसलिए नॉकरानी चाहिए , जब पत्नियाँ सेवा भाव से बच रही है तो पति से वफादारी की अपेक्षा करना भी बेमानी ही है इसलिए ही आज कल पतियो को भी नॉकरानी से जादा प्यार बढ़ रहा है, कपडा वाशिंग मशीन धोएगी तो भला पति श्री मति जी से क्यों पूछेगा आज जादा थक गई हो. टी वी रिमोट हाथ में और सीरियल से सास बहूं नन्द के झगड़ो का मजा और फिर मानसिकता वही सावधान इंडिया का रिपीट -

ये बात मस्तिस्क में बिठाने की जगह सावधानी रखना है या नहीं- बल्कि हर एक को शक भरी नजरो से देखो कुछ भी हो सकता है - काम का बोझ गृह लक्ष्मी का तो पति परमेश्वर जी ने तो कम कर दिया लेकिन बदले में बेठे रहने से रोगों का ट्रान्सफर कितना हुआ -क्योंकि एक्सरसाइज तो शारीरिक है ही नहीं- तो बी पी मोटापा शुगर माइग्रेन जेसी बीमारियां मजदुर वर्ग को  थोड़े आने वाली है- वो तो आज भी मेहनत करने के बाद सुख की नींद सोता है-

आप को बिमारी से बचना है तो सभी को सब सुख होने के बाद भी कुछ न कुछ शारीरिक मेहनत करना चाहिए जिससे आलस्य भी कम होगा और रोगों की प्रधानता भी कम हो जायेगी अपने जीवन का एक चार्ट निर्धारित करे और पूरी निष्ठा से उसका पालन करे आपको बिना किसी दवा के निश्चित मानिए साठ प्रतिशत रोगों से निजात अपने आप मिल जायेगी ,जितना हो सके जंक फ़ूड ,रेडी टू ईट , से बचना चाहिए -

जिसे आज का युवा जिसे बेकफुट पे ले जा रहा है वास्तव में वो दुसरे को नहीं खुद को ही धोखा दे रहा है -जिद और कलह से बचने के लिए बुजुर्गो ने अपने मुंह को तो बंद करना सीख लिया है लेकिन कही येसा तो नहीं आपको जो उनसे प्राप्त हो सकता था वो आप खोते जा रहे है -

अब भी समय है खुद को सक्षम बनाने का कुछ पल के लिए सोचो और अपने बुजुर्गो को सम्मान देते हुए कुछ लेने का प्रयास करे हो सकता है लाख की चीज आपको कौड़ियो में मिल जाए -

हम नहीं कहते है की इश्वेर ने आपको जो सुख साधन दिया है आप उसका उपयोग न करे -मेरा निवेदन ये है कि अगर आप कृत्रिम सुख साधन के उपयोग को करे तो कभी शारीरिक एक्सरसाइज हो इसका भी प्रयास करते रहना चाहिए - क्युकि सलाह  तो मेरी हो  सकती है -मगर ये शरीर तो आपका है ....?

उपचार और प्रयोग-

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